राउत ने कहा कि ये दोनों शब्द प्रस्तावना में कभी नहीं थे। सरकार को इन दोनों शब्दों को प्रस्तावना से हटा देना चाहिए। वहीं, विज्ञान के सामने आने के बाद विपक्ष के निशाने पर आई केद्र सरकार का बचाव करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्घन राठौड़ ने कहा कि हमने प्रस्तावना का मौलिक रूप इस्तेमाल किया था। इसमें बाद में संशोधन हुआ था।
यह विज्ञापन सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी किया गया था। गौरतलब है कि विज्ञापन में 42वें संशोधन से पहले के प्रस्तावना का इस्तेमाल किया गया। 42वें संशोधन से पहले प्रस्तावना में सेक्यूलर और सोशलिस्ट शब्द शामिल नहीं थे।
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