रामीण क्षेत्रों में लकड़ी, उपले आदि से खाना बना रही गरीब घरों की गृहणियों को अब धुंआ-धक्कड़ से बहुत जल्द ही आजादी मिल जाएगी। केंद्र सरकार ने इन गृहणियों को मुफ्त में गैस कनेक्शन देने की योजना प्रधान मंत्री उज्जवल योजना (पीएमयूवाइ) को मंजूरी दे दी। अगले तीन वर्षो में गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले पांच करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिया जाएगा। सरकार इस पर 8,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने बताया कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उज्जवल योजना अप्रैल, 2016 से लागू होगी। पहले वर्ष में ही डेढ़ करोड़ गरीब गृहणियों की रसोई को एलपीजी से जोड़ा जाएगा। इसके लिए बजट में भी 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा। गैस कनेक्शन लेने के लिए जरुरी 1600 रुपये का भुगतान केंद्र सरकार की तरफ से किया जाएगा। चूल्हा ग्राहक को स्वयं ही खरीदना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजना लाखों महिलाओं को लंबा जीवन देगा क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में उपले, लकड़ी आदि से खाना बनाने की वजह से सालाना पांच लाख महिलाओं की मौत हो जाती है। यही वजह है कि सरकार ने इस योजना के तहत गैस कनेक्शन गृहणियों के नाम पर ही देने का फैसला किया है।
बताते चले कि संप्रग कार्यकाल में भी गरीबों को रसोई गैस देने की योजना थी लेकिन तब इसे तेल कंपनियों के कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के तहत चलाया जा रहा था। अब चूंकि सरकार के आह्ववान पर लाखों लोग स्वेच्छा से सब्सिडी वाले गैस कनेक्शन वासस कर रहे हैं तो सरकार इससे बची हुई राशि का उपयोग नए गैस कनेक्शन देने में कर रही है। ताजे आंकड़े बता रहे हैं कि अभी तक 82.2 लाख लोगों ने अपनी सब्सिडी वाली गैस कनेक्शन को वापस किया है। इससे सरकार को सब्सिडी के तौर पर 4,166 करोड़ रुपये की बचत सालाना होगी। हालांकि सरकार इसमें से सिर्फ दो हजार करोड़ रुपये ही इस वर्ष व्यय करेगी।
बहरहाल, सरकार की इस योजना का आगामी चुनावों में भी खासा फायदा होगा। इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए दस हजार नई गैस एजेंसियां खोली जाएंगी। दो हजार गैस एजेंसियों के चयन का काम जल्द शुरु होगा। करोड़ों गैस सिलेंडर बनाने के लिए भी नई फैक्टि्रयां भी लगाना होगी। गैस रिफिलिंग स्टेशन बनाने होंगे। एलपीजी पाइपलाइन का विस्तार भी करना होगा। इस तरह से इस योजना से रोजगार के अवसरों में भी भारी बढ़ोतरी होगी।
पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने बताया कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उज्जवल योजना अप्रैल, 2016 से लागू होगी। पहले वर्ष में ही डेढ़ करोड़ गरीब गृहणियों की रसोई को एलपीजी से जोड़ा जाएगा। इसके लिए बजट में भी 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा। गैस कनेक्शन लेने के लिए जरुरी 1600 रुपये का भुगतान केंद्र सरकार की तरफ से किया जाएगा। चूल्हा ग्राहक को स्वयं ही खरीदना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजना लाखों महिलाओं को लंबा जीवन देगा क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में उपले, लकड़ी आदि से खाना बनाने की वजह से सालाना पांच लाख महिलाओं की मौत हो जाती है। यही वजह है कि सरकार ने इस योजना के तहत गैस कनेक्शन गृहणियों के नाम पर ही देने का फैसला किया है।
बताते चले कि संप्रग कार्यकाल में भी गरीबों को रसोई गैस देने की योजना थी लेकिन तब इसे तेल कंपनियों के कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के तहत चलाया जा रहा था। अब चूंकि सरकार के आह्ववान पर लाखों लोग स्वेच्छा से सब्सिडी वाले गैस कनेक्शन वासस कर रहे हैं तो सरकार इससे बची हुई राशि का उपयोग नए गैस कनेक्शन देने में कर रही है। ताजे आंकड़े बता रहे हैं कि अभी तक 82.2 लाख लोगों ने अपनी सब्सिडी वाली गैस कनेक्शन को वापस किया है। इससे सरकार को सब्सिडी के तौर पर 4,166 करोड़ रुपये की बचत सालाना होगी। हालांकि सरकार इसमें से सिर्फ दो हजार करोड़ रुपये ही इस वर्ष व्यय करेगी।
बहरहाल, सरकार की इस योजना का आगामी चुनावों में भी खासा फायदा होगा। इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए दस हजार नई गैस एजेंसियां खोली जाएंगी। दो हजार गैस एजेंसियों के चयन का काम जल्द शुरु होगा। करोड़ों गैस सिलेंडर बनाने के लिए भी नई फैक्टि्रयां भी लगाना होगी। गैस रिफिलिंग स्टेशन बनाने होंगे। एलपीजी पाइपलाइन का विस्तार भी करना होगा। इस तरह से इस योजना से रोजगार के अवसरों में भी भारी बढ़ोतरी होगी।
Source: Today Hindi News
No comments:
Post a Comment