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Tuesday, 27 January 2015

यूपी इंवेस्टर्स मीट में पांच हजार करोड़ का एमओयू साइन

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में आज इंवेस्टर्स मीट 2015 में पांच हजार करोड़ रुपये का एमओयू साइन किया गया है। इस इन्वेस्टर्स मीट में देश की कई बड़ी कंपनिया हैं। मीट में एमओयू साइन होने से गदगद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया कि भविष्य में उत्तर प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश रोजगार देने वाला एक बड़ा राज्य होगा।

सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी बड़ी कंपनियो का यूपी से रिश्ता है। यह कंपनियां जल्दी ही हमारे प्रदेश में निवेश की इच्छुक हैं। बड़ी कंपनियों के उत्तर प्रदेश में आने से प्रदेश में रोजगार निश्चित रूप से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास उत्तर प्रदेश में मैनुफैक्चरिंग को और अधिक बढ़ाना है। जिससे कि हमारे प्रदेश के युवाओं का स्किल और बेहतर होगा और हमारे मिशन कौशल विकास को भी नई दिशा मिलेगी। सूबे का युवा अब बाहर नौकरी करने नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया राज्यों से ही शुरू होगा। इसमें भी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी भागेदारी होगी। सीएम अखिलेश ने कहा कि हमने उत्तर प्रदेश के विकास का बजट भी काफी बढ़ाया है। अब आईटी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर काम हो रहा है।

ई-उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स मीट में आज मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम के स्मार्ट कार्ड और यूपी बस एप्स का उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर डीएम गाजीपुर नरेंद्र सिंह पटेल को सबसे ज्यादा ई-ट्रांजेक्शन के लिए सम्मानित किया गया। मीट मे लावा के साथ 600 करोड़ प्रोजेक्ट का एमओयू साइन किया गया। सीएम ने 570 करोड़ रुपये की लागत से सैमसंग मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटी का शुभारंभ किया। इस बार इन्वेस्टर्स मीट में एचसीएल,आईबीएम,माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग व एचपी भी शामिल हैं।
 

Friday, 29 November 2013

BillY Joel song "We didn't start the Fire" adapted by SP in UP

BillY Joel song
सपा के प्रचार में इस्तेमाल होगा विलायती गाना
लखनऊ। संसद में अंग्रेजी के इस्तेमाल पर मुखालफत जताने वाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अमेरिकी गायक व संगीतकार बिली जोएल के चर्चित अंग्रेजी गाने वी डिडनॉट स्टार्ट द फायर.. के हिंदी रूपांतरण का इस्तेमाल अपने प्रचार अभियान में करेंगे।
सपा ने ग्रैमी पुरस्कार विजेता बिली से गाने का अधिकार खरीदा है, जिसका इस्तेमाल पार्टी द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव से पहले प्रचार के वास्ते शुरू कर दिया जाएगा।
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी ने गाने के अधिकार को खरीद कर इसका हिंदी रूपांतरण -मन से हैं मुलायम पर इरादे लोहा.. के रूप में किया गया है। इसका इस्तेमाल लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार में किया जाएगा। इसे पहले पार्टी की वेबसाइट और फेसबुक पेज पर अपलोड किया जा चुका है।
गाने के बोल मुलायम सिंह यादव के शिक्षक व उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने तैयार किए हैं। इसे बॉलीवुड गायक जावेद अली ने गाया है।

Thursday, 21 November 2013

Where would so many Muslim soldiers in UP

mulayam singh yadav
लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के आदेश को अमल में लाने के लिए यूपी पुलिस को कम से कम छह हजार मुस्लिम सिपाही और 1505 दरोगा चाहिए। सपा के मुस्लिम प्रेम को देखते हुए पुलिस महकमा पहले से ही इस राह पर है। हालांकि थानों के सापेक्ष मुस्लिम सिपाही और दरोगा की पर्याप्त संख्या को लेकर संशय है।

गुरुवार को एनेक्सी के मीडिया सेंटर में एडीजी/आइजी कानून-व्यवस्था राजकुमार विश्वकर्मा और विशेष सचिव गृह वीरेश्वर सिंह ने मुस्लिम पुलिसकर्मियों के बारे में कोई सटीक जानकारी तो नहीं दी, लेकिन विश्वकर्मा ने यह जरूर कहा कि 'मुसलमान पुलिसकर्मियों की इतनी संख्या तो है ही कि हर थाने पर उनकी तैनाती की जा सके।' गौर करें तो महकमे में कभी जाति और मजहब के आधार पर पुलिसकर्मियों की गणना नहीं हुई। यूपी में कुल 1505 थाने हैं। यहां सिपाहियों के 2.10 लाख पद के सापेक्ष सिर्फ 96414 की ही तैनाती है। इसी तरह मुख्य आरक्षी के भी 49210 पदों के सापेक्ष सिर्फ 8859 और उपनिरीक्षक के करीब बीस हजार पद के सापेक्ष लगभग नौ हजार उपनिरीक्षक तैनात हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि मुसलमान पुलिसकर्मियों की पर्याप्त संख्या कहां से आयेगी।

खुद सपा सरकार ही यह दावा करती रही है कि सपा के अलावा बाकी सरकारों में पुलिस में मुसलमानों की भर्ती बहुत ही कम संख्या में हुई है। शासन स्तर पर थानाध्यक्षों की तैनाती के लिए पहले से यह व्यवस्था है कि 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 27 प्रतिशत पिछड़ी और आठ प्रतिशत अल्पसंख्यक थानेदारों की तैनाती की जाए। हालांकि यह आंकड़ा कभी दुरुस्त नहीं हुआ।

बसपा की सरकार में थानों में अनुसूचित जाति के थानेदार और सपा की सरकार में यादव कोतवालों की तादाद कुछ ज्यादा ही दिखती है। फिर आंकड़ों और आरक्षण का कोई मायने नहीं रहता है। जहां तक सिपाही और दरोगा की तैनाती में निर्धारण की बात है तो उसके लिए पुलिस अधीक्षकों को ही अधिकार है।