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Tuesday, 10 May 2016

जानें, कश्मीर का वो सच जिसे नकारता है पाक, अयूब सोचते थे कुछ...

कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की सियासत एक अहम सच्चाई है। पाकिस्तानी हुक्मरानों को ये यकीन हो चुका था कि भारत का मुकाबला करने के लिए उन्हें कश्मीर के मुद्दे को हमेशा जिंदा रखना होगा। लिहाजा करीब 70 साल बाद भी कश्मीर का राग पाकिस्तान अलापता रहता है। कश्मीर के पीछे का सच क्या है। इसे जानकर चौंक जाएंगे। पाक बार बार ये कहता है कि कश्मीर और कश्मीरियत के लिए एक मात्र रास्ता जनमत संग्रह है। लेकिन अमेरिका में पाक के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने चौंकाने वाली जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 1959 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने पहले ही कह दिया था कि कश्मीर में जनमत संग्रह कभी नहीं होगा।

भारत चाहता था कश्मीर विवाद सुलझे

हक्कानी के मुताबिक वर्ष 1963 में भारत 5 हजार वर्ग मील पाकिस्तान को देकर इस मामले को हमेशा के लिए सुलझाना चाहता था। लेकिन पाकिस्तान को ये विचार पसंद नहीं आया। अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रहे हुसैन हक्कानी का कुछ और ही कहना है। उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय से ही पाकिस्तान के नीति निर्माताओं को लगता रहा है कि कश्मीर में या तो जनमत संग्रह हो या ये विवाद हमेशा ऐसे ही चलता रहेगा।

ऐतिहासिक तथ्यों को किया गया नजरअंदाज

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक हक्कानी ने कहा कि लोग अच्छे पड़ोसी की उम्मीद तो करते हैं। लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज करते हैं।जिसकी वजह से पाकिस्तान में डर का माहौल रहता है। बंटवारे के समय पाकिस्तान के खाते में 33 फीसद ब्रिटिश फौज आई जबकि जीडीपी का महज 17 फीसद पाकिस्तान के खाते में गया। इसका असर ये हुआ कि पाकिस्तानी हुक्मरानों ने अवाम पर शासन के लिए भारत से डर का माहौल बनाया और पाकिस्तान के सभी राजनैतिक दल कमोबेश इसी नीति पर शासन करते हैं। हक्कानी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने के लिए या तो लगातार बातचीत चलती रहनी चाहिए या एक दूसरे को अलग-थलग रख कर आगे बढ़ सकते हैं। कभी रुठना और कभी मान जाना इस नीति के जरिए भारत और पाकिस्तान के रिश्ते नहीं सुधर सकते हैं।

भारत और पाक क्यों नहीं हो सकते दोस्त ?

हक्कानी ने 1949 के एक प्रसंग का जिक्र किया। 1949 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू अमेरिका गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन ने पूछा कि आप की नजर में हम भारत की मदद किस तरह कर सकते हैं। इस सवाल के जवाब में जवाहर लाल नेहरू ने कहा कि भारत के औद्योगीकरण और कृषि विकास के लिए अमेरिकी मदद चाहिए। ठीक यही सवाल जब अमेरिकी दौरे पर गए पाक पीएम लियाकत खान से ट्रूमैन ने पूछा तो उनका जवाब था कि पाकिस्तान को हथियारों की जरूरत है। और उन्होंने हथियारों की लिस्ट भी सौंप दी। वर्तमान हालात के लिए अतीत की ये हकीकत है जिसका सामना दोनों देश कर रहे हैं।

भारत ने गवाएं मौके

हक्कानी ने कहा कि बहुत से ऐसे मौके आए जब भारत अपनी भूमिका से पाक में फियर फैक्टर को दूर कर सकता था। लेकिन उन मौकों को भारत ने गंवा दिया। 1992 में तत्कालीन अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जेम्स बेकर और पाक पीएम नवाज शरीफ के बीच पत्राचार का जिक्र है। हक्कानी ने कहा कि आज 24 साल बाद भी पाकिस्तान उन्हीं बातों को कहता रहा है। जो पहले कहता था। देखा जाए तो पाकिस्तान गलत हो या सही उसके नजरिए में किसी तरह का बदलाव नहीं आया । Read more http://www.jagran.com/

Thursday, 29 January 2015

बच सकती थी कर्नल एमएन राय की जान, जानिए कैसे

कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल में आतंकी मुठभेड़ में शहीद कर्नल मुनीन्द्रनाथ राय की जान बच सकती थी, अगर वे अपने स्टैंडिंग ऑपरेशनल प्रोसीजर (एसओपी) की बात मान लेते। इस मुठभेड़ में कर्नल राय सहित दो सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे और हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकी आबिद और शिराज भी मारे गए थे।

दरअसल, सेना को खबर मिली थी कि दो स्थानीय आतंकी मिंदोरा गांव के एक घर में छुपे हुए है। इसकी सूचना मिलते ही वहां के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राय अपने सैनिकों के साथ मौके पर पहुंचे। कर्नल राय ने अपने आॅपरेशनल प्रोसीजर की बात मानने के बजाय आतंकियों के परिजनों की बात पर यकीन कर लिया। आतंकियों के घरवालों ने कहा कि वे उन पर गोली नहीं चलाएं और हम उनका आत्म समर्पण करवा देंगे।

सैन्य अधिकारियों व स्थानीय लोगों के मुताबिक, मंगलवार को मुठभेड़ स्थल पर आतंकी आबिद के पिता जलालुद्दीन ने कर्नल राय को बताया कि उनका पुत्र आत्मसमर्पण करना चाहता है। जलालुद्दीन के दूसरे पुत्र उवैस ने भी सुरक्षाकर्मियों से आग्रह किया कि वे फायरिंग रोक दें। उसका भाई लड़ना नहीं चाहता, वह समर्पण करने को तैयार है।

आतंकी के परिजनों के यकीन दिलाए जाने पर कर्नल राय ने अपने जवानों को फायरिंग रोकने को कहा। इसके बाद कर्नल राय खुद आतंकी का समर्पण कराने के लिए उसके ठिकाने की तरफ बढ़े तो आतंकी ने मौका पाकर फायरिंग कर दी। इसमें कर्नल जख्मी हो गए, लेकिन जमीन पर गिरने से पहले उन्होंने अपने साथियों संग जवाबी फायर कर दोनों आतंकियों को भी मार गिराया।

Wednesday, 14 January 2015

मुठभेड़ में लश्‍कर का एक आतंकी ढेर, मुठभेड़ जारी

उत्तरी कश्मीर के सोपोर में बुधवार की सुबह तड़के सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में अब तक लश्कर का एक आतंकी मारा गया। अन्य आतंकियों के साथ मुठभेड़ जारी है।

संबधित अधिकारियों ने बताया कि बीती रात लश्कर कमांडर हुजेफा कथित तौर पर अपने एक साथी के साथ सोफी हमाम छनखान मोहल्ले में अपने एक संपर्क सूत्र के घर आया था। इसी बीच सुरक्षाबलों को पता चल गया और उन्होंने पूरे इलाके को घेर लिया और मुठभेड़ शुरू हो गई।

सुबह तड़के जवानों ने जब तलाशी अभियान शुरू किया तो एक मकान में छिपे आतंकी ने फायरिंग कर दी जिसके जवाब में जवानों ने भी फायरिंग की। हालांकि इस दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकी को आत्मसमर्पण करने को भी कहा। लेकिन आतंकियों ने फायरिंग जारी रखी। जवानों ने भी जवाब में गोली चलाते हुए आतंकियों के भागने के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं।

आतंकी ठिकाना बने मकान के साथ सटे अन्य मकानों से सुरक्षाबलों ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है ताकि किसी तरह की नागरिक क्षति से बचा जा सके।
 

Wednesday, 31 December 2014

जम्मू कश्मीरः राज्यपाल से मिली महबूबा, सोज भी पहुंचे राजभवन

महबूबा मुफ्ती ने आज राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा कि जम्मू-कश्मीर में खंडित जनादेश मिला है। यह जनादेश पीएम मोदी के लिए भी चुनौती है। राज्यपाल ने हमें अनौपचारिक मुलाकात के लिए बुलाया था। हमें सरकार बनाने की जल्दबाजी नहीं है। पीडीपी को 55 से ज्यादा विधायकों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत जुटाना हमारी प्राथमिकता नहीं है।

राज्य में सरकार के गठन को लेकर जारी कवायद के बीच बुधवार को प्रदेश कांग्रेस प्रमुख प्रो सैफूदीन सोज ने राज्यपाल एनएन वोहरा से भेंट कर नई सियासी अटकलों को जन्म दे दिया। हालांकि प्रो सोज ने अपनी मुलाकात के बारे में किसी तरह का खुलासा करने से इंकार करते हुए सिर्फ यही कहा कि हमने राज्य के मौजूदा हालात पर चर्चा की है। हमने राज्यपाल से जम्मू कश्मीर की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संवेधानिक जिम्मेदारियों के निर्वाह का आग्रह किया है।

उधर, कयास लगाए जा रहे हैं कि पीडीपी 28 सीटों के साथ नेशनल कांफ्रेस को ले सकती है, जिसकी 12 सीटें हैं। इस तरह से गणित 40 पर आकर लटक जाता है, जबकि बहुमत के लिए 44 सीटें चाहिए। ऐसे में वह कांग्रेस को अपने साथ ले सकती है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा वोट भाजपा को मिले हैं, लेकिन उसके पास सीटें (25) कम हैं। ऐसे में वह नेशनल क्रांफ्रेस और अन्य को साथ लेकर सरकार बना सकती है।
Source: Hindi News and Newspaper

Wednesday, 24 December 2014

कश्मीर में सरकार बनाने को शाह के तरकश में कई तीर

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से सिर्फ तीन सीट पीछे छूटी भाजपा के पास सरकार गठन के लिए तरकश में कई तीर हैं। वह कोई दांव छोडऩा नहीं चाहती है। खंडित जनादेश में यूं तो अपनी ओर से जल्दबाजी नहीं दिखाई जाएगी, लेकिन यह संकेत दिया जाने लगा है कि जम्मू के जनादेश को अनदेखा कर सूबे में कोई तर्कपूर्ण व नैतिक बल की सरकार बन भी नहीं सकती। ध्यान रहे कि जम्मू की करीब आधा दर्जन सीटों को छोड़कर सभी पर कमल ही खिला है। पहली कोशिश होगी कि किसी भी गठबंधन में भाजपा का ही मुख्यमंत्री हो। बातचीत हर स्तर पर शुरू हो चुकी है।

लोकसभा चुनाव के बाद से हुए चुनावों में लगातार सरकार गठन का इतिहास रच रही भाजपा जम्मू-कश्मीर को अपवाद होने देना नहीं चाहती है। इसका स्पष्ट संकेत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी दे दिया। उन्होंने तीन विकल्पों पहला सरकार बनाने का, दूसरा सरकार में शामिल होने और तीसरा सरकार को समर्थन देने का नाम लिया। सवाल-जवाब में कहा कि सभी मुद्दों पर चर्चा हो रही है और किसी नेता के सार्वजनिक बयान से अलग भी राजनीति होती है।

दरअसल प्रदेश में दूसरे नंबर पर रहने के बावजूद सबसे ज्यादा वोट पाने वाली भाजपा इस अवसर को खोना नहीं चाहती। तार्किक आधार यह है कि जम्मू क्षेत्र के जनादेश को नजरअंदाज कर सरकार बनाना वाजिब नहीं होगा। तार्किक नतीजा यह है कि घाटी में सबसे बड़ी पार्टी बनी पीडीपी या घाटी से सीटें जीतने वाले नेशनल कांफ्रेंस को भाजपा के साथ ही सरकार बनाना होगा। पीडीपी और कांग्र्रेस गठबंधन की संभावनाएं बन सकती हैैं लेकिन सज्जाद लोन की पार्टी पहले ही भाजपा के साथ है। स्वतंत्र विधायकों के रूप में जीते अन्य चार भी भाजपा के संपर्क में हैं। ऐसे में उनके लिए 44 का जरूरी आंकड़ा जुटाना बहुत आसान नहीं है। भाजपा इन आंकड़ों के साथ फैसला पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस पर छोडऩा चाहती है। दोनों ही सूरत में भाजपा की कोशिश होगी कि सीएम भाजपा के खाते से बने और सहयोगी दल केंद्र में भी शामिल हो। सूत्रों का मानना है कि जमीनी स्तर पर बहुत काम हो चुका है और अब इन्हें सोचना होगा कि वह केंद्र के साथ चलना चाहता है या नहीं। भाजपा के साथ सरकार गठन पर जम्मू और घाटी दोनों क्षेत्रों के जनादेश का भी पूरा आदर होगा। बुधवार को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक है। इसमें झारखंड के मुख्यमंत्री तय करने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर की रणनीति का भी खाका तैयार होगा। झारखंड में 27-28 तक शपथग्रहण हो सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर में थोड़ा वक्त लग सकता है।

Source: Hindi News and Newspaper

Tuesday, 23 December 2014

झारखंड में भाजपा राज, पर JK में फंसा पेंच

BJP
झारखंड और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के लिए मतगणना जारी है। अब तक मिले रुझानों में झारखंड में भाजपा सरकार बनाने के करीब है, वहीं जम्मू-कश्मीर में पेंच फंसा है। वहां भाजपा और पीडीपी में टक्कर है, लेकिन कोई भी दल सरकार के करीब नहीं पहुंच पा रहा है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के लिए मतगणना जारी है। यहां भाजपा और पीडीपी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली है। स्थिति इतनी रोचक हो गई है कि दोनों ही दलों को समान सीटें मिल रही हैं, लेकिन दोनों सरकार के जादूई आकंड़े से समान दूरी पर है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार कौन बनाएगा? राजनीतिक पंडित तमाम गणित बैठा रहे हैं।

प्रदेश में कुल 87 विधानसभा सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 44 सीटें जीतना जरूरी है। रुझानों में 87 सीटों मेें से 24 पर भाजपा और 30 पर मेहबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी आगे चल रही है। कांंग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के खाते में क्रमशः 16-11 सीट जाती दिख रही हैं।

Source: Hindi News and Newspaper

Monday, 13 January 2014

If Pakistan breaks rules, then we can too: Gen. Bikram Singh

  
नई दिल्ली [जाब्यू]। पड़ोसी नियम से चलेगा तो हम भी नियमों के मुताबिक चलेंगे। अगर वो नियमों को तोड़ेंगे तो स्वाभाविक है हम नियमों से बंधे नहीं रह सकते, हम भी नियम तोड़कर जवाब देंगे। इन शब्दों के साथ सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने सोमवार को दो-टूक कहा, सीमा पर पाकिस्तान की किसी भी बदनीयती का माकूल व आक्रामक तरीके से मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। बीते साल दो जवानों के सिर काटे जाने की घटना पर जवाबी भारतीय कार्रवाई की तस्दीक करते हुए जनरल ने कहा, भारतीय सेना की फायरिंग में 10 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। उनका साफ कहना था कि सैनिकों के सिर काटने का बदला हमने ले लिया।

जवानों की गला रेत कर हत्या करने की घटना पर समय व स्थान चुनकर बदला चुकाने की बात कह चुके जनरल सिंह ने कहा, हमने भी आक्रामक कार्रवाई की है। उन्होंने 23 दिसंबर को पाकिस्तानी मीडिया में आई उस खबर का हवाला दिया जिसमें नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी में एक अधिकारी और नौ पाक सैनिकों के मारे जाने तथा 12-13 के घायल होने की बात कही गई थी। जनरल ने कहा, यह आपके सैनिकों की कार्रवाई का नतीजा था। बीते साल जनवरी में पाक सैनिकों ने आतंकियों के साथ मिलकर की गई कार्रवाई में दो भारतीय जवानों की गला रेत कर हत्या कर दी थी। घुसपैठिया पाक दस्ता एक भारतीय सैनिक का सिर काटकर अपने साथ ले गया था। वहीं अगस्त में भी पाक सैनिकों ने सीमा में घुसपैठ कर पांच भारतीय सैनिकों को मार दिया था।

नियंत्रण रेखा पर पुंछ में सोमवार को संघर्ष विराम के उल्लंघन के मुद्दे पर भी सेनाध्यक्ष बोले। उन्होंने कहा,तीन आतंकियों की हलचल देखे जाने पर भारतीय सैनिकों ने कार्रवाई की। सेना दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रकारों से बातचीत में जनरल सिंह का कहना था कि संघर्ष विराम का उल्लंघन स्थानीय स्तर पर युद्ध की तरह होता है। लिहाजा सीमा पर तैनात जवान व कमांडर जवाबी कार्रवाई के लिए जरूरी कदम उठाते हैं। सिंह ने कहा, भारत पुंछ की इस घटना को पाक सैन्य अभियान महानिदेशक के साथ हॉटलाइन वार्ता में भी उठाएगा। 

सेना प्रमुख के मुताबिक घुसपैठ के किसी भी प्रयास पर हम जबरदस्त कार्रवाई करेंगे। सीमा पार से अक्सर गोलीबारी भी घुसपैठियों की मदद के लिए ही होती है। हालांकि सोमवार को पुंछ में हुआ संघर्षविराम उल्लंघन 27 अक्टूबर के बाद दर्ज पहली घटना है। वाघा सीमा पर 24 दिसंबर 2013 को दोनों देशों की सैन्य महानिदेशकों की बैठक हुई थी जिसमें शांति बहाली के उपायों पर जोर दिया गया था। इस कड़ी में जल्द ही नियंत्रण रेखा पर दोनों मुल्कों के बीच दो ब्रिगेडियर स्तर वार्ताएं भी होनी हैं। 

बीते एक वर्ष के दौरान नियंत्रण रेखा पर 2003 से कायम संघर्ष विराम तोड़ कर पाक की ओर से गोलीबारी की 400 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं। सीमा पर 2013 में हुई घटनाओं में 10 सैनिकों और 7 नागरिकों की मौत हुई है जबकि 11 सैनिक व 89 नागरिक घायल हुए हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। इस बीच सेनाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि मानवाधिकार उल्लंघन के किसी भी मामले में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। उनका कहना था कि मच्छल एनकाउंटर मामले में सेना की कार्रवाई एक सख्त संदेश देगी ताकि फर्जी एनकाउंटर न हों। हालांकि उन्होंने मामले को अदालत के विचाराधीन बताते हुए आगे टिप्पणी करने से इन्कार किया। 

Wednesday, 8 January 2014

Harbhajan sing play caption knock in ranji trophy

वडोदरा। पंजाब के कप्तान हरभजन सिंह ने रणजी ट्रॉफी क्रिकेट क्वार्टर फाइनल मैच में जम्मू-कश्मीर के खिलाफ 80 गेंदों पर 92 रन की उम्दा पारी खेलकर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में शानदार वापसी की। हरभजन और नौवें नंबर के बल्लेबाज संदीप शर्मा (51) के बीच आठवें विकेट पर 105 रन की मूल्यवान साझेदारी की बदौलत पंजाब ने पहली पारी में 304 रन बना लिए। एक समय जम्मू-कश्मीर की सीमर तिकड़ी समीउल्लाह बेग (2/56), राम दयाल (3/59) और उमर नजीर (4/66) ने पंजाब के सात विकेट 146 रन पर झटक लिए थे। स्टंप के समय जम्मू-कश्मीर ने ओपनर ओबैद हारून (04) का विकेट गंवाकर 11 रन बना लिए थे।

मददगार विकेट पर जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों खासकर राम दयाल ने पंजाब के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के लिए काफी मुश्किल पैदा की। युवराज सिंह केवल दस रन बना सके। लेकिन अनुभवी पंजाब की टीम आखिरकार संकट से निकलने में सफल रही। कंधे की चोट के कारण छह हफ्ते से ज्यादा मैदान से बाहर रहे हरभजन ने अपनी पारी में आठ चौके और छह छक्के लगाए। उन्होंने विरोधी कप्तान परवेज रसूल को अपना निशाना बनाया। हरभजन ने रसूल की सात गेंदों पर पांच छक्के जड़े। रसूल ने 13 ओवर में 64 रन लुटाए लेकिन हरभजन का विकेट लेने में सफल रहे। संदीप ने 123 गेंदों का सामना करते हुए आठ चौके लगाए।
संक्षिप्त स्कोर : पंजाब (पहली पारी) 81.2 ओवर में 304 (हरभजन 92, संदीप 51, युवराज 10, नजीर 4/66)। जम्मू-कश्मीर (पहली पारी) : 4 ओवर में एक विकेट पर 11 रन

Sunday, 29 December 2013

North India in grip of cold



नई दिल्ली। समूचा उत्तर भारत शीतलहर की चपेट में है। दिन में धूप निकलने के बावजूद कई जगहों पर कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पंजाब के जालंधर और हरियाणा के हिसार में तापमान शून्य से नीचे चला गया। कश्मीर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों सोमवार, मंगलवार और बुधवार को बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। हरियाणा और राजस्थान में ठंड से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई है।

दिल्ली में 1.9 डिग्री पहुंचा तापमान
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। ऐसा लग रहा है कि जनवरी कहीं दिल्लीवासियों को जमा न दे। तापमान में दिनोंदिन जिस तरह से गिरावट दर्ज की जा रही है, उससे दिल्ली वालों के बीच में ठंड को लेकर होने वाली चर्चा आम हो गई है। दिसंबर के जाते-जाते रविवार को दिल्ली के पश्चिमी-बाहरी जिले के जाफरपुर इलाके में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। जबकि दिल्ली का न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने तापमान में गिरावट जारी रहने की बात कही है। रविवार को अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम यानी 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट का असर पूरी तरह से जनजीवन पर दिखाई दिया। छुट्टी के दिन दिल्ली के तकरीबन सभी पिकनिक स्पॉट तथा बाजार वीरान नजर आए। मौसम विभाग की मानें तो सोमवार व मंगलवार को भी दिल्ली में सर्द हवाएं चलेंगी और तापमान में कमी आएगी।

जालंधर में शून्य से नीचे पहुंचा तापमान

जालंधर, जागरण प्रतिनिधि। लगातार दूसरा दिन, पारा माइनस में और तेज धूप भी ठंडी लग रही थी। रविवार छुट्टी वाले दिन धूप सेंकने के इरादे से घरों की छतों पर पहुंचे लोग कुछ ही देर में वापस कमरों में दुबक गए, क्योंकि दोपहर के समय भी चल रही शीतलहर ने बैठने ही नहीं दिया।

मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक रविवार को शहर का न्यूनतम तापमान -0.5 और अधिकतम 17.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दो तीन दिनों में बारिश हो सकती है। नए साल पर बारिश होने की संभावना मौसम विशेषज्ञ जता रहे हैं।

नारनौल जमाव बिंदु पर, हिसार में तापमान -0.8 डिग्री
पानीपत, जागरण न्यूज नेटवर्क। समूचा उत्तर भारत शीतलहर की चपेट में है। दिन में धूप निकलने के बावजूद प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ठंड से सिरसा के ओढ़ा में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

रविवार को हिसार में न्यूनतम तापमान लुढ़ककर माइनस 0.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया जोकि इस सीजन का दिसंबर माह में अब तक का सबसे कम तापमान है। उधर, नारनौल में पारा जमाव बिंदु पर पहुंच गया। यहां न्यूनतम तापमान 0 डिग्री दर्ज किया गया और सुबह खेतों में फसलों पर बर्फ जमी दिखाई दी। इसके अलावा रेवाड़ी में न्यूनतम तापमान एक और सिरसा में 1.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहीं नहीं, प्रदेश में अधिकांश स्थानों पर अधिकतम पारा भी 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास मंडराता रहा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार आगामी दिनों में तापमान और गिरेगा, क्योंकि 30 और 31 दिसंबर को मैदानी इलाकों में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। 

जयपुर में पांच साल का रिकॉर्ड टूटा
जयपुर। जयपुर में रविवार को मौसम साफ और गुनगुनी धूप होने के बावजूद यहां पर सर्दी ने पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। राजधानी में शनिवार रात का पारा 2.2 डिग्री से लुढ़ककर 4.5 डिग्री से. पहुंच गया, जो पांच साल में सबसे कम और इस मौसम का न्यूनतम तापमान है। मौसम विभाग ने सोमवार या मंगलवार को जयपुर सहित पूर्वी राजस्थान में बारिश और ओले गिरने की संभावना जताई है। राजस्थान में ठंड से एक व्यक्ति के मरने की सूचना है।

आगरा में ठंड की दस्तक
आगरा। आगरा शहर में भी ठंड ने दस्तक दे दी है। यहां रविवार रात पारा 1.4 डिग्री रहा, जोकि यहां के सामान्य तापमान से 6 डिग्री कम था। यहां का अधिकतम तापमान 18 डिग्री के आसपास रहा। मौसम विभाग ने नए साल की पूर्व संध्या पर यहां हल्की बूंदाबांदी के चलते तापमान में और गिरावट की संभावना जताई है।

पहली जनवरी को साफ रहेगा मौसम
पटना, जागरण संवाददाता। मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। दिन में अच्छी धूप निकल रही लेकिन, शाम ढलते ही पारा अचानक खासा गिर जा रहा है। राजधानी के अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान में भी काफी अंतर देखा जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पहली जनवरी को आकाश साफ रहेगा और अच्छी धूप निकलेगी। लोग विभिन्न स्थलों पर पिकनिक मनाएंगे।

पटना मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एके सेन का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है। दिन में धूप निकलने से अधिकतम तापमान 22 से 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा जबकि रात में पारा गिरकर 10 तक पहुंच सकता है। 

जमने लगे कश्मीर के जलस्रोत
श्रीनगर, जागरण ब्यूरो। बर्फ की सफेद चादर और बर्फ से अटी चोटियों के दामन में अगर कोई नववर्ष का स्वागत करना चाहता है तो उसे कश्मीर आना चाहिए। सूखी ठंड की मार झेल रही वादी को 31 दिसंबर को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होकर नए साल पर हिमपात का तोहफा देने के मूड में है। इस बीच, कड़ाके की ठंड झेल रही वादी में दिन व रात के अधिकतम और न्यूनतम तापमान के सामान्य से नीचे चले जाने के कारण अधिकांश जलस्रोत जमना शुरू हो गए हैं। लगातार तीव्र होती जा रही शीतलहर ने अब आम लोगों की दिनचर्या को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

ठंड का अदांजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार रात लेह में मौजूदा सर्दियों के दौरान अब तक का सबसे कम न्यूनतम तापमान -17.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि कारगिल में -16.4 डिग्री सेल्सियस रहा है। बेशक लेह पूरे राज्य में सबसे ठंडा है, लेकिन कश्मीर में गुलमर्ग न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे -9.6 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ज्यादा ठंडा है। गुलमर्ग भी बीती रात ही मौजूदा सर्दियों की सबसे ठंडी रात थी। पहलगाम में इसी दौरान न्यूनतम तापमान -7.4 डिग्री सेल्सियस, कुपवाड़ा में -3.7, कोकरनाग में -5.2, काजीगुंड में -4.0 और श्रीनगर में -3.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।

अधिकतम और न्यूनतम तापमान के सामान्य से कम होने के कारण अधिकांश जलस्त्रोत जमने लगे हैं। डल झील के किनारों और अंदरुनी इलाकों में पानी की ऊपरी सतर पर बर्फ की बिछ रही चादर भी मोटी होने लगी है। कई इलाकों में जलापूर्ति की पाइपें फट गई हैं। 

बर्फीली हवा ने बढ़ाई ठिठुरन
जम्मू, जागरण संवाददाता। ऊंचाई वाले क्षेत्रों और पहाड़ों पर बर्फबारी के चलते शीतलहर की चपेट में आए जम्मू के मैदानी इलाकों में ठिठुरन ने झकझोर कर रख दिया है। लगातार गिर रहे तापमान ने रातों की नींद हराम होने लगी है। रविवार की छुट्टी होने के चलते अधिकतर लोगों ने घरों में ही दुबके रहना बेहतर समझा। दोपहर को निकली धूप ने हालांकि राहत प्रदान की, लेकिन शाम होते ही कड़ाके की सर्दी ने फिर दस्तक दे दी। रविवार को न्यूनतम तापमान गिरकर 3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि अधिकतम में भी गिरकर 18.1 डिग्री सेल्सियस पर रहा। 

शिमला से भी ठंडे हुए ऊना व सुंदरनगर
शिमला, जागरण संवाद केंद्र। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद ठंडी हवाओं से पूरा हिमाचल कांप उठा है। आधे हिमाचल का तापमान जमाव बिंदु और उससे नीचे चला गया है, वहीं कई क्षेत्रों का तापमान एक और दो डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया है। प्रदेश के सबसे गर्म जिले ऊना का न्यूनतम तापमान रविवार को जमाव बिंदु पर बना रहा, जो शिमला के न्यूनतम तापमान से भी कम दर्ज किया गया। ऊना का न्यूनतम तापमान दशमलव पांच डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इसी तरह हमीरपुर, सोलन और सुंदरनगर का न्यूनतम तापमान भी रविवार को शून्य डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जबकि मनाली, चंबा, केलंग, कल्पा और भुंतर का तापमान माइनस रहा। राजधानी शिमला का तापमान दो डिग्री रिकार्ड किया गया है।

प्रदेश का न्यूनतम तापमान सामान्य से औसत तीन से चार डिग्री सेल्सियस कम चल रहा है। अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है, सामान्य से एक से दो डिग्री सेल्सियस कम है। मौसम विभाग की मानें तो सोमवार को मौसम करवट बदलेगा, क्योंकि अफगानिस्तान से आने वाली पश्चिमी हवाएं प्रदेश के मौसम पर असर दिखाएंगी। मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान को देखकर प्रदेश में घूमने आए पर्यटकों में बर्फ देखने की हसरत फिर से हिलोरे मारने लगी हैं। पर्यटन स्थलों में स्थित होटलों की आक्यूपेंसी दर शत प्रतिशत चल रही है। होटल व्यवसायी पर्यटकों को लुभाने के लिए अनेक तरह के पैकेज लांच कर रहे हैं।

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Monday, 2 December 2013

BJP defends Modi, challenges Omar for debate on Article 370

farooq abdullah
धारा 370: मोदी के बयान पर सुलगी सियासत
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कश्मीर और कश्मीरियों के विकास में अनुच्छेद 370 की उपयोगिता पर नरेंद्र मोदी के सवाल और बहस की अपील ने राजनीति गर्म कर दी है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की ओर से छेड़ी गई इस बहस को कांग्रेस के साथ ही नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने जहां सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं भाजपा मोदी के पीछे खड़े हो गई है। सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 370 पर नरम रुख को नकारते हुए आरोप लगाया कि इसी के सहारे कुछ लोग अभी भी भारत से 'आजादी' जैसी भावनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।
नरेंद्र मोदी ने रविवार को जम्मू की रैली में यह कहकर पार्टी के अंदर और बाहर बहस छेड़ दी थी कि अनुच्छेद 370 पर चर्चा होनी चाहिए कि यह जम्मू-कश्मीर की आम जनता के लिए कितना फायदेमंद रहा। भाजपा अनुच्छेद 370 को किसी भी शर्त पर समझौते का मुद्दा नहीं मानती। ऐसे में मोदी की ओर से बहस की अपील ने कुछ नरमी का शुरुआती संकेत भले ही दिया हो, लेकिन कांग्रेस समेत दूसरे दलों ने इसे खारिज कर दिया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने चुटकी लेते हुए पूछा, 'क्या मोदी की अगुआई में भाजपा ने वाजपेयी और आडवाणी की विरासत को रुखसती दे दी है? कश्मीर पर यू टर्न ले लिया है?'
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद के अलावा कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी मोदी पर बरसे। तीनों नेताओं ने इसे भाजपा की विभाजनकारी नीति करार देते हुए कहा कि इस पर कोई पुनर्विचार और बहस नहीं हो सकती है। उमर ने जहां मोदी के ज्ञान पर सवाल खड़ा किया तो सईद ने दावा किया कि केंद्र सरकार चाहकर भी इस अनुच्छेद से छेड़छाड़ नहीं कर सकती। पार्टी ने आगाह किया कि इससे छेड़छाड़ की कोशिश हुई तो उसका व्यापक असर दिखेगा।
उमर की आलोचना के बावजूद मोदी ने सोमवार को भी बहस जारी रखी और उसमें दूसरे नेता भी शामिल हो गए। मोदी ने ट्वीट पर कहा कि उन्हें खुशी है कि अनुच्छेद 370 पर बहस तो शुरू हुई। ट्वीट में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुच्छेद 370 के साथ-साथ कश्मीरी पंडितों जैसे समाज के दूसरे वर्गो की दशा पर भी तार्किक चर्चा होनी चाहिए। कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।
उमर और सईद पर पलटवार जेटली की ओर से हुआ। उन्होंने कश्मीर के लिए अलग दर्जे के निर्णय पर सवाल खड़ा किया और कहा कि देश से आजादी जैसी भावनाओं को बढ़ाने वाले प्रदेश के नेताओं ने इस सूबे को देश के दूसरे हिस्सों से नहीं जुड़ने दिया। अलग दर्जा देश के साथ जुड़ाव की बजाय अलगाववाद की ओर बढ़ता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर रेजीडेंट विधेयक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाओं को संपत्ति के अधिकार से दूर करने की कोशिश हो रही है। कश्मीरियत को महिला अधिकार के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।
पनुन कश्मीर ने किया स्वागत
जम्मू। पनुन कश्मीर की राजनीतिक मामलों की कमेटी ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे वाली धारा 370 पर नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत किया है। कमेटी की बैठक प्रो. एमएल रैना की अध्यक्षता में हुई, जिसमें प्रधान अश्विनी कुमार चरंगु, वीरेंद्र रैना, जेएल कौल, उपेंद्र कौल, कमल भगती, विजय काजी व अन्य शामिल हुए।
कश्मीर पंडितों के इस संगठन की बैठक को संबोधित करते हुए अश्विनी कुमार चरंगु ने कहा कि ललकार रैली में नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी ताकतों का मनोबल बढ़ाया है।
-''अलग दर्जा भारत में कश्मीर के जुड़ाव की बजाय अलगाववाद को दे रहा है बढ़ावा, भाजपा के रुख से नरम नहीं पड़े हैं मोदी''
- अरुण जेटली, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष
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-''2004 में भाजपा ने नहीं किया था अनुच्छेद 370 का उल्लेख, अब चर्चा के लिए हो गए तैयार.यह भाजपा का यू टर्न''
-मनीष तिवारी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री
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BJP defends Modi, challenges Omar for debate on Article 370

farooq abdullah
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कश्मीर और कश्मीरियों के विकास में अनुच्छेद 370 की उपयोगिता पर नरेंद्र मोदी के सवाल और बहस की अपील ने राजनीति गर्म कर दी है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की ओर से छेड़ी गई इस बहस को कांग्रेस के साथ ही नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने जहां सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं भाजपा मोदी के पीछे खड़े हो गई है। सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 370 पर नरम रुख को नकारते हुए आरोप लगाया कि इसी के सहारे कुछ लोग अभी भी भारत से 'आजादी' जैसी भावनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।

नरेंद्र मोदी ने रविवार को जम्मू की रैली में यह कहकर पार्टी के अंदर और बाहर बहस छेड़ दी थी कि अनुच्छेद 370 पर चर्चा होनी चाहिए कि यह जम्मू-कश्मीर की आम जनता के लिए कितना फायदेमंद रहा। भाजपा अनुच्छेद 370 को किसी भी शर्त पर समझौते का मुद्दा नहीं मानती। ऐसे में मोदी की ओर से बहस की अपील ने कुछ नरमी का शुरुआती संकेत भले ही दिया हो, लेकिन कांग्रेस समेत दूसरे दलों ने इसे खारिज कर दिया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने चुटकी लेते हुए पूछा, 'क्या मोदी की अगुआई में भाजपा ने वाजपेयी और आडवाणी की विरासत को रुखसती दे दी है? कश्मीर पर यू टर्न ले लिया है?'

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद के अलावा कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी मोदी पर बरसे। तीनों नेताओं ने इसे भाजपा की विभाजनकारी नीति करार देते हुए कहा कि इस पर कोई पुनर्विचार और बहस नहीं हो सकती है। उमर ने जहां मोदी के ज्ञान पर सवाल खड़ा किया तो सईद ने दावा किया कि केंद्र सरकार चाहकर भी इस अनुच्छेद से छेड़छाड़ नहीं कर सकती। पार्टी ने आगाह किया कि इससे छेड़छाड़ की कोशिश हुई तो उसका व्यापक असर दिखेगा।

उमर की आलोचना के बावजूद मोदी ने सोमवार को भी बहस जारी रखी और उसमें दूसरे नेता भी शामिल हो गए। मोदी ने ट्वीट पर कहा कि उन्हें खुशी है कि अनुच्छेद 370 पर बहस तो शुरू हुई। ट्वीट में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुच्छेद 370 के साथ-साथ कश्मीरी पंडितों जैसे समाज के दूसरे वर्गो की दशा पर भी तार्किक चर्चा होनी चाहिए। कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।

उमर और सईद पर पलटवार जेटली की ओर से हुआ। उन्होंने कश्मीर के लिए अलग दर्जे के निर्णय पर सवाल खड़ा किया और कहा कि देश से आजादी जैसी भावनाओं को बढ़ाने वाले प्रदेश के नेताओं ने इस सूबे को देश के दूसरे हिस्सों से नहीं जुड़ने दिया। अलग दर्जा देश के साथ जुड़ाव की बजाय अलगाववाद की ओर बढ़ता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर रेजीडेंट विधेयक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाओं को संपत्ति के अधिकार से दूर करने की कोशिश हो रही है। कश्मीरियत को महिला अधिकार के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।
पनुन कश्मीर ने किया स्वागत
जम्मू। पनुन कश्मीर की राजनीतिक मामलों की कमेटी ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे वाली धारा 370 पर नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत किया है। कमेटी की बैठक प्रो. एमएल रैना की अध्यक्षता में हुई, जिसमें प्रधान अश्विनी कुमार चरंगु, वीरेंद्र रैना, जेएल कौल, उपेंद्र कौल, कमल भगती, विजय काजी व अन्य शामिल हुए।
कश्मीर पंडितों के इस संगठन की बैठक को संबोधित करते हुए अश्विनी कुमार चरंगु ने कहा कि ललकार रैली में नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी ताकतों का मनोबल बढ़ाया है।
-''अलग दर्जा भारत में कश्मीर के जुड़ाव की बजाय अलगाववाद को दे रहा है बढ़ावा, भाजपा के रुख से नरम नहीं पड़े हैं मोदी''
- अरुण जेटली, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष
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-''2004 में भाजपा ने नहीं किया था अनुच्छेद 370 का उल्लेख, अब चर्चा के लिए हो गए तैयार.यह भाजपा का यू टर्न''
-मनीष तिवारी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री
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Wednesday, 13 November 2013

Government Denied to Infiltrition in Keran Sector

infiltrition
नई दिल्ली। केरन सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठियों की लंबे समय तक हुई कोशिश के दौरान वहां क्या हुआ, इस पर उठे सवालों के बीच सरकार ने सेना के दावे को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है। सरकार ने कहा है कि वहां ऐसा कोई सुबूत नहीं है जिससे लगे कि घुसपैठ का कोई प्रयास हुआ।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि हाल में यहां हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक के दौरान यह भी महसूस किया गया कि जिस 'रिसेप्शन एरिया' में सेना को आतंकवादी मिले और जहां से आतंकी भाग गए वहां उनकी घेराबंदी करने के लिए सेना को उन स्थानों की किलेबंदी करनी चाहिए। सरकार का मानना है कि नियंत्रण रेखा से चार-पांच किलोमीटर तक अंदर भारतीय क्षेत्र में सेना उन आतंकवादियों को पकड़ सकती है जो यह दूरी तय कर पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं।

रिसेप्शन एरिया आमतौर पर नियंत्रण रेखा से पांच किलोमीटर अंदर होता है जिसे सेना उन आतंकियों के घुसपैठ के प्रयासों को निष्क्रिय करने के लिए बनाती है जो सीमा पर बच निकलने में सफल रहते हैं। सूत्रों ने कहा कि बैठक में जम्मू-कश्मीर और गुलाम कश्मीर के बीच में बंटे शालभटू गांव में पाकिस्तान के विशेष बलों की तरफ से घुसपैठ के प्रयास को सरकार ने संदिग्ध माना क्योंकि किसी अन्य एजेंसी के पास इसके साक्ष्य मौजूद नहीं थे। 

पिछली सदी के आखिरी दशक में शालभटू गांव घुसपैठ के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले रास्तों में से एक था। सूत्रों ने कहा कि बैठक में सेना के एक प्रतिनिधि ने भी शिरकत की थी और इसमें तकनीक खुफिया जानकारी को भी ध्यान में रखा गया जो सेना के किसी भी दावे से मेल नहीं खाती थी। अगस्त के अंतिम हफ्ते में शुरू हुआ केरन अभियान करीब दो सप्ताह बाद खत्म हुआ था। केरन में घुसपैठ के बारे में सेना का दावा निगरानी के दायरे में आ गया था क्योंकि इसमें दावा किया गया था कि करीब 30 आतंकियों ने घुसपैठ की थी और उन्हें घेर लिया गया था।

 Source- News in Hindi

Wednesday, 6 November 2013

Rahul Gandhi addresses rally in Jammu

Rahul Gandhi

जम्मू [जागरण ब्यूरो]। जम्मू-कश्मीर के पंच-सरपंचों को अधिकार दिलाने का वादा करने जम्मू पहुंचे राहुल गांधी ने कहा कि
गुटबाजी करने वाले नेताओं की सुलह करवाते समय मन करता है कि उन्हें डंडे मारूं। गुटबाजी खत्म करने के लिए जो छत्तीसगढ़ में किया है वह कांग्रेस की एकजुटता के लिए जम्मू-कश्मीर में भी करेंगे। राहुल गांधी पंच-सरपंचों के सम्मेलन में हिस्सा लेने से पूर्व बुधवार दोपहर को यहां कांग्रेस कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। राहुल गांधी ने चुनाव में बार-बार हारने के बाद भी टिकट की दावेदारी जताने वाले नेताओं के दिन लद जाने के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि दो बार चुनाव में नाकाम रहे नेताओं को अब टिकट नहीं दी जाएगी।

वहीं, दूसरी तरफ राहुल को कुछ पंचायत प्रतिनिधियों की खरी-खरी सुननी पड़ी। पंचायत सम्मेलन में एक सरपंच ने इतना हंगामा किया कि राहुल को अपना भाषण बीच में ही छोड़ना पड़ा। सम्मेलन में एक तरफ सरपंच परीक्षित सिंह ने पंचायतों को अधिकार न मिलने पर अपना गुस्सा निकालना शुरू किया तो कई अन्य पंच-सरपंचों ने राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। इस शोर-शराबे के कारण सम्मेलन में खलल पड़ गया। अंतत: राहुल कार्यक्रम समेटकर निकल गए।

हुआ यूं कि मौलाना आजाद स्टेडियम के पंचायत सम्मेलन में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जब पंचायतों को अधिकार दिलाने के लिए फिर से लड़ाई छेड़ने की बात कही तो ऊधमपुर जिला की रामनगर तहसील की पंचायत बुखतान के सरपंच परीक्षित सिंह व कुछ अन्य पंच भड़क गए। पंचायतों को अधिकार दिलाने के राहुल के वादे से गुस्साए परीक्षित ने कहा कि पिछले तीन साल से पंच-सरपंचों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। हमें न्याय चाहिए। हमें आज तक अधिकार नहीं मिल पाए हैं। हमें अधिकार दिए जाने का दिन कब आएगा? परीक्षित के हंगामे के कारण राहुल को अपना भाषण में बीच में रोड़ना पड़ा।

इस बीच, कई सरपंचों व पंचों ने राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस शोर-शराबे के बीच ही राहुल ने कहा, 'मैं पंचायतों को अधिकार दिलाने के मुद्दे पर सरकार पर दवाब बनाने की बात कह चुका हूं। एक मिनट में कुछ नहीं होने वाला है। हमें दबाव डालना होगा। मैं बार-बार जम्मू-कश्मीर आऊंगा और पंचायतों को अधिकार दिलाकर ही रहूंगा।'

इतना कहकर राहुल मंच से उतर गए लेकिन वहां पर हंगामा होता रहा। इस बीच प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी मंच पर पहुंची और उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत को दस-दस लाख रुपये जारी करने का प्रस्ताव केंद्र के पास है और वित्तीय विभाग में यह फाइल अंतिम चरण में है। अंबिका सोनी ने कहा कि इस समय चुनाव नजदीक है, इसलिए राहुल गांधी ने यह घोषणा नहीं की। इससे पूर्व सम्मेलन में राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर के पंच-सरपंचों को पूरा हक दिलाने का यकीन दिलाते हुए कहा कि वह भारतीय संविधान के 73 व 74 वें संशोधन को लागू करवाने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाएंगे।

करीब 16 मिनट के भाषण में राहुल ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोजन अधिकार कानून जम्मू-कश्मीर में लागू होना चाहिए। उनकी इस सिलसिले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात हुई है। भोजन अधिकार कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार कमियां पूरी करेगी।
Source- News in Hindi

Monday, 4 November 2013

Modis Influence, but not Wave

Narendra Modi

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। नरेंद्र मोदी की सेंध अब संप्रग सहयोगियों में भी दिखने लगी है। जदयू नेता शिवानंद तिवारी की प्रशंसा के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी मान लिया कि मोदी का असर है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह पाला बदलने वाले नहीं हैं। बहरहाल, उनके बयान ने राजनीतिक दलों और लोगों में चिंतन-मंथन को जरूर तेज कर दिया है। उत्साहित भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने भी यह कहने में देर नहीं की कि मोदी के सुशासन की सुनामी आ गई है।
उमर नेशनल कांफ्रेंस के नेता और मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के प्रशंसक और समर्थक हैं। ऐसे में उनके इस नए बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस जहां मोदी के असर को 'कृत्रिम' करार देती रही है वहीं उमर का मानना है कि मोदी का असर है। लहर तो नहीं है, लेकिन उनको नकारना गलत होगा। उन्होंने अपनी ओर से यह साफ करने में देर नहीं लगाई कि वह खुद को कांग्रेस के ही नजदीक पाते हैं। लेकिन उनकी ओर से यह संकेत देना ही अहम है कि जम्मू-कश्मीर में बैठकर भी वह मोदी का असर देख रहे हैं। कुछ दिन पहले ही जदयू नेता शिवानंद तिवारी पार्टी मंच से ही मोदी का लोहा मान चुके हैं। जबकि खुद कांग्रेस के मंत्री जयराम रमेश ने भी आगाह किया था कि मोदी पार्टी के लिए एक चुनौती हैं। 

उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में व्यक्तिगत रूप से नेताओं में मोदी का असर दिखने लगा है। ऐसे में उमर के बयान का स्वागत करते हुए भाजपा ने कांग्रेस को आगाह किया कि उनकी अंतिम पारी का काउंटडाउन शुरू हो गया है। नकवी ने कहा, 'कांग्रेस के कुशासन के कहर के खिलाफ सुशासन की सुनामी आई हुई है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक इसका असर दिख रहा है। मोदी विश्वास और सुशासन के प्रतीक बन गए हैं। उन्हें कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

मोदी का समर्थन करेगी नेकां: शेख मुस्तफा
जागरण ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पाला नहीं बदलने के वक्तव्य के उलट उनके चाचा और नेशनल कांफ्रेंस के अतिरिक्त महासचिव शेख मुस्तफा कमाल ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को समर्थन देने की बात कही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा यदि केंद्र की सत्ता में आती है तो उनकी पार्टी उसे अपना समर्थन देगी।
कमाल ने कहा कि अगले साल आम चुनाव में मोदी जीत दर्ज कर प्रधानमंत्री बने तो नेशनल कांफ्रेंस उनके साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखेगी। हालांकि हम अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेंगे।
हमारे वालिद शेख साहब (नेका के संस्थापक शेख मुहम्मद अब्दुला) कहा करते थे कि हमें नई दिल्ली में सत्तासीन होने वाले दल के साथ रहना है। 

Source- News in Hindi