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Thursday, 12 May 2016

अब RBI गवर्नर पर फूटा 'स्वामी बम', बोले- छुट्टी कर भेजो शिकागो

अपने बयानों से पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। सुब्रमण्यम स्वामी ने आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन पर निशाना साधा है। स्वामी ने साफ कहा है कि 'रघुराम राजन हमारे देश के अनुकूल नहीं हैं। जिस तरह से ब्याज की दरें बढ़ा रहे हैं इससे बेरोजगारी बढ़ गई है और देश को भुगतना पड़ रहा है। इसीलिए उसकी छुट्टी करके जितनी जल्दी शिकागो भेज सकते हो भेजना चाहिए।'

ब्याज दर के लिए समिति का गठन

सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक की नीति निर्धारण के लिए बुधवार को राज्यसभा में एक बिल पास किया। इसके तहत ब्याज दरों को तय करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। वर्तमान में आरबीआई से जुड़ी सभी मौद्रिक नीति बनाने का अधिकार पूर्ण रुप से गवर्नर रघुराम राजन के पास है और इनकी सहायता के लिए एक समिति होती है जिसके पास सिर्फ परामर्श देने का अधिकार होता है।

नए कानून के अनुसार बनाई गई मौद्रिक नीति परिषद में छह सदस्य होंगे। ये समिति ब्याज दरों को अंतिम रुप देगी। यदि सदस्यों में किसी मुद्दे को लेकर बराबरी की स्थिति आती है तो राजन के वोट से अंतिम निर्णय होगा।इस समिति में तीन सदस्य सरकारी पक्ष से होंगे और बाकी तीन आरबीआई के पक्ष से होंगे।

राजन को नहीं मिलेगा दूसरा कार्यकाल!

आरबीआई के गवर्नर के रूप में रघुराम राजन का कार्यकाल 4 सितंबर में खत्म हो रहा है। और राजन ने पहले ही जानकारी दे चुके हैं कि सरकार ने अभी तक उनसे ये नहीं पूछा है कि वो आरबीआई गवर्नर के तौर पर दूसरी पारी खेलना चाहते हैं या नहीं। ऐसे में रघुराम राजन को दूसरी बार कमान मिलने की संभावना बेहद कम ही दिख रही हैं।

राजन के सरकार विरोधी बयान

गौरतलब है कि नवंबर 2015 में रघुराम राजन ने भारत में असहिष्णुता वाला बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि असहिष्णुता के कारण आर्थिक विकास प्रभावित हो रहा है।

यही नहीं, अप्रैल 2016 में रघुराम राजन ने भारत को अंधों में काना राजा कहा था। रघुराम राजन के इस बयान पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आपत्ति जताई थी। वित्त मंत्री ने कहा था कि बाकी दुनिया के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़त बहुत तेज, वास्तव में सबसे तेज है। Read more http://www.jagran.com/

Monday, 13 January 2014

EPFO announce 8.75 percent interset on PF Deposite

नई दिल्ली। चुनाव से पहले नौकरीपेशा लोगों को सरकार की ओर से बड़ा तोहफा दिया गया। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए अपने अंशधारकों को उनके ईपीएफ (भविष्य निधि) पर 8.75 फीसद ब्याज देने पर फैसला कर किया है। इससे पहले कर्मचारियों को 8.50 फीसद ब्याज दर पर भुगतान किया जा रहा था। इस फैसले से करीब 5 करोड़ों से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचने वाला है। इस फैसले के साथ ही वित्तीय वर्ष 2013-14 में पीएफ पर नई ब्याज दर लागू हो गई है। 

ईपीएफओ की निर्णय लेने वाली संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (सीबीटी) की बैठक में इस पर मुहर लगी है। हालांकि, कर्मचारी यूनियन नौ फीसद ब्याज की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि सीबीटी की बैठक के एजेंडे के अनुसार, 8.5 फीसद ब्याज देने से ईपीएफओ के पास केवल 56.96 करोड़ रुपये की राशि सरप्लस बचेगी। अब 8.75 फीसद पर संगठन को कितनी राशि अतिरिक्त रखनी होगी इसका अभी अंदाजा नहीं लगाया गया है। वैसे अगर नौ फीसद ब्याज दिया जाता तो अतिरिक्त 1,220 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होती। यह राशि भविष्य निधि संस्था पर भारी पड़ेगी। 

Source: Hindi News

Sunday, 17 November 2013

EPFO to pay at least 8.5% interest on PF Deposits this Fiscal

Retirement fund body EPFO
नई दिल्ली। ईपीएफ में अंशदान करने वाले संगठित क्षेत्र के पांच करोड़ कर्मचारियों को इस साल भी कम से कम साढ़े आठ फीसद ब्याज मिलना तय है। इस बारे में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड की बैठक में अंतिम फैसला किया जाएगा। बोर्ड की बैठक अगले माह की शुरुआत में होनी है। इस फैसले को वित्ता मंत्रालय की मंजूरी मिलने और अधिसूचना जारी होने के बाद कर्मचारियों के पीएफ खाते में ब्याज की रकम पहुंचेगी।

ईपीएफओ के एक अधिकारी ने कहा कि संगठन चालू वित्ता वर्ष 2013-14 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमाओं पर 8.5 फीसद ब्याज जरूर देगा। पिछले वित्ता वर्ष 2012-13 में ईपीएफओ ने सदस्यों की जमा पर 8.5 फीसद का ब्याज दिया था। इससे पहले वर्ष 2011-12 में 8.25 फीसद का ब्याज दिया गया था।
ट्रेड यूनियनों ने ब्याज दर पर फैसला लेने के लिए श्रम मंत्रालय से ईपीएफओ की निर्णय लेने वाले केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक बुलाने की मांग की है। मई में सीबीटी का पुनर्गठन किया गया था। इसके बाद से अब तक बोर्ड की कोई बैठक नहीं हुई है। इसके अलावा किसी उप-समिति का पुनर्गठन भी नहीं हुआ है। सीबीटी का पुनर्गठन होने पर उप-समितियों का पुनर्गठन भी करना पड़ता है।

Source- Business Hindi News