Tuesday, 7 January 2014

Big problem prepared for large political parties in UP

लखनऊ [जाब्यू]। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में अपना मुकाम रखने वाले चार छोटे दल [कौमी एकता दल, भासपा, महान दल और राष्ट्रीय परिवर्तन दल] और उनके चार सहयोगी दलों का एकता मंच सूबे की सियासत में नया गुल खिलायेगा। मंगलवार को इन आठ दलों के गठबंधन पर अंतिम मुहर लग गई। इस साझेदारी से अस्तित्व में आए एकता मंच के बैनर तले इन दलों ने प्रदेश की सभी 80 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान किया है। 

इनमें तीन दलों के लिए चुनावी समर में आना पहला अनुभव है, जबकि पांच दल पिछले विधानसभा चुनाव में मुकाबिल रहे। तब वोटकटवा की भूमिका में इनकी उपस्थिति पर अंगुलियां उठती रहीं, लेकिन दो सीटें जीतने और कई पर बेहतर प्रदर्शन के चलते इनकी अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 2014 के महासमर के लिए एकता मंच ने जातियों का महासंगम कर एक नया समीकरण खड़ा करने का दांव खेला है। मुसलमान, यादव, राजभर, निषाद, बिंद, पासवान, मौर्या, कुशवाहा, चौहान, नोनिया जैसी जातियों को मिलाकर यह सपा, बसपा और अन्य बड़े दलों के अति पिछड़ा कार्ड के लिए मुसीबत बनने वाले हैं। इनकी सेंधमारी निश्चित तौर पर कोई नया समीकरण बनाएगी और किसी के समीकरण को धराशायी करेगी।

यह गठबंधन जल्द ही सीटें तय करेगा। कुछ उम्मीदवार पहले ही तय किये जा चुके हैं। फूलन सेना, दलित महासंघ और सर्वजन विकास पार्टी पहली बार मैदान में उतरने जा रही है, लेकिन बाकी दल विधानसभा चुनाव में जोर आजमाइश कर चुके हैं। कौमी एकता दल मऊ और गाजीपुर के मोहम्मदाबाद की दो सीटें जीतने में कामयाब रहा, जबकि साझीदार भासपा के साथ उसने बलिया, फेफना, बेल्थरारोड, रसड़ा, घोसी, दिलदारनगर, गाजीपुर, जहूराबाद जैसी सीटों पर मजबूत लड़ाई लड़ी। 

उधर, महान दल भी एक सीट पर दूसरे स्थान पर और दर्जन भर सीटों पर तीसरे और चौथे स्थान पर रहा। आरपीडी की लड़ाई भी रोचक दिखी। कई सीटों पर इन दलों के उम्मीदवारों को भाजपा, बसपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों से भी ज्यादा मत मिले। दरअसल, इन दिनों समाजवादी पार्टी यादव और मुस्लिम समीकरण से इतर अति पिछड़ा कार्ड खेलने में जुटी है और उसकी तीसरे चरण की यात्र भी चल रही है। 

एकता मंच के गठबंधन में जो दल शामिल हैं, इनके अध्यक्ष अपनी अपनी जातियों के क्षत्रप हैं। जाहिर है कि वह अगर अपने समाज को लुभाने में कामयाब नहीं हुए तो भी अपनी बिरादरी के मतों में सेंध लगा सकते हैं। अब ये किसी भी बड़े दल से गठबंधन न करने पर सहमत हैं। 

एकता मंच के बैनर तले आए दल :
कौमी एकता दल के अध्यक्ष, पूर्व सांसद अफजाल अंसारी, भासर्पा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्या, राष्ट्रीय परिवर्तन दल के अध्यक्ष, डीपी यादव, फूलन सेना के अध्यक्ष गोपाल निषाद, जनवादी पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौहान, सविपा के रामसागर बिंद और दलित महासंघ के अध्यक्ष रामदीन पासवान ने साझा प्रेस कांफ्रेंस में एकता मंच के बैनर तले मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा की। 

नक्सली लालव्रत की उम्मीदवारी :
राबर्ट्सगंज से कौमी एकता दल के कोटे में हार्डकोर नक्सली लालव्रत कोल को उम्मीदवार घोषित किया गया है। कोल की उम्मीदवारी के सवाल पर अफजाल अंसारी ने कहा कि लालव्रत की विचारधारा सशस्त्र क्त्रांति कर अपना हिस्सा लेने की रही है, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने को राजी कर हमने मुख्यधारा से जोड़ा है और यह उम्मीदवारी लोकतंत्र को मजबूती देगी। 

Source: Hindi News

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