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Wednesday, 15 January 2014

Binny Upsets with AAP's principles, Kejriwal replies back

  
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के विधायक विनोद कुमार बिन्नी की ओर से बगावती सुर सुनाई देने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उनपर पलटवार करते हुए कहा कि बिन्नी को पार्टी ने लोकसभा टिकट देने से मना कर दिया है, इसलिए वे नाराजगी जता रहे हैं। 

केजरीवाल ने कहा कि सरकार गठन के समय बिन्नी मंत्री पद के लिए आए थे और आज लोकसभा टिकट के लिए आए थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया है। 

गौरतलब है कि लक्ष्मीनगर से विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने 'आप' पर आरोप लगाए हैं कि वह आम जनता से छल कर रही है। इस पर आप में हाल ही शामिल हुए टीवी पत्रकार आशुतोष ने पलटवार करते हुए कहा कि अब रूठने और मनाने का खेल बंद होना चाहिए। पार्टी में लालच और महत्वाकांक्षाओं से भरे लोगों की कोई जरूरत नहीं है।

बिन्नी ने कहा कि पार्टी मुद्दों से भटक रही है। वह अब जनता के हित के बारे में नहीं सोच रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जनता से जो वादे किए थे वह उससे मुकर रही है। पार्टी अपने वादों से पीछे हट रही है। उन्होंने बताया कि कल वे इस मामले को लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस भी करेंगे।

इससे पहले मंत्रीपद को लेकर पार्टी के साथ हुई खींचतान पर उन्होंने कहा कि वे कभी भी मंत्री बनने के लिए पार्टी में शामिल नहीं हुए थे। वे तो बस काम करने के लिए यहां आए थे। उन्होंने कहा कि 15 दिन पहले पार्टी की जो स्थिति थी वह आज भी है। सिर्फ कहने से बदलाव नहीं होते करना पड़ता है। 

गौरतलब है कि जब केजरीवाल सरकार का गठन हो रहा था उस वक्त भी बिन्नी के साथ पार्टी के मतभेद सामने आए थे। कहा गया था कि बिन्नी सरकार में मंत्रीपद नहीं मिलने पर वे नाराज हो गए थे। हालांकि बाद में बिन्नी ने साफ किया था कि ऐसा कुछ भी नहीं है।

Tuesday, 14 January 2014

Rahul don't deny for prime minister post

नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इन्कार न करते हुए कहा है कि उन्हें पार्टी की ओर से जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी उसे वो निभाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बहन प्रियंका गांधी की चुनावी भूमिका नहीं होगी।

एक अखबार को दिए साक्षात्कार में राहुल गांधी ने कहा कि हम एक लोकतांत्रिक संगठन हैं। हमें लोकतंत्र में विश्वास है। देश की जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा यह तय करेगी कि कौन प्रधानमंत्री होगा। देशहित में कांग्रेस का सत्ता में आना जरूरी है और इसके लिए संगठन ने जो भी जिम्मेदारी दी है या आगे देगी, उसे मैं पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।

भाजपा के कांग्रेस मुक्त भारत और नरेंद्र मोदी के सवाल पर राहुल ने कहा कि भाजपा एक व्यक्ति आधारित राजनीति कर रही है, जो देशहित में नहीं है। सत्ता किसी एक व्यक्ति की सोच और उसके अपने तरीके से नहीं चलनी चाहिए। सबको साथ लेकर देश के 120 करोड़ लोगों का भविष्य संवारा जा सकता है। कांग्रेस इस देश के डीएनए में है। इसने देश में लोगों को जोड़कर रखा है।
बहन प्रियंका गांधी की चुनावी भूमिका पर राहुल ने कहा कि वह मेरी बहन-दोस्त और कांग्रेस की सक्रिय कार्यकर्ता हैं और इसलिए वह मुझे और संगठन को मजबूत करने के लिए मदद कर रही है। मुझे नहीं लगता कि उनकी कोई चुनावी भूमिका होगी।

अगले लोकसभा चुनाव में यूपीए और कांग्रेस की संभावनाओं पर कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि हमने पिछले 10 वर्षो में काफी अच्छे काम किए हैं। 2004 और 2009 में हमें कम करके आंका गया था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इस चुनाव में भी हम अच्छा करेंगे।

Source: Hindi News

Monday, 13 January 2014

Mayawati's bsp fight election in 500 loksaba seats

लखनऊ (अजय जायसवाल)। केंद्र की सत्ता में 'बैलेंस ऑफ पावर' बनने को बसपा एक बार फिर रिकार्ड 500 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर किस्मत आजमाएगी। पार्टी देश के दो दर्जन राज्यों की करीब सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की कवायद कर रही है। पार्टी का मानना है कि भले ही सब सीटों पर जीत असंभव हो लेकिन जनाधार में तो कुछ न कुछ इजाफा हो ही सकता है।

सात वर्ष पहले सोशल इंजीनियरिंग के दम पर उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने के बाद भले ही बसपा का जनाधार पिछले कुछ वर्ष में गिरा है लेकिन पार्टी के हौसले में कोई कमी नहीं दिख रही है।
पार्टी 16वीं लोकसभा के चुनाव में कुल 543 संसदीय सीटों में से 500 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटी है। पार्टी कितनी सीटों पर नीला परचम फहराती है यह तो चुनाव बाद ही पता चलेगा, लेकिन किसी राष्ट्रीय पार्टी के सर्वाधिक प्रत्याशी उतारने का रिकॉर्ड पार्टी के ही नाम रहने की उम्मीद है। कारण है कि पार्टी सुप्रीमो मायावती स्पष्ट कह चुकी हैं कि बसपा किसी भी राज्य में किसी भी पार्टी से सीटों के संबंध में किसी तरह का कोई गठबंधन नहीं करेगी।


15वीं लोकसभा (वर्ष 2009) के चुनाव में बसपा ने सर्वाधिक 500 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। इनमें से 21 सांसद बने। इसके अलावा सहयोगियों के लिए कुछ सीटों को छोड़ने से कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के भी 440 प्रत्याशी ही मैदान में थे। भाजपा भी गठबंधन के चलते 433 सीटों पर ही चुनाव लड़ी थी।

दो दर्जन राज्यों में उतारे थे प्रत्याशी
5वीं लोकसभा के चुनाव में बसपा ने उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने के साथ ही आंध्र प्रदेश की 40, बिहार की 39, गुजरात की 24, हरियाणा की 10, हिमाचल प्रदेश की 4, जम्मू-कश्मीर की 5, कर्नाटक की 28, केरल की 20, मध्यप्रदेश की 28, महाराष्ट्र की 47, उड़ीसा की 19, पंजाब की 13, राजस्थान की 24, तमिलनाडु की 37, पश्चिम बंगाल की 41, छत्तीसगढ़ की 12, झारखंड की 14, उत्तराखंड की 5, अंडमान-निकोबार, चंडीगढ़, दादर नगर हवेली व पुडुचेरी की 1-1 व दिल्ली की सभी 7 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। 2004 में हुए 14वीं लोकसभा के चुनाव में भी पार्टी ने गठबंधन न करके 25 राज्यों में 435 उम्मीदवार खड़े किए थे, जिसमें से सिर्फ यूपी से ही 19 जीते थे। 

तीन दशक पहले बनी थी बसपा
अब राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी बसपा का गठन 14 अप्रैल 1984 को हुआ था। 1998 के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो पार्टी के सांसद बढ़ते ही रहे हैं। नवीं लोकसभा के लिए 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 18 राज्यों में 245 प्रत्याशी खड़े किए थे जिसमें से तीन पर उसे सफलता मिली थी। इसके बाद 1991-92 (सिर्फ पंजाब) में 10वीं लोकसभा के चुनाव में बसपा ने 243 प्रत्याशी उतारे जिसमें से पार्टी ने तीन पर ही विजय पताका फहरायी थी। इसी तरह 1996 के चुनाव में पार्टी ने 16 राज्यों की 210 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे जिसमें जीते नौ थे। राष्ट्रीय पार्टी बनने के बाद भी 1998 के चुनाव में बसपा ने 251 से ज्यादा प्रत्याशी नहीं उतारे थे लेकिन उसमें भी सफलता सिर्फ पांच पर मिली थी। ऐसे ही 1999 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 225 प्रत्याशी उतारे थे जिसमें से 14 विजयी हुए थे। 

लोकसभा चुनावों में बसपा प्रत्याशियों का लेखा-जोखा
वर्ष सीटें लड़ी सीटें जीती
1989 245 03
1991 243 03
1996 210 09
1998 251 05
1999 225 14
2004 435 19
2009 500 21


Source: Hindi News

Modi nervous from AAP rise: Shakeel Ahmed

नई दिल्ली। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि आम आदमी पार्टी [आप] के उदय से मोदी नर्वस हो गए हैं। शकील अहमद ने कहा कि कांग्रेस पर भाजपा का हमला तो समझ में आता है मगर आप पर मोदी के हमले से यह स्पष्ट हो गया है कि वो उनसे डर गये हैं। 

इससे पहले गोवा में भाजपा की विजय संकल्प रैली के दौरान कल नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि पहली बार खुल कर आप को भी निशाने पर लिया था। नरेंद्र मोदी के बयानों पर कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी कांग्रेस की आलोचना करते हैं यह बात समझ में आती है, लेकिन वह अब आम आदमी पार्टी की भी आलोचना करने लगे हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि क्या मोदी आम आदमी पार्टी के उदय से नर्वस हो गए हैं? 

उल्लेखनीय है कि गोवा में भाजपा की रैली के दौरान अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बगैर नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश अनुभव से चलेगा, सादगी के ड्रामे से नहीं। उन्होंने कहा कि अब देश को तय करना है कि टेलीविजन पर दिखने से देश का भला होगा या फिर धरती पर विजन देखने से भला होगा। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में देश के सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, देश में पिछले दस सालों से कांग्रेस की सरकार रही है। इस वक्त का लेखा-जोखा लें तो देश ने अभी तक के सबसे बुरे दिन देखे हैं।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि मीडिया वालों को दिल्ली के बाहर कुछ दिखता नहीं है। देश में कई ऐसे नवरत्न है जो देश के लिए जीते हैं। उन्होंने आगे कहा, मैं 12 साल से गुजरात की सेवा कर रहा हूं। टीवी की स्क्रीन पर और अखबार के पन्ने पर न जगह बना पाया, न उनको जीत पाया। लेकिन जनता के दिलों से मैं कभी नहीं हारा। 

Source: Hindi News

Monday, 6 January 2014

India Inc rejects odi tax proposal


जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने भले ही उद्योग जगत के हितों को ध्यान में रखते हुए आयकर के झमेले को ही खत्म करने का प्रस्ताव किया है, लेकिन इंडिया इंक इसे लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है। देश के उद्यमी समाज का कहना है कि भाजपा जिस तरह का प्रस्ताव कर रही है वैसा दुनिया के किसी देश में नहीं है। इंडिया इंक मोदी और भाजपा से इन कर प्रस्तावों को विस्तार से पेश करने की मांग कर रही है।

उद्योगपति वाईके मोदी ने दैनिक जागरण को बताया कि भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार ने आयकर सहित कई तरह के करों को खत्म करने के साथ ही हर तरह के बैंकिंग लेनदेन पर टैक्स लगाने का समर्थन किया है। यह किसी भी कारोबारी को काफी भारी पड़ सकता है, क्योंकि उसके तो रोजाना कई तरह के लेनदेन बैंकों के जरिये होते हैं। हर तरह के बैंकिंग लेनदेन पर कर लगाने का प्रस्ताव हाल ही में फ्रांस में किया गया था, लेकिन उस पर सहमति नहीं बन पाई। कुछ अन्य देशों में भी इस बारे में असफल कोशिश की गई है। फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला का कहना है, 'पहले भाजपा या नरेंद्र मोदी को इस बारे में विस्तृत नीति की घोषणा करने दीजिए। उसके बाद ही हम अपनी राय देंगे। वैसे मोदी ने कर ढांचे को सरल बनाने की बात कही है जिसका हम पूरा समर्थन करते हैं।'

अर्थशास्त्री व वित्त मंत्रालय के पूर्व आर्थिक सलाहकार राजीव कुमार इस प्रस्ताव को क्रांतिकारी मानते हैं। उनका आकलन है कि इसे लागू करने से पहले साल ही 22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व हासिल होगा। अभी आयकर, बिक्री कर सहित तमाम तरह के करों से इतनी ही राशि प्राप्त होती है। लेकिन यह फार्मूला तभी सफल होगा, जब देश में काला धन पूरी तरह से खत्म हो जाए। साथ ही यह सुनिश्चत करना होगा कि किसी और माध्यम से मौद्रिक लेन-देन न हो। 

नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार को दिल्ली में एक सभा को संबोधित करते हुए मौजूदा कर व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की बात कही थी। इस सभा में सभी करों व शुल्कों को खत्म कर सिर्फ बैंकिंग लेनदेन पर दो फीसद का कर लगाने का प्रस्ताव आया था। सभा में मौजूद भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह व वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली ने भी इसका समर्थन किया। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी पहले ही इसका समर्थन कर चुके हैं।

Nitish Kumar denies alliance with any political party for Loksabha election 2014

पटना [जाब्यू]। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में किसी दल से गठबंधन की संभावना से साफ इन्कार किया है। उन्होंने कहा, हम तो एकसाथ आठ फ्रंट [मोर्चा] पर लड़ रहे हैं। अपनी तैयारी कर रहे हैं। हमारी पार्टी की ओर से निरंतर गतिविधियां जारी हैं। बारह संकल्प रैली होनी है। अब तक चार हो चुकी है।
सोमवार को जनता दरबार के बाद संवाददाताओं से बात बातचीत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने हमारी विशेष राज्य का दर्जा की मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह कदम राजनीतिक कारणों से उठाया गया है। इसलिए अब हम इसे राजनीतिक एजेंडा बनाकर चुनाव में जाएंगे। पहले यह हमारी आर्थिक लड़ाई थी जिसे हम लड़ रहे थे।

उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह द्वारा राहुल गांधी को प्रधानमंत्री प्रत्याशी के योग्य कहे जाने पर इसे कांग्रेस का अंदरूनी मसला बताया। कहा कि भाजपा में पीएम प्रत्याशी को लेकर जो कुछ हुआ, उससे हम गठबंधन से अलग हुए। अब भाजपा में कुछ होता है तो उससे क्या मतलब? उनके मुताबिक प्रधानमंत्री ऐसा होना चाहिए जो सबको साथ लेकर चले। वह न्याय के साथ समावेशी विकास करे। उन्होंने गैरकांग्रेस-गैरभाजपा का विकल्प देने के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की। यह जरूर कहा कि झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से चुनावी मसले पर आपसी सहमति बनी है लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कोई बात नहीं हुई है। 

जदयू से लोजपा के गठबंधन पर उन्होंने कहा कि चुनाव का वक्त है। ऐसे में कौन कहां जाएगा, इस पर फिलहाल कुछ भी कहना अनुचित है। मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या 'आप' अब पुरानी पार्टियों के लिए क्या खतरा है? इस पर उन्होंने कहा कि देश में संगठन एवं पार्टी बनाने का अधिकार हर किसी को है। संवैधानिक दायरे में रहकर हर पार्टी काम करने के लिए स्वतंत्र है। 'लालबत्ती' के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर मेरी कोई राय नहीं है। मीडिया में एक दौर चलता है, उससे खुद को अलग रखना ही बेहतर है। 

उन्होंने अमौसी नरसंहार [खगड़िया] में पटना उच्च न्यायालय द्वारा सभी आरोपियों की रिहाई पर कहा कि वे न्यायिक प्रक्रिया पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। न्यायालय के फैसले का अध्ययन कर राच्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। इसी प्रक्रिया नरसंहार संबंधी अन्य फैसलों में अपनायी जा रही है। 

बंगाल सरकार के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं :
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बिहार की एक बच्ची के साथ दुखद घटना [सामूहिक दुष्कर्म] घटी। इस मामले में राच्य सरकार ने अपने दायित्व का निवर्हन करते हुए पीड़ित परिजन को केवल मदद देने का प्रयास किया है। दूसरे राच्य की शासन व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है और न ही ऐसी कोई सरकार की मंशा रही है। प्रवासी श्रमिकों के लिए एक योजना है, उसी के तहत पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई, जो राच्य के 'सेंटीमेंट' का ख्याल रखकर चिंता प्रकट की और सहायता भेजी। मगर राच्य सरकार के इस 'अप्रोच' को सही परिपेक्ष्य में नहीं समझा गया। आखिर संवेदना भी कोई चीज होती है। ऐसी घटना पर अन्य राच्य के लोग भी यही करते हैं। 

Sunday, 5 January 2014

Lok sabha election 2014 will be like movement: modi


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के तीखे हमले पर उलझने के बजाय भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी फिलहाल विकास के एजेंडा और देश के लिए अपनी सोच पर ही डटे दिखना चाहते हैं। शायद यही कारण है कि बाबा रामदेव के मंच पर मोदी आए तो अपने इरादों और ट्रैक रिकॉर्ड का हवाला दिया और प्रधानमंत्री का नाम लिए बगैर कहा कि वह अनाप-शनाप आरोपों को तवज्जो नहीं देते।

तालकटोरा स्टेडियम के भरे सभागार में उन्होंने विश्वास दिलाया कि उनके पास इरादा है और कुछ कर गुजरने की क्षमता है। उन्होंने रामदेव की उम्मीदों पर भी खरा उतरने का वादा किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहला चुनाव आ रहा है जिसने पुरानी परंपराओं को नष्ट कर दिया है। चुनाव उम्मीदवार, जातिगत समीकरण से उठकर विकास के एजेंडे पर आ गया है। लिहाजा इस बार का चुनाव भी एक आंदोलन की ही तरह होगा। देश के स्वाभिमान की बात की तो जीएसएलवी-5 के लिए वैज्ञानिकों को बधाई भी दी।

मोदी ने आज अपनी गरीबी वाले दिनों से अब तक के सफर का जिक्र कर खासतौर से गांव-किसान और गरीब के साथ-साथ युवा व आधुनिक भारत के साथ संवाद करने में अपनी ऊर्जा लगाई। मोदी ने फर्श से अर्श तक के अपने सफर का जिक्र किया और भरोसा दिलाया कि वह पद के लिए नहीं कुछ कर गुजरने के लिए पैदा हुए हैं। जाहिर तौर पर रामदेव के गैरसियायी मंच से वह पीएम के तीखे बयान पर न उलझे हों, लेकिन कांग्रेस पर हमला करने से नहीं चूके। 

रविवार को रामदेव के स्वाभिमान मंच पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उपस्थित था। मोदी के साथ पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने भी सभा को संबोधित किया। एक-एक कर सभी नेताओं और खुद रामदेव ने पीएम के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें मनमोहन सिंह ने मोदी को देश के लिए विनाशकारी बताया था।

रामदेव ने कहा कि मोदी देश के लिए तो नहीं लेकिन कांग्रेस के लिए जरूर विध्वंसकारी होंगे। मोदी ने पीएम को तरजीह नहीं दी। हां, यह जरूर याद दिला दिया कि वह गरीब घर में जन्मे और चाय बेचने से लेकर मजदूरी तक की है। लगभग 45 मिनट के भाषण में मोदी ने अलग-अलग पहलुओं पर विकास की सोच रखी और भरोसा दिलाने की कोशिश की कि परिवर्तन की आशाओं को भाजपा व मोदी ही पूरी करेंगे।

मोदी के निशाने पर तो कांग्रेस और केंद्र सरकार ही थी, लेकिन परोक्ष रूप से आप भी नहीं बची। उन्होंने कहा, 'समर्थन से पहले ट्रैक रिकॉर्ड देख लेना। ऐसा न हो कि सिर्फ टेप रिकॉर्ड चल रहा हो।' याद दिलाया कि गुजरात में उन्होंने छोटे से बड़े क्षेत्रों में विकास भी किया है और अफसरशाही व भ्रष्टाचार पर लगाम भी लगाई है।

Source : Top Hindi News

Wednesday, 1 January 2014

AAP effect, Vasundhara Raje follow Simplicity

जयपुर [जासं]। दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी का भय राजनीतिक दलों को सताने लगा है। कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही दलों के नेता स्वयं को 'कॉमनमैन' दिखाने में जुट गए हैं। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस लिहाज से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब वह सरकारी विमान के बजाय साधारण रूटीन फ्लाइट से यात्रा करेंगी। उन्होंने अपनी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों की संख्या आधी करने के साथ ही काफिले में गाड़ियों की संख्या भी कम कर दी है। आम आदमी की तरह वसुंधरा भी सड़क पर लालबत्ती पर रुकेंगी। इसके अलावा उन्होंने जनता की सुलभता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट होने के बजाय अपने पुराने बंगले में ही रहने का निर्णय किया है। 

मुख्यमंत्री ने अब प्रतिदिन जन सुनवाई करने का भी फैसला लिया है। आने वाली शिकायतों के निस्तारण की अवधि भी तय की गई है। अब तक सभी मुख्यमंत्री सप्ताह में केवल एक दिन जन सुनवाई करते थे। मंत्रियों को भी सुबह एक घंटा अपने आवास पर लोगों की शिकायतें सुनने के लिए कहा गया है। वसुंधरा के इस फैसले को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा लिए गए निर्णयों से जोड़कर देखा जा रहा है। केजरीवाल ने इसी तरह के निर्णय किए, जिनका आम जनता में काफी असर हुआ। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने राजस्थान की सभी 25 संसदीय सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। 

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