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Wednesday, 1 June 2016

रुड़की में बवाल, चौकी पर पथराव, भाजपा नेता के वाहन जलाए, लाठीचार्ज, फायरिंग

लंढौरा कस्बे में एक दुकान को खाली कराने के लिए दुकान स्वामी ने सारा सामान सड़क पर फेंक दिया। इस दौरान धर्मिक ग्रंथ भी सड़क पर फेंकी गई तो लोगों ने जमकर बवाल मचा दिया। गुस्साई भीड़ ने लंढौरा पुलिस चौकी पर पथराव कर दिया। यही नहीं कांग्रेस के बागी विधायक एवं भाजपा नेता कुंवर प्रणव चैंपियन के रंगमहल में जाकर एक कार व दो पहिया वाहनों और साइकिलों को आग के हवाले कर दिया।

रंगमहल में खड़े वाहनों को जब आग के हवाले किया तो रंगमहल में कोई भी मौजूद नहीं था। जब वाहनों में आग लगाई गई तब पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही। बाद में पुलिस ने लाठियां फटकारकर लोगों को खदेड़ा। इस दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। पथराव के दौरान एसएसपी और डीएम ने चौकी में घुसकर जान बचाई। पत्थरबाजी में एसएसपी राजीव स्वरूप सहित आठ पुलिस कर्मी घायल हो गए। पुलिस ने भीड़ का काबू करने के लिए हवाई फायर भी किए। साथ ही आंसू गैस के गोले भी छोड़े। Read more http://www.jagran.com/

Tuesday, 13 January 2015

देवबंद में सांप्रदायिक तनाव, टकराव के हालात

फेसबुक पर एक धर्म विशेष (पैगंबर) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को दूसरे दिन देवबंद में उस वक्त सांप्रदायिक टकराव के हालात पैदा हो गए जब एक विशेष समुदाय के युवकों ने जबरन बाजार बंद कराना शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों संप्रदाय के लोग आमने-सामने आए गए। उपजे तनाव को देखते हुए पूरा देवबंद पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। आसपास के जनपदों से पीएसी, आरएएफ बुला ली गयी है।

देवबंद में एक पब्लिक स्कूल में पढऩे वाले छात्र चिराग मलिक ने फेसबुक पर धर्म विशेष पर आपत्तिजनक कमेंट कर दिया। सोमवार को इस मामले को लेकर तनाव पूर्ण स्थिति पैदा हो गयी। पुलिस ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया।

मंगलवार को एक विशेष संप्रदाय के लोगों ने इस छात्र के सहयोगी को गिरफ्तार करने की मांग की और प्रदर्शन व नारेबाजी करते हुए बाजार बंद करा दिया और थाने का घेराव कर जमकर हंगामा किया। पुलिस ने जबरन बाजार बंद करा रहे आन्दोलनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया। इसी बीच भाजपा सांसद राघव लखन पाल शर्मा मौके पर आ गए। उन्होंने बाजार खुलवाया। कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया पर सांसद के साथ भीड़ को देखकर किसी की विरोध करने की हिम्मत नही हुई। उन्होंने दूसरे संप्रदाय के लोगों पर क्षेत्र में अशांति फैलाने का आरोप लगाते हुए उनके विरूद्ध कार्रवाई की मांग की।

Monday, 6 January 2014

Idolatry means contemplation of Swami Vivekananda ...

जब तक हम सूक्ष्म को मन में नहीं ग्रहण कर पाते, तब तक हमें मूर्तियों के सहारे ही उपासना करनी होती है। मूर्तिपूजा को लेकर विवाद पैदा करना उचित नहीं। स्वामी विवेकानंद का चिंतन.. 
यदि कोई कहे कि प्रतीक, अनुष्ठान और विधियां सदैव रखने की चीजें हैं, तो उसका यह कहना गलत है, पर यदि वह कहे कि इन प्रतीकों और अनुष्ठानों द्वारा विकास की निम्न श्रेणियों में आत्मोन्नति में सहायता मिलती है, तो उसका कथन ठीक है। पर हां, आत्मोन्नति का अर्थ बुद्धि का विकास नहीं। किसी मनुष्य की बुद्धि कितनी ही विशाल क्यों न हो, पर आध्यात्मिक क्षेत्र में संभव है वह एक बालक या उससे भी गया-बीता हो। इसी क्षण आप इसकी परीक्षा कर सकते हैं। हममें से कितने ऐसे हैं, जिन्होंने सर्वव्यापित्व की कल्पना की है? हालांकि हम लोगों को सर्वव्यापी ईश्वर में ही विश्वास करना सिखाया गया है। यदि आप प्रयत्न करेंगे तो सर्व-व्यापकता के भाव के लिए आकाश या हरे-भरे विस्तृत मैदान की या समुद्र अथवा मरुस्थल की कल्पना करेंगे। पर ये सब भौतिक मूर्तियां हैं, जब तक आप सूक्ष्म को सूक्ष्म की ही तरह मन में नहीं ग्रहण कर सकते, तब तक इन आकारों के मार्ग से, इन भौतिक मूर्तियों के सहारे ही चलना होगा। फिर ये मूर्तियां चाहे दिमाग के भीतर हों या बाहर, उससे कोई अंतर नहीं पड़ता।

मूर्तिपूजा मानव-प्रकृति की बनावट के अंतर्गत है। उसके परे सिद्धपुरुष ही जा सकते हैं। जब तक आप अपने सामने अनेक रूप और अनेक आकृतियों सहित इस संसार को देख रहे हैं, तब तक आप सभी मूर्तिपूजक हैं। दिमाग में स्थूल मूर्तियां नहीं समातीं, वहां तो किसी स्थान पर थोड़ा सा स्फुरण ही हुआ करता है। पर फिर भी आप इस अनेक रंग-रूप और आकारयुक्त संसार की, इस महान प्रतीक स्वरूप संसार की मूर्ति किस तरह अपने सामने ले आते हैं? क्या आप एक विशालकाय मूर्ति की उपासना नहीं कर रहे हैं? जो व्यक्ति कहता है कि मैं शरीर हूं, वह जन्मत: ही मूर्तिपूजक है। असल में हम सब तो आत्मा हैं। वह आत्मा जिसका न कोई रूप है, न रंग। जो अनंत है, कोई भौतिक पदार्थ नहीं। अत: जो व्यक्ति अपने को शरीर या जड़ पदार्थ समझता है, सूक्ष्म को ग्रहण करने में असमर्थ है तथा भौतिक पदार्थ की सहायता के बिना अपने वास्तविक स्वरूप को सोच नहीं सकता, उसे तो हम मूर्तिपूजक ही कहेंगे। फिर भी ऐसे लोग दूसरे से आपस में लड़ा करते हैं। मतलब यह है कि हर एक व्यक्ति अपनी उपास्य मूर्ति को सच्चा बताता है और दूसरों की उपास्य मूर्ति को गलत। इसलिए आध्यात्मिक क्षेत्र में जो लोग बच्चों के समान हैं, उनके इस तरह के विचारों को हमें दिमाग से दूर कर देना चाहिए।

Then the rush of devotees thronging temples

वृंदावन। बढ़ते शीत के प्रकोप के बाद भी लोगों की दौड़ वृंदावन को कम नहीं हो रही। रविवार को हजारों की भीड़ मंदिरों के दर्शन को आयी। उधर कारों का काफिला सुबह और शाम तक शहर में जाम के हालात बनाता रहा। पिछले 31 दिसंबर से अब तक ठा. बांके बिहारी के मंदिर, प्रेम मंदिर, रंगजी मंदिर और इस्कॉन टेंपल के अलावा अन्य सप्त देवालयों में आने वालों का तांता लगा हुआ है। 

दुकानदारों की बल्ले-बल्ले-बांके बिहारी के भोग में लगने वाले पेड़े की बिक्त्री रविवार को जमकर हुई तो सप्त देवालयों और विख्यात मंदिरों के आसपास के गोपीनाथ बाजार, दुसायत, लोई बाजार, रेतिया बाजार, वनखंडी और अठखंभा बाजारों में भीड़ ने बड़े पैमाने पर खरीददारी की।