मामले से बरी किए जाने की याचिका अमित शाह ने इस वर्ष की शुरुआत में यह कहते हुए लगाई थी कि उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया है। सुनवाई के लिए यह याचिका इस महीने के मध्य में आई थी। सीबीआई ने आवेदन का यह कहते हुए विरोध किया था कि सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति की मुठभेड़ के मामले में शामिल षड्यंत्रकारियों में शाह भी हैं, इसलिए उन्हें बरी नहीं करना चाहिए।
मामला मुंबई में स्थानांतरित होने के एक साल बाद भी अभी तक स्पेशल सीबीआई कोर्ट विभिन्न आवेदनों की सुनवाई कर रही है और इस मामले में ट्रायल अभी तक शुरू नहीं हुआ है। सीबीआई ने फर्जी मुठभेड़ के दो मामलों में 37 अन्य लोगों के साथ ही कई पुलिस अधिकारियों और शाह के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की है, जो मुठभेड़ के वक्त गुजरात के गृहमंत्री थे।
इस मामले में करीब-करीब सभी आरोपियों को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। गुजरात एटीएस ने नवंबर 2005 में गांधीनगर के पास सोहराबुद्दन और उसकी पत्नी कौसर बी को कथिततौर पर मुठभेड़ में मार गिराया था।
Source: Hindi News and Newspaper
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