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Tuesday, 12 April 2016

राष्ट्रपति ने कई हस्तियों को किया पद्म सम्मान से सम्मानित

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक सादे समारोह में पद्म पुरस्कार प्रदान किए। यह पद्म पुरस्कार समारोह का दूसरा चरण था। आज जिन्हें पुरस्कार दिया गया उनमें बॉलिवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को पद्म सम्मान, टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को पदमभूषण और प्रसिद्ध अभिनेता रजनीकांत को पद्म विभूषण सम्मान प्रदान किए गए। इनके अलावा कई और प्रमुख हस्तियों को भी पद्म सम्मान से सम्मानित किया गया।

इससे पहले भी राष्ट्रपति ने पहले चरण के दौरान मार्च के अंतिम सप्ताह में कई हस्तियों को पद्म सम्मान से नवाजा थी जिनमें आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, बॉलिवुड कलाकार अनुपम खेर, अजय देवगन और बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल और कई प्रमुख हस्तियां शामिल थीं। See more http://www.jagran.com/

Friday, 2 January 2015

प्रणब ने पूछा था, जमीन अधिग्रहण पर अध्यादेश लाने की जल्दी क्यों ?

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जमीन अधिग्रहण संबंधित अध्यादेश को मंजूरी देने से पहले केंद्रीय कैबिनेट से पूछा था कि आखिर इस मामले में इतनी जल्दी क्यों है? राष्ट्रपति ने सरकार से स्पष्टीकरण लेने के बाद ही अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से इस अध्यादेश की जरूरत और उस पर उठ रहे सवालों पर उन्हें पहले संतुष्ट किया। इसके बाद बुधवार यानी बीते साल के आखिरी दिन राष्ट्रपति ने आर्थिक सुधारों के लिए जरूरी बताए जा रहे इस विधेयक पर हस्ताक्षर किए।
दरअसल, राष्ट्रपति की तरफ से नई सरकार गठन के बाद पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि विधेयक संसद में पारित न होने की सूरत में अध्यादेश लाने की जरूरत और प्रासंगिकता पर वह विमर्श जरूर करेंगे। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी समय व्यवस्था कर दी थी कि यदि अध्यादेश लाने की जरूरत पड़ती है तो संबंधित मंत्री राष्ट्रपति को खुद जाकर उसकी बारीकियों से अवगत कराएगा। प्रणब मुखर्जी पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के संकटमोचक और पूर्व वित्त मंत्री भी रहे हैं। वकील होने के साथ सरकारी फैसलों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

इसलिए, राष्ट्रपति बनने के बाद से ही वह रूल-बुक के हिसाब से चल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रपति के प्रशंसक रहे हैं और उन्हें कई सार्वजनिक भाषणों में कुशल राजनेता और काबिल व्यक्ति करार देते रहे हैं। लिहाजा, सरकार और राष्ट्रपति भवन के बीच केमेस्ट्री ठीक रखने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति भवन दोनों ही कोई कसर नहीं छोड़ते। कोयला और बीमा अध्यादेशों या अन्य पर सरकार के संबंधित विभाग के मंत्री पहले ही राष्ट्रपति को जाकर पक्ष समझाते रहे हैं। मगर भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर सरकार की तरफ से राष्ट्रपति से चर्चा नहीं हुई।

Source: Hindi News and Newspaper

Wednesday, 24 December 2014

वाजपेयी और मालवीय को भारत रत्न, राष्‍ट्रपति ने किया ट्वीट

 पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मदनमोहन मालवीय को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया जाएगा। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास पर पार्टी कोर ग्रुप की बैठक हुई, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई थी।

इससे पहले प्रधानमंत्री की ओर से दोनों नेताओं के नाम राष्ट्रपति के पास भेजे गए थे। सूत्रों का कहना है कि 26 जनवरी को इनको भारत रत्न दिया जा सकता है। आपको बता दें कि लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले मालवीय को भारत रत्न देने का वादा किया था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिए जाने के समर्थन में अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार भी आ गए हैं। उन्होंने कहा कि वाजपेयी को यूपीए सरकार के दौरान ही भारत रत्न दिया जाना चाहिए था, मैं उन्हें भारत रत्न देने का समर्थन करता हूं।

वाजपेयी के बारे में नीतीश ने कहा कि उनकी एक उदार सोच थी और वह हमेशा विभाजनकारी अजेंडों को दूर रखते हुए अपने गठबंधन सहयोगियों का सम्मान करते थे। वाजपेयी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए शासन के दौरान मैंने उनसे कई बातें सीखीं।

वाजपेयी को भारत रत्न देने की चर्चाओं के बीच उनके राजनीतिक हमसफर लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि अटल सही मायनों में इस सम्मान के हक़दार हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता आडवाणी ने कहा कि बतौर प्रधानमंत्री वाजपेयी का कार्यकाल शानदार रहा है और उन्हें यह सम्मान मिलना ही चाहिए।

Source: Hindi News and Newspaper

Wednesday, 1 January 2014

Lokpal Bill gets President's nod

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आगामी संसदीय चुनाव में जाने से पहले संप्रग सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाले लोकपाल कानून को मूर्तरूप देने में जुट गई है। संसद से पारित होने के बाद बहुप्रतीक्षित लोकपाल विधेयक पर राष्ट्रपति की अंतिम मुहर बुधवार को लग गई। भ्रष्टाचार निरोधक इस कानून के दायरे में प्रधानमंत्री तक को शामिल किया गया है। 

लोकसभा सचिवालय ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के हस्ताक्षर के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास अंतिम मुहर के लिए भेजा था। उनके हस्ताक्षर के साथ ही विधेयक कानून बन गया है।पिछले संसद सत्र के दौरान 17 दिसंबर को राज्यसभा और अगले ही दिन लोकसभा से यह विधेयक पारित हो गया था।
संविधान के जानकार सुभाष कश्यप के अनुसार अब कानून को विधि मंत्रालय के पास भेजा जाएगा, जहां इसके लिए नियम बनाए जाएंगे। इन नियमों के साथ कानून आधिकारिक रूप से गजट में प्रकाशित करने के लिए भेजा जाएगा। प्रकाशित होने की तिथि से लोकपाल कानून लागू हो जाएगा। उसके एक साल के भीतर केंद्रीय स्तर पर लोकपाल और राज्य स्तर पर लोकायुक्त नामक संस्थान स्थापित किये जाएंगे। कानून तभी से मूर्त रूप से अमल में आ जाएगा। 

इस कानून के तहत दस सदस्यों वाले लोकपाल का चयन जिस समिति के जरिए होगा, उसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ न्यायविद शामिल होंगे। इस कानून के लागू होने के बाद जांच एजेंसी सीबीआइ भी सीधे सरकार के निर्देश में काम करने की बजाय इसके तहत काम करेगी। लोकपाल के लिए आंदोलन करने वाले अन्ना हजारे ने भी इस कानून पर संतोष जताया है। हालांकि आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने इसे नाकाफी बताते हुए कहा था कि इससे चूहा भी जेल नहीं जाएगा।