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Tuesday, 24 May 2016

NEET अध्यादेश को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी, अगले साल से होगी एक परीक्षा

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नीट अध्यादेश पर मंजूरी के साथ ही राज्य बोर्डों के छात्रों को फिलहाल राहत मिल गई है। छात्रों को अब 24 जुलाई को होने वाले नीट परीक्षा में शामिल नहीं होना होगा। स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने कहा मीडिया के कुछ हिस्सों में खबरें आ रहीं हैं कि नीट को टाल दिया गया है। लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य बोर्डों के छात्रों को महज इस साल नीट परीक्षा से छूट हासिल है। अगले वर्ष से छात्रों को नीट परीक्षा में शामिल होना होगा।

सात राज्यों का NEET के तहत आने का फैसला

 केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि 1 मई से नीट लागू हो गया है। राज्यों ने अपनी समस्याएं अलग पाठ्यक्रम और क्षेत्रीय भाषा को लेकर बताई थी। जो राज्य चाहें NEET के दायरे में आ सकते हैं। नड्डा ने बताया कि सात राज्यों की परीक्षा नीट के तहत हो रही है। उन्होंने कहा कि यूपी नीट से बाहर है। जबकि बिहार NEET के तहत परीक्षा में शामिल होगा। सभी निजी संस्थान NEET के दायरे में होंगे। इस साल दिसबंर में पीजी की परीक्षा NEET के तहत ही होगी।

NEET से जुड़ी खास बातें


1.राष्ट्रपति ने NEET अध्यादेश को मंज़ूरी दी
2. इसी साल से NEET लागू
3. राज्यों को NEET से एक साल की छूट
4.राज्य चाहें तो NEET के तहत आ सकते हैं
5. इस साल से प्राइवेट कॉलेज NEET के दायरे में

अध्यादेश मंजूरी के खिलाफ चुनौती

संकल्प एनजीओ के प्रमुख डॉक्टर गुलशन ने कहा कि वो नीट अध्यादेश की मंजूरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे। डॉक्टर गुल्शन के वकील अमित कुमार ने कहा कि ‘इस तरह का अध्यादेश कानून के अंतर्गत नहीं आता। साथ ही ये संविधान और शक्ति के विभाजन के खिलाफ है। न्यायपालिका का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है। इसे एक अध्यादेश के जरिए हटाया नहीं सकता है। कोर्ट का निर्णय केंद्र और राज्यों को सुनने के बाद लिया गया था। लिहाजा ये अध्यादेश कानूनी तौर पर सही नहीं है। इसके पीछे निहित स्वार्थ छिपा है। एक राष्ट्र और एक परीक्षा तो वर्तमान युग की की जरूरत है। राज्य बोर्ड व पाठ्यक्रम केवल एनसीईआरटी के अनुसार है। अध्यादेश लाने से पहले उनके पास काफी समय था। Read more http://www.jagran.com/

Friday, 13 May 2016

राहुल, केजरी को SC का झटका, चलता रहेगा आपराधिक अवमानना का केस

सुप्रीम कोर्ट ने आज राहुल, केजरीवाल और स्वामी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि भारतीय दंडसंहिता की धारा 499 और 500 संवैधानिक है। कोर्ट के इस फैसले के बाद इन तमाम नेताओं पर विभिन्न निचली अदालत में चल रहे अपराधिक अवमानना के मुक़दमों पर रोक नहीं लगेगी।

इनके ख़िलाफ़ दायर मामलों में विभिन्न अदालतों में अब सुनवाई होगी। इस धारा को हटाने के लिये सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तमाम याचिकाकर्ताओं के खिलाफ देश के विभिन्न अदालतों में दायर अपराधिक अवमानना के मामलों की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। आज के आदेश के बाद अब उन तमाम मुक़दमों की सुनवाई दोोबारा हो सकेगी।

हालांकि अभी भी उन तमाम मुक़दमों की सुनवाई पर अगले 8 हफ़्तों तक तकनीकी कारणों से रोक क़ायम रहेगी।इस फैसले को सुनाते हुये जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा की संविधान की धारा 19 (1) A में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की गई है पर पर ये पूर्ण अधिकार नहीं है और व्यक्ति के सम्मान की रक्षा के लिये कुछ चेक-बैलेंस का होना आवश्यक है।  Read more http://www.jagran.com/

Wednesday, 11 May 2016

अग्निपरीक्षा में पास हुए हरीश, देवभूमि में फिर लौटेगा रावत राज

मंगलवार को उत्तराखंड विधानसभा में हुए बहुमत परीक्षण के नतीजों पर आज सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटाने का औपचारिक ऐलान कर दिया है और इसके साथ ही डेढ़ माह से राज्य में चल रहे सियासी संकट का भी अंत हो गया। कोर्ट ने शक्ति परीक्षण के नतीजों में पाया कि सरकार के पक्ष में 33 मत पड़े जबकि 28 मत सरकार के विरोध में पड़े। इस बीच कैबिनेट ने उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की है।

कोर्ट ने कहा रावत कर सकते हैं पदभार ग्रहण

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हरीश रावत मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा, " शक्ति परीक्षण के दौरान वोटिंग के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमिताएं हुई।" अर्टानी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उत्तराखंड में हरीश रावत ने शक्ति परीक्षण में बहुमत हासिल कर लिया है, हम उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हचा रहे हैं।

राहुल बोले, लोकतंत्र की जीत

कोर्ट के आदेश बाद देहरादून में कांग्रेस कार्यालय पर जश्न का माहौल है। बताया जा रहा है कि हरीश रावत कुछ देर बाद मीडिया को संबोधित करेंगे। वहीं इस मामले पर ट्विटर के जरिए प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, " उन्होंने बहुत खराब कार्य किया, हमने अपना सर्वश्रेष्ठ किया, उत्तराखंड में लोकतंत्र की जीत हुई।"



    18 मार्च को राज्य विधानसभा में विनियोग विधेयक पर विपक्षी पार्टी भाजपा ने मत विभाजन की की मांग की जिसका कांग्रेस के नौ विधायकों ने समर्थन किया,जिसके बाद प्रदेश में राजनैतिक संकट पैदा हो गया।
    राज्यपाल ने हरीश रावत सरकार को 28 मार्च को बहुमत साबित करने को कहा।

    इसके बाद एक निजी चैनल ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया जिसमें मुख्यमंत्री रावत खुद 28 मार्च को होने वाले विश्वास मत हासिल करने के लिए पार्टी के बागी विधायकों के साथ कथित तौर पर सौदेबाजी करते नजर आए।
    केंद्र ने इसी को आधार बनाते हुए फ्लोर टेस्ट से एक दिन यानि 27 मार्च को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।

    कांग्रेस ने राष्ट्रपति शासन के खिलाफ उत्तराखंड हाई कोर्ट की एकल पीठ में अपील की। कोर्ट ने अपने फ़ैसले में बहुमत साबित करने की तारीख आगे बढ़ाकर 31 मार्च कर दी।
    राज्य द्वारा दायर की गई अपील के विरोध में केंद्र ने उत्तराखंड हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील की जिसके बाद कोर्ट ने 30 मार्च को शक्ति परीक्षण के अपने ही आदेश पर रोक लगा दी और सुनवाई की तारीख 6 अप्रैल तय कर दी।
    नैनीताल हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया और कहा कि राज्य में 18 मार्च से पहले की स्थिति बनी रहेगी
    केंद्र ने इस फ़ैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की और बहुमत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया।

    इसके साथ कोर्ट ने हरीश रावत को 29 अप्रैल को विधानसभा में बहुमत साबित करने का भी आदेश दे दिया। कोर्ट ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त किए जाने के आदेश को बरकरार रखा।
    6 मई को सुप्रीम कोर्ट कहा कि हरीश रावत 10 मई को फ्लोर टेस्ट देंगे और इस दौरान कांग्रेस के 9 बागी विधायक वोटिंग में हिस्सा नहीं लें सकेंगे।

    10 मई को राज्य के मुख्य सचिव की देखरेख में उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हुआ मतों को सीलबंद कर सुप्रीम कोर्ट के लिए भेज दिया गया

    11 मई 2016 को सुप्रीम ने पाया कि रावत सरकार के पक्ष में 33 और विपक्ष में 28 मत मिले हैं और इस तरह उत्तराखंड में चल रहे सियासी संकट का अंत हो गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश कर दी।  Read more http://www.jagran.com/

अमिताभ बच्चन को लगा सुप्रीम कोर्ट से झटका, जानें- क्या सुनाया फैसला

 बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को 15 साल पुराने एक इनकम टैक्स के मामले में सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग को टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' विवाद में अभिनेता अमिताभ बच्चन की आय का फिर से आंकलन करने के आदेश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाई है जिसमें अमिताभ को साल 2001 में टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' की कमाई पर टैक्स में छूट दी गई थी।

जुलाई 2012 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अमिताभ बच्चन को केबीसी की कमाई में 30 फीसद की छूट दी थी। अमिताभ पर इस शो से जुड़ी कमाई पर 1.66 करोड़ रुपए का टैक्स बकाया है। आयकर विभाग ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अमिताभ बच्चन को शो का कलाकार होने कारण टैक्स में छूट की अनुमति दी थी।

पनामा पेपर्स में भी आया नाम

गौरतलब है कि टैक्स हेवन देश कहे जाने वाले पनामा की लॉ फर्म मोसेक फोंसेका के खुफिया दस्तावेज लीक हुए थे। इन दस्तावेजों में कई भारत के 500 लोगों के नाम थे। जिनमें अमिताभ बच्चन और उनकी बहू एश्वर्या राय बच्चन का नाम भी शामिल था।

पनामा पेपर्स मामले में खुलासा हुआ था कि अमिताभ बच्चन ऑफ-शोर कंपनियों की बोर्ड मीटिंग्स में शामिल होते थे। वह इसके लिए टेलीफोनिक कान्फ्रेंस का सहारा लेते थे। इस बारे में दो दस्तावेज जारी किए गए थे। हालांकि अमिताभ बच्चन ने इन आरोपों को खारिज किया है। Read more http://www.jagran.com/

Wednesday, 13 April 2016

SC का केंद्र सरकार से तल्ख सवाल, सूखे को आपदा क्यों नहीं मानते ?

आजादी के करीब 69 साल के बाद भी भारतीय कृषि को जिस लक्ष्य को हासिल करना चाहिए था उस लक्ष्य से हम कोसों दूर हैं। वजह बहुत से हैं जिनमें कुछ सरकारी नाकामी है तो कुछ प्रकृति की मार। देश के करीब 10 सूबे सूखे की चपेट में हैं। लोगों को पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। तो किसान प्यासी धरती को देखकर चिंता में डूबे हुए हैं उनका क्या होगा। इन सबके बीच देश की सर्वोच्च अदालत ने सरकार से सवाल किया कि आप लोग सूखे से निपटने के लिए बड़ी बड़ी योजनाओं की बात तो करते हैं। लेकिन जमीन पर आप लोगों के प्रयास नजर क्यों नहीं आते हैं। क्यों नहीं सरकार प्राकृतिक आपदाएं जिनमें सूखा शामिल है उसे डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के दायरे में क्यों नहीं लाते हैं। इस तरह के कदम उठाने में आप को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल कई राज्य सूखे का सामना करना कर रहे हैं लेकिन उन राज्यों ने अपने आपको सूखाग्रस्त राज्य नहीं घोषित किया है। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इस मामले में उनके हाथ बंधे हुए हैं। सूखा राज्य सरकारों के कार्यक्षेत्र में आता है लिहाजा वो किसी राज्य पर दबाव नहीं बना सकते हैं। केंद्र सरकार के जवाब पर अदालत ने कहा कि ये तो आश्चर्य की बात है। लोग पीने के पानी की कमी से परेशान हैं जिसे आप लोग भी रोज देख रहे हैं फिर भी आपका ये कहना कि केंद्र सरकार दबाव नहीं डाल सकती समझ के परे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए एडिश्नल सॉलीसिटर जनरल पी एस नरसिंहा ने जब ये कहा कि सूखे से निपटने के लिए कोई वैधानिक व्यवस्था नहीं है जिसकी मदद से केंद्र सरकार दखल दे सके। इस जवाब पर सु्प्रीम कोर्ट ने कहा कि आप नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के जरिए सूखे से निपटने के लिए प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं। अदालत के इस सवाल पर केंद्र की तरफ से दलील देते हुए एडिश्नल सॉलीसिटर जनरल ने कहा कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट में सूखे का साफ तौर पर जिक्र नहीं हैं, बल्कि फसलों के नुकसान पर मुआवजा देिया जाने की व्यवस्था है।

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो सूखे से प्रभावित हुए लोगों की संख्या और राज्यों के बारे में जानकारी दे। केंद्र ने कहा कि वो 19 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में सूखे से संबंधित पूरा ब्यौरा अदालत को मुहैया करा देंगे। Read more http://www.jagran.com

Thursday, 22 January 2015

आइपीएल मामलाः श्रीनि को करारा झटका, मुश्किल में मयप्पन-कुंद्रा

आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई में आज सुप्रीम कोर्ट ने 130 पन्नों का फैसला पढ़कर सुनाया है। राजस्थान रॉयल्स के सह-मालिक राज कुंद्रा और श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन पर कोर्ट ने कड़ा रवैया अपनाया है। वहीं, इस फैसले में श्रीनिवासन को थोड़ी बहुत राहत जरूर मिली लेकिन कोर्ट ने उन्हें भी जमकर घेरा।

कोर्ट ने बीसीसीआइ को 6 हफ्ते के अंदर बीसीसीआइ चुनाव कराने के आदेश दिए हैं लेकिन इसमें अध्यक्ष पद के लिए श्रीनिवासन के खड़े होने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआइ ने आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी मामले में जांच करते वक्त जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। कोर्ट के मुताबिक चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स के भविष्य पर फैसला एक तीन सदस्यीय स्वतंत्र समिति ही छह महीनों के अंदर करेगी, बीसीसीआइ नहीं।

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि राज कुंद्रा और गुरुनाथ मयप्पन सट्टेबाजी के दोषी हैं। कोर्ट ने कहा आइपीएल के नियमों के मुताबिक टीम के अधिकारियों द्वारा की गई हेराफेरी और गैरकानूनी कामों का सीधा जुड़ाव फ्रेंचाइजी से होता है। कोर्ट के मुताबिक खेल तभी साफ-सुथरा रह सकता है जब वो धोखे और गैरकानूनी कामों से दूर रखा जाए। कोर्ट के मुताबिक बीसीसीआइ के पास दोषियों को सजा देने का अधिकार तो है लेकिन इस मामले को अंजाम देने के लिए लोगों का चयन बीसीसीआइ पर नहीं छोड़ा जा सकता। उधर, जस्टिस मुकुल मुद्गल ने कहा है कि उनकी समिति ने श्रीनिवासन को क्लीन चिट दी थी और कोर्ट ने भी इस बात पर मुहर लगा दी है।

Monday, 19 January 2015

शारदा चिट फण्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट गई प.बंगाल सरकार

शारदा चिट फण्ड मामले में पश्चिम बंगाल की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए तृणमूल सरकार ने केंद्र सरकार पर परेशान करने का आरोप लगाया है। राज्य सरकार ने कहा है कि केंद्र की एनडीए सरकार सीबीआइ द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को परेशान कर रही है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार यानि 22 जनवरी को होगी। 

गौरतलब है कि इस मामले की जांच कर रही सीबीआइ तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों व मंत्रियों को समन भेज उनसे पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा कई नेताओं के ठिकानों पर छापेमारी भी हुई है। 

Monday, 15 December 2014

No exam of third language in 2014-15: KVS to SC

The affidavit in this regard was filed by the KVS, a day before the apex court is likely to take up the petition which had questioned the Centre's decision to do away with German as the third language.
  
The KV, in its affidavit, said that the Central Board of Secondary Education (CBSE) has also been informed about its decision which was taken at its 99th meeting held on October 27, 2014.
  
In support of its decision, the KV has annexed the correspondence with the CBSE in its affidavit. The affidavit and the annexures have been served to advocate Reena Singh who is appearing for a group of parents of KV students.
  
The KV's letter to the CBSE     said this arrangement to exempt students from appearing in third language in class eight is in conflict with the scheme of studies prescribed by the Board.
  
"It is expected that all the students would have studied three languages upto class eight. Those students who could not clear the third language in class eight, and have been promoted to class nine, shall be examined by the school concerned at the end of class nine in the same syllabus and text books are prescribed for class eight.

Source: Hindi News and Newspaper

Friday, 5 December 2014

Pakistan appoints new Chief Election Commissioner

Rajwana said Islamuddin Shaikh of Pakistan Peoples Party (PPP) proposed the name of Justice Khan and it was supported by all party members during the meeting of the committee.
  
Members of Imran Khan's Pakistan Tehreek-i-Insaf (PTI) did not attend the meeting. PTI members have refrained from attending meetings of the parliamentary panel since party legislators resigned en masse at the peak of their protests in Islamabad in August. Justice Khan, who belongs to Abbottabad in Khyber Pakhtunkhwa, is the Chief Justice of Federal Shariat Court and he retired as a judge of the Supreme Court in 2011.
  
He was among the Supreme Court judges who had refused to take oath under the Provisional Constitution Order after then military ruler Pervez Musharraf imposed emergency in 2007.
  
He was also a member of the bench which gave a decision in the famous National Reconciliation Ordinance case. Justice Khan was the only member who gave a "partial dissenting note," according to local media. The appointment comes after the Supreme Court had set a December 5 deadline for the appointment of a permanent CEC.   

The apex court had threatened on Tuesday it would consider issuance of notices against Prime Minister Nawaz Sharif and Leader of the Opposition in the National Assembly Syed Khursheed Shah on December 8 if the two leaders failed to appoint a permanent CEC by the deadline. The CEC office had been vacant for over 16 months after the retirement of Fakhruddin G Ibrahim.

Sunday, 30 November 2014

Israeli government approves new bill to detain asylum seekers

The bill proposal, called "The Infiltration Prevention Act," is the third formulation of the bill, the two previous versions having been struck down by the country's Supreme Court, for the alleged infringement upon the migrants' basic human rights.

According to the bill, once asylum seekers enter Israel, they would be sent to a prison called Saharonim, and from there, they would be brought to the Holot detention centre in the southern Negev desert for a period of up to 20 months.

The Supreme Court, Sep 22 disqualified the government policy, which allowed the detention of illegal migrants for up to a year without trial. In 2013, the Supreme Court had struck down the first formulation of the bill, which had allowed the authorities to lock migrants up for a period of up to three years without trial.

Following the approval of the government, the bill would be transferred, for discussion, to the Knesset (parliament) committee for Interior Affairs and then put to several rounds of voting in the Knesset plenum.

According to Israeli authorities, there are currently about 48,000 African migrants who had entered the country without permits across the Egypt-Israel border. Most of them have from the war-torn African countries of South Sudan and Eritrea.

 About 2,000 illegal migrants are currently held at the Holot facility. Israeli authorities consider the migrants to be a risk to the Jewish character of the state. On the other hand, harsh measures taken against the migrants are criticised by left-wing protesters and activists.

Monday, 13 January 2014

Second law intern victim approches SC

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली दूसरी लॉ इंटर्न ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने जज के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए ऐसे मामलों में सुनवाई के लिए एक मैकेनिज्म बनाने की भी मांग की है। इस पर अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

वकील वृंदा ग्रोवर ने पीड़िता की ओर से याचिका दायर कर उसके लिए न्याय की मांग की है। उन्होंने याचिका में पांच दिसंबर को कोर्ट द्वारा पूर्व जजों के खिलाफ शिकायत पर सुनवाई न करने के फैसले को चुनौती देते हुए ऐसी शिकायतों की सुनवाई को लेकर एक मैकेनिज्म बनाने की मांग की है।
गौरतलब है कि पूर्व में एक अन्य जस्टिस एके गांगुली पर भी एक लॉ इंटर्न ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट ने कराई थी लेकिन कोर्ट ने रिपोर्ट पर कार्रवाई से इन्कार कर दिया था। 

दूसरी लॉ इंटर्न ने पूर्व जज पर आरोप लगाया है कि मई 2011 में जब वह उनके यहां लॉ इंटर्न के रूप में कार्यरत थी उनका यौन उत्पीड़न किया गया। जब जज ने उसके कंधे को चूमते हुए कहा कि वह उनके साथ यात्रा करने और होटल के कमरे में रहने में आनंदित महसूस करेगी? तब वह असहज होकर कमरे से चली गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने याचिका का उल्लेख करते हुए इस मामले में कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और इस पर बुधवार को सुनवाई को तैयार हुआ।

Thursday, 2 January 2014

BCCI reaches SC to stop Lalit Modi

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड [बीसीसीआइ] ने ललित मोदी को राजस्थान क्रिकेट संघ [आरसीए] का अध्यक्ष बनने से रोकने के लिए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आरसीए के चुनावों का नतीजा अगले सप्ताह तक आने की उम्मीद है, जिसमें मोदी और उनके समर्थक अभी से जीत का भरोसा जता रहे हैं। आरसीए के चुनाव 19 दिसंबर को कराए गए थे।

बीसीसीआइ का इरादा सुप्रीम कोर्ट का रुखकर आइपीएल के निलंबित कमिश्नर मोदी को क्रिकेट प्रशासन में वापसी से रोकना भी है। बीसीसीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा कि मोदी के आरसीए से जुड़ने पर क्रिकेट बोर्ड की छवि खराब हो जाएगी। बीसीसीआइ ने सितंबर 2013 में मोदी पर आइपीएल के दौरान वित्तीय अनियमितताएं बरतने का आरोप लगाते हुए आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। मोदी 2008 से 2010 तक आइपीएल के कमिश्नर रहे थे।

क्रिकेट बोर्ड ने अपनी याचिका में साथ ही कहा कि बीसीसीआइ की आपत्तियों के बावजूद मोदी को आरसीए में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के तौर पर खड़ा किया गया। ऐसे में मोदी का नामांकन ही गलत है। आरसीए के चुनावों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया था जिन्होंने मोदी को नियमानुसार चुनावों में खड़े होने की अनुमति दी थी।

आरसीए में ललित मोदी की वापसी निश्चित तौर पर बीसीसीआइ और उसकेटॉप मैनेजमेंट के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। मोदी और बीसीसीआइ अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। मोदी को शरद पवार का नजदीकी माना जाता है और देश में बदल रही राजनीतिक परिस्थितियां और आरसीए चुनाव के नतीजे बीसीसीआइ में भी शक्तिकी स्थिति में बदलाव ला सकते हैं। मोदी 2005 में आरसीए अध्यक्ष बने थे जब बीजेपी की वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री थीं। रोचक तथ्य यह है कि इस बार जब मोदी ने आरसीए का चुनाव लड़ा तो वसुंधरा राजे राजस्थान में बीजेपी को मिली भारी सफलता के साथ फिर सत्ता में हैं। 

Ganguly Case: Cabinet nod on sending Prez reference to SC

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से जस्टिस [रिटायर्ड] एके गांगुली को हटाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय कैबिनेट ने उनके खिलाफ प्रेसीडेंशियल रेफरेंस को मंजूरी दे दी है। जस्टिस गांगुली के खिलाफ महिला प्रशिक्षु वकील से यौन दु‌र्व्यवहार का मामला तो था ही, लेकिन आयोग का अध्यक्ष रहते सेवा शर्तों का उल्लंघन कर पाकिस्तान जाना, वहां की सरकार का आतिथ्य स्वीकार करना व निजी कंपनियों के बीच मध्यस्थता का मामला भी उन पर भारी पड़ा।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने पत्रकारों को बताया कि जस्टिस गांगुली मामले में गृह मंत्रालय के प्रेसीडेंशियल रेफरेंस के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल राज्य मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन पद पर रहते हुए जस्टिस गांगुली के आचरण को लेकर उठाए गए सवालों पर कैबिनेट में भी एक राय रही। प्रशिक्षु वकील के साथ यौन दु‌र्व्यवहार के अलावा बाकी मामलों में लगे आरोपों को गंभीर मानते हुए कैबिनेट ने गांगुली के खिलाफ कार्रवाई को जरूरी माना है।

गौरतलब है कि जस्टिस गांगुली के खिलाफ यौन दु‌र्व्यवहार का आरोप तो है ही, लेकिन उसके साथ ही आयोग के चेयरमैन पद पर रहते हुए सेवा आचरण के विरुद्ध जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी में उन मामलों को उठाकर उन्हें आयोग के चेयरमैन पद से हटाने की गुहार कर चुकी हैं। उन पर आरोप है कि आयोग के चेयरमैन पद पर रहते वह बीते साल तीन से छह जून तक के दौरे पर पाकिस्तान गए। वह भी एक निजी कंपनी से हवाई यात्रा की टिकटों को लेकर। 

इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी इस निजी विदेश यात्रा के लिए न राज्यपाल की अनुमति ली और न ही छुट्टी मंजूर कराई। उनका यह कृत्य पश्चिम बंगाल राज्य मानवाधिकार आयोग के नियम-छह के विपरीत तो था ही। राज्य सरकार का तर्क यह भी है कि सरकारी सेवकों के मामले में इस तरह का आचरण भारतीय दंड संहिता की धारा-21 का भी उल्लंघन है। उन्होंने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट-2010 के प्रावधानों की अनदेखी की, जो निजी विदेश यात्रा के दौरान सरकारी आतिथ्य लेने की इजाजत नहीं देता।

प्रेसीडेंशियल रेफरेंस की प्रक्रिया 

-किसी वैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ मामले की जांच या उसे पद से हटाए जाने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की राय लेने के लिए कैबिनेट संबंधित नोट तैयार कर राष्ट्रपति के पास औपचारिक रूप से भेजती है। इसे प्रेसीडेंशियल रेफरेंस कहा जाता है। 

-इस नोट को राष्ट्रपति संविधान के अनच्च्छेद 143 (1) के तहत प्रधान न्यायाधीश के पास भेजकर मामले की जांच के लिए कहते हैं और उनकी राय लेते हैं। 

-मानवाधिकार एक्ट के तहत राष्ट्रीय या राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है। ऐसा तभी किया जा सकता है जब इस तरह का रेफरेंस राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पास भेजा जाए और कोर्ट जांच के बाद यह पाए कि कदाचरण या अक्षमता के आधार पर संबंधित व्यक्ति को हटाने का मामला बनता है।

Thursday, 21 November 2013

SC Grounds Subrata Roy, Bars Sahara from Selling any Property

SC grounds Subrata Roy
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। निवेशकों का पैसा न लौटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने सहारा समूह के कर्ताधर्ता सुब्रत राय और तीन अन्य निदेशकों- वंदना भारद्वाज, रवि शंकर दुबे व अशोक राय चौधरी के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, सहारा समूह की कोई भी कंपनी अचल संपत्तिायों की बिक्री नहीं कर सकेगी। ये आदेश गुरुवार को न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने सेबी की शिकायत पर दिए हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने सहारा पर शीर्ष अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने 28 अक्टूबर को निवेशकों के 20,000 करोड़ रुपये लौटाने के लिए समूह को इतनी ही कीमत की संपत्तिायों के मूल मालिकाना दस्तावेज सेबी के समक्ष जमा कराने के आदेश दिए थे।

सेबी के वकील अरविंद दत्तार ने कहा कि सहारा ने संपत्तिायों का बढ़ा-चढ़ा कर मूल्यांकन किया है। ंउसने संपत्तिायों के मूल कागजात भी नहीं जमा कराए हैं। समूह ने वर्सोवा की 106 एकड़ जमीन का मूल्य 19,000 करोड़ रुपये लगाया है, जबकि इसकी आधिकारिक कीमत मात्र 118.42 करोड़ है। इस जमीन का इस्तेमाल डेवलेपमेंट के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हरित क्षेत्र में आती है। पीठ भी जमीन के मूल्यांकन के बारे में दत्तार की दलीलों से कुछ हद तक सहमत थी। पीठ ने दत्तार से कहा कि सेबी सहारा की ंउन संपत्तिायों का पता लगाए, जिन्हें 20,000 करोड़ की जमानत के लिए विचार किया जा सकता है।

हालांकि सहारा की ओर से पेश वकील सीए सुंदरम ने सेबी के आरोपों का जबरदस्त विरोध किया। सुंदरम ने कहा कि सहारा ने कोर्ट के आदेश का पालन किया है। लेकिन पीठ उनकी दलीलों से प्रभावित नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आदेश पर पूरी तरह से अमल नहीं किया गया है। पीठ ने मामले में आगे सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है। तब तक सुब्रत राय व तीन अन्य निदेशकों के देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने इस दौरान सहारा समूह की अचल संपत्तिायों को कोर्ट की अनुमति के बिना बेचने पर भी पाबंदी आयद कर दी है।

SC grounds Subrata Roy, bars Sahara from Selling any Property

SC grounds Subrata Roy
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। निवेशकों का पैसा न लौटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने सहारा समूह के कर्ताधर्ता सुब्रत राय और तीन अन्य निदेशकों- वंदना भारद्वाज, रवि शंकर दुबे व अशोक राय चौधरी के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, सहारा समूह की कोई भी कंपनी अचल संपत्तिायों की बिक्री नहीं कर सकेगी। ये आदेश गुरुवार को न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने सेबी की शिकायत पर दिए हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने सहारा पर शीर्ष अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने 28 अक्टूबर को निवेशकों के 20,000 करोड़ रुपये लौटाने के लिए समूह को इतनी ही कीमत की संपत्तिायों के मूल मालिकाना दस्तावेज सेबी के समक्ष जमा कराने के आदेश दिए थे।

सेबी के वकील अरविंद दत्तार ने कहा कि सहारा ने संपत्तिायों का बढ़ा-चढ़ा कर मूल्यांकन किया है। ंउसने संपत्तिायों के मूल कागजात भी नहीं जमा कराए हैं। समूह ने वर्सोवा की 106 एकड़ जमीन का मूल्य 19,000 करोड़ रुपये लगाया है, जबकि इसकी आधिकारिक कीमत मात्र 118.42 करोड़ है। इस जमीन का इस्तेमाल डेवलेपमेंट के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हरित क्षेत्र में आती है। पीठ भी जमीन के मूल्यांकन के बारे में दत्तार की दलीलों से कुछ हद तक सहमत थी। पीठ ने दत्तार से कहा कि सेबी सहारा की ंउन संपत्तिायों का पता लगाए, जिन्हें 20,000 करोड़ की जमानत के लिए विचार किया जा सकता है।

हालांकि सहारा की ओर से पेश वकील सीए सुंदरम ने सेबी के आरोपों का जबरदस्त विरोध किया। सुंदरम ने कहा कि सहारा ने कोर्ट के आदेश का पालन किया है। लेकिन पीठ उनकी दलीलों से प्रभावित नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आदेश पर पूरी तरह से अमल नहीं किया गया है। पीठ ने मामले में आगे सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है। तब तक सुब्रत राय व तीन अन्य निदेशकों के देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने इस दौरान सहारा समूह की अचल संपत्तिायों को कोर्ट की अनुमति के बिना बेचने पर भी पाबंदी आयद कर दी है।

Wednesday, 20 November 2013

Sahara lied about value of assets, Sebi tells SC


Sahara group
नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक सेबी सहारा समूह के खिलाफ शिकायत लेकर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। नियामक ने आरोप लगाया है कि समूह ने अपनी संपत्तियों का मूल्य बढ़ा-चढ़ा कर बताया है और 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों के सभी मूल दस्तावेज (टाइटल डीड) नहीं सौंपे हैं। शीर्ष अदालत ने 28 अक्टूबर को आदेश दिया था कि सहारा ये दस्तावेज सेबी को सौंप दे।

नियामक इन संपत्तियों की नीलामी कर समूह की दो कंपनियों द्वारा निवेशकों से वसूली गई रकम लौटाएगा।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को शीर्ष अदालत में बताया कि सहारा ने सिर्फ जमीन के दो प्लाटों की संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज उसे दिए हैं। इनमें से 106 एकड़ का एक प्लॉट मुंबई के वर्सोवा में है। समूह ने इसकी कीमत 19,000 करोड़ रुपये बताई है। दूसरा प्लॉट ठाणो के पास वसई इलाके में है। समूह के अनुसार दो सौ एकड़ के इस प्लॉट का मूल्य एक हजार करोड़ रुपये के करीब है।

जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने आदेश पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई, लेकिन कोई आदेश जारी नहीं किया, क्योंकि सहारा के वकील बहस के लिए अदालत में मौजूद नहीं थे। खंडपीठ ने कहा, 'अगर हमारे आदेश का पालन इस तरह किया जाता है तो यह निरा मजाक है।'

इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को मुकर्रर कर दी। साथ ही यह ताकीद भी कर दी कि अगले दिन मामले की सुनवाई के वक्त कोई भी बहाना नहीं सुना जाएगा। समूह की कंपनियों ने बिना मंजूरी के डिबेंचर जारी कर लोगों से 24 हजार करोड़ जुटाए थे। इसी रकम को लौटाने के लिए सेबी की याचिका पर बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने सहारा के खिलाफ फैसला सुनाया था। इसमें निवेशकों की रकम सूद समेत लौटाने की जिम्मेदारी सेबी पर डाली थी।

समूह की ओर से नियामक के पास पांच हजार करोड़ से कुछ अधिक का बैंक ड्राफ्ट जमा कराया गया था। इसके बाद सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल की थी। इसी पर 28 अक्टूबर को अदालत ने सहारा को संपत्तियों के टाइटल डीड सौंप देने का आदेश सुनाया था।

Source- Business Hindi News

Monday, 18 November 2013

Gen VK Singh tenders unconditional apology to Supreme Court

Gen VK Singh
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने अदालत से बिना शर्त माफी मांग ली है। सुप्रीम कोर्ट में यह माफी उन्होंने अपने वकील के जरिए मांगी है। यहां उनके एक बयान को लेकर अदालत की अवमानना का मामला चल रहा है।

जनरल सिंह के वकील ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सिंह अदालत से बिना शर्त माफी मांगना चाहते हैं। अब इस मामले पर अगली सुनवाई बुधवार को होगी। सिंह ने हाल में अपनी उम्र संबंधी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की थी। जनरल सिंह के सेनाध्यक्ष रहते उनकी जन्म तिथि को लेकर विवाद उठा था। इस पर सरकार के खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, मगर वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली थी। 

Source- News in Hindi

Friday, 15 November 2013

Another Intern Accuses Retd SC Judge of Sexual Harassment

Another intern
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज पर एक और महिला इंटर्न वकील ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के जरिये आरोप लगाने वाली पीड़िता ने रिटायर्ड जज का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। इससे पहले छह नवंबर को एक इंटर्न वकील द्वारा इसी रिटायर्ड जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद मामले की जांच के लिए तीन जजों की समिति गठित की गई है।

'लीगली इंडिया' वेबसाइट के मुताबिक दूसरी इंटर्न वकील ने 11 नवंबर को अपने नाम से फेसबुक पर यौन उत्पीड़न की घटना का विवरण दिया। दूसरी महिला वकील भी कोलकाता के एनयूजेएस (नेशनल यूनिवर्सिटी ज्यूरिडिकल साइंसेज, कोलकाता) की छात्रा रह चुकी है।

वेबसाइट के अनुसार, अपनी टिप्पणी में इस इंटर्न ने कहा कि उन्हें कई बार यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है। हालांकि, बाद में इस टिप्पणी को फेसबुक से हटा दिया गया। वेबसाइट के मुताबिक टिप्पणी में कहा गया था, 'गत वर्ष ही तीन अलग-अलग मौकों पर मेरे साथ यौन दु‌र्व्यवहार किया गया। महिलाओं को अपने बॉस या प्रभावशाली लोगों द्वारा अक्सर इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।'

इंटर्न ने आगे लिखा, जब महिला वकील (6 नवंबर की घटना) द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया तो मैंने उनसे (आरोपी जज) से इस संबंध में बात की। उन्होंने वादा किया कि भविष्य में वह किसी और महिला के साथ दु‌र्व्यवहार नहीं करेंगे।

इस इंटर्न के मुताबिक उन्होंने उस समय अन्य महिला वकीलों को इस घटना के बारे में बताया तो पता चला कि रिटायर्ड जज अतीत में भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। पीड़िता ने एनयूजेएस, कोलकाता के प्रशासन से मामले की त्वरित जांच कराने की भी मांग की है।

इनका दावा है कि जज के व्यवहार को लेकर उन्होंने संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसरों को सतर्क भी किया था। इस बीच, दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की लॉ फैकल्टी के पूर्व डीन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने आरोपी जज के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। 

 Source- Hindi News

Wednesday, 13 November 2013

Punjab Police Lodge FIR Against Dead Man

लुधियाना, विकास/सुनील। थाना डिवीजन पांच की पुलिस ने नया कारनामा करते हुए करीब दो महीने पहले मरी महिला के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का मामला दर्ज कर दिया है। जब इस बारे में थाना प्रभारी इंस्पेक्टर धर्मपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि महिला जिंदा है या मर चुकी है इस बारे में उन्हें नहीं पता। धर्मपुरा निवासी कुलभूषण शर्मा की शिकायत पर थाना डिवीजन नंबर पांच की पुलिस ने पंजाब माता नगर की रहने वाली बिमला देवी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

कुलभूषण शर्मा के अनुसार बिमला देवी ने जगराओं स्थित शेरपुर कलां के पते पर जाली कागजात तैयार कर खुद की आमदनी कम दिखाई थी, जबकि उसके पास काफी जायदाद थी। कुलभूषण के अनुसार करीब डेढ़ वर्ष पहले उन्हें जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने इसकी शिकायत सामाजिक सुरक्षा व स्त्री बाल विकास विभाग के पास की थी। कुलभूषण ने आरोप लगाया कि डेढ़ वर्ष के बाद पुलिस ने बिमला देवी पर मामला दर्ज कर लिया जबकि उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने उन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जिन्होंने बिमला देवी के पेंशन के कागजात चेक किए। कुलभूषण शर्मा के अनुसार जाली दस्तावेजों के आधार पर बिमला देवी 2004 से पंजाब सरकार से बुढ़ापा पेंशन ले रही थी। 

गिल रोड स्थित ऋषि ढाबे के मालिक नरिंदर कुमार ने कहा कि उनकी सास बिमला देवी की कुछ दिन पहले मौत हो चुकी है। उन्हें नहीं पता कि पुलिस ने उन पर कोई मामला दर्ज किया है। इस मामले में जब पुलिस कमिश्नर पीएस गिल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता जिसके खिलाफ भी शिकायत करता है कानूनन उसका नाम एफआइआर में डालना पड़ता है।

 Source- News in Hindi

Friday, 1 November 2013

Sebi cracks whip on new 'Cattle and Goat Farms' Scheme

Good News

मुंबई। अवैध निवेश योजनाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे बाजार नियामक सेबी ने अब ऐसी दो और फर्मो पर शिकंजा कस दिया है। सेबी ने मवेशी और बकरी पालन के नाम पर निवेशकों से धन जुटा रही समृद्ध जीवन फूड्स इंडिया की घेरेबंदी की है।

नियामक ने इस फर्म को धन जुटाने से प्रतिबंधित करते हुए इसके निदेशकों और प्रमोटरों को निवेशकों से अब तक जुटाई गई रकम की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। इसके अलावा सेबी ने अवैध रीयल एस्टेट योजनाएं चलाने के आरोप में सर्वहित हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया को भी धन जुटाने से रोक दिया है। नियामक ने दोनों कंपनियों के निदेशकों को हिदायत दी है कि निवेशकों की रकम से खरीदी गई संपत्ति हस्तांतरित करने की कोशिश न की जाए और न ही निवेश योजना के जरिये जुटाई गई रकम को डायवर्ट किया जाए।
सेबी ने इन कंपनियों को कोई नई स्कीम लांच करने से भी प्रतिबंधित किया है। कुछ महीने पहले नियामक मवेशी और बकरी पालन में निवेश की ऐसी ही अवैध योजनाएं चला रही दो अन्य कंपनियों एचबीएन डेयरीज और बीटल लाइवस्टॉक पर भी इसी तरह की कार्रवाई कर चुका है।
एचबीएन डेयरीज मवेशियों और घी में निवेश करने पर बेहतर रिटर्न का झांसा देकर निवेशकों से रकम ऐंठ रही थी। इसी तरह बीटल लाइवस्टॉक भी बकरी पालन कारोबार का झांसा दे रही थी। सेबी को शिकायत मिली थी कि समृद्ध जीवन फर्म के एजेंट मवेशी और बकरी पालन कारोबार में निवेश करने पर लोगों को 12 फीसद से ज्यादा का तय रिटर्न देने का दावा कर रहे हैं। इस शिकायत की जांच के आधार पर सेबी ने कंपनी को नोटिस जारी करके 15 दिन में जवाब देने को कहा है।
इस कंपनी की गतिविधियों को लेकर पणजी (गोवा) में पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भी जांच शुरू की थी। इसके अलावा, सीबीआइ ने भी अपनी जांच में पाया कि कंपनी ने 6,48,406 निवेशकों से रकम जुटाई है, जबकि उसके पास केवल 16,876 मवेशी हैं। इससे स्पष्ट है कि कंपनी जितने ग्राहकों से पैसा जुटा रही है उतने मवेशियों की खरीद नहीं कर रही है। इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2011-12 में निवेशकों से 331 करोड़, वर्ष 2010-11 में 163 करोड़ और वर्ष 2009-10 में 36 करोड़ रुपये की रकम जुटाई थी। इसी तरह सर्वजन हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया के खिलाफ सेबी ने वर्ष 2010 की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की है। सेबी ने पाया है कि कंपनी प्लाट की खरीद, विकास और प्रबंधन योजना के तहत लोगों को तय रिटर्न का दावा करके निवेश योजना चला रही है। इस सामूहिक निवेश योजना (सीआइएस) के लिए कंपनी ने नियमों के अनुरूप पंजीयन नहीं कराया है। सेबी के मुताबिक कंपनी रियल एस्टेट कारोबार का केवल छलावा कर रही है ताकि निवेशकों से रकम जुटाई जा सके।