वाराणसी। पोथी पत्र दरकिनार कर लोकमन ने मंगलवार को खिचड़ी का त्योहार मना लिया। संख्या भले ही कम रही हो लेकिन रौनक में खास कमी नहीं रही। लोगों ने विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान किया, मंदिरों में मत्था टेका और पुण्य कामना से दान किया। हालांकि धर्ममना काशी में ज्यादातर लोग मकर संक्त्रांति का त्योहार बुधवार को सूर्य के मकर राशि में जाने की सुबह यानी उदयातिथि में मनाएंगे।
एक दिन पहले इसकी तैयारियों में लोग तन मन से जुटे रहे। इसमें ऐसे भी होंगे जो सभी विधान दूसरे दिन दोहराएंगे। मुंह अंधेरे से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं को भीड़ उमड़ी पड़ी थी। दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, शीतला घाट, सिंधिया घाट, अस्सी, केदारघाट और न जाने कितने घाट-पाट श्रद्धा और आस्था के रंग में रंगे। लोगों ने ठंड के बाद भी पतित पावनी गंगा की धारा में डुबकी लगाई। पुरोहितों और जरूरतमंदों को यथाशक्ति खिचड़ी, तिल, गुड़, वस्त्र आदि का दान किया। इसमें स्थानीयजनों के साथ ही दूसरे जिलों और प्रदेशों से भी आए लोग जो गंगा नहाने के बाद त्रिवेणी जाएंगे, वहां माघ नहाएंगे या कल्पवास में रम जाएंगे। इन लोगों ने स्नान दान के बाद मंदिरों में दर्शन पूजन भी किया। काशी विश्वनाथ, कालभैरव मंदिर, महामृत्युंजय महादेव, संकट मोचन समेत विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही खूब भीड़ रही।
मनसायन रहा आसमान- मंगल हो या बुध, बच्चों के लिए तो पतंग उड़ाने और पेंच लड़ाने का मौका हाथ लगा। ठंड के बाद भी सुबह से जो छत पर चढ़े तो शाम को धुंधलके के साथ ही उतरे। मैदान, पार्क, गंगा के घाट, रेती और नावों पर से भी लोगों ने पतंगबाजी का जमकर आनंद लिया।
दशाश्वमेध स्थित खिचड़ी बाबा मंदिर में मंगलवार को महाभंडारा किया गया। बाबा का श्रृंगार किया गया और भक्तों को आलू, गोभी, मटर, टमाटर, बैंगन व मेवा खिचड़ी खिलाई गई। प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ घमहापुर (कंदवा) में भी सत्संग व भंडारा किया गया। शिवशंकर सिंह, त्रिलोकीनाथ पांडेय आदि ने भजन पेश किए।
स्नानार्थियों की सेवा-यादव सर्व समाज सेवा समिति ने दशाश्वमेध क्षेत्र में डाक्टरों संग बीमार श्रद्धालुओं का परीक्षण किया।
आर्य समाज ने किया यज्ञ - काशी आर्य समाज ने बुलानाला में मकर संक्त्रांति में वैदिक यज्ञ किया। पं. रामदेव शास्त्री के आचार्यत्व में हवन कुंड में आहुतियां दी गईं। समाज मंत्री हीरालाल यादव, गायत्री देवी, सरस्वती देवी, मोतीलाल आर्य आदि शांति पाठ में शामिल थे।
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