बिहार के राजनीतिक हालात को देखते हुए यह तो पहले से ही लगता था कि प्रदेश में भाजपा के तेजी से उभरने से डरे इन दल के नेताओं को एक रखना इतना आसान नहीं है। हालांकि जदयू में एेसे नेताओं की संख्या काफी है जो पहले लालू यादव की पार्टी राजद में रहे हैं लेकिन लालू के कमजोर पड़ते ही जदयू का पल्ला थाम लिया। प्रदेश में दोनों दलों के विलय की बात चल रही है लेकिन विलय के पहले ही मतभेद उभरने लगे हैं।
इस बारे में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार ने कहा कि छह राजनीतिक दलों के महाविलय पर दिल्ली यात्र के दौरान अच्छी बात हुई है। शरद यादव, मुलायम सिंह यादव से बातचीत हुई। पहले से विलय के बारे में सैद्धांतिक रूप से सहमति बनाई गई है। विलय में समय लगता है। लेकिन बहुत लोगों को लगता है कि हमारा अलग अस्तित्व है। विलय से स्वतंत्र अस्तित्व पर कहीं कोई खतरा तो नहीं होगा? सब अपनी पार्टी के अंदर बात कर रहे हैं और इन मामलों पर चर्चा कर रहे हैं। सिर्फ जदयू-राजद के विलय के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा कि सिर्फ जदयू-राजद के विलय की बात नहीं है। इसमें कई राजनीतिक दलों का विलय होना है।
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