जयंती नटराजन वर्ष 2011 से 2013 के बीच पर्यावरण मंत्री रहीं और इस दौरान कई परियोजनाओं को मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली। इसके चलते निजी परियोजनाओं के साथ ही और सार्वजनिक परियोजनाएं और डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को भी हरी झंडी नहीं मिली।
संभवत: किसी ने पर्यावरण के नियम की कसौटी पर खरे उतरने का दावा नहीं किया। मोटेतौर पर करीब 350 फाइलें नटराजन के ऑफिस में दिसंबर 2013 में इस्तीफा दिए जाने तक धूल खाती रहीं। इन फाइलों को मंजूरी मिल सकती थी क्योंकि ज्यादातर परियोजनाओं की मंजूरी एक्सपर्ट अप्रेजल कमिटी ने दी थी।
जब कांग्रेस को परियोजनाओं की मंजूरी न मिलने के कारण होने वाले दुष्प्रभावों का अहसास हुआ, तक तक काफी देर हो चुकी थी। नटराजन के बाद जब मंत्रालय की कमान वीरप्पा मोइली ने संभाली। उन्होंने 2014 के आम चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले 1.5 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी।
संभवत: किसी ने पर्यावरण के नियम की कसौटी पर खरे उतरने का दावा नहीं किया। मोटेतौर पर करीब 350 फाइलें नटराजन के ऑफिस में दिसंबर 2013 में इस्तीफा दिए जाने तक धूल खाती रहीं। इन फाइलों को मंजूरी मिल सकती थी क्योंकि ज्यादातर परियोजनाओं की मंजूरी एक्सपर्ट अप्रेजल कमिटी ने दी थी।
जब कांग्रेस को परियोजनाओं की मंजूरी न मिलने के कारण होने वाले दुष्प्रभावों का अहसास हुआ, तक तक काफी देर हो चुकी थी। नटराजन के बाद जब मंत्रालय की कमान वीरप्पा मोइली ने संभाली। उन्होंने 2014 के आम चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले 1.5 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी।
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