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Monday, 6 January 2014

Lord only hungry Quote

कोलकाता। ईस्ट कोलकाता नागरिक फाउंडेशन और श्री शांति शक्ति पीठ आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सप्ताहव्यापी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समारोह के दूसरे दिन रविवार को कथा प्रसंग पर चर्चा करते हुए साध्वी संतोषानंद सरस्वतीजी ने कहा कि प्रभु केवल भाव के भूखे हैं। ईश्वर को पकवान, छप्पन भोग और दिखावे से कोई मतलब नहीं। विभिन्न ग्रंथों और धार्मिक पुस्तकों में इस बात का उल्लेख मिलता है। 

महात्मा विदूर का उदाहरण हमारे सामने हैं। पंडाल में उपस्थित हजारों श्रोताओं को संबोधित करते हुए साध्वीजी ने कहा कि जगत के सत्य होने का आभास भ्रम की वजह से होता है। शरीर से ऊपर उठें, जीवन को गंभीरता से समझो और अनुभव करें तो पता चलेगा कि जगत मिथ्या है और परमात्मा सत्य। 

साध्वीजी ने कहा कि आंखें खोलो, जागो और वस्तुओं को उनके यथार्थ रुप में देखो तभी सुख व शांति की अनुभूति होगी। उन्होंने कहा कि प्रभु ने हमें यह शरीर रूपी साधन इसलिए दिया है कि हम आत्मा और परमात्मा को पहचान सकें। जिनके अन्दर यह जिज्ञासा भाव होता है, वही प्रभु के निकट होता है। साध्वी श्री संतोषानन्दजी ने आगे फरमाया कि श्रीमद्भागवत ग्रंथों में काफी उच्च स्थान रखता है। इसके प्रत्येक श्लोकों में प्रेरणा है, प्रभु का संदेश है। हमें इसका सुक्ष्म विवेचन कर जीवन को सफल बनाना चाहिए। 

Krmas over 14: Barat 12 days of the monsoon, torrential ascendant

वाराणसी। शादी विवाह की चिंताओं को लेकर परेशान लोग इस बार लग्न तिथियों की उपलब्धता को लेकर मगन हैं। इस बार लग्नों का मानो धमाल है, 14 जनवरी को खरमास खत्म .और 18 जनवरी से बरात का मानसून छाने को तैयार है। जनवरी के दूसरे पखवारे से मार्च के पहले पखवारे भर घनघोर लग्न और बरातें। इन 56 दिनों में ही 37 लग्न जिसमें ग्रह नक्षत्रों की गणना के हिसाब से सात खास लेकिन युवा पीढ़ी को आठवां अर्थात 14 फरवरी खासतौर पर रास आ रहा है। 

बैंड-बाजा-बराती- जनवरी में 18 से 28 तक लगातार तो फरवरी में भी तीन से 27 के बीच कुछ एक दिनों को छोड़कर 19 लग्न हैं। मार्च के चौदह दिनों में सात दिन बैंड बाजा और बारातियों के नाम होंगे। मार्च की 14 तारीख बीतते ही 15 को रात 1.05 बजे खरमास लग जा रहा। हालांकि इसके बाद भी विवाह लग्नों की खोज गणना से अधिक मनना के आधार पर जारी है। 

चमकेगा सहालग का बाजार-
खरमास के कारण खरीदारी में रोड़े हैं पर कुछ हद तक लोगों ने बाईपास के नाना तरीके इजाद कर मिथक भी तोड़े हैं। खरीद बिक्री भले ही न हो रही हो, आर्डर धड़ाधड़ दिए और लिए जा रहे हैं। इसकी गरमाहट दुकानों व गोदामों के अंदरखाने तक दिख रही है। यानी बस सूर्य के 14 जनवरी को मकर राशि में आने का इंतजार और चमक उठेगा सहालग का बाजार। 

काउंटरों पर बुकिंग की भीड़- खरमास के कारण खरीदारी भले न हो रही हो लेकिन शोरूमों के काउंटर पर बुकिंग से सांस लेने की फुर्सत नहीं। इलेक्ट्रानिक आइटम, फर्नीचर, गहने, दो या चार पहिया वाहनों के धड़ाधड़ आर्डर दिए लिए जा रहे। इसमें वाराणसी सहित आस पास के जिलों में भी आपूर्ति की जानी है। 

उफ, टेलरों का 'ट्रेलर'- खरमास के बाद 'लगनहट' शुरू होने में तीन दिन का समय। ऐसे में टेलरों (दर्जियों) का ट्रेलर देखते बन रहा। ड्रेस डिजाइनर उत्तम मुखर्जी के अनुसार दो माह तक की एडवांस बुकिंग है। इसमें ही 17 मार्च को होली भी पड़ रही। 

56 दिन में 37 तिथियां-
जनवरी में 11 लग्न- 18 से 28 तक लगातार।
फरवरी में 19 लग्न- 3, 4, 5, 8, 9, 10, 14 से 22 तक 24 से 27 तक।
मार्च में 7 लग्न- 2, 3, 4, 7, 8, 9 और 14 को खास लग्न।
जनवरी- 22, 23, 25
फरवरी- 5, 6, 16, 19
मार्च- 7 और 8 

लॉन, बैंड की बुकिंग अब सपना-
भले लगन इस बार खूब हो लेकिन खास दिनों के लिए लान, होटलों व बैंड बाजा की बुकिंग फुल हो चुकी है। खरमास के पहले ही इसका कोटा फुल हो गया। इससे लोगों को दुखी मन से आगे पीछे का दिन भी चुनना पड़ रहा है। 

Idolatry means contemplation of Swami Vivekananda ...

जब तक हम सूक्ष्म को मन में नहीं ग्रहण कर पाते, तब तक हमें मूर्तियों के सहारे ही उपासना करनी होती है। मूर्तिपूजा को लेकर विवाद पैदा करना उचित नहीं। स्वामी विवेकानंद का चिंतन.. 
यदि कोई कहे कि प्रतीक, अनुष्ठान और विधियां सदैव रखने की चीजें हैं, तो उसका यह कहना गलत है, पर यदि वह कहे कि इन प्रतीकों और अनुष्ठानों द्वारा विकास की निम्न श्रेणियों में आत्मोन्नति में सहायता मिलती है, तो उसका कथन ठीक है। पर हां, आत्मोन्नति का अर्थ बुद्धि का विकास नहीं। किसी मनुष्य की बुद्धि कितनी ही विशाल क्यों न हो, पर आध्यात्मिक क्षेत्र में संभव है वह एक बालक या उससे भी गया-बीता हो। इसी क्षण आप इसकी परीक्षा कर सकते हैं। हममें से कितने ऐसे हैं, जिन्होंने सर्वव्यापित्व की कल्पना की है? हालांकि हम लोगों को सर्वव्यापी ईश्वर में ही विश्वास करना सिखाया गया है। यदि आप प्रयत्न करेंगे तो सर्व-व्यापकता के भाव के लिए आकाश या हरे-भरे विस्तृत मैदान की या समुद्र अथवा मरुस्थल की कल्पना करेंगे। पर ये सब भौतिक मूर्तियां हैं, जब तक आप सूक्ष्म को सूक्ष्म की ही तरह मन में नहीं ग्रहण कर सकते, तब तक इन आकारों के मार्ग से, इन भौतिक मूर्तियों के सहारे ही चलना होगा। फिर ये मूर्तियां चाहे दिमाग के भीतर हों या बाहर, उससे कोई अंतर नहीं पड़ता।

मूर्तिपूजा मानव-प्रकृति की बनावट के अंतर्गत है। उसके परे सिद्धपुरुष ही जा सकते हैं। जब तक आप अपने सामने अनेक रूप और अनेक आकृतियों सहित इस संसार को देख रहे हैं, तब तक आप सभी मूर्तिपूजक हैं। दिमाग में स्थूल मूर्तियां नहीं समातीं, वहां तो किसी स्थान पर थोड़ा सा स्फुरण ही हुआ करता है। पर फिर भी आप इस अनेक रंग-रूप और आकारयुक्त संसार की, इस महान प्रतीक स्वरूप संसार की मूर्ति किस तरह अपने सामने ले आते हैं? क्या आप एक विशालकाय मूर्ति की उपासना नहीं कर रहे हैं? जो व्यक्ति कहता है कि मैं शरीर हूं, वह जन्मत: ही मूर्तिपूजक है। असल में हम सब तो आत्मा हैं। वह आत्मा जिसका न कोई रूप है, न रंग। जो अनंत है, कोई भौतिक पदार्थ नहीं। अत: जो व्यक्ति अपने को शरीर या जड़ पदार्थ समझता है, सूक्ष्म को ग्रहण करने में असमर्थ है तथा भौतिक पदार्थ की सहायता के बिना अपने वास्तविक स्वरूप को सोच नहीं सकता, उसे तो हम मूर्तिपूजक ही कहेंगे। फिर भी ऐसे लोग दूसरे से आपस में लड़ा करते हैं। मतलब यह है कि हर एक व्यक्ति अपनी उपास्य मूर्ति को सच्चा बताता है और दूसरों की उपास्य मूर्ति को गलत। इसलिए आध्यात्मिक क्षेत्र में जो लोग बच्चों के समान हैं, उनके इस तरह के विचारों को हमें दिमाग से दूर कर देना चाहिए।

Backward preparation of the Magh Mela

इलाहाबाद। पिछले चौबीस घंटे में रुक-रुक कर हो रही बारिश से मेला की सड़कें बालू में दफन हो गईं। मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया है लेकिन मेला प्रशासन की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं अभी नदारद हैं। 

दिसंबर के अंतिम सप्ताह से मेले का स्वरूप निखरने लगता है लेकिन इस बार जनवरी माह तक मेला नहीं बस पाया। पांच सेक्टरों में बंटे मेला क्षेत्र का सेक्टर पांच क्षेत्रफल के लिहाज से काफी बड़ा है। मगर यहां पर अंधेरा छाया हुआ है। यहां पर जिन्हें भूमि का आवंटन हो गया है, उन्हें रात के अंधेरे में काम करना पड़ रहा है। मेला क्षेत्र में प्रशासनिक शिविरों में तो बिजली के कनेक्शन उपलब्ध करा दिए गए, मगर संतों के शिविरों में अभी कनेक्शन नहीं दिए गए। 

यही नहीं अभी शाम छह से रात्रि आठ बजे तक ही बिजली आपूर्ति हो रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि बिजली आपूर्ति निर्बाध होनी चाहिए। फैलने लगा कूड़ा- मेला क्षेत्र में शिविरों के लगने के साथ जगह-जगह कूड़े के ढेर भी लगने शुरू हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सफाई का कोई इंतजाम नहीं किया गया है और न ही कूड़ेदान की व्यवस्था है। समतलीकरण में बाधा- समतलीकरण में लगे ट्रैक्टरों के पहिए मिट्टी में धंस रहे हैं। जरा सी बारिश ने समतलीकरण में बाधा खड़ी कर दी है। 

माघ मेले में आने वाला हर शख्स 'तीसरी नजर' के कड़े पहरे में रहेगा। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और गैरकानूनी काम करने वालों पर पैनी नजर रखने के लिए मेला क्षेत्र में 21 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। पुलिस विभाग ने कैमरे लगाने के लिए जरूरी स्थानों का चयन करके खाका तैयार कर लिया है। सभी कैमरों को पुलिस कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। जहां से पुलिस टीम, मेले की हर गतिविधियों पर निगाह रखेगी। रविवार को मेला क्षेत्र में पुलिस की तैयारियों का जायजा लेने एसएसपी उमेश श्रीवास्तव और नोडल अफसर राजकमल यादव पहुंचे। यहां उन्होंने थानों, चौकियों और दूसरे कायरे की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए तेजी लाने के निर्देश दिए। 

मेला पुलिस लाइन सभागार में क्षेत्रधिकारी और थानेदारों की बैठक लेते हुए उन्हें निर्देशित किया कि सभी लोग स्टॉफ की समस्याओं को तत्काल दूर कर लें। उसके बाद क्षेत्र का भ्रमण कर हर मार्ग और स्थानों से परिचित हो जाएं। ताकि योजनाओं के क्त्रियान्वयन में दिक्कत न हो। यह कार्य पूरा होते ही सभी सीओ और थानेदार अपनी टीम के साथ मेला क्षेत्र में गश्त कर माहौल को समझेंगे। एसएसपी ने बताया कि मेला क्षेत्र को दो जोन, पांच सेक्टरों में बांटा गया है। पांच थानों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, बाकी तैयारी 10 जनवरी तक हर हाल में पूरी हो जाएंगी। 

यहां होगी कैमरों की 'तैनाती'-मेला क्षेत्र के सभी पुलिस थानों के अलावा अक्षयवट, महावीर, काली, त्रिवेणी मार्ग, जीटी जवाहर चौराहा, परेड में वाहन पार्किंग पर और अरैल में बनने वाले वॉच टावरों पर कैमरे लगेंगे। संगम नोज पर दो सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। 

गंगा-यमुना में बनेगी ड्रम लाइन- मेले के दौरान नदियों में नावों के सही संचालन के लिए गंगा-यमुना में संगम तक वन वे ड्रम लाइन बनाई जाएगी। नदियों में जल पुलिस की 22 और पीएसी की तीन कंपनी नाव और दूसरे सामानों के साथ मुस्तैद रहेगी। सीओ नीति द्विवेदी के मुताबिक प्रत्येक नाव पर दो जल पुलिस पर्याप्त लाइव जैकेट के साथ मौजूद रहेगी। उन्होंने बताया कि इस दौरान प्राइवेट नाविकों की सुविधा के हिसाब से उनके लिए अलग-अलग मार्ग बनाया जाएगा। रोज तीन बार जांच करेगी एटीएस-माघ मेले में श्रद्धालुओं और संतो का आगमन होते ही एटीएस और बीडीएस के साथ ही एलआइयू की टीम सतर्क हो गई हैं। यह टीमें रोजाना तीन बार अलग-अलग स्थानों पर चेकिंग करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। छह जनवरी से लेकर यह सिलसिला मेले की समाप्ति तक चलता रहेगा। इनसे मिली रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस प्रशासन अपनी सुरक्षा व्यवस्था और रणनीति को मजबूत करेगी। 

वह दिन अब दूर नहीं जब पर्यटकों और श्रद्धालुओं को संगम क्षेत्र में नगरीय सुविधाएं चाक-चौबंद मिलेंगी। छावनी क्षेत्र में आने वाले परेड मैदान में पानी, शौचालय, सीवरेज, यात्री शेल्टर होम, नियमित सफाई व्यवस्था आदि देने के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड ने नगर विकास विभाग को आठ करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव बनाकर भेजा है। शीघ्र बजट जारी होने की उम्मीद है। संगम क्षेत्र में देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में पर्यटक, श्रद्धालु एवं स्नानार्थी साल के बारहों महीने आते रहते हैं किंतु माघ मेले को छोड़कर अन्य महीनों में मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है। मसलन न उन्हें पानी आसानी से मिल पाता है, न ही रहने एवं शौच करने की कोई व्यवस्था रहती है। मार्ग प्रकाश की व्यवस्था न होने से रात में वह चोर-उचक्कों का शिकार हो जाते हैं। कैंटोनमेंट बोर्ड ने इसी के मद्देनजर परेड ग्राउंड में विकास कार्य कराने का निर्णय लिया। बोर्ड ने वहां आठ यात्री शेल्टर होम, हर्षवर्धन चौराहे के समीप नौ पार्को का सुंदरीकरण, एक वॉटर टैंक, जरूरत के अनुसार शौचालय, मार्ग प्रकाश व्यवस्था एवं नियमित सफाई के लिए ब्लीचिंग पाउडर, फिनायल, एंटी मलेरिया स्प्रे और कूड़ा रखने के लिए सात डस्टबिन एवं ग्रीनरी आदि के लिए आठ करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर नगर विकास विभाग को भेजा है। बजट जारी होते ही विकास का काम शुरू होगा।

बजट जल्द मिलने की उम्मीद है। इसके लिए छावनी परिषद के सदस्य भी प्रयासरत हैं। शौचालय बनेंगे तो सीवरेज की भी व्यवस्था करनी होगी। विकास होने से यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को बहुत सुविधा होगी। -पीएनबी शर्मा, सीईओ कैंटोनमेंट बोर्ड।

जिला प्रशासन की व्यवस्था सिर्फ तीन महीने की होती है। वह भी जब माघ मेला लगता है। नौ महीने छावनी परिषद की निगरानी रहती है। इसलिए विकास कार्य बहुत जरूरी हो गया था।-सुधा यादव, उपाध्यक्ष कैंटोनमेंट बोर्ड।

Guru Gobind Singh Ji festival of lights

गुरु गोविंद सिंह जी का मानना था कि समाज की उन्नति उच्च आदर्शो से ही संभव है, इसीलिए उन्होंने मनुष्य के परिष्कार के लिए साहित्य को प्रश्रय दिया। गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व (7 जनवरी) पर विशेष.. 

सिखों के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह जी का मानना था कि परिष्कृत जीवन से ही सफलता मिल सकती है। इसके लिए व्यक्ति को स्वयं का परिष्कार करना होगा। किंतु यह परिष्कार तभी संभव हो पाएगा, जब सबसे पहले मानसिकता का परिष्कार हो। इसीलिए गुरु गोविंद सिंह जी ने साहित्य और साहित्यकारों को प्रश्रय दिया और लोगों की मानसिकता को एक नया आयाम देने के लिए साहित्य का सृजन कराया। गुरु जी स्वयं एक साहित्यकार, दार्शनिक, चिंतक, भाषाविद और आदर्श सेनानायक थे। मात्र 42 वर्ष का उनका जीवन-काल इतना उदात्त है, जिससे प्रेरित होकर मनुष्य जीवन के उच्चतम आदर्शो को प्राप्त कर सकता है।

गुरु गोविंद सिंह जी ने शोषित-पीड़ित लोगों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अन्याय से त्रस्त जनता को एकत्र कर 'खालसा पंथ' का सृजन किया और शक्तिशाली सेना तैयार की। इस सेना ने अपने समय की बड़ी सैन्य शक्तियों को परास्त किया। गुरुजी ने शक्तिहीन आम जनता को राजनीतिक शक्ति सम्पन्न बना दिया। खालसा पंथ ने जाति-पाति, ऊंच-नीच आदि की दीवारें भी तोड़ दीं। गुरु जी का संदेश था कि सभी में मनुष्य समान हैं और सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था में उनकी भागीदारी का अधिकार भी समान है।

गुरु जी ने मानवता की रक्षा के लिए अपने सारे वंश का बलिदान दिया। गुरु जी के परदादा पांचवें गुरु श्री अर्जुन देव, नौवें गुरु श्री तेग बहादुर एवं चारों पुत्रों ने शहादत दी। गुरु जी ने स्थापित किया कि सत्य एवं मानवता की रक्षा के लिए सर्वस्व भी बलिदान करना पड़े तो भी पीछे नहीं हटना चाहिए।

गुरु गोविंद सिंह जी न सिर्फ स्वयं भी साहित्यकार थे, बल्कि वे कलम के धनी विद्वानों एवं कवियों के आश्रयदाता भी थे। सिख परंपरा के अनुसार, गुरु जी के पाऊंटा साहिब, आनंदपुर साहिब एवं लखी जंगल के विद्या दरबारों में 52 कवि एवं 34 विद्वान थे। ये कवि एवं विद्वान विभिन्न क्षेत्रों में संबंध रखते थे। कवि नंदलाल गजनी से, कवि सुदामा और कवि कुंवरेश बुंदेलखंड से, कवि ईश्वर दास आगरा से, कवि सुखदेव राय बरेली से, कवि गोपाल गोकुल से, कवि कांशी राम बनारस से और कवि वृंद मेड़ता से दशमेश दरबार में प्रवाहित ज्ञान सरिता में स्नान करने आए थे। धर्म और जाति की दृष्टि से भी इन कवियों की पृष्ठभूमि भिन्न-भिन्न थी। गुरु दरबार में बिना किसी भेदभाव के मात्र कला, विद्वता और प्रतिभा को ही सम्मान दिया जाता था। भाषा की दृष्टि से भी दशमेश दरबार में कोई संकीर्णता नहीं थी। गुरु जी स्वयं ब्रज, फारसी, सघुक्कड़ी, संस्कृत आदि कई भाषाओं के विद्वान थे। 

गुरु दरबार के कवि एवं विद्वान नित्य ही धर्म, संस्कृति, इतिहास, सामाज, राजनीति, काव्य आदि विषयों पर निरंतर अध्ययन-मनन और सृजन करते रहते थे। गुरु जी का मानना था कि समाज की उन्नति मनुष्य की मानसिकता में परिष्कार से ही हो सकती है और यह साहित्य के माध्यम से ही संभव है। अत: उन्होंने साहित्य सृजन को प्रोत्साहित किया। उन्होंने रामायण, महाभारत सरीखे प्राचीन सांस्कृतिक ग्रंथों का जनभाषा में अनुवाद भी कराया।

सत्य, मानवता, समानता, सर्वधर्म समभाव, स्वाभिमान की रक्षा आदि ऐसे जीवन मूल्य है,ं जो गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से प्राप्त होते हैं। इनके अभाव में समाज और राष्ट्र की उन्नति संभव नहीं।

डॉ. राजेन्द्र साहिल

Be the brotherhood of man by man, that's the message we

आगरा। प्रेम और सद्भावना की बातें। संकीर्ण मनोवृत्ति को त्याग मानवता के कल्याण की प्रेरणा। इन्हीं विषयों पर आधारित था निरंकारी संत बाबा हरदेव सिंह का प्रवचन, जिन्हें सुनने और ग्रहण करने के लिए रविवार को हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। 

कोठी मीना बाजार में हुए निरंकारी संत समागम की शुरुआत तो सुबह 11 बजे ही हो गई थी। तभी से जन सैलाब उमड़ने लगा था। सभी के मन बाबा के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास था। वहां गूंज रहा था- 'इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैगाम हमारा'। दोपहर तीन बजे प्रवचन देते हुए बाबा ने कहा कि देश को संकीर्ण मनोवृत्ति से काफी नुकसान हो रहा है। यहां भाईचारे और प्रेम की जरूरत है। जिसे सभी को अपनाना चाहिए। क्योंकि यह धरती ऐसे महापुरुषों की है, जिन्होंने अपना सर्वस्व त्याग कर समाज को ताकत दी है। बाबा के दर्शन के लिए मेयर इंद्रजीत आर्य, पूर्व सांसद प्रभुदयाल कठेरिया, विधायक योगेंद्र उपाध्याय आदि भी पहुंचे थे।

पांच हजार स्वयंसेवक-आयोजन की व्यवस्था को खाकी यूनिफॉर्म और सफेद टोपी पहने स्वयंसेवक तैनात थे। वे पूरे क्षेत्र में यातायात संचालन रहे थे। इसके अलावा अन्य स्थलों पर भी उनकी तैनाती थी। जिनकी संख्या पांच हजार से अधिक थी। ये आगरा के अलावा मैनपुरी, ग्वालियर से भी आए थे, जिनका नेतृत्व पुष्पेंद्र ओबराय, महेश चौहान और अजय कर रहे थे। अन्य व्यवस्थाएं सचिन ओबराय, रवि मल्होत्र आदि ने संभालीं।

लोगों ने कहा कि व्यक्ति हिमालय, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों में प्रभु की तलाश करता है। बाबा हरदेव सिंह उस परमेश्वर से रूबरू कराते हैं। बाबा सबके कष्टों को दूर कर सभी के मन को सुख, शांति देते हैं। जिसकी सभी को तलाश रहती है। बाबा हमें उस शक्ति का अहसास कराते हैं, जो हमें अल्लाह के याद करने पर होती है। इसलिए वे हमारी ताकत बने हुए हैं। 

Then the rush of devotees thronging temples

वृंदावन। बढ़ते शीत के प्रकोप के बाद भी लोगों की दौड़ वृंदावन को कम नहीं हो रही। रविवार को हजारों की भीड़ मंदिरों के दर्शन को आयी। उधर कारों का काफिला सुबह और शाम तक शहर में जाम के हालात बनाता रहा। पिछले 31 दिसंबर से अब तक ठा. बांके बिहारी के मंदिर, प्रेम मंदिर, रंगजी मंदिर और इस्कॉन टेंपल के अलावा अन्य सप्त देवालयों में आने वालों का तांता लगा हुआ है। 

दुकानदारों की बल्ले-बल्ले-बांके बिहारी के भोग में लगने वाले पेड़े की बिक्त्री रविवार को जमकर हुई तो सप्त देवालयों और विख्यात मंदिरों के आसपास के गोपीनाथ बाजार, दुसायत, लोई बाजार, रेतिया बाजार, वनखंडी और अठखंभा बाजारों में भीड़ ने बड़े पैमाने पर खरीददारी की।