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Thursday, 30 June 2016

मायावती को एक और झटका, महासचिव आरके चौधरी का BSP से इस्तीफा

बीएसपी चीफ मायवती को एक और झटका गुरुवार को लगा जब पार्टी के महासचिव आरके चौधरी ने बीएसपी से इस्तीफा दे दिया। आरके चौधरी की गिनती बीएसपी में दिग्गज और राष्ट्रीय नेताओं में की जाती है। यूपी में 2017 में होनें वाले चुनाव से पहले बीएसपी के लिए एक बड़ा झटका माना जा सकता है। वहीं आरके चौधरी 2007-12 तक बीएसपी सरकार में मंत्री भी रहें। चौधरी की पहचान पार्टी में दलित नेता के रुप में रही है।

बसपा छोड़ने के बाद आरके चौधरी ने कहा कि मायावती ने पार्टी को अपनी जागीर बना लिया है। प्रापर्टी डीलर व भू-माफिया बसपा में बढ़ते जा रहे हैं और मिशनरी कार्यकर्ता बाहर। उन्होंने कहा कि बसपा छोड़ने वालों का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। अगले कदम के बारे में चौधरी ने कहा कि वह 11 जुलाई को अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद ही कोई फैसला लेंगे। स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ जाने के सवाल पर चौधरी ने कहा कि अभी वह किसी के साथ नहीं जा रहे हैं।


चौधरी ने सीधे तौर पर मायावती पर धन उगाही का आरोप लगाते हुए कहा कि वो पार्टी में टिकट बटवारें को लेकर जमकर रुपए की लूट खसौट करती है। वहीं बीएसपी अब रीयल स्टेट कंपनी बनकर रह गयी है। बागी नेता आरके चौधरी ने कहा कि बीएसपी अब वो पार्टी नही रही जो पहले काशी राम के जमानें पर चलती थी।
बता दें, कि 22 जून को प्रेस कांफ्रेंस में इस्तीफे की घोषणा करते हुए बीएसपी विधान मंडल दल के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर संगीन आरोप लगते हुए कहा कि उन्होंने अम्बेडकर के सपनों को बेचा है। मौर्या ने मायावती पर पार्टी में टिकट बेचने का भी आरोप लगाया था।

Thursday, 14 April 2016

आरक्षण पर मोदी ने छेड़छाड़ की तो समर्थकों के साथ सड़क पर उतरेंगी मायावती

बाबा साहब की 125वीं जयंती पर आज लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा उन्होंने कहा कि दलित वोटों के स्वार्थ में कांग्रेस, बीजेपी जुटी हैं। कांग्रेस ने सबसे ज्यादा बीएसपी का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी ने सासाराम मे जगजीवनराम की जयंती क्यो नही मनाई?,नोएडा में पांच अप्रैल को जगजीवनराम को याद किया। मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने अम्बेडकर को भारत रत्न नहीं दिया था, जबकि बाबू जगजीवन राम को कांग्रेस ने इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया था यहां तक की अम्बेडकर को लोकसभा में कांग्रेस ने ही नहीं जाने दिया था

भाजपा धन्नासेठों की पार्टी

मायावती ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि आरक्षण पर मोदी ने छेड़छाड़ की तो आंदोलन,केंद्र की सरकार के खिलाफ सड़कों पर खुद उतरूंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा धन्नासेठो,पूंजपतियों की पार्टी है वह उन्हीं को आगे बढ़ा रही,प्राइवेटाइजेशन के कारण दलितों को नौकरियां नहीं मिलेगी। आरक्षण के मुद्दे पर पीएम मोदी ने कुछ नहीं किया,आरक्षण पर आरएसएस तरह-तरह की बयानबाजी करती है। बीजेपी भी कांग्रेस के पदचिन्हों में चल रही,आरक्षण पर राजनैतिक लाभ के लिए मोदी पीछे हटे। दलितों के सम्मान को नहीं वोट के लिए कार्यक्रम कर रहे,कांग्रेस और बीजेपी की जातिवादी मानसिकता है। बीजेपी दलित और पिछड़े वर्ग का कार्ड खेल रही है,बीजेपी, कांग्रेस सौ चूहे खाकर हज पर चली।

हैदराबाद विवि में हो रहा दलितों का उत्पीडऩ

रोहित वेमुला दलित छात्रों के उत्पीडऩ पर संघर्ष कर रहे थे,कन्हैया अम्बडेकर के सिद्धांतों से दूर है कांग्रेस का युवराज हैदराबाद देखने तक नहीं गया,राहुल गांधी नाट्कबाजी करते हैं। हैदराबाद विवि में दलितों का उत्पीडऩ वर्षों से हो रहा,कांग्रेस सरकार में कई छात्रों ने दी जान-दलित छात्रों का उत्पीडऩ चरम पर हो रहा है,कांग्रेस सरकार में भी दलितों का उत्पीडऩ हो रहा था। आरएसएस और वीएचपी को आगे कर माहौल खराब किया जा रहा,विश्वविद्यालयों का भी माहौल खराब किया जा रहा।

पीएम मोदी की छवि धूमिल हो रही

बीजेपी का जनाधार धीरे-धीरे खिसक रहा है। पेट्रोल-डीजल के दाम न घटाकर धन्नासेठों को फायदा पहुंचा रहे,नई योजनाओं से गरीबों को फायदा नहीं। देश के गरीबों का पैसा मोदी बाहर उड़ा रहे हैं,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम घटे। जापान से किए गए समझौते काफी महंगा पड़ेंगे,महंगाई और भुखमरी से देश जूझ रहा है मोदी सरकार में बैंकों का अरबों लेकर पूंजीपति फरार,गरीबो और छोटे व्यापारियो की कुर्की की जा रही

मोदी ने पूरा नहीं किया चुनावी वादा

मोदी ने गरीबों को लाखों देने का वादा किया था,दो साल में कालेधन का एक रुपया वापस नहीं आया 100 दिन में कालेधन के मोदी के वादे का क्या हुआ?....गरीबों को कालेधन का एक रुपया भी नहीं मिला। मोदी ने जो वादे किए, पूरे नहीं किए,देश की जनता से मोदी ने कालाधन लाने का वादे किया था। सपा,कांग्रेस, बीजेपी घोषणापत्र के वादे पूरे नही करती,बीएसपी के घोषणापत्र को ही सपा पूरा कर रही है को हराना ही नहीं, जमानत जब्त करानी है,सपा, कांग्रेस, बीजेपी के हथकंडों से सावधान रहे।

यूपी मे मेट्रो,एक्सप्रेसवे मेरी सरकार की देन है

सपा सरकार कांग्रेस के बाद बीजेपी का समर्थन कर रही। बीएसपी सरकार में गुंडे चूल्हे के बिल में छिपे थे,सपा सरकार में गुंडे और अपराधी सड़क पर घूम रहे सरकार सिर्फ बयानबाजी कर रही,2012 मे तीनों पार्टियों ने मिलकर बीएसपी के खिलाफ चुनाव लड़ा था 4 बार बीएसपी ने सरकार बनाकर कानून का राज कायम किया,गरीबों,दलितों, अल्पसंख्यकों आदि का उत्थान किया स्मारक-पार्क ही नहीं बनाए,सभी वर्गों का उत्थान भी किया,सभी वर्गों के लिए ठोस कदम उठाए। वीके सिंह का बयान कतई छमा योग नहीं है, मोदी ने दलित विरोधी बयान देने वालों पर कार्रवाई नहीं की। वीके सिंह पर पीएम मोदी ने नहीं की कार्रवाई,दलितों के खिलाफ वीके सिंह ने अभद्र टिप्पणी की थी।

केशव मौर्या आरएसएस और बीजेपी का बंधवा मजदूर
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया था यहां तक की अम्बेडकर को लोकसभा में कांग्रेस ने ही नहीं जाने दिया था मायावती ने कहा कि कल्याण सिंह ने भी ओबीसी के लिए कुछ नहीं किया,आरएसएस के एजेंडे पूरे करने में कल्याण की सरकार गई थी मोदी ने भी ओबीसी वर्ग के लिए कुछ नही किया,चाय वालों के लिए मोदी ने कुछ नही किया,फ्री की चाय पीते है। केशव मौर्या जातिवादी और साम्प्रदायिक है,केशव मौर्या आरएसएस और बीजेपी का बंधवा मजदूर है। मोदी दलितों के उत्थान के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहे,केशव मौर्या का आपराधिक इतिहास रहा है।

विपक्षियों का दलित प्रेम ढोंग

उन्होंने कहा कि दलितों के प्रति हीन भावना खत्म करें विपक्षी पार्टियां,मोदी दलितों के वोटों के लिए खूब यूपी आ रहे। अम्बेडकर के नाम पर छोटे-मोटे स्मारक बना रही, लखनऊ का अम्बेडकर स्मारक बीजेपी पर अकेले भारी बीजेपी ने दलितों की तुलना जानवरों से की,दलितों के वोटों के लिए बीजेपी ज्यादा नाटकबाजी कर रही वोटों की चाह में कांग्रेस अम्बेडकर जयंती मना रही,दलित आत्महत्या नहीं, मुकाबला करें मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने आय से अधिक मामले को जानबूझकर लटकाए रखा, विपक्षियों का दलित प्रेम ढोंग है,आय से अधिक मामले में फर्जी फंसाया गया मेरी पार्टी से चुनाव लड़ चुका कमलेश मेरे खिलाफ फिर सुप्रीम कोर्ट याचिका करवाई गई,बीएसपी के मूवमेंट को रोकने की कोशिश हो रही है।

राष्ट्रभक्ति के लिए एक नारा बोलना जरूरी नहीं

ओवैसी भी बीजेपी की मदद कर रहे हैं भारत माता की जय पर जबरन बवाल हो रहा,हमारी पार्टी के लोग जय भीम जय भारत बोलते है सपा को अधिकारी मैच जिता सकते है,सत्ता मे नही ला सकते अधिकारियो के साथ मैच खेलने से फुर्सत नही सपा सरकार में गरीबों का भला नहीं,सरकारी धन से विदेशों के दौरे कर रहे नेता दलितों और अल्पसंख्यकों की मांगे नहीं मनाते विपक्षी,जाति और धर्म की राजनीति नहीं करती बीएसपी दलितो के तीर्थस्थान लखनऊ का अम्बेडकर स्मारक,बीजेपी,सपा,कांग्रेस की वर्ण व्यवस्था की सोच नहीं बदली

सरकार आई तो मौजूदा फैसलों की जांच

राम मंदिर के नाम पर वोट चाहती है बीजेपी,दलितों के भगवान और मसीहा अम्बेडकर है बीजेपी दलितो,पिछड़ो,अल्पसंख्यको को जोडऩे में विफल, कोर्ट के फैसले के बिना नहीं बन सकता राम मंदिर मुस्लिम छात्रों के खिलाफ केंद्र का रवैया खराब,। जामिया विवि के छात्रों को परेशान किया जा रहा कानून-व्यवस्था और विकास मेरा एजेंडा है,सपा सरकार में जमकर लूट मचेगी,मेरी सरकार आई तो मौजूदा फैसलों की जांच कराएंगे। Read more http://www.jagran.com

Tuesday, 20 January 2015

भाजपा में शामिल होंगे यूपी के पूर्व डीजीपी बृज लाल

बसपा सुप्रीमो तथा उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री के बेहद भरोसेमंद पुलिस अधिकारी रहे यूपी के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृज लाल अब राजनीतिक पारी शुरू करेंगे। बृज लाल को बसपा से बेहतर भारतीय जनता पार्टी लग रही है। तेज तर्रार पुलिस अधिकारी रहे बृज लाल कल लखनऊ में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
 
बृज लाल को कल लखनऊ में भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर भाजपा की सदस्यता दिलाएंगे। बृज लाल ने आज लखनऊ में बताया कि वो कल भाजपा में शामिल होंगे। 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी बृज लाल ने अक्टूबर 2011 में उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक का पद संभाला था।

Read: Hindi News and Newspaper

Thursday, 15 January 2015

कांग्रेस की गलती से बनी भाजपा की सरकार : मायावती

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज अपने जन्मदिन पर भाजपा के साथ सपा और कांग्रेस पर जमकर भड़की। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण ही केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार भी भोली जनता को सिर्फ सपने ही दिखा रही है।

अपने जन्मदिन का केक काटने के बाद लखनऊ में पार्टी कार्यालय में मायावती ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कोई भी करिश्मा नहीं किया, लेकिन कांग्रेस की गलत नीतियों से परेशान हो चुकी जनता ने केंद्र में भाजपा की सरकार बना दी।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की गलत नीतियों का पूरा लाभ लिया। हम तो लगातार साम्प्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए कांग्रेस को बाहर से समर्थन दे रहे थे। भाजपा के साथ और कांग्रेस दलित कार्ड खेल रही है। केंद्र की सरकार अब दलितों को लुभाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। केंद्र की भाजपा सरकार पूंजीपतियो के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ चुनावी स्टंट के सहारे देश के कई राज्य में सरकार बना रही है, लेकिन बसपा को चुनावी स्टंट से फर्क नही पड़ता है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दलितो को रिझा रहे हैं। दलितों के घर अगर मोदी भी खिचड़ी खाएं तो कोई फर्क नही पड़ेगा। भाजपा ने देश में अच्छे दिन के सपने से जनता को गुमराह किया। इस पार्टी ने आम जनता को प्रलोभन भरे सपने दिखाए थे। अब हकीकत सामने आ रही है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में देश में साम्प्रदायिकता व जातिवाद काफी बढ़ा है। जिससे लोग परेशान है। सरकार सिर्फ पूंजीपतियों तथा धन्नासेठों को अधिक लाभ देने की योजनाएं तैयार कर रही ह। इसी कारण देश की जनता कुछ ही महीने मे केंद्र सरकार से परेशान है। बसपा सुप्रीमो ने कह कि इस बार अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें आधे से ज्यादा कम हुई हैं लेकिन भाजपा सरकार ने सिर्फ पेट्रोल के दाम घटाए। वह भी नाम मात्र का। उन्होंने कहा जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल व डीजल के दाम बहुत बढ़ी मात्रा में कम हुए हैं तब फिर केंद्र सरकार देश की जनता को अधिक लाभ क्यों नहीं दे रही है।

Wednesday, 15 January 2014

BSP's Lucknow rally

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को कांग्रेस-बसपा-सपा पर चौतरफा हमला करते हुए कहा कि बसपा के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए तीनों पार्टियों अंदरखाते एक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने सत्ता में आते ही बसपा की कई जनहित योजनाओं का बंद कर दिया। उत्तर प्रदेश अब क्राइम प्रदेश बन गया है।

अपने 58वें जन्मदिन पर रमाबाई अंबेडकर मैदान में आयोजित बसपा की राष्ट्रीय सावधान रैली में पार्टी प्रमुख मायावती ने कहा कि बसपा के खिलाफ कांग्रेस-भाजपा-सपा एक साथ हैं। उन्होंने कहा कि 2003-06 तक पार्टी संकट में थी। उन्होंने कहा कि 2003 में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा के साथ गठबंधन टूटा था, क्योंकि 2004 के चुनाव में गठबंधन के नाम पर भाजपा प्रदेश की 80 में से 60 सीटें चाहती थी। मैं भाजपा की इस मांग के खिलाफ थी, क्योंकि इससे बसपा के अस्तित्व पर संकट आ जाता। मैं स्वाभिमानी लड़की हूं, इसलिए मैं उनकी मांग पर नहीं झुकी।

माया ने कहा कि मेरे खिलाफ सीबीआइ का दुरुपयोग किया गया और मेरे खिलाफ गलत आरोप लगाए गए। मैं सांप्रदायिक शक्तियों के सख्त खिलाफ हूं। जब बसपा मुश्किल में थी तो स्वार्थियों ने उसे छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि बसपा उम्मीदवारों को हराने के लिए सन् 2009 में सपा-कांग्रेस-भाजपा अंदरखाते एक हो गए। इसलिए उस चुनाव में प्रदेश में 80 में से बसपा 20 सीटें जीती और 45 जगह वह दूसरे नंबर पर रही।

उन्होंने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब क्राइम प्रदेश बन गया है। यहां गुंडागर्दी बढ़ गई और सपा के गुंडे अधिकारियों को ढंग से काम नहीं करने दे। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के शासनकाल में प्रदेश में दंगे चरम पर पहुंच गए हैं। मुजफ्फनगर दंगे के आरोपियों को सरेआम सम्मानित किया जा रहा है। दंगों के बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए था। दंगों के बाद अनाप-शनाप बयान दिए गए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलितों की हालत बदतर होती जा रही है। सपा सरकार में केवल यादवों को ही फायदा पहुंचाया जा रहा है। सरकार पर अराजक तत्व हावी हो रहे हैं। 

मायावती ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी निशाना साधते हुए कहा कि मोदी झूठे लोकलुभावन वादे कर रहे हैं। माया ने गोधरा दंगों पर भी मोदी को घेरा।

Source: Hindi News

Monday, 13 January 2014

Mayawati's bsp fight election in 500 loksaba seats

लखनऊ (अजय जायसवाल)। केंद्र की सत्ता में 'बैलेंस ऑफ पावर' बनने को बसपा एक बार फिर रिकार्ड 500 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर किस्मत आजमाएगी। पार्टी देश के दो दर्जन राज्यों की करीब सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की कवायद कर रही है। पार्टी का मानना है कि भले ही सब सीटों पर जीत असंभव हो लेकिन जनाधार में तो कुछ न कुछ इजाफा हो ही सकता है।

सात वर्ष पहले सोशल इंजीनियरिंग के दम पर उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने के बाद भले ही बसपा का जनाधार पिछले कुछ वर्ष में गिरा है लेकिन पार्टी के हौसले में कोई कमी नहीं दिख रही है।
पार्टी 16वीं लोकसभा के चुनाव में कुल 543 संसदीय सीटों में से 500 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटी है। पार्टी कितनी सीटों पर नीला परचम फहराती है यह तो चुनाव बाद ही पता चलेगा, लेकिन किसी राष्ट्रीय पार्टी के सर्वाधिक प्रत्याशी उतारने का रिकॉर्ड पार्टी के ही नाम रहने की उम्मीद है। कारण है कि पार्टी सुप्रीमो मायावती स्पष्ट कह चुकी हैं कि बसपा किसी भी राज्य में किसी भी पार्टी से सीटों के संबंध में किसी तरह का कोई गठबंधन नहीं करेगी।


15वीं लोकसभा (वर्ष 2009) के चुनाव में बसपा ने सर्वाधिक 500 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। इनमें से 21 सांसद बने। इसके अलावा सहयोगियों के लिए कुछ सीटों को छोड़ने से कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के भी 440 प्रत्याशी ही मैदान में थे। भाजपा भी गठबंधन के चलते 433 सीटों पर ही चुनाव लड़ी थी।

दो दर्जन राज्यों में उतारे थे प्रत्याशी
5वीं लोकसभा के चुनाव में बसपा ने उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने के साथ ही आंध्र प्रदेश की 40, बिहार की 39, गुजरात की 24, हरियाणा की 10, हिमाचल प्रदेश की 4, जम्मू-कश्मीर की 5, कर्नाटक की 28, केरल की 20, मध्यप्रदेश की 28, महाराष्ट्र की 47, उड़ीसा की 19, पंजाब की 13, राजस्थान की 24, तमिलनाडु की 37, पश्चिम बंगाल की 41, छत्तीसगढ़ की 12, झारखंड की 14, उत्तराखंड की 5, अंडमान-निकोबार, चंडीगढ़, दादर नगर हवेली व पुडुचेरी की 1-1 व दिल्ली की सभी 7 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। 2004 में हुए 14वीं लोकसभा के चुनाव में भी पार्टी ने गठबंधन न करके 25 राज्यों में 435 उम्मीदवार खड़े किए थे, जिसमें से सिर्फ यूपी से ही 19 जीते थे। 

तीन दशक पहले बनी थी बसपा
अब राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी बसपा का गठन 14 अप्रैल 1984 को हुआ था। 1998 के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो पार्टी के सांसद बढ़ते ही रहे हैं। नवीं लोकसभा के लिए 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 18 राज्यों में 245 प्रत्याशी खड़े किए थे जिसमें से तीन पर उसे सफलता मिली थी। इसके बाद 1991-92 (सिर्फ पंजाब) में 10वीं लोकसभा के चुनाव में बसपा ने 243 प्रत्याशी उतारे जिसमें से पार्टी ने तीन पर ही विजय पताका फहरायी थी। इसी तरह 1996 के चुनाव में पार्टी ने 16 राज्यों की 210 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे जिसमें जीते नौ थे। राष्ट्रीय पार्टी बनने के बाद भी 1998 के चुनाव में बसपा ने 251 से ज्यादा प्रत्याशी नहीं उतारे थे लेकिन उसमें भी सफलता सिर्फ पांच पर मिली थी। ऐसे ही 1999 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 225 प्रत्याशी उतारे थे जिसमें से 14 विजयी हुए थे। 

लोकसभा चुनावों में बसपा प्रत्याशियों का लेखा-जोखा
वर्ष सीटें लड़ी सीटें जीती
1989 245 03
1991 243 03
1996 210 09
1998 251 05
1999 225 14
2004 435 19
2009 500 21


Source: Hindi News

Friday, 29 November 2013

Super Saturday for Delhi Asembly Election

Delhi assembly election
नई दिल्ली। ठंड के मौसम में शनिवार को दिल्ली में सियासत की गरमी रहेगी। चार दिसंबर को दिल्ली में होने वाले विधान सभा चुनाव के मद्देनजर आज भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार, लोकसभा की विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, बसपा सुप्रीमो मायावती अलग-अलग जगहों पर रैली कर जनता को अपने पक्ष में लुभाने की कोशिश करेंगे। मोदी आज दिल्ली में तीसरी बार रैली करेंगे। देखना होगा कि विधान सभा चुनाव में मोदी की रैली का कितना असर दिखाई देता है। भाजपा दिल्ली में मोदी के बल पर कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में कामयाब हो पाती है या नहीं। यह एक बड़ा सवाल है।
गौरतलब है कि दिल्ली में कांग्रेस पिछले पंद्रह वर्षो से सत्ता में हैं और इस बार फिर से सत्ता में वापसी के प्रति आश्वस्त हैं। वहीं, विपक्षी पार्टियां कांग्रेस को बेदखल करने की कोशिश कर रही हैं।
भाजपा कुर्सी पाना चाहती है तो कुछ पार्टियां अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने की कोशिश करेंगी। हर पार्टियां अपने-अपने दांव आजमा रही हैं। आज जहां नरेंद्र मोदी शाहदरा, चांदनी चौक और सुल्तानपुरी में रैली करेंगे तो वहीं नीतीश कुमार, संगम विहार और जामिया नगर में अपने प्रत्याशियों के लिए वोट मांगेंगे। सुषमा स्वराज जहां पटपड़ गंज में एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगी। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती रामलीला मैदान चुनावी रैली करेंगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ऑनलाइन होकर एक घंटे तक जनता से रूबरू होगी।


Sunday, 10 November 2013

BSP will Becomes Number one Party in UP in Parliament Election

BSP

लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। बहुजन समाज पार्टी 16वीं लोकसभा के चुनाव को अकेले दम पर लड़ेगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने किसी भी पार्टी से चुनावी गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की तिकड़ी लालकृष्ण आडवानी, नरेन्द्र मोदी व राजनाथ सिंह अपने-अपने स्वार्थ में एक-दूसरे को काटने में लगे हैं जिसका फायदा लोकसभा चुनाव में बसपा को मिलेगा। सूबे की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठाते हुए उन्होंने राज्यपाल से राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की है। साथ ही सपा की सामाजिक न्याय यात्रा को नाटकबाजी करार दिया है।

तकरीबन तीन माह बाद शुक्रवार को राजधानी लखनऊ पहुंचीं बसपा प्रमुख ने शनिवार को माल एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से कहा कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन की बातें हवाई व बेबुनियाद हैं। साजिश के तहत विरोधियों द्वारा ऐसी अफवाह फैलायी जा रही है ताकि पार्टी का नुकसान हो। सपा से भी मिलने का सवाल नहीं उठता।

मायावती ने बसपा के संस्थापक कांशीराम के निधन पर राज्य की सपा व केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा शोक न घोषित करने का जिक्र करते हुए कहा कि कांशीराम को आदर सम्मान न देने वालों से बसपा का नाम जोड़ना ठीक नहीं। केंद्र की सत्ता से भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी को रोकने को ही वह यूपीए को बाहर से समर्थन दे रही हैं।

बहराइच रैली में नरेन्द्र मोदी द्वारा सपा, कांग्रेस व बसपा गठजोड़ की बात करने पर उन्होंने कहा कि यह उनकी अज्ञानता व शरारतपूर्ण शैतानी को प्रदर्शित करने वाला है। भाजपा नेताओं को दूसरी पार्टियों से मुकाबला करने से पहले आपसी लड़ाई व अंतर्विरोध से मुक्ति पाना चाहिए। भाजपा नेता देश की समस्याओं के समाधान को बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं पर छह वर्ष तक केंद्र की सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? चुनाव में वोटों के ध्रुवीकरण को सपा व भाजपा मिलीभगत से सांप्रदायिक जहर फैलाकर माहौल खराब कर सकते हैं जिससे जनता सावधान रहे।

मायावती ने कहा कि सूबे में अपराध बढ़ रहे हैं। नए उद्योग लगना दूर, पुराने भी पलायन कर रहे हैं। प्रदेश पूरी तरह से पिछड़ा प्रदेश बन जाएगा। ऐसे में यहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने को लेकर सपा की सामाजिक न्याय यात्रा को बसपा प्रमुख ने नाटकबाजी व छलावा करार देते हुए कहा कि विहिप की तरह ऐसी यात्राएं निकालने से पहले सपा ओबीसी समाज के लोगों से सार्वजनिक माफी मांगें क्योंकि उसकी सरकार के आदेश से इन्हें आरक्षण नहीं मिल सका था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा बसपा में दलित लीडरशिप को न उभरने देने के बयान पर मायावती ने कहा कि उनको दलित नेतृत्व पैदा करने से किसने रोका है? 

धनंजय पर कानूनी कार्रवाई देखने के बाद ही निर्णय
नौकरानी की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जौनपुर के बसपा सांसद धनंजय सिंह के संबंध में मायावती ने कहा है कि अभी यह देखा जा रहा है कि उनके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई होती है? इसके बाद ही पार्टी कोई फैसला करेगी। धनंजय को पार्टी ने एक बार फिर जौनपुर से चुनाव लड़ाने का निर्णय कर रखा है। 

दलित विरोधी मानसिकता नहीं तो और क्या
दिल्ली में कई बंगलों को जोड़कर बनाए गए बहुजन प्रेरणा केंद्र और भाई की संपत्ति को लेकर मीडिया में आ रही खबरों पर भी बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार को सफाई दी। उन्होंने कहा कि प्रेरणा केंद्र पूरी तरह से उचित व नियमानुसार बनाया गया है। भाई-बहन की संपत्ति से भी उनका कोई संबंध नहीं है।

उनकी छवि को धूमिल करने के लिए जान-बूझकर इस तरह की खबरें दिखाई व छापी जा रही हैं। दिल्ली में तो कई हस्तियों के स्मारक व संग्रहालय 5-6 एकड़ के सरकारी बंगलों में बने हैं लेकिन उनके बारे में खबर नहीं दिखाई जाती है। जबकि तीन बंगलों को जोड़कर मात्र डेढ़-पौने दो एकड़ में ही प्रेरणा केंद्र बनाया गया है, जिसका पूरा खर्च उनका ट्रस्ट ही उठाता है। दलित विरोधी मानसिकता रखने वाले ही सरकारी नियमों के उल्लंघन की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।


Source- News in Hindi

Woman Suicide With 2 Child In Uttar Pradesh

Suicide

बिजनौर, जागरण संवाददाता। फुटपाथ पर पड़ा था, वो भूख से मरा था और पेट पर लिखा था, सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा। हिंदुस्तान में हर सुबह कई लाशों की पेशानी पर यह शेर चस्पा होता है। खुद को तरक्की याफ्ता कहने वाली इस मुल्क की सरकारों के गरीबी मिटाओ जैसे नारे की जमीनी हकीकत उस वक्त दम तोड़ती नजर आती है जब गरीबी के बजाए गरीब ही खुद को मिटाकर सरकारी दावों की पोल खोलते नजर आते हैं। बिजनौर में महिला द्वारा दो बच्चों को जहर देकर खुदकशी करने का मामला इसकी जिंदा बानगी है। बात यही खत्म नहीं होती। किसी प्रशासनिक अधिकारी ने अंतिम संस्कार के लिए साधन जुटाना भी मुनासिब नहीं समझा। सास ने कर्ज लेकर तीनों का अंतिम संस्कार कराया। गौरतलब है कि इस परिवार में गरीबी से तंग आकर अब तक पांच लोग खुदकुशी कर चुके हैं।

बिजनौर के ग्राम पुरैनी में गरीबी व तंगहाली से तंग आकर वीरबाला द्वारा अपने दो मासूम बच्चों को मारकर खुदकुशी करने की हृदय विदारक घटना से हर कोई हतप्रभ है। ग्रामीणों की मानें तो किसी समय यह परिवार पुरैनी के समृद्ध परिवारों में गिना जाता था। दूरसंचार विभाग के एसडीओ पद से रिटायर्ड नत्थू सिंह चौहान की 60 बीघा खेती की भूमि और आलीशान मकान था। पांच पुत्रों के पिता नत्थू सिंह की मौत के बाद ही उनके परिवार की बर्बादी शुरू हो गई थी। वीरबाला से पहले इसी घर में उसके जेठ अरविंद ने 25 वर्ष पूर्व, फिर दूसरे जेठ जितेंद्र ने 17 वर्ष पूर्व सल्फास खाकर जान दे दी थी। वहीं वीरबाला के पति धर्मवीर ने 13 फरवरी 2013 को तंगहाली के कारण आत्महत्या कर ली थी। देवर महेश व शैलेंद्र मजदूरी करके गुजर बसर करने को मजबूर हैं। वीरबाला की 80 वर्षीय सास रामेश्वरी ने बताया कि उनका परिवार कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। मरते समय भी वीरबाला 90 हजार रुपये कर्ज छोड़ गई है। वीरबाला व उसके दो बच्चों के शवों का आठ हजार रुपये कर्ज लेकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। शनिवार की देर शाम गांव के श्मशान घाट में उनके शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि वीरबाला के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। इनको सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए और वृद्धा राजेश्वरी का कर्ज भी माफ होना चाहिए। इससे कर्ज के बोझ तले दबे इस परिवार को कुछ राहत मिल सके।
निजाम को नहीं पता, किसकी मदद करें?
एक ही परिवार में पांच लोगों ने गरीबी से तंग आकर खुदकुशी कर ली, लेकिन इस बाबत हुक्मरानों के बयान चिंताजनक हैं। एसडीएम नगीना प्रेम प्रकाश फरमाते हैं कि सारा परिवार खत्म हो गया। किसकी मदद करें? अब सवाल यह उठता है कि जब एडीएम साहब को पता था कि सारा परिवार खत्म हो गया तो अंतिम संस्कार कौन करेगा? इसकी सुध उन्होंने क्यों नहीं ली? इसके अलावा गरीबी से जूझ रही मृतका ने कर्ज से छुटकारे को अपने घर के दरवाजे तक बेच डाले और प्रशासन इस त्रासदी से गाफिल ही नहीं रहा, बल्कि लाशों के अंतिम संस्कार की भी जहमत नहीं उठाई।

Source- News in Hindi

Thursday, 7 November 2013

BSP Will Soon Start Rallies Of Mayawati In Lucknow

Mayawati

लखनऊ। कांग्रेस, भाजपा तथा सपा के बाद बसपा भी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जोर-शोर से जुटेगी। जल्द ही बसपा प्रमुख मायावती की उत्तर प्रदेश में रैलियों का वृहद कार्यक्रम तय हो जाएगा।
तकरीबन तीन माह आज मायावती लखनऊ आ रही हैं। 10 नवंबर को लखनऊ में पार्टी के पदाधिकारियों व जोनल कोआर्डिनेटरों की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें राजनीतिक माहौल को देखते कुछ लोकसभा प्रत्याशियों को बदलने पर निर्णय हो सकता है। अधिकृत तौर घोषणा न सही लेकिन पार्टी ने लगभग सभी लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी तय कर रखे हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सूबे में भी मायावती की रैलियों का सिलसिला भी जल्द शुरू होगा। 

पाच राज्य के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीते तीन माह से मायावती में दिल्ली में ही हैं। पार्टी दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में चुनाव लड़ रही है। दस को पदाधिकारियों व जोनल कोआर्डिनेटरों के साथ बैठक के साथ ही बसपा प्रमुख मायावती पार्टी के लोकसभा प्रत्याशियों से भी अलग-अलग मिलेंगी। सूत्रों के मुताबिक मुजफ्फनगर दंगे के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदले सियासी समीकरण को देखते हुए भी बसपा प्रमुख कुछ क्षेत्रों के प्रत्याशियों को बदल सकती है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि बसपा प्रमुख फिलहाल यहीं रहकर मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में चुनावी सभाएं करेंगी। पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद प्रदेश में रैलियों की तिथि घोषित की जा सकती हैं। 

बसपा के कुल 21 सासदों में से 20 उत्तर प्रदेश से ही हैं। ऐसे में पार्टी भले ही किसी से गठबंधन किए बिना देश की ज्यादातर लोकसभा सीटों पर ताल ठोकने को तैयार है इसलिए उसका सर्वाधिक फोकस सूबे की 80 सीटों पर ही है। पार्टी पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव के बाद से ही लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के चुपचाप बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए बूथ कमेटियों का गठन कर कैडर कैंप चल रहे हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम भी किया जा रहा है। इन कामों की समीक्षा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर करते रहे हैं लेकिन जिस तरह से दूसरी पार्टियों की इधर सूबे में सक्त्रियता बढ़ी है उसको देखते हुए अबकी बसपा प्रमुख खुद ही तैयारियों की समीक्षा करेंगी।

Source- News in Hindi