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Tuesday, 7 January 2014

Ramgopal attacks on media, says media men will be sent to jail

फीरोजाबाद [जासं]। अपने पुत्र के चुनाव क्षेत्र में प्रचार के वास्ते पहुंचे सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने मीडिया को निशाने पर लिया। सिरसागंज से विधायक हरीओम यादव को क्लीन चिट देते हुए कहा- मीडिया दुष्प्रचार कर रहा है। विधायक का चरित्र हनन किया जा रहा है। धमकाने वाले अंदाज में उन्होंने कहा, मई के दूसरे हफ्ते में अखबारों और चैनलों पर मुकदमा किया जाएगा। जिम्मेदार लोगों की जमानत भी नहीं होने दी जाएगी। सपा महासचिव रामगोपाल यादव मंगलवार को सिरसागंज में आयोजित संकल्प रैली में बोल रहे थे। 

सपा महासचिव ने कहा कि हरीओम यादव लोकप्रिय विधायक हैं, उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से साजिश रची गई है। सपा महासचिव ने बताया कि 1977 में प्रदेश सरकार में मुलायम सिंह सहकारिता मंत्री बने थे। उस वक्त मुलायम सहित पूरे परिवार पर काली कमाई समेत कई आरोप लगाए। मुंबई और एक लखनऊ के समाचार पत्र ने इन्हें प्रकाशित किया था। इनमें एक मालिक ने छह माह जेल काटी थी और दूसरे को हार्ट अटैक हो गया। उन्होंने कहा कि विधायक हरीओम के खिलाफ अखबारों और चैनलों में गलत दिखाया जा रहा है, उनके खिलाफ मई के दूसरे सप्ताह में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। मुकदमे के बाद आरोपी जेल जाएंगे और जमानत भी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए अखबार और चैनलों के मालिक मुल्जिम नंबर एक और बाद वाले दूसरे नंबर पर होंगे। उल्लेखनीय है कि आगरा से अगवा एक किशोरी ने विधायक के शिकोहाबाद स्थित आवास में खुद को रखे जाने की बात कही है। वहीं से खुद के बरामद होने की जानकारी दी है। इसी के बाद से विधायक हरीओम चर्चा में हैं। 

सपा महासचिव ने कहा कि पार्टी के वादे के मुताबिक गुंडे जेल जाएंगे। उन्होंने माना कि यह वादा अभी पूरा नहीं हो सका है। प्रदेश में भले आदमी सिर उठाकर चलेंगे और गुंडे झुका कर। पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वह कोई गलत कार्य न करें, अन्यथा बख्शा नहीं जाएगा। 

Wednesday, 1 January 2014

Dogged by questions UP government plays the biggest political game



लखनऊ [आनंद राय]। बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ स्मारक घोटाले में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराना सपा सरकार का सबसे बड़ा सियासी दांव है। सांप्रदायिक दंगों और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर चौतरफा घिरी सरकार ने इस कार्रवाई से एक तीर से कई निशाना साधने की जुगत लगाई है। लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी सपा एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को अपना हथियार बनाएगी और दूसरी तरफ कुशवाहा को संरक्षण देने के चुभते सवालों पर विपक्ष का मुंह बंद करने की भी कोशिश करेगी।

विधानसभा चुनाव के दरम्यान अखिलेश यादव जब साइकिल यात्रा लेकर निकले तो स्मारक घोटाले का भ्रष्टाचार उनका सबसे अहम मुद्दा था। वह अपनी किसी सभा में यह कहने से नहीं चूकते कि यदि हमारी सरकार बनी तो स्मारक घोटाला करने वालों को जेल भेजेंगे। 21 माह बाद अखिलेश के उन वादों को एक मुकाम मिला है। हालांकि इसके पहले लैकफेड घोटाले में बसपा सरकार के ही मंत्री बादशाह सिंह, चंद्रदेव राम यादव और रंगनाथ मिश्र को जेल जाना पड़ा। इन्हीं आरोपों में कुशवाहा के खिलाफ भी वारंट बी बना। चार पूर्व मंत्रियों को जेल भेजे जाने के बावजूद सपा सरकार उसका श्रेय नहीं ले पाई। दरअसल एक ही तरह के आरोपों में कुछ पूर्व मंत्रियों को जेल भेजा और कुछ को छोड़ दिया। इससे जांच एजेंसी की नीयत पर तो सवाल उठे ही, दोहरा मापदंड भी उजागर हुआ। अब सतर्कता विभाग के सहारे सरकार ने एक नई पहल की है।


कुशवाहा पर नई रणनीति
बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ जिस दिन आय से अधिक संपत्ति, भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी में मुकदमा दर्ज होना था, उसके पहले उनकी पत्‍‌नी और भाई सपा में शामिल हो गए। अब उनकी पत्‍‌नी गाजीपुर से सपा की उम्मीदवार है। ऐसे में स्मारक घोटाले में कुशवाहा पर एफआइआर को सरकार की नई रणनीति माना जा रहा है।

शिकंजे में माया के नवरत्न
पहले भी आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में माया सरकार के नवरत्‍‌न घिरे हैं। रामवीर उपाध्याय को छोड़ दें, तो राकेश धर त्रिपाठी, रंगनाथ मिश्र, अवधपाल सिंह यादव, बादशाह सिंह, नसीमुद्दीन, बाबू सिंह कुशवाहा, रामवीर उपाध्याय, चंद्रदेव राम यादव और रामअचल राजभर जैसे कद्दावर मंत्रियों पर जांच और मुकदमे की प्रक्रिया शुरू हुई। रामवीर उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से स्थगनादेश ले रखा है। 

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Thursday, 26 December 2013

Jayaprada to fight election on congress ticket from Rampur


मुरादाबाद [ज्ञानेंद्र त्रिपाठी]। फिल्मी दुनिया से आकर आजम खां के शहर रामपुर की सियासी फिल्म बदलने का माद्दा रखने वाली सांसद जयाप्रदा की तीसरी सियासी फिल्म का ट्रेलर अब दिखने लगा है। कल तक आजम द्वारा नवाबी दौर की तोड़ी गई इमारतों का जो मुद्दा आजम और नवेद के बीच था उसे अब जयाप्रदा ने हथिया लिया है। उनकी नजर नवेद की मां की कांग्रेसी सीट पर भी है, जिनको साइकिल पर सवार होकर दो बार जयाप्रदा मात दे चुकी हैं। अब साइकिल नहीं है। सो, कांग्रेस के हाथ का साथ पा कर नई पारी खेलना चाहती हैं और कांग्रेसी सुर में सुर मिलाने लगी हैं।

रामपुर की संसदीय सीट पर अर्से तक नवाबी खानदान के साथ कांग्रेसी कब्जा रहा है तो विधानसभा की सीट पर आजम का दबदबा। पर, वर्ष 2004 के संसदीय चुनाव में यहां की हवा ही बदल गई। अमर सिंह के साथ फिल्मी दुनिया से जयाप्रदा आईं और आजम के नेतृत्व में चुनाव लड़ नवाबी सीट पर काबिज हो गई।
राजनीति की इस दोतरफा की जमीन पर पहली दफा तीसरे चेहरे का उदय हुआ। यहां पर तीसरी पार्टी भाजपा थी, लेकिन उसमें उतनी धार नहीं। पर, 2009 के संसदीय चुनाव में आजम खां ने जयाप्रदा का विरोध किया, लेकिन सपा ने आजम को ही बाहर कर दिया और जयाप्रदा ने आजम खां के विरोध के बावजूद नूरबानो को लगातार दूसरी बार पराजित कर सीट पर कब्जा जमा लिया। 

इस तरह जयाप्रदा ने एक बार आजम के साथ तो दूसरी दफा उनके विरोध के बावजूद अपना राजनीतिक रसूख बनाए रखा, लेकिन दोनों बार सपा साथ थी। अब उनके विरोधी आजम हैं, लेकिन उनके साथ कोई पार्टी नहीं है, क्योंकि सपा ने उन्हें निकाल दिया है। ऐसे में जयाप्रदा ने अपनी नई सियासी फिल्म के लिए बैनर खोजना शुरू कर दिया, जिसका संकेत पिछले दिनों तब मिला जब वह रामपुर आईं और राहुल गांधी का गुणगान कर गईं।
नतीजा यह रहा कि राहुल रैली में आए तो कांग्रेस नेत्री के रूप में जयाप्रदा का बैनर भी लगा। इस पर किसी ने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। हां, यह बात फैलने लगी कि इस बार नूरबानो की जगह जयाप्रदा कांग्रेस से चुनाव लड़ेंगी। इसे बल तब मिला जब लोकसभा चुनाव के लिए मुरादाबाद से कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम के पैनल में नूरबानो का नाम भेजा गया, जो रामपुर से लड़ती रही हैं। 

बुधवार को रामपुर पहुंची जयाप्रदा ने एक बार फिर खुद इस कयास को पूरा बल दे दिया। उन्होंने घोषणा की कि आजम द्वारा तुड़वाए गए नवाबी दौर के गेट को वह सांसद निधि से बनवाएंगी। अब तक गेट की विधिक व उच्चस्तरीय लड़ाई नूरबानो के बेटे नवेद लड़ते रहे हैं, जो आजम के साथ साथ जयाप्रदा के भी विरोधी रहे हैं। पर, अब इस पूरे मामले को जयाप्रदा भी राष्ट्रपति तक ले जाने व दोषियों को दण्डित कराने की कसम खा रही हैं, जो वैचारिक रूप में सही आजम के विरोधी और आपस में भी सियासी विरोधी नवाब खानदान और जयाप्रदा को एक मंच पर ला दिया है। फिर, जयाप्रदा का यह कहना कि वह रामपुर से ही चुनाव लड़ेंगी और किसी पार्टी से लड़ेंगी, इस बात का साफ संकेत हैं कि सबकुछ ठीक रहा तो जयाप्रदा की तीसरी सियासी फिल्म कांग्रेस के पर्दे पर ही प्रदर्शित होगी, क्योंकि सपा में उनकी राह में आजम रोड़ा हैं तो भाजपा से कोई नजदीकी अभी नहीं दिख रही है। 

साथ ही आजम से पार पाने को उनसे अधिक कहीं नवाब खानदान बेचैन है। दोनों ही इस समय एक सुर से आजम पर निशाना साधे हुए हैं, जो दोनों के बीच सियासी समझौते के संकेत दे रहा है, जिसपर जयाप्रदा हां तो नहीं कहती हैं, लेकिन ना भी नहीं बोलती हैं, जिसे आजम खां के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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Friday, 29 November 2013

Super Saturday for Delhi Asembly Election

Delhi assembly election
नई दिल्ली। ठंड के मौसम में शनिवार को दिल्ली में सियासत की गरमी रहेगी। चार दिसंबर को दिल्ली में होने वाले विधान सभा चुनाव के मद्देनजर आज भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार, लोकसभा की विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, बसपा सुप्रीमो मायावती अलग-अलग जगहों पर रैली कर जनता को अपने पक्ष में लुभाने की कोशिश करेंगे। मोदी आज दिल्ली में तीसरी बार रैली करेंगे। देखना होगा कि विधान सभा चुनाव में मोदी की रैली का कितना असर दिखाई देता है। भाजपा दिल्ली में मोदी के बल पर कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में कामयाब हो पाती है या नहीं। यह एक बड़ा सवाल है।
गौरतलब है कि दिल्ली में कांग्रेस पिछले पंद्रह वर्षो से सत्ता में हैं और इस बार फिर से सत्ता में वापसी के प्रति आश्वस्त हैं। वहीं, विपक्षी पार्टियां कांग्रेस को बेदखल करने की कोशिश कर रही हैं।
भाजपा कुर्सी पाना चाहती है तो कुछ पार्टियां अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने की कोशिश करेंगी। हर पार्टियां अपने-अपने दांव आजमा रही हैं। आज जहां नरेंद्र मोदी शाहदरा, चांदनी चौक और सुल्तानपुरी में रैली करेंगे तो वहीं नीतीश कुमार, संगम विहार और जामिया नगर में अपने प्रत्याशियों के लिए वोट मांगेंगे। सुषमा स्वराज जहां पटपड़ गंज में एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगी। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती रामलीला मैदान चुनावी रैली करेंगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ऑनलाइन होकर एक घंटे तक जनता से रूबरू होगी।


BillY Joel song "We didn't start the Fire" adapted by SP in UP

BillY Joel song
सपा के प्रचार में इस्तेमाल होगा विलायती गाना
लखनऊ। संसद में अंग्रेजी के इस्तेमाल पर मुखालफत जताने वाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अमेरिकी गायक व संगीतकार बिली जोएल के चर्चित अंग्रेजी गाने वी डिडनॉट स्टार्ट द फायर.. के हिंदी रूपांतरण का इस्तेमाल अपने प्रचार अभियान में करेंगे।
सपा ने ग्रैमी पुरस्कार विजेता बिली से गाने का अधिकार खरीदा है, जिसका इस्तेमाल पार्टी द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव से पहले प्रचार के वास्ते शुरू कर दिया जाएगा।
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी ने गाने के अधिकार को खरीद कर इसका हिंदी रूपांतरण -मन से हैं मुलायम पर इरादे लोहा.. के रूप में किया गया है। इसका इस्तेमाल लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार में किया जाएगा। इसे पहले पार्टी की वेबसाइट और फेसबुक पेज पर अपलोड किया जा चुका है।
गाने के बोल मुलायम सिंह यादव के शिक्षक व उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने तैयार किए हैं। इसे बॉलीवुड गायक जावेद अली ने गाया है।

Friday, 1 November 2013

SP worry about Caste Balence in Cabinet


Lucknow

जागरण ब्यूरो, लखनऊ : विधायक राजाराम पाण्डेय के निधन के कारण अखिलेश मंत्रिमंडल का पाचवा विस्तार तो टल गया मगर, मंत्रिमण्डल में जातीय संतुलन को लेकर दबाव से उबरना सपा के लिए आसान नहीं है। सपा के प्रदेश की सत्ता संभालते ही प्रभावशाली छत्रपों ने मंत्रिमण्डल में आने की लामबंदी शुरू कर दी थी। इसी दबाव का नतीजा है कि डेढ़ साल से कुछ अधिक के अंतराल में ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मंत्रिमण्डल का चार बार विस्तार करना पड़ा। पाचवा विस्तार भी इसी क्रम में होना था। 59 सदस्यीय मंत्रिमण्डल में एक ब्राह्मण, छह यादव, पाच क्षत्रिय, तीन मुस्लिम, दो अनुसूचित जाति और जाट जाति के एक विधायक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल है।

दस अक्टूबर को चौथे विस्तार में निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह को मंत्री बनाया गया था। तीन सप्ताह बाद ही आज शुक्रवार को पांचवें विस्तार में एक राज्य मंत्री को प्रमोशन देकर कैबिनेट में स्वतंत्र प्रभार दिये जाने और एक नए राज्य मंत्री शामिल किये जाने की संभावना थी ताकि मंत्रिमंडल ब्राह्मणों की नुमाइंदगी संतुलित हो सके। कुछ दिन पहले ब्राह्मंण समाज के कई विधायकों ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मुलाकात भी की थी और तर्क दिया था कि सपा के 21 विधायक ब्राह्मण हैं मगर उनकी नुमाइंदगी के लिए मंत्रिमण्डल में एक ही कैबिनेट मंत्री है।

लोकसभा चुनाव करीब हैं, और पार्टी 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी में शामिल करने और अति पिछड़ों को लुभाने लिए यात्रा निकाल रही है। लेकिन इस वर्ग से कैबिनेट मंत्री नहीं है, इस वर्ग से भी अब दबाव बढ़ाया जा रहा है। मुस्लिम नुमाइंदे भी पीछे नहीं है, सपा के बड़े समर्थकों में शुमार इस वर्ग के नुमाइंदों का मानना है कि उनके कोटे के तीन कैबिनेट मंत्रियों में से एक वकार अहमद गंभीर रूप से बीमार हैं। दूसरे कई विवादों से घिरे हैं, तीसरे विधान परिषद सदस्य हैं। इधर राज्यमंत्रियों व कैबिनेट मंत्रियों के बीच अख्तियार को लेकर खींचतान भी चल रही है। इस बीच हर नया विस्तार दबाब बनाने की नई जमीन तैयार कर देता है। 

Source- News in Hindi