Thursday, 29 January 2015

बच सकती थी कर्नल एमएन राय की जान, जानिए कैसे

कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल में आतंकी मुठभेड़ में शहीद कर्नल मुनीन्द्रनाथ राय की जान बच सकती थी, अगर वे अपने स्टैंडिंग ऑपरेशनल प्रोसीजर (एसओपी) की बात मान लेते। इस मुठभेड़ में कर्नल राय सहित दो सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे और हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकी आबिद और शिराज भी मारे गए थे।

दरअसल, सेना को खबर मिली थी कि दो स्थानीय आतंकी मिंदोरा गांव के एक घर में छुपे हुए है। इसकी सूचना मिलते ही वहां के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राय अपने सैनिकों के साथ मौके पर पहुंचे। कर्नल राय ने अपने आॅपरेशनल प्रोसीजर की बात मानने के बजाय आतंकियों के परिजनों की बात पर यकीन कर लिया। आतंकियों के घरवालों ने कहा कि वे उन पर गोली नहीं चलाएं और हम उनका आत्म समर्पण करवा देंगे।

सैन्य अधिकारियों व स्थानीय लोगों के मुताबिक, मंगलवार को मुठभेड़ स्थल पर आतंकी आबिद के पिता जलालुद्दीन ने कर्नल राय को बताया कि उनका पुत्र आत्मसमर्पण करना चाहता है। जलालुद्दीन के दूसरे पुत्र उवैस ने भी सुरक्षाकर्मियों से आग्रह किया कि वे फायरिंग रोक दें। उसका भाई लड़ना नहीं चाहता, वह समर्पण करने को तैयार है।

आतंकी के परिजनों के यकीन दिलाए जाने पर कर्नल राय ने अपने जवानों को फायरिंग रोकने को कहा। इसके बाद कर्नल राय खुद आतंकी का समर्पण कराने के लिए उसके ठिकाने की तरफ बढ़े तो आतंकी ने मौका पाकर फायरिंग कर दी। इसमें कर्नल जख्मी हो गए, लेकिन जमीन पर गिरने से पहले उन्होंने अपने साथियों संग जवाबी फायर कर दोनों आतंकियों को भी मार गिराया।

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