Showing posts with label JNU. Show all posts
Showing posts with label JNU. Show all posts

Monday, 11 April 2016

JNU आंतरिक समिति ने कन्हैया समेत 5 छात्रों के निष्कासन की सिफारिश की


जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में आतंकी अफजल गुरु की बरसी के समर्थन में आयोजित 9 फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में देशविरोधी नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कन्हैया समेत पांच दोषी छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित किया जाएगा।

सूत्रों की माने तो इस मामले में पांच सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कन्हैया 21 छात्रों को दोषी माना है। कुलपति को सौंपी गई यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस पर अंतिम फैसला कुलपति एम. जगदीश कुमार लेंगे।

जेएनयू की आवाज नहीं कन्हैया

सूत्रों के मुताबिक, जांच के लिए बनाई गई आंतरिक समिति ने जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य सहित पांच छात्रों को निष्कासित किए जाने की सिफारिश की है। इनमें रामा नागा भी शामिल है।

आंतरिक जांच समिति द्वारा की गई सिफारिश पर जेएनयू प्रशासन ने अभी निर्णय नहीं लिया है। सूत्रों की माने तो जेएनयू छात्र संघ के सह सचिव सौरभ शर्मा को भी मामले में दोषी माना गया है। उन पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

यहां पर याद दिला दें कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 21 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

कुछ दोषी छात्रों ने प्रशासन को अपना लिखित जबाव भेज दिया था, जबकि बड़ी संख्या आरोपी छात्रों ने अपना जवाब नहीं भेजा था।


जेएनयू प्रशासन इस मामले में उनपर कोई कार्रवाई करने से पहले कानूनी सलाह ले रहा है। जेएनयू में छात्रों के अपराध के आधार पर ही उनको सजा का प्रावधान है। सूत्रों के मुताबिक आरोपी छात्रों को क्या सजा दी जाए? इस संबंध में जेएनयू प्रशासन ने कानूनी राय मांगी है।

विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में आगे कोई विवाद नहीं चाहता है। माना जा रहा है कि यदि दोषी छात्रों पर निष्कासन या कोई अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाती है तो एक बार फिर छात्र आंदोलन तेज हो सकता है।

जेएनयू के एक अधिकारी का कहना है कि अनुशासन के नियमों को ध्यान में रखते हुए आरोपी छात्रों को क्या सजा दी जाए इस पर फैसला किया जाएगा, लेकिन सबसे पहले यह सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है कि दोषियों को दी जाने वाली सजा न्यायोचित हो।

ज्ञात हो कि नौ फरवरी की घटना की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बनाई गई आंतरिक समिति का शुरू से ही जेएनयू के छात्र विरोध कर रहे हैं। समिति ने उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को सांप्रदायिक, जातिगत और क्षेत्रीय भावना भड़काने एवं छात्रों के बीच सौहार्द बिगाड़ने का दोषी पाया है।



Thursday, 17 March 2016

पाक जाकर गुलाम कश्मीर के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं जेएनयू के शिक्षक !


जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के दस शिक्षकों ने कैंपस में हो रही गतिविधियों को लेकर पूर्व कुलपति को 400 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें साफतौर पर लिखा गया है कि पाकिस्तान समेत कई जगह देशविरोधी कार्यक्रमों में जेएनयू के शिक्षक और छात्र शामिल होते हैं। इसके बाद भी जेएनयू प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जेएनयू में कई ऐसे छात्र हैं जो अवैध रूप से हास्टल में रहते हैं। जेएनयू के एक वरिष्ठ शिक्षक सहित अन्य शिक्षकों व कुछ छात्रों ने इसमें सहयोग किया है।

सूत्रों की मानें तो एक साल पहले यह रिपोर्ट सरकार और जेएनयू प्रशासन को सौंपी गई थी। इसमें साफतौर पर लिखा गया है कि कई जगह देशविरोधी कार्यक्रमों में जेएनयू के शिक्षक और छात्र शामिल होते हैं।

यही नहीं, गुलाम कश्मीर में भी आयोजित कार्यक्रमों में कुछ शिक्षकों के शामिल होने की बात कही गई है। जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के शोध छात्र अंबा शंकर वाजपेयी का कहना है कि कैंपस और कैंपस के बाहर देशविरोधी गतिविधियों में जेएनयू के शिक्षक और छात्रों की संलिप्तता के प्रमाण हैं।

इसकी पूरी जानकारी सरकार और उसकी एजेंसियों के पास भी है। इन पर एजेंसियों को गंभीरता से कार्रवाई करने की आवश्यकता है। संस्कृत अध्ययन केंद्र के शिक्षक डॉ. हरिराम मिश्र का कहना है कि कैंपस में ऐसी कई गतिविधियां होती हैं, जिन पर यहां के कई शिक्षकों को आपत्ति होती है।

उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को तत्काल उन लोगों को गिरफ्तार करना चाहिए जो चेहरा ढंककर नारेबाजी कर रहे थे। कई लोग ऐसे हैं जो जेएनयू को बदनाम कर रहे हैं।