नई दिल्ली। आतंकी गुट लश्कर-ए-तैयबा मुजफ्फरनगर में हुए दंगों का फायदा अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए उठाना चाहता था और उसमें उसको आंशिक सफलता भी मिलने लगी थी, जब दंगा पीड़ित दो लड़के आतंकवाद की राह पर चलने को तैयार हो गए थे।
हरियाणा के मेवात से पकड़े गए लश्कर से संबंध रखने वाले दो लोगों से पुलिस पूछताछ के दौरान कई अन्य अहम जानकारियां भी सामने आई हैं। एक अंग्रेजी समाचार में दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से प्रकाशित समाचार के अनुसार, आतंकी गुट लश्कर की नजर मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों पर थी। पकड़े गए लोगों ने अपने पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं के कहने पर मुजफ्फरनगर और शामली के राहत शिविरों का दौरा कर दंगा पीड़ित कुछ युवकों से संपर्क साध, लश्कर में शामिल करने के लिए उनका ब्रेनवॉश करने की कोशिश की थी। उनकी साजिश भरी बातों के झांसे में आकर दो लड़के आतंकी गुट लश्कर में शामिल होने के लिए तैयार हो गए थे। स्पेशल सेल ने इन दोनों लड़कों की पहचान कर उन्हें ढूंढ निकाला। पुलिस ने इन दोनों लड़कों की गिरफ्तारी नहीं की है, क्योंकि वह इन्हें सरकारी गवाह बना अदालत में पेश कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने दिसंबर में हरियाणा के मेवात क्षेत्र में आतंकियों के छिपे हुए होने की सूचना मिलने पर वहां छापेमारी की थी, हालांकि आतंकी वहां से भाग निकलने में सफल रहे थे। इन आतंकियों की तलाश के दौरान पुलिस ने इनसे संबंध रखने वाले दो लोगों को मेवात से गिरफ्तार किया था। पुलिस इस साजिश के मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश कर रही है।
पुलिस पूछताछ में दोनों ने लश्कर के लिए काम करने की बात कबूली थी। उन्होंने 4 दिसंबर को विधानसभा के लिए हो रहे मतदान के दौरान दिल्ली में आतंकी हमले की साजिश का भी खुलासा किया था।
दोनों ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह अपने आकाओं के कहने पर राहत शिविरों में रह रहे मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के सपंर्क में थे। उनका प्रयास था कि ज्यादा से ज्यादा पीड़ित लश्कर से जुड़े, जिससे देश में इस आतंकी गुट की जड़ों को मजबूत किया जा सके।
Source: News in Hindi
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