Thursday, 29 January 2015

निन्‍दनीय है 'धर्मनिपेक्ष', 'समाजवाद' शब्‍द हटाने की मांग: तुषार गांधी

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने संविधान की प्रस्तावना से 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवाद' शब्दों को हटाने की शिवसेना की मांग को गलत बताया है। इनका कहना है कि शिवसेना की यह मांग विनाशकारी, निन्दनीय और घृणित है जो कट्टरता फैलाएगी।

महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के 100 साल पूरे होने पर आयोजित एक डाक टिकट और पैंटिंग प्रदर्शनी का उद्धाटन करने पहुंचे मांझी ने कहा, 'कुछ लोगों का मानना है कि संविधान में धर्मनिपेक्ष शब्द की कोई जरूरत नहीं है और भारत को इसे भूल जाना चाहिए। यह बहुत चिंताजनक बात है। महात्मा गांधी ने हमेशा सह-अस्तित्व पर जोर दिया। लेकिन क्या आज हम इतने असंवेदनशील हो गए हैं कि हमें धर्मनिपेक्षा की जरूरत नहीं है।क्या महात्मा गांधी ने भारत में हिंदू राज का सपना देश आजादी की लड़ाई लड़ी थी। नहीं महात्मा गांधी ने हमेशा समाज और गरीबों की सेवा करने पर बल दिया था।'

उन्होंने कहा, 'लोग आज धर्म, जाति और भाषा के जाल में फंसे हुए हैं। लेकिन आज जरूरत मानवता की ओर कदम बढ़ाने की है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसका खामिआजा हमें चुकाना पड़ेगा।'

बता दें कि शिवसेना ने मांग की थी कि संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिपेक्ष और समाजवाद शब्द को हटा देना चाहिए, अब इनकी कोई जरूरत नहीं है। शिवसेना का कहना है कि संविधान की मूल प्रस्तावना में भी धर्मनिपेक्ष और समाजवाद शब्द नहीं है। इन्हें संविधान में संशोधन के बाद जोड़ा गया था।

महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी भी इस प्रदर्शनी में मांझी के साथ थे। उन्होंने कहा, 'शिवसेना की यह मांग निन्दनीय है। यह मांग घृणित है और ऐसा लगता है कि कट्टरता फैलाने के लिए की गई है। ऐसी मांग पर गौर करने की कोई आवश्यकता नहीं है।'

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