बरेली, जागरण संवाददाता। बुजुर्गो से किस्सा सिर्फ कहानियों में सुना था, नौजवान फिल्मों में देखकर जवां हुए और विज्ञान हमेशा इसे नकारता रहा..। जी हां, ग्यारह साल पहले जिस युवक को सांप के काटने पर नदी में बहा दिया गया था, वह घर लौट आया है.. बिल्कुल सही सलामत। बेटे को जीवित देख परिवार निहाल है। गांव में कौतूहल है, लेकिन एक दिल असमंजस में डूबा जा रहा है। जिस 'सुहाग' के उजड़ने पर उसने दूसरे का दामन थाम लिया था। जिंदगी की डगर पर आगे कदम बढ़ा दिए थे, अब वही सामने खड़ा है। परिवार वाले फैसला मर्जी पर छोड़ रहे हैं लेकिन वक्त का तकाजा ऐसा करने से रोक रहा है। इसी उधेड़बुन में उसके दिन और रात गुजर रहे हैं लेकिन हल..सूझ नहीं रहा।
हम वास्तव में अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं चाहते लेकिन जो कहानी सामने आई है, वो वाकई रोमांचित करने वाली है। सच जो भी हो लेकिन हकीकत वर्षो बाद सामने जिंदा खड़ा इंसान है। वह इंसान जिसे परिवार भी मरा हुआ समझकर पानी में बहा आया था। किस्सा 11 साल पहले का है। देवरनिया के भुडुवा गांव के 25 साल के छत्रपाल को खेत में काम करते समय सांप ने काट लिया था। होश न आने पर परिजनों ने उसे नदी में बहा दिया। वक्त बीतता गया। परिवार ने बेटे की मौत के गम को भुलाना शुरू कर दिया। सभी की चिंता उसकी गर्भवती पत्नी उर्मिला को लेकर थी।
आखिर में रिश्तेदारों की पंचायत बैठी और तय हुआ कि उर्मिला को छत्रपाल के छोटे भाई तेजपाल के साथ बैठा दें यानी अघोषित विवाह कर दिया जाए। सभी की सहमति के बाद नत्थूलाल ने बेटे तेजपाल को बहू के साथ रहने की अनुमति दे दी। लगा सबकुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन इस बीच परिवार पर एक और वज्रपात हुआ। गर्भ में पल रहा उर्मिला का बच्चा बच नहीं सका। तेजपाल से उर्मिला को दो बच्चे हुए।
सोमवार को एकाएक इस परिवार में फिर तूफान आया लेकिन खुशखबरी लेकर। वर्षो बाद अचानक छत्रपाल घर पहुंच गया। उसे देखकर किसी को आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन यह सच था। इसके बाद इस 'चमत्कार' को लेकर कौतूहल भरे सवालों की बौछार शुरू हो गई। जो सामने आया, वह भी काफी चौंकाने वाला था। छत्रपाल के मुताबिक, वह बेहोशी की हालत में नदी में बहता हुआ बदायूं इलाके में पहुंच गया था। वहां पास में ही सपेरों की बस्ती थी। वे उसे ले आए और जिंदा देख इलाज शुरू कर दिया। जब वह ठीक हो गया तो घर लौटने के बजाए साथ रख लिया। छात्रपाल ने बताया कि पिछले दिनों वह ढकिया गांव पहुंचा तो परिवार वाले मिलने पहुंचे लेकिन सपेरों ने उसे नहीं छोड़ा। सोमवार को वह एक सपेरे के साथ भुडुवा पहुंचा, अपने घर। परिजनों के मुताबिक, उन्होंने छत्रपाल को देखते ही पहचान लिया। सभी की आंखों से आंसू छलक पड़े। पत्नी उर्मिला की खुशी का ठिकाना नहीं रहा लेकिन वह असमंजस के समंदर में डूब गई।
उर्मिला बोली-मेरे लिए तो दोनों 'परमेश्वर'
रिश्तों की भंवर में फंसी उर्मिला असमंजस में है। एक ओर पहला पति है, जिसके साथ सात जन्मों तक साथ रहने के लिए फेरे लिए। दूसरी ओर वो शख्स, जिसने मुश्किल की घड़ी में उसका हाथ थामा। परिजनों ने फैसला उर्मिला पर ही छोड़ा है लेकिन वह दोनों का साथ छोड़ने को राजी नहीं। वह कहती है-मेरे लिए तो दोनों ही परमेश्वर हैं। वे राजी हुए तो वह दोनों की अर्धाग्नी बनकर जी लेगी।
बता दें, उर्मिला फिलहाल छात्रपाल के छोटे भाई तेजपाल के साथ रह रही है। छत्रपाल की वापसी के बाद से ही हर किसी के मन में एक ही सवाल है, आखिर उर्मिला का क्या होगा? वह किसके साथ रहेगी? परिजन उसे पहले ही फैसला लेने की आजादी दे चुके हैं। लिहाजा उर्मिला कहती है-वह दोनों को ही पति मानती है और उनसे रिश्ता रखेगी। धर्म व समाज चाहे जो भी कहे।
छत्रपाल को ले गए सपेरे
दो दिन रुकने के बाद सपेरे छत्रपाल को फिलहाल अपने साथ ले गए हैं। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल में गुरुजी के पास विशेष पूजा करनी है। उसके बाद वे छात्रपाल को घर छोड़ जाएंगे।
Source: Latest News in Hindi & Rashifal in Hindi
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