आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई में आज
सुप्रीम कोर्ट ने 130 पन्नों का फैसला पढ़कर सुनाया है। राजस्थान रॉयल्स के
सह-मालिक राज कुंद्रा और श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन पर कोर्ट ने
कड़ा रवैया अपनाया है। वहीं, इस फैसले में श्रीनिवासन को थोड़ी बहुत राहत
जरूर मिली लेकिन कोर्ट ने उन्हें भी जमकर घेरा।
कोर्ट ने बीसीसीआइ को 6 हफ्ते के अंदर बीसीसीआइ चुनाव कराने के आदेश दिए
हैं लेकिन इसमें अध्यक्ष पद के लिए श्रीनिवासन के खड़े होने पर रोक लगा दी
है। कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआइ ने आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी मामले
में जांच करते वक्त जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। कोर्ट के
मुताबिक चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स के भविष्य पर फैसला एक तीन
सदस्यीय स्वतंत्र समिति ही छह महीनों के अंदर करेगी, बीसीसीआइ नहीं।
कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि राज कुंद्रा और गुरुनाथ मयप्पन सट्टेबाजी के
दोषी हैं। कोर्ट ने कहा आइपीएल के नियमों के मुताबिक टीम के अधिकारियों
द्वारा की गई हेराफेरी और गैरकानूनी कामों का सीधा जुड़ाव फ्रेंचाइजी से
होता है। कोर्ट के मुताबिक खेल तभी साफ-सुथरा रह सकता है जब वो धोखे और
गैरकानूनी कामों से दूर रखा जाए। कोर्ट के मुताबिक बीसीसीआइ के पास दोषियों
को सजा देने का अधिकार तो है लेकिन इस मामले को अंजाम देने के लिए लोगों
का चयन बीसीसीआइ पर नहीं छोड़ा जा सकता। उधर, जस्टिस मुकुल मुद्गल ने कहा
है कि उनकी समिति ने श्रीनिवासन को क्लीन चिट दी थी और कोर्ट ने भी इस बात
पर मुहर लगा दी है।
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