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Friday, 7 March 2014

Sage reminder of an era of

सरयू तट पर स्थित लक्ष्मण किला में इन दिनों पूर्व आचार्य एवं रामकथा की शास्त्रीय धारा के दिग्गज विद्वान स्वामी सीतारामशरण की 17वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। स्मृति दिवस की शुरुआत सोमवार को रहस्योपासना के प्रतिनिधि ग्रंथों नामकांति, रूपकांति, लीलाकांति, धामकांति आदि के पारायण से हुई।

वर्तमान लक्ष्मण किलाधीश एवं दिवंगत आचार्य के शिष्य महंत मैथिलीरमण शरण ने बताया कि 10 मार्च को श्रद्धांजलि सभा एवं वृहद भंडारा के साथ पुण्यतिथि के कार्यक्रम का समापन होगा।

लक्ष्मण किलाधीश स्वामी सीतारामशरण को याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है। यद्यपि उनकी प्रतिभा दुनियादारी के किसी भी आयाम में लगकर अपना लोहा मनवा सकती थी किंतु उन्होंने तरुणाई में ही संतत्व की जो राह अख्तियार की, उससे कभी विचलित नहीं हुए। बिहार प्रांत के पटना जिलांतर्गत अपनी समृद्ध पैतृकता को तिलांजलि देकर अयोध्या आए स्वामी जी यहीं के होकर रह गए।

राम भक्ति के साथ उनका मन रामकथा के प्रसंगों में बखूबी रमा और शीघ्र ही उन्होंने अपनी पहचान तेजस्वी साधक व रामकथा के मार्मिक व्याख्याकार की बनाई। 1957 में प्रतिष्ठित पीठ लक्ष्मण किला की महंती संभालने के साथ उन्होंने धर्म, संस्कृति एवं अध्यात्म को संस्थाबद्ध भी किया। इस बीच उनका प्रभामंडल रामनगरी से आगे बढ़ता हुआ संपूर्ण सनातन जगत में स्थापित हुआ। वे स्वामी अखंडानंद एवं करपात्री जी के साथ संतों की शीर्ष त्रिमूर्ति में से एक माने जाते रहे। बीएचयू में बाल्मीकि रामायण पर उनका व्याख्यान मील का पत्थर माना जाता है। कहां तो वह गए थे एक सत्र को संबोधित करने पर साहित्य-संस्कृति के युवा अध्येताओं एवं अध्यापकों पर उनकी ऐसी छाप पड़ी कि दशकों तक उन्हें व्याख्यान के लिए विश्वविद्यालय आमंत्रित किया जाता रहा। 1973 में उन्होंने अयोध्या से सीतामढ़ी तक ऐसी रामबारात निकाली, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। बिहार के तत्कालीन राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री आदि ने बारात का राजकीय सम्मान किया और बारात की शोभा-सजावट कुछ वैसी झलक पेश करने वाली थी, जैसी त्रेता में भगवान राम की बारात रही होगी।

1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय जब मंदिरों के अधिग्रहण की आशंका छिड़ी तो वे किलाधीश ही थे, जिनकी मध्यस्थता में अधिग्रहण का बादल छटा। उनके इस प्रभाव के पीछे प्रवचन के फलक पर उनकी राष्ट्रीय ख्याति और बड़ी संख्या में शिष्यों प्रशंसकों की फौज रही। 1997 में इहलीला का संवरण करते हुए सांस्कृतिक-आध्यात्मिक जगत में ऐसी शून्यता छोड़ी, जिसे 17 वर्षो बाद भी महसूस किया जा रहा है।

Vaishno Devi reduction in the number of devotees in court

स्कूलों में परीक्षा और मौसम के बिगड़े मिजाज के कारण इन दिनों माता वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या कम हो गई है। हालांकि, वीरवार को मौसम साफ होने से श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है। वहीं, श्रद्धालुओं की संख्या आठ से दस हजार के बीच होने के कारण प्राचीन गुफा खुली हुई है।

विदित हो कि बुधवार को आधार शिविर कटड़ा सहित वैष्णो देवी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में बारिश हुई थी। त्रिकुटा पर्वत की ऊपरी चोटियों पर हल्का हिमपात हुआ था। मार्च में हिमपात देखकर लोग हैरान हैं। ऐसे में ठिठुरन बढ़ गई है। मां वैष्णो देवी के दर्शनों को देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को गर्म कपड़े पहनकर परिवार सहित पंजीकरण करवा कर भवन की ओर रवाना हुए। नगर से जारी हेलीकॉप्टर सेवा सहित वैष्णो देवी मार्ग पर चलने वाली बैट्री कार सेवा श्रद्धालुओं को उपलब्ध रही।

संभावना जताई जारी है कि मार्च के दूसरे पखवाड़े या फिर अप्रैल में वैष्णो देवी यात्रा में वृद्धि देखने को मिल सकती है। जिसका व्यापारी वर्ग बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

दस मार्च से फिर बिगड़ेगा मौसम का मिजाज-

वादी में ताजा बर्फबारी के बाद फिर हिमस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते प्रशासन ने उच्च पर्वतीय इलाकों टंगडार, करनाह, केरन, सोनमर्ग, गुरेज, तुलैल और साधना टॉप में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

बीते चार दिनों से वादी में जारी बर्फबारी व बारिश का सिलसिला वीरवार को थम गया। मौसम विभाग ने मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है। विभाग की मानें तो 10 मार्च से वादी में फिर से बर्फबारी की संभावना है। मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोट्स ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ 10 मार्च से वादी के वायुमंडल में फिर से सक्त्रिय होगा। इसके चलते वादी में फिर से बर्फबारी व बारिश हो सकती है। इस बीच तापमान में भी गिरावट आ सकती है। वहीं, चार दिनों से जारी बर्फबारी और बारिश का सिलसिला थमने से लोगों ने राहत की सांस ली है। दिन में हलकी धूप भी छाई रही। हालांकि, बर्फीली हवा चलने से लोगों को ठंड का अहसास हुआ। श्रीनगर में अधिकतम तापमान 10.2 डिग्री और न्यूनतम 3.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

Seven-day international is Shivaratri Festival

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में शिवरात्रि महोत्सव की तीसरी व आखिरी शाही जलेब देव छांजणू व छमाहूं के नेतृत्व में वीरवार को निकली। आखिरी जलेब के साथ ही शिवरात्रि महोत्सव भी संपन्न हो गया।

शाही जलेब में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल उर्मिला सिंह ने भाग लिया। शाही जलेब निकलने से पहले राज्यपाल उर्मिला सिंह ने अराध्य देव राज माधवराय के मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद बाबा भूतनाथ मंदिर जाकर पूजा की। दोनों जगह पूजा करने के बाद उन्होंने शाही जलेब में भाग लिया। शाही जलेब अराध्य देव राज माधव राय के मंदिर से निकली जो चौहाटा होकर समखेतर बाजार से घूमती हुई दोबारा चौहाटा पहुंची। जहां से राज्यपाल उर्मिला सिंह ने जलेब में शिरकत की। जलेब में अराध्य देव राज माधो राय की पालकी संग अन्य देवी-देवता पड्डल पहुंचे।

राज माधव राय ने देवी-देवताओं के साथ की मिलनी-

शिवरात्रि महोत्सव के आगाज पर सभी देवी-देवताओं ने अराध्य देव राज माधव राय के दरबार में जाकर हाजिरी भरी थी। मगर शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर राज माधव राय ने चौहाटा जातर के दौरान देवी-देवताओं से मिलनी की और उन्हें विदाई दी। इसके लिए राज माधव राय अपनी पालकी पर विराजमान होकर चौहटा पहुंचे और देवी-देवताओं को विदाई दी।

चौहाटा जातर के दौरान सभी देवी-देवता मंडी शहर के मुख्य बाजार चौहाटा पर विराजमान होते हैं और यहीं पर राज माधव राय पहुंचे और उन्होंने देवी-देवताओं के बीच जाकर उन्हें विदा किया।

देव कमरूनाग ने पुलिस पहरे में दिए दर्शन-चौहाटा जातर के समय चानणी परिसर में विराजमान देव कमरूनाग के दर्शन पुलिस पहरे में हुए। देव कमरूनाग के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ी रही। शिवरात्रि महोत्सव के दौरान देव कमरूनाग टारना मंदिर में ही विराजमान रहते हैं। मगर चौहाटा जातर के दौरान देव कमरूनाग शहर में पहुंचते हैं। मगर यहां भी देवता अन्य देवी-देवताओं के साथ नहीं बैठता है। देव कमरूनाग सेरी चानणी परिसर में ही विराजमान होते हैं। जहां वीरवार को देवता दर्शनों के लिए कुछ समय बैठे।..

Saturday, 1 March 2014

Shivlok Dham come off .. and Badnath

महा शिवरात्रि के मौके पर बाबा भोले की नगरी जय शिव के उद्घोष से गुंजायमान हो गया। इस दौरान देश के कोने-कोने से आए एक लाख से अधिक शिव भक्तों ने मंदिर में जलार्पण किया। भक्तों की कतार फुटओवर ब्रिज, मानसरोवर, बीएन झा पथ होने हुए बाई पास तक पहुंच गई। हालांकि सभी को कतारबद्ध तरीके से पूजा कराया गया। जलार्पण रात 9:30 बजे तक चलता रहा। रात 10:30 बजे से चौथे पहर की पूजा प्रारंभ की गई। मंदिर में पूजा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए थे।

उपायुक्त अमित कुमार व एसपी प्रभात कुमार पूरी व्यवस्था पर पैनी नजर रखे हुए थे। स्थानीय लोगों को पूजा कराने की भी कुछ व्यवस्था की गई थी। मंदिर में भोले शिव व माता पार्वती के विवाह को लेकर रातभर भजन-कीर्तन चलता रहा।

शिवरात्रि के मौके पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बाबा भोले की अनोखी बरात निकली। शाम करीब 7:30 बजे बरात नगर स्टेडियम से निकली। हालांकि बरात की एक झलक पाने के लिए लोग दिन से ही अपनी-अपनी जगह सुरक्षित करने में जुट गए थे। सड़क किनारे लोग कतार में खड़े थे। इस दौरान सड़क पर दो लाख से अधिक शिव भक्तों की भीड़ लगी हुई थी। दूरदराज के गांव व दूसरे प्रदेश से भारी संख्या में लोग बरात की एक झलक पाने के लिए बाबाधाम पहुंचे। शिव की इस बरात में बसहा पर सवार शिव जी के अलावा विभिन्न देवता के रूप धरे भक्तों को देख ऐसा लगा मानो आज शिव लोक बाबा भोले की धरती पर उतर आया हो। बरात में भूत-पिशाच, नर कंकाल, साधू-महात्मा, भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। इसके अलावा छऊ नृत्य, डीजे, बैंड, गेट बत्ती, घोड़ा व उंट भी बरात में शामिल था।

कोका दैत्य बना आकर्षण का केंद्र-इस बार शिव बरात में 25 फीट उंचा व 8 फीट चौड़ा कोका दैत्य सभी के आकर्षण का मुख्य केन्द्र था। इसके अलावा पंचमुखी कालिया नाग भी सभी की नजरों पर था। आम लोगों को मतदान के लिए जागरूक करने के लिए भी एक झांकी को बरात में शामिल किया गया था। 20 पहलवानों ने शारीरिक सौष्ठव का प्रदर्शन किया। बरात नगर स्टेडियम से निकली व मुख्य मार्ग होते हुए टावर चौक पहुंची, यहां से बाजार होते हुए विभिन्न मागरे से गुजरते हुए बाबा मंदिर पहुंची। चहुंओर लाइट की चकाचौंध-भोले की शादी के मौके पर बाबा की धरती को लाइट से दुल्हन की तरह सजाया गया था। बंगाल के चंदन नगर के कलाकारों ने लाइट का ऐसा इंतजाम किया था कि जो भी इसे देखा बस देखता ही रह गया। एफिल टावर, संसद भवन, मंदिर, चर्च, मस्जिद, आदि को दर्शाया गया था। लोग इन लाइट की सजावट को देखने के लिए अनायास ही रुक गये।

बरात का जगह-जगह स्वागत-शिव बरात का जगह-जगह रास्ते में भव्य स्वागत किया गया। फल, शर्बत, पानी, ठंडई, सूखे मेवे, मिठाई आदि का इंतजाम किया गया था। आम लोग व विभिन्न सामाजिक संगठन शिव के बरात की स्वागत में जुटे थे। इसमें महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग भी शामिल थे। कई जगह बरात पर फूलों की बरसात की गई।

कार्यकर्ताओं का अथक प्रयास-इस बरात के सफल आयोजन में मेयर सह महाशिवरात्रि महोत्सव समिति के अध्यक्ष राजनारायण खवाड़े व उनकी टीम का अथक प्रयास शामिल है। इस टीम समाज के हर वर्ग के लोग शामिल है। 1994 से हर वर्ष आयोजित ये अनोखी शिव बरात सामाजिक समरसता का अद्भुत मिसाल बन गयी है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम- इस मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बरात के रूट पर जगह-जगह पर लाठी पार्टी व सशस्त्र बल तैनात किया गया था। सादे लिबास में भी पुलिस वाले हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे। इसके अलावा गश्ती दल भी अपना काम कर रही थी। बरात के रूट को दोपहर से ही सील कर दिया गया था। जगह-जगह बैरिकेड लगा दिया गया था और वहां पुलिस वाले मुस्तैद थे। वाहन के रूट में परिवर्तन कर दिया गया था।

भांग-फलाहारी जलेबी का लिया आनंद- शिव की शादी हो और लोग भांग न खाएं ये कैसे हो सकता है। आज भांग की काफी डिमांड देखी गई। लोग इस वक्त का भरपूर आनंद उठाना चाहते थे और वे भंग के रंग में डूब गए। इसके अलावा हर इलाके में सड़क किनारे फलाहारी जलेबी व मिठाई भी खूब बिकी।

Kedarnath four valves may be opened

महाशिवरात्रि के पर्व पर ग्यारहवें ज्योतिर्लिग भगवान केदारनाथ के कपाट खोलने की तिथि घोषित कर दी गई है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट चार मई को सुबह छह बजे खोले जाएंगे। पिछले साल जून में आई आपदा के बाद क्षतिग्रस्त गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग की मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि 30 अप्रैल तक पैदल मार्ग के साथ ही केदारनाथ राष्ट्रीयराजमार्ग पूरी तरह से दुरुस्त कर लिये जाएंगे।

गुरुवार को भगवान केदार के शीतकालीन प्रवास स्थल ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में बदरी-केदार मंदिर समिति के प्रतिनिधियों, हक हकूकधारियों, पुजारियों व तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में वेदपाठी ब्राह्मणों ने पंचाग गणना कर केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि निकाली। कपाट मेष लगन में सुबह छह बजे खोले जाएंगे। बदरी-केदार मंदिर समिति की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने बताया कि तीस अप्रैल को भगवान केदार की चल विग्रह डोली ओंकारेश्वर मंदिर से केदारनाथ के लिए प्रस्थान करेगी। डोली फाटा और गौरीकुंड होते हुए तीन मई को केदारनाथ पहुंचेगी। इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह, कार्याधिकारी अनिल शर्मा, केदारनाथ के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग, टीगंगाधर लिंग और बागेश लिंग के अलावा हक हकूकधारी और तीर्थ पुरोहित मौजूद थे। गौरतलब है कि आपदा के बाद बीते वर्ष 11 सितंबर को शुद्धिकरण के बाद केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई थी, जो पांच नंवबर को कपाट बंद होने तक जारी रही।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी राघव लंगर ने बताया कि गौरीकुंड से केदारनाथ तक 24 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग को दुरुस्त करने का काम लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को सौंपा गया है। उन्हाेंने बताया कि यात्रियों के ठहरने के लिए केदारनाथ में प्री-फैब्रिकेटेड हट का निर्माण कराया जाएगा।अलावा हक हकूकधारी और तीर्थ पुरोहित मौजूद थे। गौरतलब है कि आपदा के बाद बीते वर्ष 11 सितंबर को शुद्धिकरण के बाद केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई थी, जो पांच नंवबर को कपाट बंद होने तक जारी रही। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी राघव लंगर ने बताया कि गौरीकुंड से केदारनाथ तक 24 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग को दुरुस्त करने का काम लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को सौंपा गया है। उन्हाेंने बताया कि यात्रियों के ठहरने के लिए केदारनाथ में प्री-फैब्रिकेटेड हट का निर्माण कराया जाएगा।

Friday, 28 February 2014

Everyone - from Har Mahadev echo raised pagoda Jaykare

महाशिवरात्रि पर शिवालयों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे से शिवालय दिनभर गूंजते रहे। चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में सुबह की आरती के बाद भक्तों ने भोले बाबा का अभिषेक किया।

कालकाजी मंदिर में मंत्रोच्चारण के साथ बाबा पशुपति नाथ का रुद्राभिषेक किया गया। दूध, दही, गंगाजल, शहद, गन्ने के रस से बाबा को स्नान कराया गया। आक, धतूरा, बेल पत्र, मेहंदी, सफेद पुष्प अर्पित कर श्रृंगार किया गया। शिव स्तुति व हवन के बीच भक्तों ने भक्तों ने बाबा का अभिषेक किया। हनुमान रोड स्थित शिव मंदिर में भी दिनभर भक्तों की कतार लगी रही। उन्होंने भोले भंडारी को बेल, धतूरा और दूध अर्पित किया। भक्तों को फल, खीर और आलू आदि का प्रसाद दिया गया। काल सर्प दोष की पूजा भी हुई।

पुष्प से भरी थालियां लेकर पहुंचे भक्त1केशवपुरम के पारदेश्वर मंदिर से लेकर मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, रोहिणी व जहांगीरपुरी के विभिन्न शिवमंदिरों में भक्तों ने पूजा की। लोग हाथों में पुष्प से भरी थालियां व चंदन-धूप लेकर शिव की आरती करने पहुंचे। इस मौके पर कई मंदिरों में बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया।

प्रवचन व भंडारे का आयोजन-उत्तम नगर, ककरौला, मोहन गार्डन, नजफगढ़, जनकपुरी, विकासनगर, विकासपुरी, तिलक नगर, रघुवीर नगर, मीरा बाग, पश्चिम विहार, सागरपुर व पालम स्थित मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। जनकपुरी सी-3 स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर के पुजारी पं.राम कुमार दूबे ने शिव तत्व पर प्रवचन का आयोजन किया। त्रिलोकीनाथ मंदिर में भी काफी संख्या में भक्तों ने शिव का जलाभिषेक किया।

हरिनगर घंटाघर के पास राष्ट्रीय महिला जनकल्याण सेवा मंच के तत्वावधान में भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंडित ध्रुवचंद पाठक, गुरबक्श सिंह, आलोक कपूर, अशप्रीत सिंह, बलजीत कौर सोनिया व सरोज सिंह सहित कई लोग उपस्थित थे।

Monday, 24 February 2014

Amritanandamayi Math blaming the attack on Hindus

आरएसएस विचारक पी. परमेश्वरन ने झप्पी देने वाली अम्मा के रूप में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी के मठ के खिलाफ उनकी पूर्व शिष्या द्वारा लगाए गए आरोपों को हिंदुओं पर हमला करार दिया है। उनका कहना है कि मठ के प्रति लोगों में श्रद्धा भाव कम करने के लिए ऐसी बातें फैलाई जा रही हैं।

अमृतानंदमयी की शिष्या रहीं आस्ट्रेलियाई मूल की गेल गायत्री ट्रेडवेल ने अपनी किताब 'होली हेल-ए मेमॉयर ऑफ फेथ, डिवोशन एंड प्योर मैडनेस' में माता और उनके मठ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।

इसी सिलसिले में भारतीय विचारकेंद्रम के निदेशक परमेश्वरन ने रविवार जारी बयान में कहा, मठ का चयन इसलिए किया गया क्योंकि अम्मा (अमृतानंदमयी) और मठ जाति, धर्म और क्षेत्र से उठकर अध्यात्मिकता और सेवा में रत हैं। केरल में मीडिया के एक तबके द्वारा मठ पर लगाए गए आरोपों के पीछे आध्यात्मिकता और सेवा के क्षेत्र में सक्त्रिय मठ के प्रति लोगों में श्रद्धा भाव को कम करना है। 1परमेश्वरन के मुताबिक, अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब झूठ का प्रचार कर धार्मिक भावना को आहत करना नहीं है। ट्रेडवेल ने अपने संस्मरण में दावा किया है कि वह कई ऐसे राज जानती हैं, जिनके उजागर होने पर सनसनी फैल जाएगी। माता अमृतानंदमयी ने संस्मरण में लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

Sunday, 23 February 2014

Maha Shivaratri: Kanvdiyhon shadow of the terror threat!

महाशिवरात्रि पर सड़कों में उमड़ने वाले कांवड़ियों के सैलाब पर इस साल फिर आतंकी साया मंडराने लगा है। ऐसी आशंका खुफिया एजेंसियों ने ही जताई है। किसी भी खुराफात को नाकाम करने के लिए पुलिस अफसरों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। फोर्स के साथ खुफिया कैमरे भी लगाए जाएंगे।

27 फरवरी को महाशिवरात्रि है। 25 की रात से ही लाखों की संख्या में कांवड़िये सड़कों पर दिखने लगेंगे। रामघाट रोड, जीटी रोड व खैर रोड पर सबसे ज्यादा भीड़ रहेगी। ज्यादातर शिवभक्त कांवड़ लेकर खेरेश्वरधाम तक आते हैं। खुफिया एजेंसियों ने कावड़ियों की भीड़ के बीच आतंकियों के खुराफात की आशंका जताई है।

फोर्स तैनाती का प्लान-एसपी सिटी पंकज पांडेय के मुताबिक आशंकाओं को देखते हुए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। रामघाट रोड से लेकर खेरेश्वरधाम तक फोर्स रहेगा। बम डिस्पोजल दस्ते और एलआइयू टीम को सतर्क रहने को कहा गया है। पुलिस, पीएसी, आरएएफ व होमगार्ड की लगाए जाएंगे। 

चौकीदार भी-कांवड़ यात्रा के दौरान शहर का पूरा फोर्स तो रहेगा ही, देहात के छह थानेदार, 11 दरोगा, 63 सिपाही और हर थाने से 20-20 चौकीदारों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इगलास, गौंडा, मडराक, अकराबाद, गंगीरी, विजयगढ़, पिसावा व महिला थाने की पुलिस भी मुस्तैद रहेगी।

वाहनों पर रोक 126 फरवरी से ही अतरौली की ओर से शहर आने वाले हल्के-भारी वाहनों पर प्रतिबंध लग जाएगा। इस रूट की निजी बसें तालानगरी स्थित संत फिदेलिस स्कूल से चलेंगी। जीटी रोड पर पड़ाव दुबे से सारसौल तक वाहनों का प्रतिबंध रहेगा। दो दिन रोडवेज बसें बाईपास से निकाली जाएंगी। दिल्ली रोड से जाने वाले वाहनों को सोमना रोड भेजा जाएगा। कानपुर की ओर से आने वाले वाहनों को एटा चुंगी से बाईपास होते हुए निकाला जाएगा। टीएसआइ शौर्य कुमार से बैरियर व्यवस्था की जरूरत पर रिपोर्ट मांगी गई है। 

एसपी सिटी ने सीओ व सभी थानेदारों को निर्देश दिया है कि कांवड़ियों के भोजन व परिक्रमा का ध्यान रखें। महिला कांवड़ियों से पूर्व में हुई छेड़खानी जैसी किसी भी घटना से सबक लेते हुए पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।

महाशिवरात्रि की तैयारियों को लेकर शनिवार शाम चार बजे कोतवाली में बैठक होगी। इसमें एडीएम सिटी अवधेश तिवारी, नगर निगम, बिजली विभाग, स्वास्थ्य व पुलिस विभाग के अफसर रहेंगे।

Wednesday, 19 February 2014

Banke Bihari Temple

वृंदावन। जगप्रसिद्ध बांकेबिहारी और उनके भक्तों के बीच 'दीवाल' नजर नहीं आएगी। जगमोहन में तीन से अधिक सेवायतों के जाने पर मंदिर प्रबंध कमेटी ने रोक लगा दी है।

गत दिवस 'जागरण' में प्रकाशित खबर 'बांकेबिहारी और भक्तों के बीच 'दीवाल' सेवायत' का असर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु के आदेश में देखने को मिला।

उपमन्यु ने सेवायतों को पत्र जारी कर दर्शन के दौरान नियम के अनुसार केवल तीन लोगों को ही ठाकुरजी के जगमोहन में मौजूद रहने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर इससे तीन से अधिक कोई व्यक्ति मंदिर के जगमोहन में दिखाई देगा, तो सेवा अधिकारी के ऊपर कार्रवाई की जाएगी। 

जगमोहन में मौजूद रहने वाले तीन लोगों में सेवायत हो या फिर मंदिर के भंडारी, केवल तीन लोग ही जगमोहन में श्रद्धालुओं की माला, प्रसाद लगाने के लिए मौजूद रहेंगे।

Wednesday, 12 February 2014

Keep attention to death and god

क्रांरांतिकारी जैन संत तरुण सागर महाराज ने मंगलवार को अपने कड़वे प्रवचनों से श्रोताओं के जीवन की मिठास घोलने का प्रयास किया। हंसी की फुहारों के बीच उन्होंने जीवन में आने वाले दुखों की चर्चा की और समय आते अपने जीवन में सुधार करने का संदेश दिया।

एमडी जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत के मैदान में जैन मुनि के तीन दिवसीय कड़वे प्रवचनों की श्रृंखला मंगलवार से शुरू हुई। मंच पर बने ताजमहल के कटआउट के आगे आसन पर बैठकर उन्होंने अपने प्रवचन की शुरुआत में जिदंगी में प्रकृति, विकृति और संस्कृति का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भूख लगने पर भोजन करने को प्रकृति, भूख न लगे तब भी खाने को विकृति, खुद भूखे रहकर भूखे को खिलाना संस्कृति होती है। 

जिदंगी का सार बताते हुए संत ने कहा कि सोते में धन, जागते में धन, घर में धन, बाजार में धन। आखिर में रिजल्ट निकलता है निधन। इसलिए हमें ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे किसी और को हमारी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना नहीं करनी पड़े। हम ही आत्म कल्याण करें। जीवन में जो भी रिश्ते हैं, वे जीते जी हैं। मरने के बाद कोई रिश्ता किसी के साथ नहीं रहता।

Tuesday, 11 February 2014

Devotees crowd in banke bihari temple

एकादशी पर्व पर सोमवार को बांके बिहारी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा को लेकर पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। पुलिस की गैर मौजूदगी का लाभ असामाजिक तत्वों ने उठाया।

बांके बिहारी के एकादशी पर्व पर दर्शन करने के लिए दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और आसपास के श्रद्धालु सुबह से ही उमड़े। भीड़ को नियंत्रित करने को एक भी कांस्टेबल दिखाई नहीं दिया। इसका फायदा उठाते हुए चेन स्नेचरों ने मंदिर परिसर में आधा दर्जन श्रद्धालुओं की जेब साफ की और दो महिलाओं के गले से सोने की चेन तोड़ ली गई।

दिल्ली के शाहदरा निवासी कमला गुलाटी और फरीदाबाद निवासी सुभद्रा देवी ने बताया कि मंदिर में दर्शन के दौरान कब उनके गले की चेन कट गई, पता नहीं चला। मंदिर के बाहर जब वह दोनों परिजनों के साथ लस्सी पीने रुकीं, तब परिजनों की नजर गले पर पड़ी, तब जानकारी हुई।

इसी तरह गुड़गांव निवासी शुभेंद्र गुप्ता, विनोद कापरी, दिल्ली के तिलक नगर निवासी शोभित अरोड़ा, करोलबाग निवासी विनोद अग्रवाल, उत्तम नगर निवासी कुंजबिहारी गुप्ता बांके बिहारी पुलिस चौकी पर अपनी जेब कटने की शिकायत लेकर पहुंचे। जहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें कोतवाली का रास्ता दिखा दिया।
लगता रहा जाम, सोती रही पुलिस
वृंदावन। एकादशी पर्व पर शहर की पंचकोसीय परिक्रमा को हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। परिक्रमा मार्ग में दौड़ते अनियंत्रित वाहन और अटल्ला व इस्कॉन कट पर वाहनों से लगा जाम परेशानी का सबब बनता रहा। लेकिन पूरे परिक्रमा मार्ग में पुलिस का एक भी कांस्टेबल नहीं दिखा।

बांकेबिहारी की नगरी वृंदावन में एकादशी पर पंचकोसीय परिक्रमा करने हजाराें भक्त भोर होते हुए उमड़ पड़े। पूरे परिक्रमा मार्ग में पुलिस की अनदेखी का खामियाजा श्रद्धालुओं को उठाना पड़ा। रास्तेभर अनियंत्रित दौड़ते वाहन श्रद्धालुओं के लिए खतरा बनते दिखाई दिए। पानीगांव पक्का पुल से वृंदावन आने-जाने वाले वाहनों को रोकने या नियत स्थान पर खड़ा करवाने को कोई ट्रैफिक प्लान न तो प्रशासन ने बनाया न ही स्थानीय पुलिस ने। परिक्रमा में दौड़ते छोटे-बड़े वाहनों से बचते-बचाते जैसे-तैसे श्रद्धालुओं ने परिक्रमा पूरी की। मथुरा मार्ग पर अटल्ला चुंगी और छटीकरा मार्ग पर इस्कॉन मंदिर के निकट परिक्रमा कट के अलावा प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर पर सुबह से ही वाहनों से जाम लगा रहा। जाम खुलवाने को भी पुलिस का कोई कांस्टेबल नजर नहीं आया। सुबह 8 बजे शुरू हुआ जाम दोपहर को एक बजे तक लगा रहा। पुलिस की अनदेखी का खामियाजा पिछले दिन रविवार को भी श्रद्धालु और स्थानीय नागरिकों ने जाम के झाम में फंसकर उठाया। बावजूद इसके प्रशासन की आंख नहीं खुलीं।

Devotees crowd in banke bihari temple

वृंदावन, जागरण संवाददाता। एकादशी पर्व पर सोमवार को बांके बिहारी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा को लेकर पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। पुलिस की गैर मौजूदगी का लाभ असामाजिक तत्वों ने उठाया।

बांके बिहारी के एकादशी पर्व पर दर्शन करने के लिए दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और आसपास के श्रद्धालु सुबह से ही उमड़े। भीड़ को नियंत्रित करने को एक भी कांस्टेबल दिखाई नहीं दिया। इसका फायदा उठाते हुए चेन स्नेचरों ने मंदिर परिसर में आधा दर्जन श्रद्धालुओं की जेब साफ की और दो महिलाओं के गले से सोने की चेन तोड़ ली गई।

दिल्ली के शाहदरा निवासी कमला गुलाटी और फरीदाबाद निवासी सुभद्रा देवी ने बताया कि मंदिर में दर्शन के दौरान कब उनके गले की चेन कट गई, पता नहीं चला। मंदिर के बाहर जब वह दोनों परिजनों के साथ लस्सी पीने रुकीं, तब परिजनों की नजर गले पर पड़ी, तब जानकारी हुई।

इसी तरह गुड़गांव निवासी शुभेंद्र गुप्ता, विनोद कापरी, दिल्ली के तिलक नगर निवासी शोभित अरोड़ा, करोलबाग निवासी विनोद अग्रवाल, उत्तम नगर निवासी कुंजबिहारी गुप्ता बांके बिहारी पुलिस चौकी पर अपनी जेब कटने की शिकायत लेकर पहुंचे। जहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें कोतवाली का रास्ता दिखा दिया।

लगता रहा जाम, सोती रही पुलिस
वृंदावन। एकादशी पर्व पर शहर की पंचकोसीय परिक्रमा को हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। परिक्रमा मार्ग में दौड़ते अनियंत्रित वाहन और अटल्ला व इस्कॉन कट पर वाहनों से लगा जाम परेशानी का सबब बनता रहा। लेकिन पूरे परिक्रमा मार्ग में पुलिस का एक भी कांस्टेबल नहीं दिखा।

बांकेबिहारी की नगरी वृंदावन में एकादशी पर पंचकोसीय परिक्रमा करने हजाराें भक्त भोर होते हुए उमड़ पड़े। पूरे परिक्रमा मार्ग में पुलिस की अनदेखी का खामियाजा श्रद्धालुओं को उठाना पड़ा। रास्तेभर अनियंत्रित दौड़ते वाहन श्रद्धालुओं के लिए खतरा बनते दिखाई दिए। पानीगांव पक्का पुल से वृंदावन आने-जाने वाले वाहनों को रोकने या नियत स्थान पर खड़ा करवाने को कोई ट्रैफिक प्लान न तो प्रशासन ने बनाया न ही स्थानीय पुलिस ने। परिक्रमा में दौड़ते छोटे-बड़े वाहनों से बचते-बचाते जैसे-तैसे श्रद्धालुओं ने परिक्रमा पूरी की। मथुरा मार्ग पर अटल्ला चुंगी और छटीकरा मार्ग पर इस्कॉन मंदिर के निकट परिक्रमा कट के अलावा प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर पर सुबह से ही वाहनों से जाम लगा रहा। जाम खुलवाने को भी पुलिस का कोई कांस्टेबल नजर नहीं आया। सुबह 8 बजे शुरू हुआ जाम दोपहर को एक बजे तक लगा रहा। पुलिस की अनदेखी का खामियाजा पिछले दिन रविवार को भी श्रद्धालु और स्थानीय नागरिकों ने जाम के झाम में फंसकर उठाया। बावजूद इसके प्रशासन की आंख नहीं खुलीं।

Sunday, 9 February 2014

Gupt navratri in jawalamukhi

ज्वालामुखी। विश्व विख्यात शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में शनिवार को गुप्त नवरात्र का प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष सुशील रतन ने विधिवत समापन किया।

नौ दिन तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में पुजारी महासभा व मंदिर प्रशासन से संयुक्त तत्वाधान में देवी आराधना, ज्वाला मां के मूलमंत्र का जाप, वटुक भैरव, गायत्री व हनुमान का जाप पाठ किया गया। इसके उपरांत कन्या पूजन किया गया। सुशील रतन ने गुप्त नवरात्र के सफल होने के लिए बधाई दी और कहा कि हजारों भक्तों ने गुप्त नवरात्र पर देवी अराधना व पूजा का पुण्य फल प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों में भी मां की पूजा का नवरात्र के बराबर ही पुण्य फल मिलता है।

इस अवसर पर मंदिर अधिकारी तहसीलदार देवी राम, मंदिर न्यास के सदस्य दिव्यांशू भूषण दत, पार्वती प्रसाद, सुरेंद्र चौधरी, भवानी दत्त, संजीव सूद, वेनी माधव, प्रेमानंद, पवन शर्मा, धर्मपाल शर्मा, कांग्रेस महासचिव सत्यपाल शर्मा, पुजारी लवलेश शर्मा, शैलू शर्मा, संदीप शर्मा, मनोज, भुवनीश, पीयूष व मनोहर लाल मौजूद रहे।