कोलकाता। ईस्ट कोलकाता नागरिक फाउंडेशन और श्री शांति शक्ति पीठ आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सप्ताहव्यापी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समारोह के दूसरे दिन रविवार को कथा प्रसंग पर चर्चा करते हुए साध्वी संतोषानंद सरस्वतीजी ने कहा कि प्रभु केवल भाव के भूखे हैं। ईश्वर को पकवान, छप्पन भोग और दिखावे से कोई मतलब नहीं। विभिन्न ग्रंथों और धार्मिक पुस्तकों में इस बात का उल्लेख मिलता है।
महात्मा विदूर का उदाहरण हमारे सामने हैं। पंडाल में उपस्थित हजारों श्रोताओं को संबोधित करते हुए साध्वीजी ने कहा कि जगत के सत्य होने का आभास भ्रम की वजह से होता है। शरीर से ऊपर उठें, जीवन को गंभीरता से समझो और अनुभव करें तो पता चलेगा कि जगत मिथ्या है और परमात्मा सत्य।
साध्वीजी ने कहा कि आंखें खोलो, जागो और वस्तुओं को उनके यथार्थ रुप में देखो तभी सुख व शांति की अनुभूति होगी। उन्होंने कहा कि प्रभु ने हमें यह शरीर रूपी साधन इसलिए दिया है कि हम आत्मा और परमात्मा को पहचान सकें। जिनके अन्दर यह जिज्ञासा भाव होता है, वही प्रभु के निकट होता है। साध्वी श्री संतोषानन्दजी ने आगे फरमाया कि श्रीमद्भागवत ग्रंथों में काफी उच्च स्थान रखता है। इसके प्रत्येक श्लोकों में प्रेरणा है, प्रभु का संदेश है। हमें इसका सुक्ष्म विवेचन कर जीवन को सफल बनाना चाहिए।
Source: Spiritual News in Hindi
No comments:
Post a Comment