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Friday, 13 May 2016

बेनी प्रसाद वर्मा का कांग्रेस से मोहभंग, समाजवादी पार्टी में वापसी

पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने आज उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में खलबली मचा दी। कांग्रेस से सांसद तथा केंद्रीय मंत्री रहे बेनी प्रसाद वर्मा ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से आज लखनऊ में मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी में वापसी कर ली।

मुलायम सिंह यादव के पुराने साथी बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस में जाने के बाद उनके धुर विरोधी हो गये थे। आज इनके बीच करीब आधा घंटा की मुलाकात हुई। इसके बाद बेनी प्रसाद वर्मा ने फिर से समाजवादी पार्टी में शामिल होने का फैसला कर लिया। अब समाजवादी पार्टी उनको राज्यसभा भी भेज सकती है। समाजवादी पार्टी से जिन लोगों के नाम राज्यसभा के लिए चल रहे हैं उनमें बेनी प्रसाद वर्मा, माता प्रसाद पाण्डेय, अमर सिंह और पूर्व राज्यसभा सदस्य अखिलेश दास शामिल हैं। इसके अलावा सुभाष चंद्रा भी राज्यसभा जा सकते हैं।

प्रदेश में कुर्मियों की राजनीति करने वाले बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस में थे, लेकिन मुलायम सिंह यादव तथा समाजवादी पार्टी से उनका पुराना रिश्ता रहा है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे बेनी प्रसाद से समाजवादी पार्टी ने पार्टी में वापसी को कहा। इस बाबत उनको राज्यसभा का टिकट ऑफर किया गया। बेनी प्रसाद वर्मा को कांग्रेस ने लंबे समय से हाशिए पर रखा था। पार्टी में उनकी कोई पूछ नहीं हो रही है। इसी कारण से आज बेनी प्रसाद वर्मा ने मुलायम सिंह से उनके आवास पर भेंट की। इस भेंट के दौरान शिवपाल सिंह यादव भी मौजूद थे। बेनी प्रसाद वर्मा के साथ पूर्व मंत्री उनके बेटे राकेश वर्मा व राकिरनपाल सिंह भी पार्टी में शामिल हो गये। उनकी समाजवादी पार्टी में वापसी के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, संसदीय कार्यमंत्री आजम खां तथा शिवपाल सिंह यादव भी मौजूद थे।

समाजवादी पार्टी की नजर कुर्मी वोट बैंक पर भी है। बेनी प्रसाद वर्मा का बाराबंकी के साथ ही बहराइच तथा पास के क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। बेनी प्रसाद वर्मा कुर्मी जाती से आते हैं। वह पूर्वांचल की 25-40 सीटों पर प्रभाव डाल सकते हैं। उनकी सपा में वापसी पर हर सीट पर लगभग 5-10 हजार वोटों का फर्क पड़ेगा। बेनी प्रसाद वर्मा की उम्र भी काफी हो चुकी है। अब वह अपने बेटे राकेश वर्मा को राजनीति में स्थापित भी करना चाहते हैं। राकेश सपा सरकार में कारागार मंत्री रह चुके हैं। जब अखिलेश मंत्रिपरिषद में बदलाव की अटकलें तेज हैं तो बेनी ïबेटे के लिए मंत्री पद की डिमांड भी कर सकते हैं। इसके लिए जुलाई में होने वाले एमएलसी चुनावों के जरिये कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी बेनी प्रसाद वर्मा को राज्यसभा में भेजकर उनके कद का लाभ ले। समाजवादी पार्टी 2017 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हर कदम फूंक कर रख रही है। बेनी को राज्यसभा भेजने की तैयारी की बड़ी वजह कुर्मी वोट बैंक भी है।

समाजवादी पार्टी के मुखिया को कभी जमकर कोसने वाले बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के काफी चहेते थे। बेनी प्रसाद वर्मा यूपीए की सरकार में राहुल गांधी के चहेते हुआ करते थे। बेनी प्रसाद वर्मा ने उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावों में बेनी ने बड़े-बड़े वादे किये थे लेकिन सभी धरे के धरे रह गये। जिसके बाद से बेनी मुलायम सिंह को जमकर कोसा करते थे।

आजम भी हो गये मुरीद

बेनी प्रसाद वर्मा की समाजवादी पार्टी में वापसी के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में आजम खां ने कहा कि बेनी मजबूत नेता थे। जब आप पार्टी से गए थे तो बहुत दु:ख हुआ था। आजम ने कहा कि आज जब बेनी बाबू से मिला तो कहा आपने बहुत दिल दुखाया। बेनी क्यों गए बड़ी बहस का मुद्दा। मैं बेनी का समाजवादी पार्टी में स्वागत करता हूं। Read more http://www.jagran.com/

Thursday, 15 January 2015

उन्नाव में गंगा नदी में शव साक्षी महाराज ने डलवाये : आजम

उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री तथा समाजवादी पार्टी के फायर ब्रांड नेता आजम खां ने भाजपा सांसद साक्षी महाराज पर आज गंभीर आरोप लगाए हैं। रामपुर में आजम खां ने कहा कि दो दिन पहले उन्नाव में गंगा नदी में जो सौ से अधिक शव मिले हैं वो सभी भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने फिंकवायें है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से इस्तीफा मांगा है।

आजम खां ने कहा कि गंगा नदी को स्वच्छ बनाने का अभियान छेडऩे वाले ही गंगा नदी को गंदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्नाव में मंगलवार को गंगा नदी में जो सौ से अधिक शव मिले हैं, उनको उन्नाव से भाजपा के सांसद साक्षी महाराज ने ट्रक में भरकर गंगा नदी में डलवाये हैं। जिससे कि सूबे में सांप्रदायिक तनाव फैल सके। अब तो साक्षी महाराज को बताना ही पड़ेगा कि इतनी लाशें कहां से लाये।

इसके बाद आजम के निशाने पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी थे। नकवी को कल रामपुर की एक कोर्ट ने एक वर्ष के कारावास की सजा देने के बाद जमानत कर रिहा किया है। उन्होंने कहा कि नकवी में जरा भी नैतिकता नही है। अगर होती तो वो अब तक पद से इस्तीफा दे देते। उन्होंने कहा कि यह सवाल मोदी जी की राजनैतिक स्वच्छता का भी है। आजम खां ने नकवी को लेकर मोदी से सवाल भी पूछा कि क्या जिस मंत्री को क्रिमिनल एक्ट में सजा मिली हो वो कैबिनेट में रहेंगे। उनको अपने मंत्री से इस्तीफा मांग लेना चाहिए थे। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नहीं मांगते हैं तो फिर नकवी को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी में जरा भी नैतिकता नही है इसलिए तो उन्होंने रामपुर से कुछ भी लेना देना न होने के बाद भी कोठियों पर कब्जा जमा रखा है।

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Monday, 6 January 2014

Muzaffarnagar riot: no evidence in sting against azam khan

रामपुर, जागरण संवाददाता। यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खां ने कहा है कि उन्हे फांसी या उम्रकैद की सजा हो सकती है। मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से सात नोटिस मिले हैं। उन्हें फांसी मंजूर है, लेकिन गलत को सही नहीं कह सकते। 

जौहर यूनिवर्सिटी में लैपटॉप वितरण समारोह में आजम ने कहा कि जुल्म करवाने वाली ताकतों ने अदालतों का सहारा लिया है, हम मुजफ्फरनगर गए नहीं, किसी को छुड़ाने की सिफारिश नहीं की। फिर भी हम पर तमाम आरोप लगाए गए। हमें सुप्रीम कोर्ट से नोटिस मिले हैं। वह इससे घबराने वाले नहीं हैं। इसका मुकाबला करेंगे, उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। 

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर इशारा करते हुए कहा कि इंसानियत के सौदागर और हत्यारे को देश नहीं दिया जा सकता। चाय बेचने की बात कह कर लोगों की हमदर्दी लेने की कोशिश की जा रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर प्रहार करते हुए कहा कि अब दिल्ली वाले भी झाड़ू ले आए हैं। बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए बोले, हमने पत्थरों के हाथी नहीं बनवाए हैं। 

जांच समिति ने आजम को आरोपित करने वाले स्टिंग के रॉ फुटेज को देखा

लखनऊ, जागरण ब्यूरो। विधानसभा की जांच समिति ने सोमवार को मुजफ्फरनगर दंगे में नगर विकास मंत्री आजम खां को आरोपित करने वाले स्टिंग आपरेशन के रॉ फुटेज को देखा। हालांकि चार से पांच घंटे अवधि के इस रॉ फुटेज के अवलोकन की कार्यवाही सोमवार को पूरी नहीं हो सकी। अगली बैठक के लिए समिति ने वैसे तो कोई तारीख तय नहीं की है, लेकिन माह के आखिरी सप्ताह में यह बैठक होने की संभावना है। रॉ फुटेज के अवलोकन में जुटी समिति को प्रथम दृष्टया आजम खां पर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

बताया जाता है कि रॉ फुटेज का जितना भी अंश सोमवार को देखा गया, उसके आधार पर प्रथम दृष्टया यही प्रतीत हुआ कि इसमें दिखाए गए किसी भी शख्स ने साफ तौर पर आजम खां का नाम नहीं लिया। मिली जानकारी के अनुसार समिति की बैठक में यह तय हुआ है कि एक बार रॉ फुटेज बारीकी से देखने के बाद स्टिंग आपरेशन में शामिल सभी लोगों को तलब किया जाएगा। जिन पुलिस अधिकारियों से हुई बातचीत को दिखाया गया है, उन्हें व आपरेशन को अंजाम देने वाले सभी को कमेटी के समक्ष आकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। 

बैठक में शामिल एक सदस्य के अनुसार समिति इस बात को लेकर पूरी सावधानी बरत रही है कि इसकी कार्यवाही ऐसी हो कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पूरी तरह अनुपालन हो। वैसे समिति ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि स्टिंग आपरेशन करने वाला न्यूज चैनल अब जांच में सहयोग कर रहा है। 

Thursday, 26 December 2013

Jayaprada to fight election on congress ticket from Rampur


मुरादाबाद [ज्ञानेंद्र त्रिपाठी]। फिल्मी दुनिया से आकर आजम खां के शहर रामपुर की सियासी फिल्म बदलने का माद्दा रखने वाली सांसद जयाप्रदा की तीसरी सियासी फिल्म का ट्रेलर अब दिखने लगा है। कल तक आजम द्वारा नवाबी दौर की तोड़ी गई इमारतों का जो मुद्दा आजम और नवेद के बीच था उसे अब जयाप्रदा ने हथिया लिया है। उनकी नजर नवेद की मां की कांग्रेसी सीट पर भी है, जिनको साइकिल पर सवार होकर दो बार जयाप्रदा मात दे चुकी हैं। अब साइकिल नहीं है। सो, कांग्रेस के हाथ का साथ पा कर नई पारी खेलना चाहती हैं और कांग्रेसी सुर में सुर मिलाने लगी हैं।

रामपुर की संसदीय सीट पर अर्से तक नवाबी खानदान के साथ कांग्रेसी कब्जा रहा है तो विधानसभा की सीट पर आजम का दबदबा। पर, वर्ष 2004 के संसदीय चुनाव में यहां की हवा ही बदल गई। अमर सिंह के साथ फिल्मी दुनिया से जयाप्रदा आईं और आजम के नेतृत्व में चुनाव लड़ नवाबी सीट पर काबिज हो गई।
राजनीति की इस दोतरफा की जमीन पर पहली दफा तीसरे चेहरे का उदय हुआ। यहां पर तीसरी पार्टी भाजपा थी, लेकिन उसमें उतनी धार नहीं। पर, 2009 के संसदीय चुनाव में आजम खां ने जयाप्रदा का विरोध किया, लेकिन सपा ने आजम को ही बाहर कर दिया और जयाप्रदा ने आजम खां के विरोध के बावजूद नूरबानो को लगातार दूसरी बार पराजित कर सीट पर कब्जा जमा लिया। 

इस तरह जयाप्रदा ने एक बार आजम के साथ तो दूसरी दफा उनके विरोध के बावजूद अपना राजनीतिक रसूख बनाए रखा, लेकिन दोनों बार सपा साथ थी। अब उनके विरोधी आजम हैं, लेकिन उनके साथ कोई पार्टी नहीं है, क्योंकि सपा ने उन्हें निकाल दिया है। ऐसे में जयाप्रदा ने अपनी नई सियासी फिल्म के लिए बैनर खोजना शुरू कर दिया, जिसका संकेत पिछले दिनों तब मिला जब वह रामपुर आईं और राहुल गांधी का गुणगान कर गईं।
नतीजा यह रहा कि राहुल रैली में आए तो कांग्रेस नेत्री के रूप में जयाप्रदा का बैनर भी लगा। इस पर किसी ने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। हां, यह बात फैलने लगी कि इस बार नूरबानो की जगह जयाप्रदा कांग्रेस से चुनाव लड़ेंगी। इसे बल तब मिला जब लोकसभा चुनाव के लिए मुरादाबाद से कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम के पैनल में नूरबानो का नाम भेजा गया, जो रामपुर से लड़ती रही हैं। 

बुधवार को रामपुर पहुंची जयाप्रदा ने एक बार फिर खुद इस कयास को पूरा बल दे दिया। उन्होंने घोषणा की कि आजम द्वारा तुड़वाए गए नवाबी दौर के गेट को वह सांसद निधि से बनवाएंगी। अब तक गेट की विधिक व उच्चस्तरीय लड़ाई नूरबानो के बेटे नवेद लड़ते रहे हैं, जो आजम के साथ साथ जयाप्रदा के भी विरोधी रहे हैं। पर, अब इस पूरे मामले को जयाप्रदा भी राष्ट्रपति तक ले जाने व दोषियों को दण्डित कराने की कसम खा रही हैं, जो वैचारिक रूप में सही आजम के विरोधी और आपस में भी सियासी विरोधी नवाब खानदान और जयाप्रदा को एक मंच पर ला दिया है। फिर, जयाप्रदा का यह कहना कि वह रामपुर से ही चुनाव लड़ेंगी और किसी पार्टी से लड़ेंगी, इस बात का साफ संकेत हैं कि सबकुछ ठीक रहा तो जयाप्रदा की तीसरी सियासी फिल्म कांग्रेस के पर्दे पर ही प्रदर्शित होगी, क्योंकि सपा में उनकी राह में आजम रोड़ा हैं तो भाजपा से कोई नजदीकी अभी नहीं दिख रही है। 

साथ ही आजम से पार पाने को उनसे अधिक कहीं नवाब खानदान बेचैन है। दोनों ही इस समय एक सुर से आजम पर निशाना साधे हुए हैं, जो दोनों के बीच सियासी समझौते के संकेत दे रहा है, जिसपर जयाप्रदा हां तो नहीं कहती हैं, लेकिन ना भी नहीं बोलती हैं, जिसे आजम खां के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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Wednesday, 13 November 2013

Azam says, 'Yes, I was behind riots'

Muzaffarnagar riots
लखनऊ, जागरण ब्यूरो। अपनी हरकतों से लगातार सरकार और पार्टी को मुश्किलों में डालने वाले कद्दावर मंत्री आजम खां ने बुधवार को खुद को 'बैड मैन' दर्शाते हुए कहा कि वह दुनिया के सबसे बुरे आदमी हैं। उन्होंने अपने विरोधियों पर तीर चलाने के साथ ही मीडिया व नौकरशाही पर भी जमकर हमले किए।
स्थानीय निकाय अध्यक्षों के सम्मेलन में बोलते हुए आजम ने अपने ऊपर लगने वाले आरोपों के लिए मीडिया को जिम्मेदार ठहराया और खूब तंज कसे। फिर बारी आई अफसरों की, जिन्हें सरकार योजनाओं को अमली जामा न पहनाने के लिए उन्होंने जिम्मेदार ठहराया। दिलचस्प यह रहा कि लगे हाथ आजम ने मंच पर बैठे राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के निदेशक जेपी सिंह पर बैट्री चालित रिक्शा खरीद योजना पर कुंडली मार कर बैठने का आरोप भी जड़ दिया। कहा, 'यह तो माशाअल्लाह हैं, गरीबों के रिक्शा खरीद के लिए 350 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं लेकिन इन पर तो मैं कार्रवाई भी नहीं कर सकता।' अफसरों द्वारा बजट जारी करने के लिए रिश्वत मांगे जाने और नहीं देने पर योजनाएं अटकाने के आरोप पर आजम ने निकायों के अध्यक्षों से एकजुट होकर रिश्वत का विरोध करने का भी आह्वान किया। निकाय अध्यक्षों ने जिलों में डीएम, एडीएम, एसडीएम से लेकर तहसीलदार के खिलाफ गंभीर आरोप भी लगाए। आजम ने अध्यक्षों को भी अदब में लेते हुए कहा कि 'आप हमारी लाज रखो, हम आपकी लाज रखेंगे'।

आजम के बोल
'मीडिया की नजर में दुनिया की सारी बुराई हममें है। हम कामचोर हैं, देशद्रोही हैं, हम दंगाई हैं। दंगा कराते हैं, हम मंत्री होते हुए प्रदेश और देश की जनता पर बोझ हैं, ईमानदारी से कुतुबमीनार और ताजमहल भी बनवा दे तब भी लोग उसमें कमियां निकाल कर बेईमान ठहरा देंगे।.. सोशल मीडिया की आड़ में अफसर भी मुझे बेईमान ठहराने में जुटे हैं।' आजम ने अपनी सफाई में अभिनेता दिलीप कुमार, लता मंगेशकर से लेकर सचिन तेंदुलकर जैसे कई हस्तियों को जोड़कर तमाम बातें कहीं।

अध्यक्षों ने कहा
निकायों का विकास कैसे करें। एडीएम, एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक योजना स्वीकृत करने के लिए रिश्वत मांगते हैं। नहीं देने पर कोई न कोई पेंच फंसाकर योजना को अटका देते हैं। -जगदीश सिंह इंदौलिया, नगर पंचायत, किरावली, आगरा

निकायों में अफसरों की तैनाती में सरकार भेदभाव कर रही है। सपा समर्थक निकायों में ईओ की तैनाती की जाती है जबकि अन्य दलों से जुड़े निकायों में एसडीएम, एडीएम और तहसीलदारों को तैनात कर अवैध वसूली को बढ़ावा दिया जा रहा है। सभी निकायों में ईओ की तैनाती की जाए। -छट्ठे लाल निगम, नगर पंचायत रुद्रपुर, देवरिया

Source- News in Hindi