गौरतलब है कि हाईकोर्ट के जस्टिस के. कानन की एकल पीठ ने डेरे के अनुयायी रहे हंसराज चौहान की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को इस सिलसिले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। याचिका में आरोप था कि डेरे के भीतर करीब 400 युवाओं को नपुंसक बनाया गया है। सीबीआई को शनिवार को मामला दर्ज करना था लेकिन तकनीकी कारणों के चलते वह ऐसा नहीं कर सकी।
चौहान का दावा था कि डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम डेरे में तैनात डॉक्टरों की मदद से अनुयायियों को नपुंसक बनाता है। वह झूठी उम्मीद दिलाता था कि ऐसा करने से वे डेरा प्रमुख के जरिए ईश्वर को प्राप्त कर लेंगे।
हाईकोर्ट ने इस बात को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने इससे पहले चौहान की चिकित्सकीय जांच करवाने के निर्देश दिए थे। चंडीगढ़ के सेक्टर 16 में गवर्नमेंट मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने चौहान को नपुंसक बनाए जाने की पुष्टि हुई थी। इस मामले में चौहान ने सीबीआई जांच की मांग की थी।
इसी मामले में राज्य सरकार भी हाईकोर्ट में एक रिपोर्ट रख चुकी है। इसमें डेरा प्रमुख से जुड़े सात लोगों के बयान रिकॉर्ड किए गए थे, जिसमें सब ने पुष्टि की थी कि उनको नपुंसक बनाया गया था।
अपने आश्रम में अनुयायियों को जबरन नपुंसक बनाए जाने के मामले में सीबीआइ ने सोमवार को डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है।
Source: Hindi News and Newspaper
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