अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भी उम्मीद नहीं होगी कि उनको सम्मान दिलाने के लिए खेल प्रेमियों को उनके ही देश में सड़क पर उतरना होगा। ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं मिलने की कसक ने हॉकी खिलाड़ियों सहित सभी खेल प्रेमियों को मर्माहत कर दिया है। खेल मंत्रालय से मिले आश्वासन के बाद भी भारत के सबसे हुनरमंद खिलाड़ी को देश का सबसे बड़ा सम्मान नहीं मिला और इसके कारण उनके बेटे अशोक कुमार समेत सभी हॉकी प्रेमी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। अभी तक सरकार से उम्मीद लगाए बैठे खेल प्रेमियों ने अब ध्यानचंद को सम्मान दिलाने के लिए सड़क पर उतरने का मन बना लिया है।
हॉकी सिटीजन ग्रुप की इस रैली में भारत के सबसे सफल हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार सहित देश के वर्तमान और पूर्व हॉकी खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों और प्रबंधकों के भी शामिल होने की संभावना है। हॉकी इंडिया के अधिकारियों को भी इस रैली में बुलाया गया है। 14 घंटे तक चलने वाली यह रैली नई दिल्ली के बाराखंबा रोड से शुरू होकर टॉलस्टॉय मार्ग होते हुए जंतर-मंतर जाएगी। जंतर-मंतर में प्रदर्शन के बाद हॉकी खिलाड़ी प्रधानमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपेंगे।
इससे पहले पिछले साल 12 जुलाई को क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी की अगुआई में एक दल ने खेल मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात की थी और सात दिन के अंदर ही खेल मंत्रालय ने उनके नाम की सिफारिश प्रधानमंत्री को कर दी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजी गई इस सिफारिश का आगे अध्ययन किया गया लेकिन इस बीच सचिन तेंदुलकर को खेल रत्न दे दिया गया जबकि ध्यानचंद को भुला दिया गया। उस समय खेल मंत्री ने आश्वासन दिया था कि वह निजी तौर पर इस मामले पर नजर रखेंगे लेकिन इस महान खिलाड़ी को धोखा दिया गया। ध्यानचंद कहते थे कि उनका काम मैदान पर खेलना है। बाकी चीजें दूसरों को हवाले। आज उनके सम्मान के लिए बाकी लोग लड़ाई लड़ रहे हैं। अशोक कुमार ने कहा कि ध्यानचंद इस सम्मान के सबसे बड़े हकदार हैं और उन्हें ठगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी सरकार नहीं जागी तो हम आगे नई योजना बनाएंगे।
सर्वश्रेष्ठ हैं ध्यानचंद
नई दिल्ली । ध्यानचंद ने भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहते हुए ओलंपिक में तीन स्वर्ण पदक जीते। वह 1928 में एम्सटर्डम, 1932 में लॉस एंजिल्स और 1936 में बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। उनका 1979 में निधन हुआ। सरकार ने 2011 में संसद के 82 सदस्यों की मांग ठुकरा दी थी जिन्होंने भारत रत्न के लिए ध्यानचंद के नाम की सिफारिश की थी। पहले खिलाड़ियों को भारत रत्न नहीं मिलता था। इस नियम में गृह मंत्रालय ने बदलाव किया। खेल मंत्रालय ने जनवरी 2012 में स्वयं ध्यानचंद के अलावा ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और पर्वतारोही तेनजिंग नोर्गे के नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दे दिया गया।
Source: Sports News in Hindi
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