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Tuesday, 11 March 2014

Amalaki ekadashi 2014

आमल की एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। आंवले के वृक्ष में भगवान का निवास होता हैं इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान का पूजन किया जाता हैं। आंवला विष्णु भगवान का प्रिय फल है।

आमल की एकादशी एक पवित्र हिन्दू पर्व है। इस दिन अमला को भगवान विष्णु लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। आमल की एकादशी व्रत फाल्गुन शुक्ल पक्ष को एकादशी के दिन किया जाता। ऐसा माना जाता है कि एकादशी समस्त पाप नाश करने में समर्थ है। सौ गाय दान करने का जो फल होता है वही फल आमल की एकादशी करने से प्राप्त होता है।

अमला एकादशी पूजा

अमला एकादशी भी आमल की एकादशी के रूप में जाना जाता है। इसे फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन पर रखा जाता है। इस साल, आंवला एकादशी 12 मार्च 2014 को मनाया जाएगा। यह अमला एकादशी पापों के सभी प्रकार से व्यक्ति को मुक्त कर देते है।

माना जाता है कि आंवला पेड़ भगवान विष्णु के चेहरे से उत्पन्न माना जाता है। इस दिन आंवला के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद धूप, चंदन, रोली, फूल, आदि से पूजन करना चाहिए। आंवला के पेड़ के नीचे ब्राहमणों को भोजन कराना चाहिए। भगवान विष्णु के भक्त एकादशी व्रत करते हैं। इसमें आंवले के पेड़ की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि जो एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे वैष्णव भक्तों के समीप गीता और विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करता है, वह उस परम धाम में जाता है, जहां साक्षात् भगवान नारायण विराजमान हैं।

अमला की एकादशी पर चौघड़िया मुहूर्त।

इस बार संवत 2070 चैत्र शुक्ल पक्ष 12 मार्च 2014 [बुधवार] को अमला एकादशी मनाई जाएगी।

अगले दिन पाराना समय- 06: 52

17: 32 पाराना दिन द्वादशी समाप्ति पल पर

एकादशी तिथि 11 मार्च 2014 पर- 00: 40 पर शुरू होता है।

एकादशी तिथि 12 मार्च 2014 के 15: 11 पर समाप्त होता है।

फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकादशी अमला एकादशी के रूप में जाना जाता है। अमला एकादशी महा शिवरात्रि व होली के बीच पड़ता है। वर्तमान में यह अंग्रेजी में फरवरी या मार्च के महीने में मनाया जाता है।

एकादशी व्रत विधि-

दशमी की रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें तथा भोग विलास से भी दूर रहें। प्रात: एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें; नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उंगली से कंठ शुद्ध कर लें। वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करे। यदि यह सम्भव न हो तो पानी से बारह कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर आंवले के पेड़ के नीचे जाकर पूजा करें गीता पाठ करें या पुरोहितादि से श्रवण करें।

विष्णु के द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जाप करें।

महात्म-

जिन्होंने श्रीहरि के व्रत किया है, उन्होंने चारों वेदों का स्वाध्याय, देवताओं का पूजन, यज्ञों का अनुष्ठान तथा सब तीर्थो में स्नान कर लिया। श्रीकृष्ण से बढ़कर कोई देवता नहीं है और एकादशी व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। जहां भागवत शास्त्र है, भगवान विष्णु के लिए जहां जागरण किया जाता है और जहां शालीग्राम शिला स्थित होती है, वहां साक्षात् भगवान विष्णु उपस्थित होते हैं ।

व्रत खोलने की विधि-

द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए। मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए - यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।

अमला एकादशी के बारे में एक कथा प्रचलित है।

कथा- प्राचीन काल में भारत में चित्रसेन नामक राजा राज्य करता था । उनके राज्य में एकादशी व्रत का प्रचलन था। प्रजा एवं राजा एकादशी का व्रत रखते थें। एक दिन राजा चित्रसेन शिकार खेलते खेलते दूर निकल गए। वहां पर जंगली जातियों ने उन पर आक्रमण कर दिया। उनके शस्त्रों-अस्त्रों का उनपर कोई प्रभाव नही पड़ा। देखते- देखते जंगली जाति के आदमियों की संख्या बढ़ गई। तो उनके आक्रमण से राजा चित्रसेन संज्ञाहीन होकर पृथ्वी पर गिर पडे़। पृथ्वी पर गिरते ही राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई जो समस्त राक्षसों को मारकर अदृष्य हो गई। जब राजा की मुर्छा टुटी तो उन्हे सब राक्षस मृत पडे़ दिखाई दिये। वे बडे़ आश्चर्य में पड़कर सोचने लगे कि इन्हें किसने मारा है तभी आकाशवाणी हुई, ये समस्त राक्षस तुम्हारे आमला एकादशी व्रत के प्रभाव के कारण मारे गए हैं। यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ तथा अपने राज्य में उसने आमला एकादशी के व्रत का प्रचार करवाया।

[प्रीति झा]

Monday, 10 March 2014

All fought street surrounded belle, beauty Chhay's pants

वसंत का अहसास कराता मौसम। रविवार को सूरज चढ़ा तो बरसाने की चमक ही निराली थी। बरसाना की होली में गुलाल बरसने लगा। आसमां ने गुलाबी आभा ले ली। होरी के रसियाओं का रस बरसना शुरू हुआ तो, तो छठा बदलने लगी। फाग खेलन बरसाने आयो है, नटवर नंद किशोर.घेर लई सब गली रंगीली, छाय रही है छटा छबीली की टेर के बीच छबीली गली में हुरियारिनों की प्रेम पगी लाठियां नंदगांव के हुरियारों पर बरसने लगीं।

इसमें सुबह नंदगांव के हुरियारों के, तो शाम बरसाना की हुरियारिनों के नाम रही। ब्रज की इस लठामार होली के साक्षी बने देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु इस होरी को देखकर भाव-विभोर हो गए। रविवार सुबह जयपुरी फेंटा और हाथों में ढाल, पिचकारी लेकर हुरियारों के टोल नंदबाबा मंदिर पहुंचे। वहां से टोलियां बरसाने निकल पड़ीं। बुजुर्ग हुरियारे भी फाग की मस्ती में मस्त थे। मस्ती में पता ही नहीं चला कि नंदगांव से बरसाना की आठ किमी दूरी कब खत्म हो गई। शाम को श्री राधा के धाम में सूर्य देव छिपने की तैयारी में थे। लेकिन रंग-बिरंगे वेश में सजे नंदगांव के ग्वालों (हुरियारों) के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी। एक ओर ये हुरियारे, दूसरी तरफ लहंगा-ओढ़नी से सजी श्री राधारानी की सखी गोपियां। ग्वालों के हाथ में ढाल, तो हुरियारिनों (गोपियों) के हाथों में लंबी सजीली लाठियां। हुरियारों को छेड़ते देख लंबी घूंघट काढ़े गोपियां कभी सकुचातीं, कभी मुस्कातीं, कभी नैनन के बाण चलातीं। गोपियां लाठी की तरफ इशारा करतीं, तो हुरियारे ढाल दिखाते। एक हुरियारे ने शरारती अंदाज में हुरियारिनों को होली खेलने का इशारा किया। तुरंत आवाज आई ़आ लाला तो कूं खिलाऊं मैं होली।़

इसके साथ ही गोपियों ने ग्वालों पर प्रेम से सराबोर लाठियों की बरसात शुरू कर दी। इससे कान्हा के सखा घुटनों के बल बैठने को विवश हो गए। सिर पर ढाल रखे हुरियारों पर लाठियां पड़ रही थीं। होली की खुमारी में मस्त हुरियारे बड़े आनंद से लाठियां खा रहे थे। कुछ बचने की कोशिश करते, तो हुरियारिनें उन्हें घेर लेतीं। कुछ हुरियारे ़.मत मारे दृगन की चोट, रसिया होरी में, मेरे लग जाएगी।़ गाकर मनुहार भी करते। बरसाना के हुरियारे सोमवार को नंदगांव में बदले की होली खेलने जाएंगे।

Friday, 7 March 2014

Sage reminder of an era of

सरयू तट पर स्थित लक्ष्मण किला में इन दिनों पूर्व आचार्य एवं रामकथा की शास्त्रीय धारा के दिग्गज विद्वान स्वामी सीतारामशरण की 17वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। स्मृति दिवस की शुरुआत सोमवार को रहस्योपासना के प्रतिनिधि ग्रंथों नामकांति, रूपकांति, लीलाकांति, धामकांति आदि के पारायण से हुई।

वर्तमान लक्ष्मण किलाधीश एवं दिवंगत आचार्य के शिष्य महंत मैथिलीरमण शरण ने बताया कि 10 मार्च को श्रद्धांजलि सभा एवं वृहद भंडारा के साथ पुण्यतिथि के कार्यक्रम का समापन होगा।

लक्ष्मण किलाधीश स्वामी सीतारामशरण को याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है। यद्यपि उनकी प्रतिभा दुनियादारी के किसी भी आयाम में लगकर अपना लोहा मनवा सकती थी किंतु उन्होंने तरुणाई में ही संतत्व की जो राह अख्तियार की, उससे कभी विचलित नहीं हुए। बिहार प्रांत के पटना जिलांतर्गत अपनी समृद्ध पैतृकता को तिलांजलि देकर अयोध्या आए स्वामी जी यहीं के होकर रह गए।

राम भक्ति के साथ उनका मन रामकथा के प्रसंगों में बखूबी रमा और शीघ्र ही उन्होंने अपनी पहचान तेजस्वी साधक व रामकथा के मार्मिक व्याख्याकार की बनाई। 1957 में प्रतिष्ठित पीठ लक्ष्मण किला की महंती संभालने के साथ उन्होंने धर्म, संस्कृति एवं अध्यात्म को संस्थाबद्ध भी किया। इस बीच उनका प्रभामंडल रामनगरी से आगे बढ़ता हुआ संपूर्ण सनातन जगत में स्थापित हुआ। वे स्वामी अखंडानंद एवं करपात्री जी के साथ संतों की शीर्ष त्रिमूर्ति में से एक माने जाते रहे। बीएचयू में बाल्मीकि रामायण पर उनका व्याख्यान मील का पत्थर माना जाता है। कहां तो वह गए थे एक सत्र को संबोधित करने पर साहित्य-संस्कृति के युवा अध्येताओं एवं अध्यापकों पर उनकी ऐसी छाप पड़ी कि दशकों तक उन्हें व्याख्यान के लिए विश्वविद्यालय आमंत्रित किया जाता रहा। 1973 में उन्होंने अयोध्या से सीतामढ़ी तक ऐसी रामबारात निकाली, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। बिहार के तत्कालीन राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री आदि ने बारात का राजकीय सम्मान किया और बारात की शोभा-सजावट कुछ वैसी झलक पेश करने वाली थी, जैसी त्रेता में भगवान राम की बारात रही होगी।

1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय जब मंदिरों के अधिग्रहण की आशंका छिड़ी तो वे किलाधीश ही थे, जिनकी मध्यस्थता में अधिग्रहण का बादल छटा। उनके इस प्रभाव के पीछे प्रवचन के फलक पर उनकी राष्ट्रीय ख्याति और बड़ी संख्या में शिष्यों प्रशंसकों की फौज रही। 1997 में इहलीला का संवरण करते हुए सांस्कृतिक-आध्यात्मिक जगत में ऐसी शून्यता छोड़ी, जिसे 17 वर्षो बाद भी महसूस किया जा रहा है।

Vaishno Devi reduction in the number of devotees in court

स्कूलों में परीक्षा और मौसम के बिगड़े मिजाज के कारण इन दिनों माता वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या कम हो गई है। हालांकि, वीरवार को मौसम साफ होने से श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है। वहीं, श्रद्धालुओं की संख्या आठ से दस हजार के बीच होने के कारण प्राचीन गुफा खुली हुई है।

विदित हो कि बुधवार को आधार शिविर कटड़ा सहित वैष्णो देवी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में बारिश हुई थी। त्रिकुटा पर्वत की ऊपरी चोटियों पर हल्का हिमपात हुआ था। मार्च में हिमपात देखकर लोग हैरान हैं। ऐसे में ठिठुरन बढ़ गई है। मां वैष्णो देवी के दर्शनों को देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को गर्म कपड़े पहनकर परिवार सहित पंजीकरण करवा कर भवन की ओर रवाना हुए। नगर से जारी हेलीकॉप्टर सेवा सहित वैष्णो देवी मार्ग पर चलने वाली बैट्री कार सेवा श्रद्धालुओं को उपलब्ध रही।

संभावना जताई जारी है कि मार्च के दूसरे पखवाड़े या फिर अप्रैल में वैष्णो देवी यात्रा में वृद्धि देखने को मिल सकती है। जिसका व्यापारी वर्ग बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

दस मार्च से फिर बिगड़ेगा मौसम का मिजाज-

वादी में ताजा बर्फबारी के बाद फिर हिमस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते प्रशासन ने उच्च पर्वतीय इलाकों टंगडार, करनाह, केरन, सोनमर्ग, गुरेज, तुलैल और साधना टॉप में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

बीते चार दिनों से वादी में जारी बर्फबारी व बारिश का सिलसिला वीरवार को थम गया। मौसम विभाग ने मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है। विभाग की मानें तो 10 मार्च से वादी में फिर से बर्फबारी की संभावना है। मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोट्स ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ 10 मार्च से वादी के वायुमंडल में फिर से सक्त्रिय होगा। इसके चलते वादी में फिर से बर्फबारी व बारिश हो सकती है। इस बीच तापमान में भी गिरावट आ सकती है। वहीं, चार दिनों से जारी बर्फबारी और बारिश का सिलसिला थमने से लोगों ने राहत की सांस ली है। दिन में हलकी धूप भी छाई रही। हालांकि, बर्फीली हवा चलने से लोगों को ठंड का अहसास हुआ। श्रीनगर में अधिकतम तापमान 10.2 डिग्री और न्यूनतम 3.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

Saturday, 1 March 2014

Shivlok Dham come off .. and Badnath

महा शिवरात्रि के मौके पर बाबा भोले की नगरी जय शिव के उद्घोष से गुंजायमान हो गया। इस दौरान देश के कोने-कोने से आए एक लाख से अधिक शिव भक्तों ने मंदिर में जलार्पण किया। भक्तों की कतार फुटओवर ब्रिज, मानसरोवर, बीएन झा पथ होने हुए बाई पास तक पहुंच गई। हालांकि सभी को कतारबद्ध तरीके से पूजा कराया गया। जलार्पण रात 9:30 बजे तक चलता रहा। रात 10:30 बजे से चौथे पहर की पूजा प्रारंभ की गई। मंदिर में पूजा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए थे।

उपायुक्त अमित कुमार व एसपी प्रभात कुमार पूरी व्यवस्था पर पैनी नजर रखे हुए थे। स्थानीय लोगों को पूजा कराने की भी कुछ व्यवस्था की गई थी। मंदिर में भोले शिव व माता पार्वती के विवाह को लेकर रातभर भजन-कीर्तन चलता रहा।

शिवरात्रि के मौके पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बाबा भोले की अनोखी बरात निकली। शाम करीब 7:30 बजे बरात नगर स्टेडियम से निकली। हालांकि बरात की एक झलक पाने के लिए लोग दिन से ही अपनी-अपनी जगह सुरक्षित करने में जुट गए थे। सड़क किनारे लोग कतार में खड़े थे। इस दौरान सड़क पर दो लाख से अधिक शिव भक्तों की भीड़ लगी हुई थी। दूरदराज के गांव व दूसरे प्रदेश से भारी संख्या में लोग बरात की एक झलक पाने के लिए बाबाधाम पहुंचे। शिव की इस बरात में बसहा पर सवार शिव जी के अलावा विभिन्न देवता के रूप धरे भक्तों को देख ऐसा लगा मानो आज शिव लोक बाबा भोले की धरती पर उतर आया हो। बरात में भूत-पिशाच, नर कंकाल, साधू-महात्मा, भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। इसके अलावा छऊ नृत्य, डीजे, बैंड, गेट बत्ती, घोड़ा व उंट भी बरात में शामिल था।

कोका दैत्य बना आकर्षण का केंद्र-इस बार शिव बरात में 25 फीट उंचा व 8 फीट चौड़ा कोका दैत्य सभी के आकर्षण का मुख्य केन्द्र था। इसके अलावा पंचमुखी कालिया नाग भी सभी की नजरों पर था। आम लोगों को मतदान के लिए जागरूक करने के लिए भी एक झांकी को बरात में शामिल किया गया था। 20 पहलवानों ने शारीरिक सौष्ठव का प्रदर्शन किया। बरात नगर स्टेडियम से निकली व मुख्य मार्ग होते हुए टावर चौक पहुंची, यहां से बाजार होते हुए विभिन्न मागरे से गुजरते हुए बाबा मंदिर पहुंची। चहुंओर लाइट की चकाचौंध-भोले की शादी के मौके पर बाबा की धरती को लाइट से दुल्हन की तरह सजाया गया था। बंगाल के चंदन नगर के कलाकारों ने लाइट का ऐसा इंतजाम किया था कि जो भी इसे देखा बस देखता ही रह गया। एफिल टावर, संसद भवन, मंदिर, चर्च, मस्जिद, आदि को दर्शाया गया था। लोग इन लाइट की सजावट को देखने के लिए अनायास ही रुक गये।

बरात का जगह-जगह स्वागत-शिव बरात का जगह-जगह रास्ते में भव्य स्वागत किया गया। फल, शर्बत, पानी, ठंडई, सूखे मेवे, मिठाई आदि का इंतजाम किया गया था। आम लोग व विभिन्न सामाजिक संगठन शिव के बरात की स्वागत में जुटे थे। इसमें महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग भी शामिल थे। कई जगह बरात पर फूलों की बरसात की गई।

कार्यकर्ताओं का अथक प्रयास-इस बरात के सफल आयोजन में मेयर सह महाशिवरात्रि महोत्सव समिति के अध्यक्ष राजनारायण खवाड़े व उनकी टीम का अथक प्रयास शामिल है। इस टीम समाज के हर वर्ग के लोग शामिल है। 1994 से हर वर्ष आयोजित ये अनोखी शिव बरात सामाजिक समरसता का अद्भुत मिसाल बन गयी है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम- इस मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बरात के रूट पर जगह-जगह पर लाठी पार्टी व सशस्त्र बल तैनात किया गया था। सादे लिबास में भी पुलिस वाले हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे। इसके अलावा गश्ती दल भी अपना काम कर रही थी। बरात के रूट को दोपहर से ही सील कर दिया गया था। जगह-जगह बैरिकेड लगा दिया गया था और वहां पुलिस वाले मुस्तैद थे। वाहन के रूट में परिवर्तन कर दिया गया था।

भांग-फलाहारी जलेबी का लिया आनंद- शिव की शादी हो और लोग भांग न खाएं ये कैसे हो सकता है। आज भांग की काफी डिमांड देखी गई। लोग इस वक्त का भरपूर आनंद उठाना चाहते थे और वे भंग के रंग में डूब गए। इसके अलावा हर इलाके में सड़क किनारे फलाहारी जलेबी व मिठाई भी खूब बिकी।

Kedarnath four valves may be opened

महाशिवरात्रि के पर्व पर ग्यारहवें ज्योतिर्लिग भगवान केदारनाथ के कपाट खोलने की तिथि घोषित कर दी गई है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट चार मई को सुबह छह बजे खोले जाएंगे। पिछले साल जून में आई आपदा के बाद क्षतिग्रस्त गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग की मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि 30 अप्रैल तक पैदल मार्ग के साथ ही केदारनाथ राष्ट्रीयराजमार्ग पूरी तरह से दुरुस्त कर लिये जाएंगे।

गुरुवार को भगवान केदार के शीतकालीन प्रवास स्थल ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में बदरी-केदार मंदिर समिति के प्रतिनिधियों, हक हकूकधारियों, पुजारियों व तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में वेदपाठी ब्राह्मणों ने पंचाग गणना कर केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि निकाली। कपाट मेष लगन में सुबह छह बजे खोले जाएंगे। बदरी-केदार मंदिर समिति की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने बताया कि तीस अप्रैल को भगवान केदार की चल विग्रह डोली ओंकारेश्वर मंदिर से केदारनाथ के लिए प्रस्थान करेगी। डोली फाटा और गौरीकुंड होते हुए तीन मई को केदारनाथ पहुंचेगी। इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह, कार्याधिकारी अनिल शर्मा, केदारनाथ के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग, टीगंगाधर लिंग और बागेश लिंग के अलावा हक हकूकधारी और तीर्थ पुरोहित मौजूद थे। गौरतलब है कि आपदा के बाद बीते वर्ष 11 सितंबर को शुद्धिकरण के बाद केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई थी, जो पांच नंवबर को कपाट बंद होने तक जारी रही।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी राघव लंगर ने बताया कि गौरीकुंड से केदारनाथ तक 24 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग को दुरुस्त करने का काम लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को सौंपा गया है। उन्हाेंने बताया कि यात्रियों के ठहरने के लिए केदारनाथ में प्री-फैब्रिकेटेड हट का निर्माण कराया जाएगा।अलावा हक हकूकधारी और तीर्थ पुरोहित मौजूद थे। गौरतलब है कि आपदा के बाद बीते वर्ष 11 सितंबर को शुद्धिकरण के बाद केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई थी, जो पांच नंवबर को कपाट बंद होने तक जारी रही। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी राघव लंगर ने बताया कि गौरीकुंड से केदारनाथ तक 24 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग को दुरुस्त करने का काम लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को सौंपा गया है। उन्हाेंने बताया कि यात्रियों के ठहरने के लिए केदारनाथ में प्री-फैब्रिकेटेड हट का निर्माण कराया जाएगा।

Friday, 28 February 2014

Everyone - from Har Mahadev echo raised pagoda Jaykare

महाशिवरात्रि पर शिवालयों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे से शिवालय दिनभर गूंजते रहे। चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में सुबह की आरती के बाद भक्तों ने भोले बाबा का अभिषेक किया।

कालकाजी मंदिर में मंत्रोच्चारण के साथ बाबा पशुपति नाथ का रुद्राभिषेक किया गया। दूध, दही, गंगाजल, शहद, गन्ने के रस से बाबा को स्नान कराया गया। आक, धतूरा, बेल पत्र, मेहंदी, सफेद पुष्प अर्पित कर श्रृंगार किया गया। शिव स्तुति व हवन के बीच भक्तों ने भक्तों ने बाबा का अभिषेक किया। हनुमान रोड स्थित शिव मंदिर में भी दिनभर भक्तों की कतार लगी रही। उन्होंने भोले भंडारी को बेल, धतूरा और दूध अर्पित किया। भक्तों को फल, खीर और आलू आदि का प्रसाद दिया गया। काल सर्प दोष की पूजा भी हुई।

पुष्प से भरी थालियां लेकर पहुंचे भक्त1केशवपुरम के पारदेश्वर मंदिर से लेकर मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, रोहिणी व जहांगीरपुरी के विभिन्न शिवमंदिरों में भक्तों ने पूजा की। लोग हाथों में पुष्प से भरी थालियां व चंदन-धूप लेकर शिव की आरती करने पहुंचे। इस मौके पर कई मंदिरों में बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया।

प्रवचन व भंडारे का आयोजन-उत्तम नगर, ककरौला, मोहन गार्डन, नजफगढ़, जनकपुरी, विकासनगर, विकासपुरी, तिलक नगर, रघुवीर नगर, मीरा बाग, पश्चिम विहार, सागरपुर व पालम स्थित मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। जनकपुरी सी-3 स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर के पुजारी पं.राम कुमार दूबे ने शिव तत्व पर प्रवचन का आयोजन किया। त्रिलोकीनाथ मंदिर में भी काफी संख्या में भक्तों ने शिव का जलाभिषेक किया।

हरिनगर घंटाघर के पास राष्ट्रीय महिला जनकल्याण सेवा मंच के तत्वावधान में भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंडित ध्रुवचंद पाठक, गुरबक्श सिंह, आलोक कपूर, अशप्रीत सिंह, बलजीत कौर सोनिया व सरोज सिंह सहित कई लोग उपस्थित थे।

Mahadev been Indradev Jalabhishek

देवों के देव महादेव के महापर्व शिवरात्रि पर न केवल नर नारी बल्कि देवगण भी अर्चना प्रस्तुत करते नजर आए। महाशिवरात्रि पर सुबह से ठहर-ठहर कर बारिश होती रही। ऐसा लगा मानों इंद्रदेव स्वयं महादेव को जलाभिषेक करने को आतुर हों। वहीं मंदिरों और शिवालयों में दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान शिवभक्त अपने आराध्य का अभिषेक करते रहे।

मंदिर परिसरों में दिनभर बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। भक्तों ने दूध व जल से अभिषेक कर शमी, धतूरा, बेलपत्रों से महादेव का श्रृंगार किया। वहीं हजारों भक्तों ने मंदिरों में रातभर जागकर महाशिवरात्रि मनाई। इस दौरान रात भर भक्त भजन कीर्तन व मंत्रोच्चार के जरिए शिव आराधना में लीन रहे। वहीं मंदिरों और शहर की तमाम संस्थाओं की ओर से शिव बरात निकाली गई। बरसात के बीच निकाली गई शिवबरात में भूत, पिचाश और औघड़ों का भेष धरे तमाम बाराती शामिल रहे।

शिवकुटी स्थित शंकर जी की कचहरी, शिव कोटेश्वर महोदव, कमौरी नाथ महादेव, मनकामेश्वर महादेव, तक्षकेश्वर महादेव, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन में भगवान शिवमंदिर, पंचमुखी महादेव, दशाश्वमेघ महादेव, छतनाग स्थित छतनाग महादेव, झूंसी स्थित गंगोली शिवाला महादेव, करछना स्थित समोगर नाथ महादेव आदि मंदिरों पर दिनभर शिवभक्तों का तांता लगा रहा। माघ मेला प्रशासन पंडाल में विशेष पूजापाठ एवं हवन का आयोजन हुआ।

युवा चौरसिया समाज सेवा समिति की ओर से बजे पान दरीबा शिवमंदिर, नेपाली धर्म समाज की ओर से गंगानगर में, जय शिव सेना लूकरगंज, सत्ती चौरा चढ़ान मालवीय नगर, श्रीश्री भोले बाबा मंदिर समिति बादशाही मंडी, हरिहर आरती समिति, श्रीनारायण आध्यात्मिक ज्योतिषपीठ नर्मदेश्वर महादेव बेनीगंज, शिवशक्ति सेना का अखाड़ा त्रिशूल नंदी दर्शन, शोभायात्र कमौरी महादेव मंदिर सिद्धपीठ भोलेगिरि मंदिर कटघर प्रयाग, श्री निम्बार्क आश्रम रामबाग में शिवरात्रि पर भीड़ रही। सिद्धपीठ मां ललिता देवी मंदिर स्थित ललितेश्वर महादेव का भांग धतूरा एवं पुष्प के आभूषणों से श्रृंगार किया गया। शाम को महामंत्री धीरज नागर, सुमित श्रीवास्तव, पीसी वर्मा, अनुराग चंद्रा, शिवनाथ शर्मा, अशोक मिश्र की देखरेख में भजन एवं भंडारा आयोजित किया। दशाश्वमेघ महादेव, माधवेश्वर महादेव पर शंखनाद और घंटा घडियाल बजाकर संगम को विश्व धरोहर बनाए जाने की कामना की गई। इस मौके पर धर्मराज पांडेय, ध्रुवराज पांडेय, भक्तराज पांडेय, केसी पांडेय, विष्णु दयाल श्रीवास्तव, आशा, अनुपमा, विश्व धरोहर महाअभियान के संयोजक तीर्थराज पांडेय आदि मौजूद रहे।

हर हर महादेव प्राचीन शिवमंदिर मुंडेरा की ओर से सुबह रुद्राभिषेक के बाद शिवबरात निकाली गई। इस मौके पर स्वामी रामभद्र करपात्री बाबा, क्षेत्रीय विधायक पूजा पाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष धनंजय सिंह, संयोजक राहुल सिंह आदि मौजूद रहे।1फाफामऊ प्रतिनिधि के अनुसार देवाधिदेव महादेव की आराधना और पूजन को लेकर क्षेत्र के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटी रही। यह क्त्रम देर शाम तक चलता रहा। बारिश में भीगते हुए शिवालयों तक जाना पड़ा। मगर आस्था के आगे बारिश का लोगों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। क्षेत्र के मलाकहरहर, शिवपुर, मोरहूं, गद्दोपुर, गोहरी, फाफामऊ गांव, शांतिपुरम कालोनी आदि स्थानों पर मौजूद शिवालयों में शिव शंकर के जयकारे लगाने के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक भी किए गए।1पड़िला महादेव में शुरू हुआ मेला1पांडेश्वर नाथ धाम पड़िला महादेव में गुरुवार भोर से ही चहल पहल रही। बरसात के बीच स्थानीय और आस-पास जिलों के हजारों की संख्या में भक्त जलाभिषेक करने पहुंचे।

इस दौरान हजारों लोगों ने झंडा, पताका और घंटा आदि का निशान भी चढ़ाया। देर शाम को महाआरती हुई और छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाया गया। इस मौके पर भजन कीर्तन आयोजित हुआ। इसमें कृष्ण कुमार गिरि, देवेंद्र गिरि, बिंदु गुप्ता, दीप नारायण, डॉ. धर्मराज यादव, शिवचंद्र यादव, जिलेदार शुक्ला, वरिष्ठ नारायण शुक्ला, सुजीत समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। गुरुवार को व्यवस्था का जायजा लेने के लिए सांसद कपिलमुनि करवरिया पहुंचे।..


Monday, 24 February 2014

Amritanandamayi Math blaming the attack on Hindus

आरएसएस विचारक पी. परमेश्वरन ने झप्पी देने वाली अम्मा के रूप में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी के मठ के खिलाफ उनकी पूर्व शिष्या द्वारा लगाए गए आरोपों को हिंदुओं पर हमला करार दिया है। उनका कहना है कि मठ के प्रति लोगों में श्रद्धा भाव कम करने के लिए ऐसी बातें फैलाई जा रही हैं।

अमृतानंदमयी की शिष्या रहीं आस्ट्रेलियाई मूल की गेल गायत्री ट्रेडवेल ने अपनी किताब 'होली हेल-ए मेमॉयर ऑफ फेथ, डिवोशन एंड प्योर मैडनेस' में माता और उनके मठ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।

इसी सिलसिले में भारतीय विचारकेंद्रम के निदेशक परमेश्वरन ने रविवार जारी बयान में कहा, मठ का चयन इसलिए किया गया क्योंकि अम्मा (अमृतानंदमयी) और मठ जाति, धर्म और क्षेत्र से उठकर अध्यात्मिकता और सेवा में रत हैं। केरल में मीडिया के एक तबके द्वारा मठ पर लगाए गए आरोपों के पीछे आध्यात्मिकता और सेवा के क्षेत्र में सक्त्रिय मठ के प्रति लोगों में श्रद्धा भाव को कम करना है। 1परमेश्वरन के मुताबिक, अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब झूठ का प्रचार कर धार्मिक भावना को आहत करना नहीं है। ट्रेडवेल ने अपने संस्मरण में दावा किया है कि वह कई ऐसे राज जानती हैं, जिनके उजागर होने पर सनसनी फैल जाएगी। माता अमृतानंदमयी ने संस्मरण में लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

Kripalu Maharaj's daughter officially assumed command

कृपालु महाराज के अपने धाम जाने के उनकी बड़ी बेटी डॉ. विशाखा त्रिपाठी ने प्रकल्पों को आगे बढ़ाने की कमान संभाल ली है। इसकी रविवार को आधिकारिक घोषणा हो गई। डॉ. विशाखा ने कहा कि 'प्रेम मंदिर' का निर्माण विश्व में प्रेम-धर्म की स्थापना के लिए किया गया है। साथ ही जगदगुरु के कई प्रकल्प भी चल रहे हैं। वह चाहेंगी कि यह अपना काम बेहतर ढंग से करते रहें।

डॉ. विशाखा ने कृपालु महाराज के औपचारिक रूप से काम संभालने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ब्रज- वृंदावन से भगवान श्रीकृष्ण ने जगत को 'प्रेम' का संदेश दिया तो उनके भक्त कृपालु ने इस संदेश के सार को जगत के सामने रखने का खाका तैयार किया। 'प्रेम मंदिर' कृपालु द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम तत्व को साक्षात् रूप देने का एक छोटा प्रयास भर था। इसकी कल्पना उन्होंने दशकों पहले की। अपनी कल्पना को मूर्त रूप देने में कृपालु को कई साल लगे।

डॉ. विशाखा त्रिपाठी ने बताया कि विश्व भर में सनातन धर्म की पताका फराहने के साथ 'प्रेम मंदिर' निर्माण में किसी प्रकार की कोई कोताही न रहे, ऐसा प्रयास जगद्गुरु ने हमेशा किया।

प्रेम के इस संवाहक मंदिर के अलावा अत्याधुनिक सत्संग भवन, तीन सौ बेड का अस्पताल बनाने की योजना को मूर्तरूप मिलता, इससे पहले ही जगद्गुरु ने गोलोक धाम का रुख कर लिया। अब इसका जिम्मा वह संभाल रही हैं। उनका कहना है कि निराश्रित, दरिद्र नारायण सेवा, सत्संग भवन, अस्पताल निर्माण की व्यवस्था को उन्होंने गति देना शुरू कर दिया है। कृपालु परिषद की अध्यक्षा डॉ. विशाखा त्रिपाठी ने बताया कि मनगढ़ में 'श्रीभक्ति धाम', वृंदावन में 'श्री श्यामा श्याम धाम', बरसाना का 'रंगीली महल' और दिल्ली की राधा गोविंद समिति हैं। इन केंद्रों ने समाजसेवा में नये आयाम स्थापित किए। वृंदावन में 100 बेड वाला नि:शुल्क चिकित्सालय तीन महीने में शुरू कर दिया जाएगा। अत्याधुनिक मशीनों व विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा यहां हर रोग का उपचार होगा।

Sunday, 23 February 2014

Maha Shivaratri: Kanvdiyhon shadow of the terror threat!

महाशिवरात्रि पर सड़कों में उमड़ने वाले कांवड़ियों के सैलाब पर इस साल फिर आतंकी साया मंडराने लगा है। ऐसी आशंका खुफिया एजेंसियों ने ही जताई है। किसी भी खुराफात को नाकाम करने के लिए पुलिस अफसरों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। फोर्स के साथ खुफिया कैमरे भी लगाए जाएंगे।

27 फरवरी को महाशिवरात्रि है। 25 की रात से ही लाखों की संख्या में कांवड़िये सड़कों पर दिखने लगेंगे। रामघाट रोड, जीटी रोड व खैर रोड पर सबसे ज्यादा भीड़ रहेगी। ज्यादातर शिवभक्त कांवड़ लेकर खेरेश्वरधाम तक आते हैं। खुफिया एजेंसियों ने कावड़ियों की भीड़ के बीच आतंकियों के खुराफात की आशंका जताई है।

फोर्स तैनाती का प्लान-एसपी सिटी पंकज पांडेय के मुताबिक आशंकाओं को देखते हुए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। रामघाट रोड से लेकर खेरेश्वरधाम तक फोर्स रहेगा। बम डिस्पोजल दस्ते और एलआइयू टीम को सतर्क रहने को कहा गया है। पुलिस, पीएसी, आरएएफ व होमगार्ड की लगाए जाएंगे। 

चौकीदार भी-कांवड़ यात्रा के दौरान शहर का पूरा फोर्स तो रहेगा ही, देहात के छह थानेदार, 11 दरोगा, 63 सिपाही और हर थाने से 20-20 चौकीदारों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इगलास, गौंडा, मडराक, अकराबाद, गंगीरी, विजयगढ़, पिसावा व महिला थाने की पुलिस भी मुस्तैद रहेगी।

वाहनों पर रोक 126 फरवरी से ही अतरौली की ओर से शहर आने वाले हल्के-भारी वाहनों पर प्रतिबंध लग जाएगा। इस रूट की निजी बसें तालानगरी स्थित संत फिदेलिस स्कूल से चलेंगी। जीटी रोड पर पड़ाव दुबे से सारसौल तक वाहनों का प्रतिबंध रहेगा। दो दिन रोडवेज बसें बाईपास से निकाली जाएंगी। दिल्ली रोड से जाने वाले वाहनों को सोमना रोड भेजा जाएगा। कानपुर की ओर से आने वाले वाहनों को एटा चुंगी से बाईपास होते हुए निकाला जाएगा। टीएसआइ शौर्य कुमार से बैरियर व्यवस्था की जरूरत पर रिपोर्ट मांगी गई है। 

एसपी सिटी ने सीओ व सभी थानेदारों को निर्देश दिया है कि कांवड़ियों के भोजन व परिक्रमा का ध्यान रखें। महिला कांवड़ियों से पूर्व में हुई छेड़खानी जैसी किसी भी घटना से सबक लेते हुए पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।

महाशिवरात्रि की तैयारियों को लेकर शनिवार शाम चार बजे कोतवाली में बैठक होगी। इसमें एडीएम सिटी अवधेश तिवारी, नगर निगम, बिजली विभाग, स्वास्थ्य व पुलिस विभाग के अफसर रहेंगे।

Holly wears a bright white dress before Takurji

चल री लड्डूगोपाल कूं नई पोशाक लैं आवें.। वृंदावन की कुंज गलियों में महिलाओं के कुछ ऐसे ही बोल आजकल सुनाई दे रहे हैं। परंपरा के अनुसार होली से पहले घर-घर में लड्डू गोपाल को सफेद पोशाक पहनाई जाएगी। जबकि होली के बाद लाला रंगबिरंगी पोशाक धारण करते हैं।

वृंदावन और ब्रज में मौसम बदलने के साथ लाड़ले कन्हैया की पोशाक में बदलाव नजर आने लगा है। होली पर लड्डू गोपाल को नई पोशाक पहनाने को महिलाएं खरीदारी में जुट गई हैं। कारण वृंदावन में भगवान कृष्ण की घरों में बालक रूप में पूजा होती है। जिस तरह घरों में बालकों के खानपान और कपड़ों में मौसम के साथ बदलाव होता है, ठीक उसी तरह 'लाला' की परवरिश भी महिलाएं यशोदा मैया की तरह करती हैं। अब जबकि ब्रज में फागुनी बयार उड़ने लगी है तो महिलाओं को भी अपने लाड़ले के परिधान की चिंता सता रही है। स्थानीय निवासी रामनारायन बृजवासी का कहना है कि होली पर ठाकुरजी धवल सफेद वस्त्र ही धारण करेंगे। ताकि जो भी रंग उनके ऊपर चढ़े चटख दिखायी दे।

पर्व पर देसी-विदेशी भक्त उन्हें रंग से सराबोर देश मदमस्त हो जायें। बाजार के कई पोशाक विक्रेताओं ने बताया कि रेशम और बेलवेट की सफेद धवल पोशाक की बिक्री इन दिनों तेज हो गयी है।

पोशाक व्यापारी पुरुषोत्तम शर्मा का कहना है कि हर साल होली से पहले धवल पोशाक की बिक्त्री अधिक होती है। होली पर ठाकुर जी के सफेद परिधान पर पड़े चटख रंग श्रद्धालुओं को लुभाते हैं तो होली के बाद उनके आकर्षक परिधान। होली के बाद कान्हा शनील और वेलवेट के बने रत्‍‌न जड़ित परिधान धारण कर श्रद्धालुओं को भव्य दर्शन देंगे।

Thursday, 20 February 2014

Shri Amarnath Yatra 2014 Guidebook Released

राज्यपाल एनएन वोहरा ने मंगलवार को जम्मू, कश्मीर एंड लद्दाख टूरिज्म डेवलपमेंट कोऑपरेटिव लिमिटेड (जेकेएलटीडीसी) द्वारा तैयार की गई श्री अमरनाथ यात्रा-2014 गाइड बुक के दूसरे संस्करण का विमोचन किया।

उन्होंने जेकेएलटीडीसी के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा से संबंधित पुस्तक में दी गई समग्र देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। जेकेएलटीडीसी के चेयरमैन राजेश गुप्ता ने बताया कि गाइड में यात्रा के दौरान आने वाले स्थलों की जानकारी के अलावा, यात्रा रजिस्ट्रेशन सेंटर, ग्रुप रजिस्ट्रेशन, एनआरआई रजिस्ट्रेशन, स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के अलावा यात्र के दौरान क्या करें, क्या न करें के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। गुप्ता ने बताया कि इसके अलावा गाइड में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए क्या करना है, के बारे में भी बताया गया है। यही नहीं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गाइड में होटल के नंबर, हेलीकॉप्टर बुकिंग व अन्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई है।

इस अवसर पर श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ नवीन के चौधरी के अलावा कोऑपरेटिव के स. अमरीक सिंह, अजय कुमार गुप्ता, स. गुरमीत सिंह, एसएस मदनी, निशांत कुमार गुप्ता, एडवोकेट शकील अहमद सहित अन्य शामिल थे।

Nanda Devi Rajjat ??trip: visit of Faith Initiative Biswasbri

दुनिया की सबसे लंबी (280 किमी) दुर्गम पैदल यात्रा 'श्री नंदा देवी राजजात' को सुरक्षित एवं निरापद बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने कमर कस ली है। लगभग 280 किमी की यह यात्रा 14 अगस्त को चमोली जनपद के नौटी गांव से प्रारंभ होकर छह सितंबर को विश्राम लेगी।

12 साल के अंतराल में होने वाली इस धार्मिक यात्रा से पूरी देवभूमि की आस्था जुड़ी हुई है। बता दें कि 2013 में राजजात उत्तराखंड में आई भीषण आपदा के कारण स्थगित कर दी गई थी। इसलिए इस बार इसका महत्व और भी बढ़ गया है। उम्मीद की जा रही है कि राजजात आपदा में बुरी तरह चरमरा गई सूबे की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी का काम करेगी। साथ ही इससे पर्यटन एवं तीर्थाटन की नई संभावनाएं भी विकसित होंगी। इन्हीं तमाम बिंदुओं को ध्यान में रखकर पर्यटन विभाग अपनी तैयारियां कर रहा है।

'श्री नंदा राजजात-2014' के लिए पर्यटन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसलिए जिम्मेदारियों का बोझ भी सबसे ज्यादा उसी पर है। उसे कार्य करने के साथ उनकी निगरानी भी रखनी है, ताकि यात्रापथ में कोई कमियां न रह जाएं। 12 साल के अंतराल में होने वाली आस्था की यह ऐसी यात्र है, जिससे संपूर्ण देवभूमि की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में राजजात को निर्विघ्न संपन्न कराना किसी चुनौती से कम नहीं। एक तरफ आपदा में बुरी तरह क्षतिग्रस्त यात्रापथ को व्यवस्थित करने की चुनौती है तो दूसरी तरफ देश-दुनिया के सामने खुद को साबित करने की। यही वजह है कि पर्यटन विभाग राजजात की तैयारियों को लेकर खासा संजीदा है। कुरुड़-नंदकेशरी-वाण-बेदनी झील हेरिटेज एवं इको टूरिज्म सर्किट आठ करोड़ों नौटी-कांसुवा-चांदपुर गढ़ी-सेम हेरिटेज एवं इको टूरिज्म सर्किट आठ करोडों पौड़ी-चमोली में मार्गीय सुविधाएं- आठ करोड़ यात्रा पथ की सबसे बड़ी चुनौती निर्जन पड़ावों में जरूरी सुविधाएं जुटाने की है। पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे, इसलिए इन पड़ावों में 121 अस्थाई शौचालय बनाए जाएंगे। इसके लिए जिलाधिकारी चमोली पांच निर्जन पड़ाव सुझाए हैं।

रामचंद्र भारद्वाज, संयुक्त निदेशक, पर्यटन

राज्य आकस्मिकता निधि व राज्य सेक्टर से राजजात की अवस्थापना सुविधाओं के लिए वर्ष 2012-13 में पर्यटन विभाग ने 1941.48 लाख की धनराशि अवमुक्त की। इसमें से 1698.11 लाख की धनराशि कार्यदायी संस्थाओं को आवंटित हो चुकी है, जिससे 220 कार्य होने हैं। इससे पूर्व, 2011-12 में राज्य सेक्टर से यात्रा मार्ग के सुधार के लिए वन विभाग को 83.32 लाख की धनराशि आवंटित हो चुकी है।

Wednesday, 19 February 2014

Banke Bihari Temple

वृंदावन। जगप्रसिद्ध बांकेबिहारी और उनके भक्तों के बीच 'दीवाल' नजर नहीं आएगी। जगमोहन में तीन से अधिक सेवायतों के जाने पर मंदिर प्रबंध कमेटी ने रोक लगा दी है।

गत दिवस 'जागरण' में प्रकाशित खबर 'बांकेबिहारी और भक्तों के बीच 'दीवाल' सेवायत' का असर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु के आदेश में देखने को मिला।

उपमन्यु ने सेवायतों को पत्र जारी कर दर्शन के दौरान नियम के अनुसार केवल तीन लोगों को ही ठाकुरजी के जगमोहन में मौजूद रहने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर इससे तीन से अधिक कोई व्यक्ति मंदिर के जगमोहन में दिखाई देगा, तो सेवा अधिकारी के ऊपर कार्रवाई की जाएगी। 

जगमोहन में मौजूद रहने वाले तीन लोगों में सेवायत हो या फिर मंदिर के भंडारी, केवल तीन लोग ही जगमोहन में श्रद्धालुओं की माला, प्रसाद लगाने के लिए मौजूद रहेंगे।

Tuesday, 18 February 2014

Governor calls for more facilities for Char Dham pilgrims

देहरादून, जागरण ब्यूरो। उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी का कहना है कि जिस तरह हज यात्रियों के लिए व्यवस्था की जाती है, उसी तरह चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आर्थिक सहायता व अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रभावी फार्मूला या संसदीय कानून बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में चल रहे राज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने कहा कि चार धाम यात्रा को वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड और तिरुपति में चल रही व्यवस्था की तर्ज पर ही विकसित करना चाहिए। 

Wednesday, 12 February 2014

Keep attention to death and god

क्रांरांतिकारी जैन संत तरुण सागर महाराज ने मंगलवार को अपने कड़वे प्रवचनों से श्रोताओं के जीवन की मिठास घोलने का प्रयास किया। हंसी की फुहारों के बीच उन्होंने जीवन में आने वाले दुखों की चर्चा की और समय आते अपने जीवन में सुधार करने का संदेश दिया।

एमडी जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत के मैदान में जैन मुनि के तीन दिवसीय कड़वे प्रवचनों की श्रृंखला मंगलवार से शुरू हुई। मंच पर बने ताजमहल के कटआउट के आगे आसन पर बैठकर उन्होंने अपने प्रवचन की शुरुआत में जिदंगी में प्रकृति, विकृति और संस्कृति का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भूख लगने पर भोजन करने को प्रकृति, भूख न लगे तब भी खाने को विकृति, खुद भूखे रहकर भूखे को खिलाना संस्कृति होती है। 

जिदंगी का सार बताते हुए संत ने कहा कि सोते में धन, जागते में धन, घर में धन, बाजार में धन। आखिर में रिजल्ट निकलता है निधन। इसलिए हमें ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे किसी और को हमारी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना नहीं करनी पड़े। हम ही आत्म कल्याण करें। जीवन में जो भी रिश्ते हैं, वे जीते जी हैं। मरने के बाद कोई रिश्ता किसी के साथ नहीं रहता।

Friday, 31 January 2014

Narayani rock brought salvation to the Pitrion

 
हरिद्वार। मौनी अमावस्या पर हजारों लोगों ने नारायणी शिला पहुंच कर अपने पितृों को मोक्ष दिलाया। इस मौके पर नारायणी शिला पर लोगों ने अपने पितृों के निमित यज्ञ-हवन किए। 

गुरुवार को गंगा स्नान के बाद हजारों लोगों ने नारायणी शिला पहुंचकर अपने पितृों के निमित यज्ञ और दान आदि कर उन्हें मोक्ष दिलाया। गरुड़ और विष्णु पुराण में कहा गया है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा को 13 दिनों तक प्रेत योनि में रखा जाता है। जिसके बाद में उनके निमित यज्ञ हवन करके उन्हें मोक्ष दिलाया जाता है। इसके लिए हरिद्वार स्थित नारायणी शिला का उल्लेख शास्त्रों में भी मिलता है। विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित शक्तिधर शर्मा शास्त्री ने बताया कि बाकि अमावस्याओं की अपेक्षा मौनी अमावस्या पर किए गए हवन आदि का अतिशीघ्र फल मिलता है। क्योंकि, इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित रहते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन गंगा स्नान के बाद ही पितृों के निमित्त हवन किया जाता है। इसके लिए गंगा स्नान करने के भी अलग नियम होते हैं। इस दिन यज्ञ हवन से पहले कोई भी मादक द्रव्य और तंबाकू का सेवन किए बगैर गंगा उत्तर दिशा में मुख करके स्नान करना चाहिए और तिल जौ और गिलोय युक्त हवन सामग्री से हवन करने के बाद कपड़े और अन्य मानव उपयोगी वस्तुएं दान देने से पितृों को बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है।

स्नान के बाद गंगा और विष्णु पूजा का क्रम भी जारी रहा दिनभर-

भाजपा नेत्री साध्वी उमा भारती ने भी मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान किया। उन्होंने गुरुवार को नीलधारा स्थित दक्षिण काली मंदिर घाट पर स्नान किया। इस अवसर पर उन्होंने गंगा में अपनी आस्था और गंगा की महिमा को भी बताया। 

कम रही भीड़-मौनी अमावस्या स्नान के लिए सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम बुधवार को ही पूरे कर लिए थे। पुलिस प्रशासन के अनुसार मौनी अमावस्या पर करीब सात से दस लाख श्रद्धालु आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन विभिन्न कारणों से गुरुवार को महज दो से ढाई लाख श्रद्धालु ही स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचे थे।
गुरुवार को पवित्र मौनी अमावस्या पर पुण्य लाभ लेने के लिए लाखों लोगों ने गंगा में पावन डुबकी लगाई। 

ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ स्नान का क्रम शाम तक चलता रहा। हरकी पैड़ी समेत दर्जनों घाटों पर शाम तक करीब ढाई लाख श्रद्धालुओं ने पावन डुबकी लगा पुण्य कमाया। गुरुवार को मौनी अमावस्या के दिन सिद्धि योग रहा। ज्योतिषाचार्यो के अनुसार विभिन्न स्नान और पर्वो के दिन आने वाला सिद्धि योग हर कार्य के पूर्ण होने के शुभ संकेत लेकर आता है। सिद्धि योग में पुण्य कमाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली आदि राज्यों के लाखों श्रद्धालुओं ने गुरुवार को धर्मनगरी का रुखकिया। ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित शक्तिधर शर्मा शास्त्री के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रहकर व्रत करने और गंगा में स्नान कर दान, यज्ञ और पूजा अर्चना करने से सैकड़ों अश्वमेघ यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। विष्णु की पूजा इस व्रत के दौरान श्रेयस्कर मानी जाती है।

 गुरुवार को हरकी पैड़ी, सर्वानंद घाट, कुशावर्त घाट, बिरला घाट, अलकनंदा घाट, विश्वकर्मा घाट, प्रेमनगर आश्रम घाट व लवकुश घाट आदि घाटों पर करीब ढाई लाख लोगों ने मौनी अमावस्या पर पावन डुबकी लगाई। 

Friday, 17 January 2014

LINDA C. BLACK HOROSCOPES for 01/04/14

Today's Birthday (01/04/14). Love flavors the soup this year with spice and sultry deliciousness. Social activities playfully distract until mid-February. After that, creative ambitions spark in a new direction. Balance work with health to grow stronger physically and financially. Romance grows with shared spiritual and philosophical discovery, especially over spring and summer. Inspire love and happiness.

To get the advantage, check the day's rating: 10 is the easiest day, 0 the most challenging.

Aries (March 21-April 19) -- Today is a 6 -- Get contemplative today and tomorrow. New information instigates changes. It's a good time for brainstorming. Consider all possible consequences before taking action. Conserve resources, without worrying about the money. Keep a secret. Read more..



From CT News

Wednesday, 15 January 2014

Pakistan: Truck hits school bus, 17 children dead

Islamabad: A truck slammed into a bus bringing school children home from an outing in southern Pakistan on Wednesday, killing at least 17 pupils and three adults, police said.

"It was a head-on collision when the truck slammed into the school van on a single track dirt road. Apparently, speeding and recklessness resulted in the accident," Abdul Rahim Gopang, a police officer, said by telephone from near the accident.

The collision occurred in southern Sindh province, about 300 km (180 miles) north of the provincial capital Karachi. Television channels showed footage of parents running into a hospital in the nearby town of Nawab Shah, frantically looking for their children, aged 10 to 16. Read more




From IBN News