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Thursday, 19 May 2016

चुनाव के नतीजों पर पीएम मोदी ने दी बधाई तो राहुल ने दिया ये बयान

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। इन रुझानों के में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होता दिखाई दे रहा है। वहीं भाजपा के लिए खुशखबरी ये रही कि वो पहली बार असम में सरकार बनाती दिख रही है। जबकि दूसरे राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल में भी उसका प्रदर्शन सुधरता दिखाई दे रहा है।

पढ़िए, चुनाव के इन नतीजों पर राजनीतिक दलों के नेताओं का क्या कहना है।

नरेंद्र मोदी- भाजपा असम की जनता के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी संभव प्रयास करेगी और असम के विकास को नई ऊंचाईयों पर लेकर जाएंगे। पूरे देश की जनता भाजपा पर भरोसा जता रही है।

राहुल गांधी- कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पांच राज्यों में हुए चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी की हार स्वीकार करते हुए कहा कि जनता ने जो जनादेश दिया है वे उसका स्वागत करते हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट कर जीती हुई पार्टियों को बधाई देते हुए कहा कि कांग्रेस तब तक संघर्ष करती रहेगी जब तक वह जनता का विश्वास फिर से नहीं हासिल कर लेती।

नितिन गडकरी- गांधी जी का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना राहुल गांधी पूरा करेंगे।

जितेंद्र सिंह- असम की जनता का धन्यवाद, पीएम मोदी के नेतृत्व पर लोगों ने भरोसा जताया है।

पीयूष गोयल- नतीजों से काफी खुशी हुई। भारत के लोगों ने एक बार फिर ये बता दिया है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा करते हैं।

शशि थरुर- वाकई में ये परेशान करने वाला है। लेकिन हम एक मजबूत विपक्ष की भूमिका अदा करेंगे।

जयराम रमेश- असम और केरल के ऐसे नतीजों से उम्मीद नहीं थी। लेकिन पश्चिम बंगाल में हमने अच्छा किया। तमिलनाडु और पुडुचेरी में कांग्रेस गठबंधन ने मजबूती दिखाई है।  Read more http://www.jagran.com/

Wednesday, 4 February 2015

खुद के सर्वे में 'आप' ने थपथपाई पीठ, केजरी सबसे पसंदीदा सीएम कैंडिडेट

दिल्ली में हो रहे विधानसभा चुनाव में किस पार्टी को मिलेगा बहुमत और कौन रहेगा हासिए पर यह जानने के लिए आम आदमी पार्टी की तरफ से सर्वे किया गया। 'आप' ने 35 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 3188 लोगों से बातचीत की और उनसे यह जानने का प्रयास किया कि दिल्ली का सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन है?
सर्वे में शामिल छह फीसद लोगों के सामने कोई विकल्प नहीं था। सात फीसद लोगों ने अजय माकन को बताया कि वे अच्छे मुख्यमंत्री हो सकते हैं। 34 फीसद लोगों ने कहा कि किरण बेदी दिल्ली के लिए अच्छी मुख्यमंत्री साबित हो सकती हैं। जबकि अरविंद केजरीवाल के बारे में लोगों की राय बिल्कुल जुदा थी। 53 फीसद लोगों ने कहा कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सबसे अच्छे मुख्यमंत्री हो सकते हैं।
'आप' नेता योगेंद्र यादव ने बताया कि हमने इन लोगों से यह सवाल किया था कि आपके मुताबिक कौन दिल्ली का सबसे अच्छा मुख्यमंत्री हो सकता है। उनके सामने हमने तीन नाम रखे थे। अजय माकन, किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल का, जिसमें सबसे पसंदीदा अरविंद केजरीवाल रहे। वहीं, मतदान प्रतिशत की बात करें तो सर्वे के मुताबिक 46 फीसद वोट आम आदमी पार्टी को मिलने की उम्मीद है, जबकि 33 फीसद वोट भारतीय जनता पार्टी को मिलने की उम्मीद की जा रही है।
वहीं, सीटों की बात करें तो आम आदमी पार्टी अपने आंतरिक सर्वे में खुद को 51 सीटें दे रही है जबकि भाजपा को 15 सीटें और कांग्रेस महज चार सीटें ही मिल रही है।
आपको बता दें, इसके पूर्व अन्य समाचार चैनल्स के सर्वे में भी आम आदमी पार्टी को सबसे अधिक सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। आप के मुकाबले भारतीय जनता पार्टी की स्थिति कमजोर बताई जा रही है, जबकि कांग्रेस को हासिए पर बताया जा रहा है।

Thursday, 29 January 2015

'आप' का केवल एक लक्ष्य, कांग्रेस सत्ता में न आने पाएः राहुल गांधी

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अपने सबाब पर पहुंच रहा है। जहां भाजपा तेरह राज्यों से नेताओं को बुलाकर चुनाव प्रचार करने की योजना को मूर्त रूप देने जा रही है। वहीं, आप और कांग्रेस भी पूरे दमखम के साथ प्रचार में उतर गई हैं। जहां आम आदमी पार्टी हर रोज नुक्कड़ सभाओं के जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है तो कांग्रेस भी पूरा एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।

आज सीलमपुर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आप और भाजपा दोनों पर जमकार निशाना साधा। राहुल ने कहा कि आम आदमी पार्टी का केवल एक लक्ष्य है कांग्रेस को सत्ता से बाहर देखना। उन्होंने कहा कि जितने भी आप के नेताओं ने पार्टी छोड़ी वे सब के सब भाजपा में चले गए। वहीं भाजपा पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने एक भी वादे नहीं पूरी कर पाई है। दोनों ही पार्टियां सपना देख रही हैं कि कांग्रेस सत्ता में दोबारा ना आए। लेकिन उनका यह कपना कभी पूरा होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सबकी है। जब तक सबका विकास नहीं होगा तब तक दिल्ली का विकास नहीं हो सकता है।

भारतीय जनता पार्टी केवल कुछ उद्योगपतियों की भलाई के लिए काम कर रही है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी कमजोर नहीं होने वाली है। राहुल ने आप पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए सरकार के दौरान दिल्ली में रेप होते थे तो केजरीवाल धरना देते थे। जब से केंद्र में एनडीए की सरकार बनी है। रेप तीस फीसद बढ़ा है। अब केजरीवाल कहां है। अब वे धरने पर क्यों नहीं बैठते हैं। यूपीए के कार्यकाल में अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार और बलात्कार का मुद्दा उठाते थे। क्या अब उनको यह सब नहीं दिखाई देता है। राहुल गांधी ने वार भाजपा पर किया और सवाल आप से पछा। उन्होंने कहा कि कालाधन कहां है और उसको वापस लाने के लिए धरना देने वाले अब कहां चले गए।

Wednesday, 28 January 2015

भाजपा से मेरे संबंध मधुर थे, तो केजरीवाल क्यों बनाना चाहते थे सीएमः किरण

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की मुख्यमंत्री पद की घोषित उम्मीदवार किरण बेदी ने आम आदमी पार्टी पर पलटवार किया है। किरण ने कहा है कि अगर वे आंदोलन के समय से ही भारतीय जनता पार्टी के प्रति नरम थीं तो आम आदमी पार्टी की तरफ से उन्हें मुख्यमंत्री बनने का ऑफर क्यों किया था? आज एक संवाददाता सम्मेलन में बात करते हुए किरण ने कहा कि अगर उनके ऊपर 'आप' को भरोसा नहीं था तो इतना बड़ा पद देने का ऑफर क्यों किया गया था?

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने कहा था कि किरण बेदी इंडिया अगेंस्ट करप्शन के समय से ही भारतीय जनता पार्टी के प्रति नरम रुख रखती थी। कुमार विश्वास ने किरण बेदी के ऊपर यह आरोप उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद लगाए थे। इसके पहले अन्ना हजारे के आंदोलन के समय भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में ये सभी लोग एक साथ थे।

उधर, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि अगर अरविंद केजरीवाल ने किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का ऑफर दिया था तो उन्हें यह बात लोगों के सामने लाना चाहिए।

Tuesday, 27 January 2015

'जदयू' के 'आप' को दिल्‍ली में समर्थन देने से तिलमिलाई कांग्रेस

जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का समर्थन करने का एलान किया है। कांग्रेस की नाराजगी की परवाह न करते हुए जदयू ने साफ कर दिया है कि वह अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को समर्थन करने को तैयार है। इस मुद़दे पर जब उनसे कांग्रेस की नाराजगी का सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस से उनका तालमेल सिर्फ बिहार तक ही सीमित है।

सिंह ने साफतौर पर कहा कि बिहार के बाहर जदयू किसी को भी समर्थन दे सकती है और ले सकती है, इसके लिए पार्टी पूरी तरह से आजाद है। हालांकि इस बार में जब पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी से बात की गई तो उनका कहना था कि अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ लेकिन आप को समर्थन देने का प्रपोजल जरूर है। उनका कहना था कि दिल्ली चुनाव में सपा और राजद ने भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। ऐसी स्थिति में यदि वह कुछ नहीं कर पाते हैं तो पार्टी आप को समर्थन दे सकती है।


गौरतलब है कि नीतीश कुमार के केजरीवाल के समर्थन में चुनाव प्रचार करने पर बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता प्रेम चंद्र मिश्रा ने कड़ी नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि जदयू की इस तरह की बात करना कांग्रेस की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। उनका कहना था कि ऐसे स्थिति में जब बिहार में उनकी सरकार को कांग्रेस समर्थन कर रही है तब उन्हें इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। उन्होंने जदयू को यह कहते हुए धमकी भी दी है कि यदि वह आप को समर्थन देती है तो केंद्रीय नेतृत्व उन्हें बिहार में समर्थन देने पर फिर से विचार कर सकती है।

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Monday, 19 January 2015

किरण बेदी पर दिए बयान पर मनोज तिवारी ने दी सफाई

भाजपा नेता और पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी ने किरण बेदी पर दिए अपने पूर्व के बयान पर सफाई दी है। तिवारी ने कहा है कि उन्होंने सिर्फ अपने मन की बात अपने शब्दों में कही थी। इससे यदि किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें खेद है। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि वह नहीं मानते हैं कि भाजपा किरण बेदी को दिल्ली का सीएम बनाएगी। इस बयान के बाद उन्हें पार्टी के अंदर ही काफी नाराजगी झेलनी पड़ी थी। पार्टी में हो रही आलोचना के बाद ही उन्होंने अपने बयान पर सफाई दी है।

भाजपा सांसद ने उन खबरों का भी खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि उनके बयान के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें फोन पर फटकार लगाई थी। इस बाबत उन्होंने कहा कि यह सभी बातें कोरी अफवाह हैं, इनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह किरण बेदी के पार्टी में आने से खुश हैं।इस दौरान उन्होंने आप पर भी जमकर हमला बोला। तिवारी ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में आप को मुंह की खानी होगी और उसके विधायक सिमट कर छह से आठ ही रह जाएंगे।

किरण बेदी के भाजपा में शामिल होने के बाद और उन्हें चुनाव की कमान सौंपे जाने के बाद पार्टी के अंदर कई कई नेताओं के चेहरे फीके पड़ गए हैं। हालांकि उनके सीएम प्रत्याशी होने पर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। दो दिन पूर्व ही पार्टी अध्यक्ष और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यह साफ कर दिया था कि दिल्ली के सीएम पद पर प्रत्याशी का फैसला केंद्रीय संसदीय बोर्ड करेगा।

पार्टी द्वारा चुनाव की कमान सौंपे जाने के बाद किरण बेदी पूरी तरह से चुनावी दंगल में कूद गई हैं। उन्होंने कल ही एमसीडी अधिकारियों से बात की और भाजपा नेताओं के साथ चुनाव की रणनीति भी बनाई। उन्होंने अपना चुनावी कार्यक्रम भी तैयार कर लिया है। इसके तहत वह रोज पांच सभाएं करेंगी और रोड शो का भी हिस्सा बनेंगी।

Tuesday, 13 January 2015

केजरीवाल के खिलाफ चुनावी रण में उतरेंगी किरण वालिया

पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को उनकी नई दिल्ली सीट से करारी मात देने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के सामने कांग्रेस ने पूर्व मंत्री प्रो. किरण वालिया को अपना उम्मीदवार बनाया है। वरिष्ठ भाजपा नेता प्रो. जगदीश मुखी के दामाद सुरेश कुमार जनकपुरी से पार्टी के प्रत्याशी बनाए गए हैं, जबकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र से चुनावी किस्मत आजमाएंगी। पार्टी ने दो पूर्व मंत्रियों रमाकांत गोस्वामी और मंगतराम सिंघल का टिकट काट दिया है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में सोमवार शाम को हुई पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में शेष सभी 45 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगा दी गई। पार्टी पहले ही 25 नामों का एलान कर चुकी है। इसमें से केवल एक कृष्णा नगर सीट पर बंसीलाल के नाम को रोका गया था लेकिन समझा जा रहा है कि उन्हें भी हरी झंडी मिल गई है। इस प्रकार पार्टी ने चुनाव की घोषणा के साथ ही सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। प्रत्याशियों की सूची से साफ है कि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित समर्थकों का लगभग सफाया हो गया है जबकि प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन और पूर्व सांसद सज्जन कुमार के तमाम समर्थक टिकट पाने में कामयाब रहे हैं।

Friday, 2 January 2015

जम्मू-कश्मीर में स्थिर सरकार के लिए भाजपा ने मांगा समय

भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में स्थिर सरकार बनाने के लिए राज्यपाल एनएन वोहरा से और समय मांगा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को राज्यपाल से मुलाकात की। आधे घंटे चली इस बैठक में भाजपा ने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का अपना खाका पेश कर कहा कि बातचीत जारी है, जिसमें कुछ और दिन लग सकते हैं। वहीं पीडीपी की तरह भाजपा ने भी स्पष्ट संकेत दिए कि दोनों दल सरकार बनाने के लिए बीच का रास्ता तलाश रहे हैं।

दरअसल, पीडीपी और भाजपा में मुख्यमंत्री के पद को लेकर पेंच फंस रहा है। पीडीपी चाहती है कि छह साल के लिए मुफ्ती मुहम्मद सईद मुख्यमंत्री रहें और उपमुख्यमंत्री का पद भाजपा का होगा। वहीं, भाजपा चाहती है कि राज्य में दोनों पार्टियों का तीन-तीन साल के लिए मुख्यमंत्री बने। बुधवार को 55 विधायकों का समर्थन होने का दावा करने वाली महबूबा के बाद राज्यपाल से मिलकर लौटे जुगल किशोर ने पत्रकारों से बातचीत में पीडीपी से मिलकर सरकार बनाने के सवाल को टाल दिया। उन्होंने कहा कि महबूबा मुफ्ती वाजयेपी के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सहयोग की अपील कर रही हैं, इससे आपको खुद समझ लेना चाहिए।

श्रीनगर। पीडीपी और भाजपा में गठबंधन की अटकलों के बीच कश्मीर में अलगाववादी भी दो गुटों में बंटते नजर आ रहे हैं। उदारवादी हुर्रियत कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम कांफ्रेंस के प्रमुख प्रो. अब्दुल गनी बट को जहां मुफ्ती सईद की भाजपा से नजदीकियों में बुराई नजर नहीं आती। वहीं हुर्रियत जेके के संयोजक शब्बीर शाह इसे कश्मीरियों से विश्वासघात मानते हैं। अलबत्ता हुर्रियत नेता मानते हैं कि जम्मू-कश्मीर में सरकार चाहे किसी की भी बने, उससे उनका कोई सरोकार नहीं है। मुख्यधारा से जुड़े सभी राजनीतिक दल नई दिल्ली के एजेंट हैं। वे कश्मीर की आजादी की राह में रुकावट हैं।
Source: Hindi News and Newspaper

Tuesday, 30 December 2014

सीबीआइ ने अमित शाह को बचाया: योगेंद्र यादव

आम आदमी पार्टी (आप) एक बार फिर दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार कर रही है। इसके तहत आम आदमी पार्टी के नेता 49 दिनों की आप सरकार की उपलब्धियों को गिनाने के साथ-साथ लगातार विरोधी पार्टी भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं।

आप ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार निशाना साधा। आप नेता मनिष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार अनाधिकृत कॉलोनियों को चुनाव से नियमित कर दिल्ली की जनता को गुमराह कर रही है।

वहीं आप नेता योगेंद्र यादव ने सीबीआइ पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को बचाने का आरोप लगाया। आपको बता दें कि सीबीआई की विशेष अदालत ने गांधीनगर के पास हुए सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में मंगलवार को अमित शाह को क्लीन चिट दे दी। अदालत इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

Source: Hindi News and Newspaper

Wednesday, 24 December 2014

कश्मीर में सरकार बनाने को शाह के तरकश में कई तीर

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से सिर्फ तीन सीट पीछे छूटी भाजपा के पास सरकार गठन के लिए तरकश में कई तीर हैं। वह कोई दांव छोडऩा नहीं चाहती है। खंडित जनादेश में यूं तो अपनी ओर से जल्दबाजी नहीं दिखाई जाएगी, लेकिन यह संकेत दिया जाने लगा है कि जम्मू के जनादेश को अनदेखा कर सूबे में कोई तर्कपूर्ण व नैतिक बल की सरकार बन भी नहीं सकती। ध्यान रहे कि जम्मू की करीब आधा दर्जन सीटों को छोड़कर सभी पर कमल ही खिला है। पहली कोशिश होगी कि किसी भी गठबंधन में भाजपा का ही मुख्यमंत्री हो। बातचीत हर स्तर पर शुरू हो चुकी है।

लोकसभा चुनाव के बाद से हुए चुनावों में लगातार सरकार गठन का इतिहास रच रही भाजपा जम्मू-कश्मीर को अपवाद होने देना नहीं चाहती है। इसका स्पष्ट संकेत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी दे दिया। उन्होंने तीन विकल्पों पहला सरकार बनाने का, दूसरा सरकार में शामिल होने और तीसरा सरकार को समर्थन देने का नाम लिया। सवाल-जवाब में कहा कि सभी मुद्दों पर चर्चा हो रही है और किसी नेता के सार्वजनिक बयान से अलग भी राजनीति होती है।

दरअसल प्रदेश में दूसरे नंबर पर रहने के बावजूद सबसे ज्यादा वोट पाने वाली भाजपा इस अवसर को खोना नहीं चाहती। तार्किक आधार यह है कि जम्मू क्षेत्र के जनादेश को नजरअंदाज कर सरकार बनाना वाजिब नहीं होगा। तार्किक नतीजा यह है कि घाटी में सबसे बड़ी पार्टी बनी पीडीपी या घाटी से सीटें जीतने वाले नेशनल कांफ्रेंस को भाजपा के साथ ही सरकार बनाना होगा। पीडीपी और कांग्र्रेस गठबंधन की संभावनाएं बन सकती हैैं लेकिन सज्जाद लोन की पार्टी पहले ही भाजपा के साथ है। स्वतंत्र विधायकों के रूप में जीते अन्य चार भी भाजपा के संपर्क में हैं। ऐसे में उनके लिए 44 का जरूरी आंकड़ा जुटाना बहुत आसान नहीं है। भाजपा इन आंकड़ों के साथ फैसला पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस पर छोडऩा चाहती है। दोनों ही सूरत में भाजपा की कोशिश होगी कि सीएम भाजपा के खाते से बने और सहयोगी दल केंद्र में भी शामिल हो। सूत्रों का मानना है कि जमीनी स्तर पर बहुत काम हो चुका है और अब इन्हें सोचना होगा कि वह केंद्र के साथ चलना चाहता है या नहीं। भाजपा के साथ सरकार गठन पर जम्मू और घाटी दोनों क्षेत्रों के जनादेश का भी पूरा आदर होगा। बुधवार को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक है। इसमें झारखंड के मुख्यमंत्री तय करने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर की रणनीति का भी खाका तैयार होगा। झारखंड में 27-28 तक शपथग्रहण हो सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर में थोड़ा वक्त लग सकता है।

Source: Hindi News and Newspaper

Thursday, 26 December 2013

They don't wants to give birth of Rakhi




http://www.jagran.com/नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। अरविंद केजरीवाल के मंत्रिमंडल में शामिल होने जा रही मंगोलपुरी की विधायक राखी बिड़ला के माता-पिता नहीं चाहते थे कि वह इस दुनिया में आए। राखी जब अपनी मां की गर्भ में थीं तो मां ने चिकित्सक की सलाह पर गर्भपात कराने की दवा भी ली थी, लेकिन दवा अपना असर नहीं दिखा सकी। यह खुलासा खुद राखी के पिता भूपेंद्र सिंह बिड़ला ने किया है। उन्होंने बताया कि पहले से तीन संतान होने के चलते वह चौथी संतान नहीं चाहते थे।

घर की खराब माली हालत इसकी वजह थी। सबसे बड़ी बेटी सोनू, बेटे विरेंद्र, विक्रम के बाद राखी सबसे छोटी संतान है। लेकिन दवा ने जब असर नहीं किया तो वह दोबारा अपनी पत्‍‌नी को चिकित्सक के पास ले गए। चिकित्सक ने जांच करने के बाद जब यह कहा कि अब तो ऑपरेशन ही एक रास्ता है तो उन्होंने व उनकी पत्‍‌नी ने गर्भपात का फैसला टाल दिया। उन्होंने सोचा कि दवा लेने के बाद भी जब गर्भ में पल रहे बच्चे को दुनिया में आने से रोका नहीं जा सका तो अब उसे दुनिया में आना ही चाहिए।

भूपेंद्र कहते हैं कि राखी के जन्म के बाद उन्होंने उसके प्रति अपने प्यार में कोई कमी नहीं आने दी। उसके पालन -पोषण से लेकर शिक्षा-दीक्षा में कोई कसर बाकी नहीं रखी। कर्ज लेकर राखी की शिक्षा पूरी करवायी और आज राखी ने उनके परिवार का नाम रोशन कर दिया। दलित परिवार में पैदा हुई राखी का मूल गोत्र बिड़लान है। वह अपनी स्कूल की शिक्षक की गलती के कारण बिड़लान से बिड़ला हो गईं। दरअसल स्कूल के शिक्षक ने उनकी दसवीं कक्षा के प्रमाण पत्र में बिड़लान की जगह बिड़ला लिख दिया था। उसके बाद उनके नाम के आगे बिड़ला जुड़ गया। 

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