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Tuesday, 15 March 2016

जदयू व रालोद के विलय पर सहमति, झाविमो के भी शामिल होने की संभावना

बिहार में तो 'एक झंडा और एक निशान' कुछ कारणों से संभव नहीं हो सका, लेकिन उत्तर प्रदेश में जदयू और रालोद इसकी तैयारी लगभग पूरी कर चुके हैं। मंगलवार को दिल्ली में नीतीश कुमार और अजित सिंह के साथ साथ दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की लंबी बैठक में यह मन बन गया है कि अब देर नहीं होनी चाहिए। जदयू और रालोद के साथ-साथ बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा का भी विलय होने की तैयारी हो गई है। इस बैठक में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी मौजूद थे।

हालांकि जदयू और रालोद के बीच विलय को लेकर पहले ही संकेत स्पष्ट था, मंगलवार को बैठक के बाद जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि अगले एक दो दिनों में इसकी घोषणा कर दी जाएगी। बैठक में शरद यादव, जयंत चौधरी, वशिष्ठ नारायण समेत कई अन्य नेता मौजूद थे। त्यागी ने बताया कि दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच सहमति थी कि दोनों दलों की नीति-रीति एक रही है। लिहाजा फिर से इकट्ठा होकर ही आगे की लड़ाई लड़नी चाहिए। यह तय हुआ कि लोहिया और चौधरी चरण सिंह की विरासत बंटी हुई नहीं दिखनी चाहिए।

यह विलय मुख्यत: उत्तर प्रदेश चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। ध्यान रहे कि पीस पार्टी समेत कुछ अन्य छोटे दलों को भी पहले ही साधा जा चुका है। बिहार में महागठबंधन के शिल्पकार रहे प्रशांत किशोर भी इस नए सियासी विलय में भूमिका निभा रहे हैं। बिहार के महागठबंधन की तर्ज पर ही उत्तर प्रदेश में भी कुछ वही दांव चलने के लिहाज से बाद में कांग्रेस को भी साथ जोड़ा जा सकता है। इसी कड़ी में झारखंड विकास मोर्चा के विलय की भूमिका भी तैयार हो गई है।

नीतीश तो बुधवार को वापस बिहार लौट जाएंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के लिहाज से अहम माने जा रहे इस गठजोड़ के संयोजक की भूमिका के.सी त्यागी को सौंपी जा सकती है। यह बैठक भी उन्हीं के घर पर हो रही थी। त्यागी ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक तरह से इस नई राजनीति का परीक्षण केंद्र होगा। जाहिर है कि सोच बिहार व उत्तर प्रदेश के आगे अगले लोकसभा चुनाव तक की है।

Friday, 6 February 2015

गरमाई बिहार की सियासत, मांझी के समर्थन में उतरे मंत्री

मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की अटकलों के बीच जीतन राम मांझी ने पूरी तरह बगावती रुख अपना लिया है। शनिवार को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा शनिवार को बुलाई गई विधायक दल की बैठक को अवैध करार देते हुए उन्होंने कहा कि 'मैं इस बैठक में नहीं जाऊंगा।' वहीं दूसरी ओर उन्होंने 20 फरवरी को जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई है।

इसके साथ ही पिछले एक माह से भी अधिक समय से चल रही राजनीतिक उठापटक और जदयू में मचा घमासान अब खुले मंच पर आ गया है। मंत्री नरेंद्र सिंह, नितीश मिश्रा और वृषिण पटेल ने मांझी को हटाए जाने विरोध करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष का विधायक दल की बैठक बुलाने को अवैध बताया है।

गुरुवार को जदयू अध्यक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री व जीतन राम मांझी से मुलाकात कर मुद्दे पर काफी देर तक बातचीत की। चर्चा इस बात की भी है कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बुधवार रात नीतीश कुमार को फोन कर खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के लिए कहा था।

कई दिनों से बगावती सुर व लगातार पार्टी लाइन से हटकर बयान देने वाले मांझी को हटाने की पूरी पटकथा गुरुवार को लिखी जा चुकी है। उन्हें कुर्सी से हटाने के लिए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महासचिव के साथ दूसरे तमाम बड़े नेता पटना में डेरा डाले हुए हैं। शरद यादव ने गुरुवार को नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की फिर मांझी से मिलने मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। एक घंटा चर्चा करने के बाद वे फिर नीतीश के पास आए और शाम को विधायक दल की बैठक बुलाने का एलान किया।

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Tuesday, 27 January 2015

'जदयू' के 'आप' को दिल्‍ली में समर्थन देने से तिलमिलाई कांग्रेस

जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का समर्थन करने का एलान किया है। कांग्रेस की नाराजगी की परवाह न करते हुए जदयू ने साफ कर दिया है कि वह अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को समर्थन करने को तैयार है। इस मुद़दे पर जब उनसे कांग्रेस की नाराजगी का सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस से उनका तालमेल सिर्फ बिहार तक ही सीमित है।

सिंह ने साफतौर पर कहा कि बिहार के बाहर जदयू किसी को भी समर्थन दे सकती है और ले सकती है, इसके लिए पार्टी पूरी तरह से आजाद है। हालांकि इस बार में जब पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी से बात की गई तो उनका कहना था कि अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ लेकिन आप को समर्थन देने का प्रपोजल जरूर है। उनका कहना था कि दिल्ली चुनाव में सपा और राजद ने भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। ऐसी स्थिति में यदि वह कुछ नहीं कर पाते हैं तो पार्टी आप को समर्थन दे सकती है।


गौरतलब है कि नीतीश कुमार के केजरीवाल के समर्थन में चुनाव प्रचार करने पर बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता प्रेम चंद्र मिश्रा ने कड़ी नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि जदयू की इस तरह की बात करना कांग्रेस की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। उनका कहना था कि ऐसे स्थिति में जब बिहार में उनकी सरकार को कांग्रेस समर्थन कर रही है तब उन्हें इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। उन्होंने जदयू को यह कहते हुए धमकी भी दी है कि यदि वह आप को समर्थन देती है तो केंद्रीय नेतृत्व उन्हें बिहार में समर्थन देने पर फिर से विचार कर सकती है।

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Monday, 12 January 2015

बिहार में आसान नहीं जदयू-राजद विलय की राह

बिहार में सांप्रदायिकता के नाम पर भाजपा के खिलाफ राजनीति के धूर विरोधी नीतीश कुमार और लालू यादव अपनी पार्टियों के विलय पर राजी तो हो गए लेकिन अब लगने लगा है यह राह इतना भी आसान नहीं है। दोनों पार्टी के अधिकांश नेता छह दलों के महाविलय के पक्ष में तो हैं लेकिन बिहार में सिर्फ राजद और जदयू के विलय को लेकर असमंजस में हैं।

बिहार के राजनीतिक हालात को देखते हुए यह तो पहले से ही लगता था कि प्रदेश में भाजपा के तेजी से उभरने से डरे इन दल के नेताओं को एक रखना इतना आसान नहीं है। हालांकि जदयू में एेसे नेताओं की संख्या काफी है जो पहले लालू यादव की पार्टी राजद में रहे हैं लेकिन लालू के कमजोर पड़ते ही जदयू का पल्ला थाम लिया। प्रदेश में दोनों दलों के विलय की बात चल रही है लेकिन विलय के पहले ही मतभेद उभरने लगे हैं।

इस बारे में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार ने कहा कि छह राजनीतिक दलों के महाविलय पर दिल्ली यात्र के दौरान अच्छी बात हुई है। शरद यादव, मुलायम सिंह यादव से बातचीत हुई। पहले से विलय के बारे में सैद्धांतिक रूप से सहमति बनाई गई है। विलय में समय लगता है। लेकिन बहुत लोगों को लगता है कि हमारा अलग अस्तित्व है। विलय से स्वतंत्र अस्तित्व पर कहीं कोई खतरा तो नहीं होगा? सब अपनी पार्टी के अंदर बात कर रहे हैं और इन मामलों पर चर्चा कर रहे हैं। सिर्फ जदयू-राजद के विलय के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा कि सिर्फ जदयू-राजद के विलय की बात नहीं है। इसमें कई राजनीतिक दलों का विलय होना है।


Source : News in Hindi and Newspaper

Thursday, 8 January 2015

खतरे में है बिहार के सीएम जीतन राम मांझी की कुर्सी!

अपने बयानों से लगातार चर्चा में रहे बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि खरवास बाद यानी 14 जनवरी के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया जा सकता है। इस मामले को लेकर जदयू और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के शीर्ष नेताओं के बीच बैठक में फैसला लिया जा सकता है। उधर, नीतीश कुमार ने कहा है कि जेडीयू में सब ठीक है। सब ठीक चल रहा है। जबकि राजद अध्यक्ष लालू यादव चाहते हैं कि नीतीश कुमार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री का पदभार संभालें।

जदयू-राजद की बैठक में शीर्ष नेतृत्व इस बात पर चर्चा करेगा कि क्या जीतनराम मांझी को बदला जाए या नहीं। बैठक में अगर मांझी को बदलने पर सहमति बन जाती है तो इस बात पर भी चर्चा होगी कि बिहार का नया सीएम कौन बनेगा? इस बैठक में जदयू अध्यक्ष शरद यादव भी मौजूद रहेंगे। इन दिनों शरद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में मौजूद हैं। ये लोग समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के साथ बैठक के लिए लिए दिल्ली पहुंचे हैं।

उधर पटना में जीतन राम मांझी को सीएम पद से हटाने को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। अटकले लगाई जा रही हैं कि खरवास बाद सीएम मांझी को पद से हटाया जा सकता है। दरअसल मांझी लगातार अपने बयानों से चर्चा में रहे हैं। कई बार तो उनके बयान उनकी ही पार्टी के लिए मुसीबत बनते नजर आए।


Monday, 6 January 2014

Nitish Kumar denies alliance with any political party for Loksabha election 2014

पटना [जाब्यू]। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में किसी दल से गठबंधन की संभावना से साफ इन्कार किया है। उन्होंने कहा, हम तो एकसाथ आठ फ्रंट [मोर्चा] पर लड़ रहे हैं। अपनी तैयारी कर रहे हैं। हमारी पार्टी की ओर से निरंतर गतिविधियां जारी हैं। बारह संकल्प रैली होनी है। अब तक चार हो चुकी है।
सोमवार को जनता दरबार के बाद संवाददाताओं से बात बातचीत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने हमारी विशेष राज्य का दर्जा की मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह कदम राजनीतिक कारणों से उठाया गया है। इसलिए अब हम इसे राजनीतिक एजेंडा बनाकर चुनाव में जाएंगे। पहले यह हमारी आर्थिक लड़ाई थी जिसे हम लड़ रहे थे।

उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह द्वारा राहुल गांधी को प्रधानमंत्री प्रत्याशी के योग्य कहे जाने पर इसे कांग्रेस का अंदरूनी मसला बताया। कहा कि भाजपा में पीएम प्रत्याशी को लेकर जो कुछ हुआ, उससे हम गठबंधन से अलग हुए। अब भाजपा में कुछ होता है तो उससे क्या मतलब? उनके मुताबिक प्रधानमंत्री ऐसा होना चाहिए जो सबको साथ लेकर चले। वह न्याय के साथ समावेशी विकास करे। उन्होंने गैरकांग्रेस-गैरभाजपा का विकल्प देने के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की। यह जरूर कहा कि झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से चुनावी मसले पर आपसी सहमति बनी है लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कोई बात नहीं हुई है। 

जदयू से लोजपा के गठबंधन पर उन्होंने कहा कि चुनाव का वक्त है। ऐसे में कौन कहां जाएगा, इस पर फिलहाल कुछ भी कहना अनुचित है। मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या 'आप' अब पुरानी पार्टियों के लिए क्या खतरा है? इस पर उन्होंने कहा कि देश में संगठन एवं पार्टी बनाने का अधिकार हर किसी को है। संवैधानिक दायरे में रहकर हर पार्टी काम करने के लिए स्वतंत्र है। 'लालबत्ती' के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर मेरी कोई राय नहीं है। मीडिया में एक दौर चलता है, उससे खुद को अलग रखना ही बेहतर है। 

उन्होंने अमौसी नरसंहार [खगड़िया] में पटना उच्च न्यायालय द्वारा सभी आरोपियों की रिहाई पर कहा कि वे न्यायिक प्रक्रिया पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। न्यायालय के फैसले का अध्ययन कर राच्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। इसी प्रक्रिया नरसंहार संबंधी अन्य फैसलों में अपनायी जा रही है। 

बंगाल सरकार के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं :
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बिहार की एक बच्ची के साथ दुखद घटना [सामूहिक दुष्कर्म] घटी। इस मामले में राच्य सरकार ने अपने दायित्व का निवर्हन करते हुए पीड़ित परिजन को केवल मदद देने का प्रयास किया है। दूसरे राच्य की शासन व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है और न ही ऐसी कोई सरकार की मंशा रही है। प्रवासी श्रमिकों के लिए एक योजना है, उसी के तहत पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई, जो राच्य के 'सेंटीमेंट' का ख्याल रखकर चिंता प्रकट की और सहायता भेजी। मगर राच्य सरकार के इस 'अप्रोच' को सही परिपेक्ष्य में नहीं समझा गया। आखिर संवेदना भी कोई चीज होती है। ऐसी घटना पर अन्य राच्य के लोग भी यही करते हैं।