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Sunday, 5 January 2014

GSLV D5 successfully launched from shriharikota



श्रीहरिकोटा। भारत ने रविवार को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाकर नया इतिहास रच दिया। परीक्षण में सौ फीसद खरे उतरे स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के बूते रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने का कमाल कर दिखाया है। इसरो ने देश में निर्मित क्रायोजेनिक इंजन के जरिये रॉकेट जीएसएलवी डी- 5 का सफल प्रक्षेपण कर यह बेमिसाल उपलब्धि हासिल की है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित 49.13 मीटर लंबा यह रॉकेट 1,982 किलोग्राम वजनी संचार उपग्रह जीसेट-14 को उसकी वांछित कक्षा में स्थापित करने में कामयाब रहा। रविवार शाम 4.18 बजे प्रक्षेपण के 17वें मिनट में ही उसने उपग्रह को कक्षा में पहुंचा दिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस उपलब्धि पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है।

करीब 365 करोड़ रुपये की लागत वाले रॉकेट जीएसएलवी डी-5 के इस सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत विश्व का ऐसा छठा देश बन गया, जिसके पास अपना देसी क्रायोजेनिक इंजन है। अमेरिका, रूस, जापान, चीन और फ्रांस के पास पहले से ही यह तकनीक है। क्रायोजेनिक इंजन तकनीक से लैस चुनिंदा राष्ट्रों के क्लब में शामिल होने के बाद भारत को अपने उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इतना ही नहीं अब वह दूसरे देशों के उपग्रहों का प्रक्षेपण कर विदेशी मुद्रा अर्जित करने की स्थिति में भी आ गया है।

तीन नाकामियों के बाद देसी क्रायोजेनिक इंजन के साथ 414.75 टन वजनी जीएसएलवी डी-5 रॉकेट के सफल प्रक्षेपण से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के राधाकृष्णन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गदगद राधाकृष्णन ने पत्रकारों से कहा, 'मैं खुशी और गर्व के साथ कह रहा हूं कि टीम इसरो ने यह कर दिखाया है। इस मिशन के लिए जैसे मानक तय किए गए थे, उस पर भारतीय क्रायोजेनिक इंजन सौ फीसद खरा उतरा है। जीएसएलवी डी-5 द्वारा जीसेट-14 को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है।' उनका कहना था, 'हम 3.5 टन के संचार उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए 500 करोड़ की फीस चुकाया करते थे। जबकि जीएसएलवी यह काम 220 करोड़ में करेगा। जीसेट-14 के प्रक्षेपण पर 145 करोड़ का खर्च आया है। क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने में बीस वर्षो की मेहनत रंग लाई। भारत के लिए यह ऐतिहासिक दिन है।'

चुनौती था प्रक्षेपण :-
दरअसल देसी क्रायोजेनिक इंजन के माध्यम से जीएसएलवी का प्रक्षेपण इसरो के लिए 2001 से ही एक गंभीर चुनौती बना हुआ था। रविवार को जो प्रक्षेपण हुआ, वह पिछले वर्ष 19 अगस्त को ही होना तय था। लेकिन ईधन लीक होने के कारण इसके प्रक्षेपण को आखिरी समय में स्थगित कर दिया गया। रॉकेट को व्हीकल असेंबली बिल्डिंग ले जाकर इसकी कमी दुरुस्त की गई। रविवार के प्रक्षेपण के साथ जीएसएलवी की यह आठवीं उड़ान थी। इसके पूर्व के सात में से तीन मिशन में इसरो को असफलता ही हाथ लगी थी। वैसे क्रायोजेनिक इंजन के साथ जीएसएलवी का यह दूसरा ही प्रक्षेपण था। इसमें उसे कामयाबी मिली।

देश का 23वां संचार उपग्रह है जीसेट-14 :-
देसी क्रायोजेनिक इंजन के साथ सफलतापूर्वक प्रक्षेपित रॉकेट जीएसएलवी डी5 द्वारा वांछित कक्षा में स्थापित जीसेट-14 दरअसल भारत का 23वां भूस्थैतिक संचार उपग्रह है। यह कक्षा में पहले से ही मौजूद नौ संचार उपग्रहों के क्लब में शामिल हो जाएगा। जीसेट-14 को कक्षा में 74 डिग्री देशांतर पूर्व में इनसेट-3सी, इनसेट-4 सीआर और कल्पना-1 उपग्रहों के साथ स्थापित किया गया है। यह उपग्रह अपने साथ 12 संचार ट्रांसपांडर्स ले गया है जो इनसेट और जीसेट सिस्टम की क्षमता और बढ़ाने में मददगार होंगे।

मिशन के रहे दो मकसद :-
इसरो के अनुसार जीएसएलवी डी-5 मिशन के दो मकसद रहे। पहला देसी क्रायोजेनिक इंजन का परीक्षण और दूसरा संचार उपग्रह को उसकी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित करना था। दोनों ही मिशन में कामयाबी हाथ लगी। इसरो प्रमुख राधाकृष्णन के अनुसार, 'हम जीएसएलवी डी-5 के जरिये जीसेट-6,7ए और 9 का प्रक्षेपण करेंगे। हम इस रॉकेट का इस्तेमाल अपने दूसरे चंद्रयान मिशन और जीआइसेट की लांचिंग में भी करेंगे।' इसरो की इस कामयाबी पर विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के निदेशक एस रामाकृष्णन ने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि 'इसरो में हम जीएसएलवी को शैतान बच्चा कहा करते थे, लेकिन आज वह नटखट बहुत ज्यादा आज्ञाकारी बालक बन गया है।'

Monday, 2 December 2013

Mangalyaan crosses Moon's orbit, travelling 10 lakh km a day

ISRO
चेन्नई। इसरो का मार्स ऑर्बिटर यानी मंगलयान जिसे शनिवार-रविवार की देर रात (1.12 बजे) पृथ्वी की कक्षा के बाहर धकेला गया था वह सोमवार की सुबह करीब 3.85 लाख किलोमीटर की चांद की कक्षा से भी बाहर निकल गया। अब यह पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रहों से आगे की यात्रा कर रहा है। यह सोमवार की शाम 5 लाख 36 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर चुका था। इसरो के सूत्रों ने बताया कि मंगलयान चांद की कक्षा के बाहर निकल गया है। तकनीकी रूप से यह अब हमारे चंद्रयान की कक्षा को पार कर अब चांद से आगे की यात्रा कर रहा है। यह पहला मौका है जब भारत में बनी कोई चीज गहन अंतरिक्ष में भेजी गई है। मंगलयान 300 दिनों की यात्रा पर लाल ग्रह की ओर जा रहा है। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में यह एक बड़ा मील का पत्थर है।

Thursday, 21 November 2013

Cyclone Helen photographed by newly launched satellite Mangalyaan

Cyclone
चेन्नई। भारत के पहले अभियान के तहत लाल ग्रह के लिए भेजे गए मंगलयान ने आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहे भीषण चक्रवाती तूफान हेलेन की तस्वीर कैद कर भेजी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक मंगलयान ने पृथ्वी की तस्वीरों का सेट भेजा है, जिसमें भारतीय उपमहाद्वीप एवं अफ्रीका के कुछ भागों की तस्वीरों को कैद किया गया है। 

बृहस्पतिवार को इसरो के सूत्रों ने कहा कि हम अंतरिक्षयान के उपकरणों की जांच कर रहे हैं। ये तस्वीरें अंतरिक्षयान में लगे मार्स कलर कैमरा से मंगलवार को दोपहर 1:50 बजे 67,975 किमी की उंचाई एवं 3.53 किमी के रिजोल्यूशन से ली गई हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या इन तस्वीरों को योजना के अनुसार खींचा गया क्योंकि अभियान तो मंगल ग्रह के लिए है। सूत्रों ने कहा कि ये तस्वीरें अंतरिक्षयान पर लगे उपकरण की जांच के दौरान खींची गई।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी को एक से अधिक तस्वीरें मिली हैं। लेकिन उसने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी केवल एक तस्वीर जारी की है। मंगलयान को प्रक्षेपित किए जाने के बाद पहली बार इसमें लगे उपकरण के परिचालन की जांच की गई है। इस बीच, भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि हेलेन शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के तट को पार करेगा और इसके प्रभाव से भारी वर्षा होगी। इससे पूर्व इसरो ने मार्स आर्बिटर की पांच बार कक्षा बढ़ाए जाने के अभियान को पूरा किया था। इन अभियानों के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद मंगलयान में एक दिसंबर को रात 12:42 बजे ट्रांस मार्स इंजेक्शन के महत्वपूर्ण चरण को पूरा किया जाएगा।

450 करोड़ रुपये की लागत वाले इस अभियान के तहत मंगल यान करीब 10 माह की अंतरिक्ष यात्रा करने के बाद 24 सितंबर 2014 को लाल ग्रह की कक्षा में पहुंचेगा। इसरो के पीएसएलवी सी 25 ने 1350 किग्रा वजन वाले मंगलयान आर्बिटर को पांच नवंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर 2:38 बजे प्रक्षेपित किया था।

Friday, 15 November 2013

BJP complaint against Supporter of Modi

BJP
नई दिल्ली [प्रणय उपाध्याय]। भाजपा यूं तो इन दिनों अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी बयानों की शिकायत के साथ चुनाव आयोग जा रही है। लेकिन बीते दिनों एक शिकायत उसने मोदी के समर्थन में किए जा रहे एसएमएस प्रचार अभियान को लेकर भी की है। हिंदुत्व रक्षा के लिए मोदी को वोट देने की हिमायत करते मोबाइल संदेशों से पल्ला झाड़ते हुए पार्टी ने फर्जी संदेश भेजने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ सीबीआइ व दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा में भी मामले की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि उसके नाम पर लोगों को संदेश भेजे जा रहे हैं। संदेश में कहा जा रहा है, यदि आप मोदी जी के समर्थक हैं, भ्रष्टाचार को मिटाना चाहते हैं तथा हिंदुत्व व देश को बचाना चाहते हैं तो 022-61550990 पर मिस कॉल करें। इसे मोदी के नाम पर ई-पोल का नाम दिया जा रहा है।
भाजपा के आइटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद गुप्ता के मुताबिक संदेश में जिस नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह भाजपा का है। हालांकि संदेश में जो कुछ कहा जा रहा है, उसे न भाजपा ने शुरू किया है, न उसका समर्थन करती है। पार्टी द्वारा 31 अक्टूबर को आयोग के पास भेजी गई शिकायत के मुताबिक यह भाजपा के नाम पर जानबूझकर गलत मुद्दों को उठाने का प्रयास है। पार्टी किसी एक धर्म या जाति विशेष का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। भाजपा ने अपनी पहचान के गलत इस्तेमाल की सख्त निंदा करते हुए इस मामले में सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।

वैसे मोबाइल के जरिये भ्रामक संदेश की बीते दिनों कई घटनाएं सामने आई हैं। जुलाई में जालंधर में एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ता द्वारा सोनिया गांधी की गलत तस्वीर सोशल नेटवर्किग साइट पर डालने और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाते हुए पुलिस शिकायत दर्ज कराई थी। वहीं मुजफ्फरनगर दंगों के सिलसिले में स्थानीय भाजपा नेता पर विवादास्पद वीडियो के प्रचार का आरोप लगाते हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि बाद में रासुका हटा लिया गया।

Source- Hindi News

Tuesday, 5 November 2013

ISRO Family Divide on Mars Mission

Mission Mars

नई दिल्ली,जागरण ब्यूरो। मंगलयान की सफल लांचिंग पर पूरा देश इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दे रहा है। लेकिन, कामयाबी की खुशियों के बीच ही इसरो कुनबे में इस मिशन के औचित्य को लेकर मतभेद की दरारें भी नजर आई।
इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने मंगल अभियान के नतीजों पर फिर संशय के सवाल उठाए हैं। मंगल अभियान की लांचिंग के बाद दी प्रतिक्रिया में नायर ने तकनीकी उपलब्धि पर अपने साथी रहे वैज्ञानिकों को बधाई दी, साथ ही इस अभियान से बहुत अधिक अपेक्षा नहीं करने की बात भी कही।
नायर का कहना है, 'मंगलयान लंबी दूरी की रॉकेट यात्रा तकनीक के अतिरिक्त खोज की कोई नई तकनीकी उपलब्धि हासिल करेगा, ऐसी उम्मीद बेमानी होगी। नायर के अनुसार इस अभियान से मंगल ग्रह पर जीवन की मौजूदगी का पता लगाने की उम्मीद बेमानी होगी। वहीं, यदि इससे ग्रह पर मीथेन गैस की मौजूदगी के आंकड़े जमा किए जाएंगे तो यह काम नासा पहले ही कर चुका है और जानकारियां इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। डॉ के कस्तूरीरंगन और यूआर आर राव जैसे पूर्व इसरो प्रमुखों ने हालांकि मंगलयान की आलोचना को खारिज करते हुए अभियान की लांचिंग को बड़ी कामयाबी करार दिया है।
यह बात और है कि इसरो प्रमुख रहे नायर के कार्यकाल में ही मंगल अभियान की शुरुआती तैयारियां हुई थीं। लेकिन, निजी कंपनी देवास और इसरो के अधीन एंटिक्स के बीच विवादास्पद वाणिज्यिक करार के कारण उनकी काफी किरकिरी हुई थी।

Source- News in Hindi

India Launches Maiden Mars Missionm, Placed into Earth Orbit


Mission Mars

श्रीहरिकोटा। मंगलवार का दिन भारत के लिए बेहद मंगलकारी रहा। इस दिन दोपहर बाद दो बजकर अड़तीस मिनट पर देश की तकनीकी क्षमता का डंका बजाने वाला मंगल यान सौर मंडल के सबसे खूबसूरत लाल ग्रह यानी मंगल से मिलन के ऐतिहासिक सफर पर रवाना हो गया। बतौर सारथी प्रक्षेपण रॉकेट पीएसएलवी-सी25 ने धरती छोड़ने के लगभग 44 मिनट में पहली चुनौती पार करते हुए यान को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा दिया।
अब इस कक्षा में रहते हुए छोटी कार की आकार वाला सुनहरे रंग का यह यान लगातार 25 दिनों तक धरती की परिक्रमा करता रहेगा। फिर पहली दिसंबर आधी रात के बाद 12.42 बजे मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) नाम से मशहूर यह यान पृथ्वी की कक्षा को छोड़ आगे की अग्नि परीक्षा के लिए खुद निकल जाएगा। इस दौरान एमओएम करीब तीन सौ दिनों यानी तकरीबन दस महीने तक गहरे अंतरिक्ष में गोता लगाता हुआ लाल ग्रह की तरफ अग्रसर रहेगा। अगले साल 24 सितंबर को इसके मंगल की कक्षा में स्थापित होने की संभावना है।
वैसे तो 1350 किलोग्राम वजनी मंगल यान के प्रक्षेपण को लेकर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर सुबह से ही गहमागहमी थी। 2.38 बजे अपनी पीठ पर यान को लिए प्रक्षेपण रॉकेट पीएसएलवी-सी25 ने जैसे ही आग और धुएं के भारी गुबार को नीचे छोड़ते हुए कर्णभेदी दहाड़ के साथ आसमान चीरते हुए पृथ्वी की कक्षा की ओर रुख किया।
इसरो के वैज्ञानिकों और अन्य विशेषज्ञों ने ताली बजाकर सफल उड़ान शुरू होने का स्वागत किया। लेकिन यान को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होने की चुनौती से अभी गुजरना था, लिहाजा चेहरों पर चिंता की लकीरें भी साफ देखी जा सकती थी। प्रक्षेपण के करीब 44 मिनट बाद यानी 3.22 बजे जब रॉकेट द्वारा यान को दक्षिणी अमेरिका के ऊपर सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने घोषणा की तो सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे।
राधाकृष्णन ने कहा कि 450 करोड़ रुपये की लागत वाले मंगल अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।' इसरो के इस अभियान के दौरान खास जोर लाल ग्रह के वातावरण में मीथेन गैस की मौजूदगी का पता लगाना होगा। मीथेन जीवन की संभावना के लिए एक जरूरी रसायन है। इस गैस की खोज के लिए यान के साथ भेजे गए पांच पेलोड (उपकरण) में एक मीथेन सेंसर भी शामिल है। 

राधाकृष्णन ने बताया कि यह प्रक्षेपण वाहन पीएसएलवी की 25वीं सफल उड़ान थी। उन्होंने माना कि यह बेहद नया और जटिल मिशन है, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि बहुत कम ऊर्जा की खपत से हम यान को पृथ्वी की कक्षा से मंगल की कक्षा में स्थापित करने में कामयाब होंगे। गहरे अंतरिक्ष से मंगल की कक्षा तक का सफर वाकई बेहद चुनौतीपूर्ण है। बकौल इसरो प्रमुख, 'अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत मंगल की परिक्रमा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

अमेरिका, रूस और यूरोप के यान पहले से ही लाल ग्रह का चक्कर काट रहे हैं। इस मामले में चीन और जापान के अभियान को असफलता हाथ लगी है।' मंगल के लिए अभी तक 51 अभियान हुए हैं। इसमें केवल 21 को ही सफलता हाथ लगी है।

प्रशांत महासागर में तैनात पोत से उतारी गई तस्वीरें
मंगल यान के पृथ्वी की कक्षा में स्थापना की तस्वीरों को उतारने के लिए इसरो ने खास इंतजाम कर रखा था। इसके लिए दक्षिण प्रशांत महासागर में शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया के दो पोत नालंदा और यमुना को खास तौर पर तैनात किया गया।

दोनों पोत पर इसरो ने अपना संचार टर्मिनल स्थापित कर रखा था। जैसे ही रॉकेट पीएसएलवी-सी25 दक्षिण अमेरिका के ऊपर मंगलयान को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर अलग हुआ, उस क्षण की तस्वीरों को टर्मिनल के शक्तिशाली कैमरों ने उतारकर मिशन कंट्रोल रूम भेज दिया। 

'हमने करोड़ों किमी तक जाने वाले एक रॉकेट पर 450 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पर क्यों शोर मचाया जा रहा है, जबकि दिवाली के दौरान पटाखेबाजी पर पांच हजार करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।'
-प्रो. यूआर राव, पूर्व प्रमुख इसरो

Source- News in Hindi

Monday, 4 November 2013

Mars Orbiter Mission Launch Today at 2.38 pm

Mission Mars

चेन्नई। भारत का मंगल अभियान अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है। इसे हम भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का मील का पत्थर भी कह सकते हैं।
भारतीय अंतरिक्ष संगठन (इसरो) के एक प्रवक्ता ने बताया, प्रक्षेपण के लिए रविवार को शुरू हुई उल्टी गिनती लगातार जारी है। यह काउंटडाउन मंगलवार दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर खत्म होगा। इस वक्त पर भारत मंगलग्रह के लिए अपना अंतरिक्ष यान लॉन्च करेगा। चीजें सामान्य हैं। हम तैयारियों के काम में व्यस्त हैं। रॉकेट की लंबाई 44.4 मीटर है और इसे स्पेसपोर्ट के फ‌र्स्ट लॉन्च पैड पर लगाया गया है। यहां 76 मीटर लंबा एक मोबाइल सर्विस टावर लगा है, जो 230 किलोमीटर प्रति घंटा की गति वाली हवा में भी टिका रह सकता है। इस तरह यह चक्रवात की स्थिति से निपटने में सक्षम है। लॉन्च से पहले इसे हटा लिया जाएगा।
पीएसएलवी 25 मंगलवार को यहां से 100 किलोमीटर दूर स्पेसपोर्ट से दोपहर 2 बजकर 38 मिनट पर प्रक्षेपित किया जाएगा। इसरो सूत्रों ने कहा कि इस व्हीकल की स्थिति का लगातार निगरानी रखने वाले पोर्ट ब्लेयर, बेंगलूर के पास बाएलालू और ब्रूनेई के ट्रैकिंग स्टेशनों को अलर्ट पर रखा गया है। वहीं समुद्री टर्मिनलों (भारतीय जहाजरानी निगम के जहाजों) एससीआई नालंदा और एससीआई यमुना ने दक्षिणी प्रशांत महासागर में अपनी जगह ले ली है। ऐसा माना जा रहा है कि उड़ान के बाद रॉकेट को पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह छोड़ने में 40 मिनट से ज्यादा समय लगेगा।
मंगलग्रह पर जाने वाला यान 1 दिसंबर को ग्रह के लिए अपनी यात्रा शुरू करने से पहले 20 से 25 दिन तक पृथ्वी के चारों ओर घूमेगा और 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंच जाएगा। यदि 450 करोड़ की लागत वाला यह मंगल अभियान सफल रहता है तो मंगल पर अभियान भेजने वाली इसरो विश्व की चौथी अंतरिक्ष स्पेस एजेंसी होगी।

Source- News in Hindi

ISRO Chief Seeks Divine Blessings for MARS Mission


ISRO chief

तिरुपति। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने बहुप्रतीक्षित मंगल अभियान की सफलता के लिए सोमवार सुबह मशहूर तिरुपति मंदिर में मत्था टेका। 

पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे राधाकृष्णन ने पीएसएलवी-सी25 रॉकेट की सफल लांचिंग के लिए दुआ मांगी। इसरो प्रमुख हर अभियान से पहले प्रक्षेपित किए जाने वाले सेटेलाइट की प्रतिकृति को कुछ देर के लिए तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। अभियान की सफलता के बाद भी वह मंदिर जाते हैं।

Source- News in Hindi

Success of Mars Mission Give India to Access other Planets

Mars Mission

बेंगलूर, एजेंसियां। देश की महत्वाकांक्षी मंगल मिशन परियोजना को लेकर अंतरिक्ष विज्ञानी बेहद आशान्वित हैं। इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन का तो यहां तक मानना है कि इस अभियान की सफलता से न केवल मंगल के बारे में हमारी समझदारी और विकसित होगी बल्कि सौर मंडल के अन्य ग्रहों तक हमारी खोज का दायरा भी बढ़ेगा। 

उनके अनुसार इससे अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में देश की नई वैश्रि्वक पहचान बनेगी। दुनिया हमारा लोहा मानेगी। वहीं इसरो के स्पेस अप्लीकेशन सेंटर के निदेशक एएस किरण कुमार कहते हैं, 'मार्स ऑर्बिटर को हमने जिस तकनीक से तैयार किया है। उसका इस्तेमाल कर भविष्य में हम कम लागत में उन्नत किस्म के उपग्रहों का निर्माण करने में सक्षम होंगे।'

मंगल मिशन के प्रक्षेपण की पूर्व संध्या पर कस्तूरीरंगन बेंगलूर में और किरण कुमार चेन्नई में पत्रकारों से बात कर रहे थे। कस्तूरीरंगन का कहना था, 'अभियान का मकसद भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करना है। दुनिया को यह दिखाना है कि हम भी लाल ग्रह पर यान भेज सकते हैं और वहां पर जीवन की संभावना तलाशने की दिशा में उपयोगी परीक्षण कर सकते हैं।' 

ध्यान रहे कि मार्स रोवर के आंकलन के आधार पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की ओर से यह बयान जारी किया जा चुका है कि मंगल ग्रह पर जीवन की कोई भी संभावना नहीं है। उन्होंने यान के साथ भेजे जा रहे पांच उपकरणों में से एक मीथेन सेंसर के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उनका कहना था कि इस सेंसर की मदद से लाल ग्रह के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की स्कैनिंग करने में तो आसानी होगी ही साथ ही जीवन की संभावना के लिए जरूरी मीथेन गैस की मौजूदगी का पता भी चल सकता है। जबकि किरण कुमार ने बताया कि मार्स ऑर्बिटर बेहद उम्दा तकनीक से निर्मित किया गया है। यह किसी भी गड़बड़ी से खुद निपटने वाली तकनीक से लैस है। यह खराबी का खुद पता लगाएगा और जमीन से किसी भी निर्देश के मिले बगैर उसे दुरुस्त करने में सक्षम होगा। 

उनके अनुसार मिशन के दौरान बहुत लंबे समय तक सूर्य पृथ्वी और मंगल के बीच में होगा। इस अवधि में वहां पर गहरा अंधेरा छाया रहेगा। ऐसे में यान पूर्व अर्जित ऊर्जा के प्रसंस्करण के जरिये संचालित रहेगा। 

Source- News in Hindi