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Tuesday, 7 January 2014

Big problem prepared for large political parties in UP

लखनऊ [जाब्यू]। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में अपना मुकाम रखने वाले चार छोटे दल [कौमी एकता दल, भासपा, महान दल और राष्ट्रीय परिवर्तन दल] और उनके चार सहयोगी दलों का एकता मंच सूबे की सियासत में नया गुल खिलायेगा। मंगलवार को इन आठ दलों के गठबंधन पर अंतिम मुहर लग गई। इस साझेदारी से अस्तित्व में आए एकता मंच के बैनर तले इन दलों ने प्रदेश की सभी 80 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान किया है। 

इनमें तीन दलों के लिए चुनावी समर में आना पहला अनुभव है, जबकि पांच दल पिछले विधानसभा चुनाव में मुकाबिल रहे। तब वोटकटवा की भूमिका में इनकी उपस्थिति पर अंगुलियां उठती रहीं, लेकिन दो सीटें जीतने और कई पर बेहतर प्रदर्शन के चलते इनकी अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 2014 के महासमर के लिए एकता मंच ने जातियों का महासंगम कर एक नया समीकरण खड़ा करने का दांव खेला है। मुसलमान, यादव, राजभर, निषाद, बिंद, पासवान, मौर्या, कुशवाहा, चौहान, नोनिया जैसी जातियों को मिलाकर यह सपा, बसपा और अन्य बड़े दलों के अति पिछड़ा कार्ड के लिए मुसीबत बनने वाले हैं। इनकी सेंधमारी निश्चित तौर पर कोई नया समीकरण बनाएगी और किसी के समीकरण को धराशायी करेगी।

यह गठबंधन जल्द ही सीटें तय करेगा। कुछ उम्मीदवार पहले ही तय किये जा चुके हैं। फूलन सेना, दलित महासंघ और सर्वजन विकास पार्टी पहली बार मैदान में उतरने जा रही है, लेकिन बाकी दल विधानसभा चुनाव में जोर आजमाइश कर चुके हैं। कौमी एकता दल मऊ और गाजीपुर के मोहम्मदाबाद की दो सीटें जीतने में कामयाब रहा, जबकि साझीदार भासपा के साथ उसने बलिया, फेफना, बेल्थरारोड, रसड़ा, घोसी, दिलदारनगर, गाजीपुर, जहूराबाद जैसी सीटों पर मजबूत लड़ाई लड़ी। 

उधर, महान दल भी एक सीट पर दूसरे स्थान पर और दर्जन भर सीटों पर तीसरे और चौथे स्थान पर रहा। आरपीडी की लड़ाई भी रोचक दिखी। कई सीटों पर इन दलों के उम्मीदवारों को भाजपा, बसपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों से भी ज्यादा मत मिले। दरअसल, इन दिनों समाजवादी पार्टी यादव और मुस्लिम समीकरण से इतर अति पिछड़ा कार्ड खेलने में जुटी है और उसकी तीसरे चरण की यात्र भी चल रही है। 

एकता मंच के गठबंधन में जो दल शामिल हैं, इनके अध्यक्ष अपनी अपनी जातियों के क्षत्रप हैं। जाहिर है कि वह अगर अपने समाज को लुभाने में कामयाब नहीं हुए तो भी अपनी बिरादरी के मतों में सेंध लगा सकते हैं। अब ये किसी भी बड़े दल से गठबंधन न करने पर सहमत हैं। 

एकता मंच के बैनर तले आए दल :
कौमी एकता दल के अध्यक्ष, पूर्व सांसद अफजाल अंसारी, भासर्पा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्या, राष्ट्रीय परिवर्तन दल के अध्यक्ष, डीपी यादव, फूलन सेना के अध्यक्ष गोपाल निषाद, जनवादी पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौहान, सविपा के रामसागर बिंद और दलित महासंघ के अध्यक्ष रामदीन पासवान ने साझा प्रेस कांफ्रेंस में एकता मंच के बैनर तले मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा की। 

नक्सली लालव्रत की उम्मीदवारी :
राबर्ट्सगंज से कौमी एकता दल के कोटे में हार्डकोर नक्सली लालव्रत कोल को उम्मीदवार घोषित किया गया है। कोल की उम्मीदवारी के सवाल पर अफजाल अंसारी ने कहा कि लालव्रत की विचारधारा सशस्त्र क्त्रांति कर अपना हिस्सा लेने की रही है, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने को राजी कर हमने मुख्यधारा से जोड़ा है और यह उम्मीदवारी लोकतंत्र को मजबूती देगी। 

Source: Hindi News

Sunday, 10 November 2013

BSP will Becomes Number one Party in UP in Parliament Election

BSP

लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। बहुजन समाज पार्टी 16वीं लोकसभा के चुनाव को अकेले दम पर लड़ेगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने किसी भी पार्टी से चुनावी गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की तिकड़ी लालकृष्ण आडवानी, नरेन्द्र मोदी व राजनाथ सिंह अपने-अपने स्वार्थ में एक-दूसरे को काटने में लगे हैं जिसका फायदा लोकसभा चुनाव में बसपा को मिलेगा। सूबे की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठाते हुए उन्होंने राज्यपाल से राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की है। साथ ही सपा की सामाजिक न्याय यात्रा को नाटकबाजी करार दिया है।

तकरीबन तीन माह बाद शुक्रवार को राजधानी लखनऊ पहुंचीं बसपा प्रमुख ने शनिवार को माल एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से कहा कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन की बातें हवाई व बेबुनियाद हैं। साजिश के तहत विरोधियों द्वारा ऐसी अफवाह फैलायी जा रही है ताकि पार्टी का नुकसान हो। सपा से भी मिलने का सवाल नहीं उठता।

मायावती ने बसपा के संस्थापक कांशीराम के निधन पर राज्य की सपा व केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा शोक न घोषित करने का जिक्र करते हुए कहा कि कांशीराम को आदर सम्मान न देने वालों से बसपा का नाम जोड़ना ठीक नहीं। केंद्र की सत्ता से भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी को रोकने को ही वह यूपीए को बाहर से समर्थन दे रही हैं।

बहराइच रैली में नरेन्द्र मोदी द्वारा सपा, कांग्रेस व बसपा गठजोड़ की बात करने पर उन्होंने कहा कि यह उनकी अज्ञानता व शरारतपूर्ण शैतानी को प्रदर्शित करने वाला है। भाजपा नेताओं को दूसरी पार्टियों से मुकाबला करने से पहले आपसी लड़ाई व अंतर्विरोध से मुक्ति पाना चाहिए। भाजपा नेता देश की समस्याओं के समाधान को बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं पर छह वर्ष तक केंद्र की सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? चुनाव में वोटों के ध्रुवीकरण को सपा व भाजपा मिलीभगत से सांप्रदायिक जहर फैलाकर माहौल खराब कर सकते हैं जिससे जनता सावधान रहे।

मायावती ने कहा कि सूबे में अपराध बढ़ रहे हैं। नए उद्योग लगना दूर, पुराने भी पलायन कर रहे हैं। प्रदेश पूरी तरह से पिछड़ा प्रदेश बन जाएगा। ऐसे में यहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने को लेकर सपा की सामाजिक न्याय यात्रा को बसपा प्रमुख ने नाटकबाजी व छलावा करार देते हुए कहा कि विहिप की तरह ऐसी यात्राएं निकालने से पहले सपा ओबीसी समाज के लोगों से सार्वजनिक माफी मांगें क्योंकि उसकी सरकार के आदेश से इन्हें आरक्षण नहीं मिल सका था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा बसपा में दलित लीडरशिप को न उभरने देने के बयान पर मायावती ने कहा कि उनको दलित नेतृत्व पैदा करने से किसने रोका है? 

धनंजय पर कानूनी कार्रवाई देखने के बाद ही निर्णय
नौकरानी की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जौनपुर के बसपा सांसद धनंजय सिंह के संबंध में मायावती ने कहा है कि अभी यह देखा जा रहा है कि उनके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई होती है? इसके बाद ही पार्टी कोई फैसला करेगी। धनंजय को पार्टी ने एक बार फिर जौनपुर से चुनाव लड़ाने का निर्णय कर रखा है। 

दलित विरोधी मानसिकता नहीं तो और क्या
दिल्ली में कई बंगलों को जोड़कर बनाए गए बहुजन प्रेरणा केंद्र और भाई की संपत्ति को लेकर मीडिया में आ रही खबरों पर भी बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार को सफाई दी। उन्होंने कहा कि प्रेरणा केंद्र पूरी तरह से उचित व नियमानुसार बनाया गया है। भाई-बहन की संपत्ति से भी उनका कोई संबंध नहीं है।

उनकी छवि को धूमिल करने के लिए जान-बूझकर इस तरह की खबरें दिखाई व छापी जा रही हैं। दिल्ली में तो कई हस्तियों के स्मारक व संग्रहालय 5-6 एकड़ के सरकारी बंगलों में बने हैं लेकिन उनके बारे में खबर नहीं दिखाई जाती है। जबकि तीन बंगलों को जोड़कर मात्र डेढ़-पौने दो एकड़ में ही प्रेरणा केंद्र बनाया गया है, जिसका पूरा खर्च उनका ट्रस्ट ही उठाता है। दलित विरोधी मानसिकता रखने वाले ही सरकारी नियमों के उल्लंघन की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।


Source- News in Hindi

Thursday, 7 November 2013

BSP Will Soon Start Rallies Of Mayawati In Lucknow

Mayawati

लखनऊ। कांग्रेस, भाजपा तथा सपा के बाद बसपा भी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जोर-शोर से जुटेगी। जल्द ही बसपा प्रमुख मायावती की उत्तर प्रदेश में रैलियों का वृहद कार्यक्रम तय हो जाएगा।
तकरीबन तीन माह आज मायावती लखनऊ आ रही हैं। 10 नवंबर को लखनऊ में पार्टी के पदाधिकारियों व जोनल कोआर्डिनेटरों की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें राजनीतिक माहौल को देखते कुछ लोकसभा प्रत्याशियों को बदलने पर निर्णय हो सकता है। अधिकृत तौर घोषणा न सही लेकिन पार्टी ने लगभग सभी लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी तय कर रखे हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सूबे में भी मायावती की रैलियों का सिलसिला भी जल्द शुरू होगा। 

पाच राज्य के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीते तीन माह से मायावती में दिल्ली में ही हैं। पार्टी दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में चुनाव लड़ रही है। दस को पदाधिकारियों व जोनल कोआर्डिनेटरों के साथ बैठक के साथ ही बसपा प्रमुख मायावती पार्टी के लोकसभा प्रत्याशियों से भी अलग-अलग मिलेंगी। सूत्रों के मुताबिक मुजफ्फनगर दंगे के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदले सियासी समीकरण को देखते हुए भी बसपा प्रमुख कुछ क्षेत्रों के प्रत्याशियों को बदल सकती है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि बसपा प्रमुख फिलहाल यहीं रहकर मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में चुनावी सभाएं करेंगी। पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद प्रदेश में रैलियों की तिथि घोषित की जा सकती हैं। 

बसपा के कुल 21 सासदों में से 20 उत्तर प्रदेश से ही हैं। ऐसे में पार्टी भले ही किसी से गठबंधन किए बिना देश की ज्यादातर लोकसभा सीटों पर ताल ठोकने को तैयार है इसलिए उसका सर्वाधिक फोकस सूबे की 80 सीटों पर ही है। पार्टी पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव के बाद से ही लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के चुपचाप बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए बूथ कमेटियों का गठन कर कैडर कैंप चल रहे हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम भी किया जा रहा है। इन कामों की समीक्षा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर करते रहे हैं लेकिन जिस तरह से दूसरी पार्टियों की इधर सूबे में सक्त्रियता बढ़ी है उसको देखते हुए अबकी बसपा प्रमुख खुद ही तैयारियों की समीक्षा करेंगी।

Source- News in Hindi

Jagriti Made me Eat like a Dog: Maid

maid murder

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। बसपा सांसद धनंजय सिंह के सरकारी आवास में काम करने वाली दूसरी घरेलू सहायिका मीना भी उनकी पत्नी डॉ. जागृति की क्रूरता की शिकार थी। पिटाई के चलते जान गंवाने वाली घरेलू सहायिका रेखा को बचाने के लिए जब भी वह बीच में पड़ती, उसकी भी जमकर पिटाई होती। भरी आंखों से मीना ने बताया कि भइया (सांसद) भी हमेशा चुपचाप देखते रहते थे, कुछ नहीं बोलते थे। मीना के शरीर पर जख्मों के इतने निशान हैं कि किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। उसके दाहिने हाथ में फ्रैक्चर है। जागृति ने माचिस से कई बार मीना के बाल जलाए थे। उसके सिर के आधे बाल अभी तक जले हुए हैं।
उपचार के लिए आरएमएल अस्पताल में भर्ती मीना ने बृहस्पतिवार को बताया कि 'दीदी (जागृति) शाम को घर आतीं तो पता नहीं क्यों गुस्सा रहती थीं। उनके सामने जो भी पड़ता, उसकी शामत पक्की होती थी। दीदी किसी न किसी बात पर कमी निकाल कर मुझे, राखी और नाबालिग नौकर को इतना पीटती थी कि कई-कई दिन तक शरीर दर्द करता था। गलती होने पर खाने के समय वह अचानक हम लोगों के बीच आ जाती और कहती कि कुत्ता बनो और बिना हाथ लगाए सीधे मुंह से खाना खाओ। हम रोते या मना करते तो डंडे से बेरहमी से पिटाई कर देती थी।' उसके मुताबिक, कभी-कभी सांसद भी उनकी पिटाई कर देते थे। नई दिल्ली जिले के डीसीपी एसबीएस त्यागी ने बताया कि कुछ महीने पूर्व जागृति ने गर्म प्रेस मीना के पेट पर रख दी थी, जिसका घाव अब तक भर नहीं पाया है। हाल ही में किसी गलती पर मीना के दोनों कूल्हों को भी गर्म प्रेस से दागा था, जिसकी वजह से वह अपने बल पर उठने-बैठने में अब तक असमर्थ है। डॉक्टरों का कहना है कि मीना को इलाज के लिए काफी समय तक अस्पताल में रहना होगा। दूसरी तरफ, मेडिकल बोर्ड गठित न होने के कारण रेखा का पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार को भी नहीं हो पाया। मीना और राखी दोनों 24 परगना, कोलकाता की हैं। 

घर का खाना खा रहे धनंजय
सांसद धनंजय व जागृति को चाणक्यपुरी थाने में अलग-अलग कमरे में रखा गया है। सूत्रों की मानें तो धनंजय घर से खाना मंगवा रहे हैं, जबकि जागृति को मेस का खाना दिया जाता है। उन्हें रिश्तेदारों व परिचितों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। बुधवार रात दोनों को ठीक से नींद नहीं आई। वह कई बार जगे और बेचैनी महसूस करते रहे। दोनों पांच दिन की पुलिस रिमांड पर हैं। 

बाल आयोग ने मांगी रिपोर्ट
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पुलिस को पत्र लिखकर नाबालिग नौकर की पिटाई से संबंधित जांच रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने मांग की कि अगर नाबालिग का यौन उत्पीड़न हुआ हो तो तत्काल पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। वहीं, आरएमएल अस्पताल प्रशासन ने भी पुलिस से रिपोर्ट मांगी है ताकि वह अपने यहां कार्यरत डॉ. जागृति पर विभागीय कार्रवाई कर सके।

Source- News in Hindi

Wednesday, 6 November 2013

Jagriti Singh: 'Hot-Head, Egoist And Insecure'

maid murder

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राजनीति में विफलता, सांसद पति की बेरुखी व अन्य हालात ने डॉक्टर जागृति को एकाकीपन के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया। रही सही कसर उसके पिता की सड़क हादसे में मौत ने पूरी कर दी। शादी के चार साल के अंदर जीवन में आए कई उतार-चढ़ावों के कारण उसका स्वभाव आक्रामक हो गया। वह इतनी क्रूर हो गई कि बात-बात पर अपने नौकरों की बेरहमी से पिटाई करने लगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में जागृति जौनपुर के रारी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय लड़ी थी। 50 हजार वोट मिलने के बाद भी वह हार गई। इससे वह परेशान रहने लगी। इसके बाद से ही उसके पति से संबंध बिगड़ने लगे। वह सांसद के 175, साउथ एवेन्यू, चाणक्यपुरी वाले सरकारी आवास में अकेले रहने लगी। तीन साल पहले बेटे के जन्म के बाद जागृति की दिक्कतें बढ़ गई। दबंग धनंजय सिंह जब जौनपुर से दिल्ली आते तो उनके साथ हर तरह के लोग आते थे। इससे नाखुश जागृति पति से कहती थी कि इससे उसके बेटे पर गलत प्रभाव पड़ेगा। विचारों में मतभेद के कारण सांसद ने गत जून में तलाक के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी दायर की थी।

बताया जाता है कि जागृति अक्सर सुबह कंस्टीट्यूशन क्लब स्थित जिम जाती थी। बेटे को साथ लेकर जिम में जाने के कारण उसका कुछ महीने पहले एक अन्य सांसद से झगड़ा हो गया था। पुलिस का कहना है कि जांच में पता चला कि जागृति पहले भी उग्र मिजाज की थी। पिटाई के दौरान नौकरों का खून निकल आने पर वह कहती थी कि उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। घर के नौकर-नौकरानी को बाहर निकलने पर सख्त मनाही थी। जब वह खुद बाहर जाती थी, तो मुख्य द्वार पर ताला जड़ देती थी। 

मीना को भिजवा दिया था साले के घर
राखी के मौत की जानकारी मिलने पर सांसद धनंजय सिंह जब जौनपुर से दिल्ली आए तो उन्होंने सबसे पहले 38 वर्षीय दूसरी नौकरानी मीना को अपने साले के घर भिजवा दिया था। उसके शरीर पर भी गर्म प्रेस से जलाने के निशान मिले हैं। राखी व मीना दोनों मुस्लिम हैं किंतु दोनों ने हिंदू नाम रख लिए थे। पुलिस ने मीना के बयान भी मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करवा दिए हैं।

Source- News in Hindi

Tuesday, 5 November 2013

BSP MP Dhananjay Singh: Maid Beaten to Death, Minor Tortured

BSP MP

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बसपा सांसद धनंजय सिंह की पत्‍‌नी डॉ. जागृति सिंह जिस तरीके से घरेलू सहायिका राखी व 17 वर्षीय घरेलू सहायक की बेरहमी से पिटाई करती थी, उसे जानकर हर किसी के रोंगटें खड़े हो सकते हैं। दोनों को सांसद ने एक साल पहले नौकरी पर रखा था।
राखी को जहां दक्षिण दिल्ली के एजेआर प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से रखा गया था, वहीं नाबालिग को परिचित के माध्यम से नौकरी पर रखा गया था। नाबालिग बनारस के पास एक गांव का रहने वाला है। इनके अलावा सांसद ने मीणा नाम की एक अन्य घरेलू सहायिका को भी नौकरी पर रखा हुआ था, जो राखी की हत्या किए जाने के बाद 4 नवंबर को भाग गई।
पुलिस के मुताबिक, वैसे तो विधायक की पत्‍‌नी नाबालिग की अकसर बेरहमी से पिटाई करती थी। लेकिन एक नवंबर से तीन नवंबर तक वह दोनों की नियमित पिटाई कर रही थी। दीपावली वाले दिन डॉ. जागृति ने राखी की लाठी से बुरी तरह पिटाई की थी। चोट लगने से जब वह बेहोश होकर गिर गई, तब उन्होंने मारना छोड़ दिया। कुछ देर बाद उन्होंने इलेक्ट्रोल पाउडर का घोल राखी को पिलाने की कोशिश की थी। उसके बेहोश होने से जब राखी ने मुंह नहीं खोला तो जागृति को लगा कि वह ड्रामा कर रही है। तब उन्होंने राखी के मुंह में जोर से चम्मच घुसेड़ दिया था, जिससे उसके कई दांत टूट गए थे। राखी की छाती पर चढ़कर दोनों पैर से कई बार दबाया था। जिससे वह और बुरी तरह घायल हो गई थी। देर रात ही तड़प-तड़प कर राखी ने दम तोड़ दिया था।

दिनभर सांसद ने दी धमकी
नाबालिग ने बयान में कहा है कि राखी की मौत होने पर सांसद व जागृति उसे दिनभर बैठाकर धमकी देते रहे कि अगर उसने किसी के पास भी मुंह खोला तो वे लोग उसके पूरे परिवार को खत्म करवा देंगे। जागृति ने दोनों को घर से कहीं भी बाहर निकलने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा था। 

गर्म प्रेस से दाग दिया था
जब नाबालिग के बाल बढ़ जाते थे तब वह राखी से इस्तेमाल किया हुआ रेजर से उसके बाल मुड़वा देती थी। बात-बात में जागृति दोनों के गर्दन पकड़ नोंच डालती थी। नाबालिग ने बताया कुछ समय पूर्व जागृति ने उसके पैर व प्राइवेट पार्ट पर गर्म प्रेस से जला डाला था। 

वह अकसर दोनों को डराती थी कि अगर वे घर से बाहर निकलेंगे तो उन्हें उनकी कोठी में तैनात नागालैंड पुलिस के जवान गोली मार देंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि जागृति ने अपने घर में 20 सीसीटीवी कैमरे लगा रखी है। वह सर्वेट क्वार्टर के बाथरूम में भी सीसीटीवी कैमरे लगा रखी है। इसके पीछे उनका मकसद क्या था पुलिस उसका पता लगा रही है। यह भी बताया जा रहा है कि कुछ समय पूर्व जागृति ने एक बार राखी व नाबालिग को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। तब उन्होंने दोनों की दिनभर पिटाई की थी।

Source- News in Hindi

She Beat Rakhi on Every Occasion

maid murder

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। पुलिस टीम ने जब घर में काम करने वाले किशोर से पूछताछ की तो सनसनीखेज खुलासा हुआ। नाबालिग के शरीर पर जगह-जगह प्रेस से जलाए जाने के निशान थे। पूरा शरीर सूजा हुआ था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार नाबालिग ने बताया कि दीपावली की रात डॉ. जागृति सिंह ने खाने को लेकर हुए विवाद में उसकी और राखी की जमकर पिटाई की थी। बताया जाता है कि डॉ. जागृति ने राखी को प्रेस तथा घर में सजावट के लिए रखे बारहसिंगा के सिर तथा छड़ी से जमकर पीटा था और बीच में आए नाबालिग की भी उन्होंने पिटाई की थी।
मूलरूप से गोरखपुर की रहने वाली डॉ. जागृति सांसद की दूसरी पत्नी हैं। बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की डिग्री हासिल कर चुकी जागृति राम मनोहर लोहिया अस्पताल में सीनियर रेजिडेंट हैं। डॉ. जागृति के पिता परियोजना अधिकारी हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो जागृति सिंह के खिलाफ साउथ एवेन्यू पुलिस चौकी में घरेलू सहायक-सहायिकाओं की पिटाई की शिकायत पहले भी मिलती रही है लेकिन मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण अक्सर बात दब जाती थी। चाणक्यपुरी थाना पुलिस ने जागृति के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, नाबालिग को बंधक बनाकर जबरन घर का काम कराने, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट आदि धाराओं में मामला दर्ज किया है।

जागृति का हुआ था प्रेम विवाह
छात्र राजनीति के जरिये राजनीति में कदम रखने वाले धनंजय सिंह ने 2006 में मीनू नाम की युवती से विवाह किया था। लेकिन शादी के एक साल बाद ही लखनऊ स्थिति गोमती नगर में 2007 में मीनू की संदिग्ध परिस्थतियों में मौत हो गई थी। बताया जाता है कि मीनू ने इसलिए खुदकुशी की थी क्योंकि उस दौरान धनंजय का डॉ. जागृति से प्रेम संबंध चल रहा था। उसी दौरान डॉ. जागृति लखनऊ में रहकर पढ़ाई कर रही थी। धनंजय उस समय विधायक थे जिससे वह भी लखनऊ में रह रहे थे। मीनू की मृत्यु के बाद 2009 में सांसद ने जागृति से प्रेम विवाह कर लिया था। लेकिन पिछले कुछ महीने से उनके तलाक की प्रक्रिया अदालत में जारी है।

चल रहा था मनमुटाव
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से सांसद धनंजय सिंह और डॉ. जागृति सिंह के रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे थे। दोनों की तलाक की प्रक्रिया भी आरंभ हो चुकी थी। सांसद अपनी इस कोठी में रहने के बजाय समीप की एक अन्य कोठी में रहते हैं। लिहाजा वह इस हत्याकांड से पल्ला झाड़ने की भरपूर कोशिश करते रहे।
मैडम अक्सर 17 वर्षीय घरेलू सहायक व घरेलू सहायिका राखी की पिटाई करती रहती थीं। एक बार राखी ने जब फोन से अपनी मां से बात कर ली थी तब उन्होंने उसकी खूब पिटाई की थी। वह चप्पल, लात-घूंसे व सामने आने वाली किसी भी चीज को लेकर उनसे मारपीट करती थीं। एक बार उन्होंने मेरी भी पिटाई कर दी थी।' -आजाद, इलेक्ट्रीशियन
पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। नाबालिग घरेलू सहायक से भी पूछताछ की जा रही है। इस पूरे मामले में सांसद की भूमिका का भी पुलिस पता लगा रही है।' -एसबीएस त्यागी, पुलिस उपायुक्त, नई दिल्ली जिला


Source- News in Hindi