दरअसल, पीडीपी और भाजपा में मुख्यमंत्री के पद को लेकर पेंच फंस रहा है। पीडीपी चाहती है कि छह साल के लिए मुफ्ती मुहम्मद सईद मुख्यमंत्री रहें और उपमुख्यमंत्री का पद भाजपा का होगा। वहीं, भाजपा चाहती है कि राज्य में दोनों पार्टियों का तीन-तीन साल के लिए मुख्यमंत्री बने। बुधवार को 55 विधायकों का समर्थन होने का दावा करने वाली महबूबा के बाद राज्यपाल से मिलकर लौटे जुगल किशोर ने पत्रकारों से बातचीत में पीडीपी से मिलकर सरकार बनाने के सवाल को टाल दिया। उन्होंने कहा कि महबूबा मुफ्ती वाजयेपी के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सहयोग की अपील कर रही हैं, इससे आपको खुद समझ लेना चाहिए।
श्रीनगर। पीडीपी और भाजपा में गठबंधन की अटकलों के बीच कश्मीर में अलगाववादी भी दो गुटों में बंटते नजर आ रहे हैं। उदारवादी हुर्रियत कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम कांफ्रेंस के प्रमुख प्रो. अब्दुल गनी बट को जहां मुफ्ती सईद की भाजपा से नजदीकियों में बुराई नजर नहीं आती। वहीं हुर्रियत जेके के संयोजक शब्बीर शाह इसे कश्मीरियों से विश्वासघात मानते हैं। अलबत्ता हुर्रियत नेता मानते हैं कि जम्मू-कश्मीर में सरकार चाहे किसी की भी बने, उससे उनका कोई सरोकार नहीं है। मुख्यधारा से जुड़े सभी राजनीतिक दल नई दिल्ली के एजेंट हैं। वे कश्मीर की आजादी की राह में रुकावट हैं।
Source: Hindi News and Newspaper
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