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Wednesday, 24 December 2014

इन्‍हें मिल चुका है भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न'

भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है 'भारत रत्न'। यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है। इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। अन्य अलंकरणों के समान इस सम्मान को भी नाम के साथ पदवी के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। प्रारम्भ में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, यह प्रावधान 1955 में बाद में जोड़ा गया। तत्पश्चात 12 व्यक्तियों को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। सुभाष चन्द्र बोस को घोषित सम्मान वापस लिए जाने के उपरान्त मरणोपरान्त सम्मान पाने वालों की संख्या 11 मानी जा सकती है। एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है।

पदक

मूल रूप में इस सम्मान के पदक का डिजाइन 35 मिमि गोलाकार स्वर्ण मैडल था। जिसमें सामने सूर्य बना था, ऊपर हिन्दी में भारत रत्न लिखा था और नीचे पुष्प हार था। और पीछे की तरफ राष्ट्रीय चिह्न था। फिर इस पदक के डिजाइन को बदल कर तांबे के बने पीपल के पत्ते पर प्लेटिनम का चमकता सूर्य बना दिया गया। जिसके नीचे चांदी में लिखा रहता है 'भारत रत्न' और यह सफेद फीते के साथ गले में पहना जाता है।

अब तक 43 व्यक्तियों को इस रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।

सम्मानित व्यक्तित्व

1. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन - 1954

2. चक्रवर्ती राजगोपालाचारी- 1954

3. डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण- 1954

4. डॉक्टर भगवान दास- 1955

5. सर डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेक्ष्वरय्या- 1955

6. पं. जवाहर लाल नेहरु- 1955

7. गोविंद वल्लभ पंत- 1957

8. डॉ. धोंडो केशव कर्वे - 1958

9. डॉ. बिधन चंद्र रॉय- 1961

10. पुरुषोत्तम दास टंडन- 1961

11. डॉ. राजेंद्र प्रसाद- 1962

12. डॉ. जाकिर हुसैन- 1963

13. डॉ. पांडुरंग वामन काणे- 1963

14. लाल बहादुर शास्त्री- 1966

15. इंदिरा गांधी- 1971

16. वराहगिरी वेंकट गिरी- 1975

17. के.कामराज - 1967

18. मदर टेरेसा- 1980

19. आचार्य विनोबा भावे- 1983

20. खान अब्दुल गफ्फार खान - 1987

21. एम जी आर- 1988

22. डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर- 1990

23. नेल्सन मंडेला- 1990

24. राजीव गांधी- 1991

25. सरदार वल्लभ भाई पटेल- 1991

26. मोरारजी देसाई - 1991

27. मौलाना अबुल कलाम आजाद- 1992

28. जेआरडी टाटा- 1992

29. सत्यजीत रे- 1992

30. अब्दुल कलाम- 1997

31. गुलजारी लाल नंदा- 1997

32. अरुणा आसफ अली- 1997

33. एम एस सुब्बुलक्ष्मी- 1998

34. सी सुब्रामनीयम- 1998

35. जयप्रकाश नारायण- 1998

36. पं. रवि शंकर- 1999

37. अमृत्य सेन- 1999

38. गोपीनाथ बोरदोलोई- 1999

39. लता मंगेशकर- 2001

40. उस्ताद बिस्मिल्लाह खां- 2001

41. पं.भीमसेन जोशी- 2008

42. सी.एन.आर.राव- 2013

43. सचिन तेंदुलकर- 2013

2014 के सम्मानित व्यक्तित्व होंगे

अटल बिहारी वाजपेयी

मदन मोहन मालवीय

Source: Hindi News and Newspaper

वाजपेयी और मालवीय को भारत रत्न, राष्‍ट्रपति ने किया ट्वीट

 पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मदनमोहन मालवीय को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया जाएगा। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास पर पार्टी कोर ग्रुप की बैठक हुई, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई थी।

इससे पहले प्रधानमंत्री की ओर से दोनों नेताओं के नाम राष्ट्रपति के पास भेजे गए थे। सूत्रों का कहना है कि 26 जनवरी को इनको भारत रत्न दिया जा सकता है। आपको बता दें कि लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले मालवीय को भारत रत्न देने का वादा किया था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिए जाने के समर्थन में अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार भी आ गए हैं। उन्होंने कहा कि वाजपेयी को यूपीए सरकार के दौरान ही भारत रत्न दिया जाना चाहिए था, मैं उन्हें भारत रत्न देने का समर्थन करता हूं।

वाजपेयी के बारे में नीतीश ने कहा कि उनकी एक उदार सोच थी और वह हमेशा विभाजनकारी अजेंडों को दूर रखते हुए अपने गठबंधन सहयोगियों का सम्मान करते थे। वाजपेयी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए शासन के दौरान मैंने उनसे कई बातें सीखीं।

वाजपेयी को भारत रत्न देने की चर्चाओं के बीच उनके राजनीतिक हमसफर लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि अटल सही मायनों में इस सम्मान के हक़दार हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता आडवाणी ने कहा कि बतौर प्रधानमंत्री वाजपेयी का कार्यकाल शानदार रहा है और उन्हें यह सम्मान मिलना ही चाहिए।

Source: Hindi News and Newspaper

Monday, 22 December 2014

काश, यूपीए ने दिया होता वाजपेयी को भारत रत्‍न : उमर

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न सम्मान दिए जाने की अटकलों के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिसासी दांव खेला है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को ही पूर्व प्रधानमंत्री को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देना चाहिए था।

उमर ने ट्वीट किया कि 2004 से 10 साल सत्ता में रही कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार ने यह मौका गंवा दिया। उमर की पार्टी नेशनल कॉफ्रेंस यूपीए सरकार का हिस्सा थी। उमर ने ट्विटर पर लिखा- काश यूपीए सरकार ने राजनीति से ऊपर उठकर वाजपेयी साहब को भारत रत्न दिया होता। यह सही भावना का परिचायक होता।

ऐसी अटकलें हैं कि भारतीय जनता पार्टी के नेता वाजपेयी को उनके जन्मदिन 25 दिसंबर पर भारत रत्न से सम्मानित किया जा सकता है। नेशनल कॉफ्रेंस और उसके पूर्व गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के बीच पिछले कुछ महीनों से संबंध खराब चल रहे हैं।

उमर की यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव परिणाम से महज दो दिन पहले आई है। विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना 23 दिसंबर को होनी है और परिणाम भी उसके साथ ही आएंगे। ऐसे में इसे जम्मू-कश्मीर में भाजपा के साथ गठबंधन वाली सरकार बनाने से पहले माहौल तैयार करने के रूप में दिए गए बयान की तरह देखा जा रहा है।
Source: Hindi News and Newspaper

Wednesday, 8 January 2014

Ex-players march to PMO, demand Bharat Ratna for Dhyan Chand

अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। मेजर ध्यानचंद की हॉकी की कमाई खा रहे हॉकी इंडिया और वर्तमान हॉकी टीम के खिलाड़ियों ने इस खेल के पुरोधा को ही धोखा दे दिया। केंद्र सरकार की अनदेखी के बाद ध्यानचंद को देश का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न दिलाने के लिए हॉकी सिटीजन ग्रुप के नेतृत्व में बुधवार को मार्च निकाला गया। मार्च निकला भी और अपने गंतव्य तक भी पहुंचा। 300 से ज्यादा बच्चों संग पूर्व ओलंपियनों ने सड़क पर उतरकर इस मांग को और पुख्ता किया। ध्यानचंद के बेटे और पूर्व ओलंपियन अशोक कुमार, जफर इकबाल, दिनेश चोपड़ा, राजेश चौहान, एचएस चिमनी और हरेंद्र सिंह सहित कई दिग्गजों ने बाराखंबा से लेकर जंतर मंतर तक प्रदर्शन किया और बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपा लेकिन बाराखंभा से कुछ मीटर की दूरी पर स्थिति एक पांच सितारा होटल में मौजूद हॉकी इंडिया के पदाधिकारी, हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह और अन्य खिलाड़ियों ने चंद कदम चलने की जहमत नहीं उठाई। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरेंद्र बत्रा को अशोक कुमार ने एक दिन पहले ही फोन करके इस कार्यक्रम में आने का निमंत्रण भेजा था। इसके अलावा पूरी भारतीय टीम को भी निमंत्रण भेजा गया था लेकिन प्रबंधन और खिलाड़ी पांच सितारा होटल में चल रहे व‌र्ल्ड हॉकी लीग की ट्रॉफी के अनावरण कार्यक्रम में फोटो खिंचवाने में व्यस्त रहे। यह कार्यक्रम भी जरूरी था लेकिन ध्यानचंद के लिए हुए मार्च में इन लोगों के न आने पर दिग्गज नाराज नजर आए। मार्च में मौजूद जूनियर खिलाड़ियों ने कहा कि अगर हॉकी टीम के खिलाड़ी आते तो ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग और बुलंद होती। जब इस बारे में सरदार सिंह से पूछा गया तो उन्होंने राजनीतिक जवाब देते हुए कहा कि ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना चाहिए लेकिन वह यह जोड़ना नहीं भूले कि यह तो केंद्र सरकार का काम है। ध्यानचंद के लिए हुए मार्च पर न जाने के सवाल पर भी वह कुछ नहीं बोले। टीम और हॉकी इंडिया के प्रबंधन के नहीं आने पर अशोक कुमार ने कहा कि दद्दा की वजह से ही भारत ने हॉकी की ऊंचाइयां छुई। अब हॉकी इंडिया और उससे जुड़े लोगों को सोचना चाहिए कि वह क्या कर रहे हैं। हमने तो आशा की थी कि वह इस मार्च का हिस्सा बनेंगे। अब यह तो वही बता सकते हैं कि वो क्यों नहीं आए। 

ध्यानचंद ने भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहते हुए ओलंपिक में तीन स्वर्ण पदक जीते। वह 1928 में एम्सटर्डम, 1932 में लॉस एंजिल्स और 1936 में बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। उनका 1979 में निधन हुआ। सरकार ने 2011 में संसद के 82 सदस्यों की मांग ठुकरा दी थी जिन्होंने भारत रत्न के लिए ध्यानचंद के नाम की सिफारिश की थी। जब खिलाड़ियों को भारत रत्न देने की मंजूरी गृह मंत्रालय ने दी तो इस कड़ी में सबसे आगे ध्यानचंद का ही नाम था लेकिन केंद्र सरकार ने सचिन को रिटायरमेंट का तोहफा देने के लिए दद्दा को दरकिनार कर दिया। 

Wednesday, 20 November 2013

Sachin is Bharat Ratna but what about Dhyan Chand

Dhyan Chand

भुवनेश्वर। हॉकी इंडिया लीग (एचआइएल) ने भी ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग में खुद को शामिल करते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार को हॉकी के जादूगर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करना चाहिए। वहीं, पूर्व हॉकी खिलाड़ियों ने भी कहा है कि यह सम्मान उन्हें नहीं दिया जाना उस महान खिलाड़ी का अपमान है जिसने देश को गुलामी के दौर में खेल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी।

एचआइएल के अध्यक्ष और हॉकी इंडिया के महासचिव नरेद्र बत्रा ने कहा, 'हम सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने का स्वागत करते है। हमें खुशी होगी यदि भारत सरकार ध्यानचंद के नाम की घोषणा भी इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए करे। एचआइएल का अध्यक्ष होने के नाते मैं जल्द ही खेल मंत्रालय के सामने यह मसला रखूंगा।' एचआइएल के उपाध्यक्ष प्रताप सत्पथी ने कहा, 'हम तेंदुलकर को भारत रत्न देने का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन यदि ध्यानचंद को यह सम्मान नहीं मिलता है तो यह अन्याय होगा।'

भारत रत्न पर मचे घमासान के बीच पूर्व ओलंपियनों ने कहा है कि चाहे सचिन को भारत रत्न के साथ 'खेल मंत्री' बना दो, लेकिन पहले यह पुरस्कार ध्यानचंद को दिया जाना चाहिए था जिन्होंने मुल्क के खाते में कई स्वर्ण पदक दिलाए हैं। पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह ने कहा, 'ध्यानचंद का खेल के क्षेत्र में बड़ा योगदान है। इस महान खिलाड़ी ने उस वक्त मुल्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल के क्षेत्र में पहचान दिलायी थी, जब हमारा देश गुलाम था। इसलिए इस सम्मान पर पहला हक उनका बनता है।'

भारतीय टीम के पूर्व कोच राजिंदर सिंह ने कहा, 'मैं अन्य की बात नहीं जानता लेकिन मेजर (ध्यानचंद) को यह पुरस्कार अवश्य मिलना चाहिए था।' सुरेंद्र सोढी ने कहा, 'मेजर ध्यानचंद इस पुरस्कार के असली हकदार हैं और उन्हें भी यह पुरस्कार मिलना चाहिए।

Source- Cricket News in Hindi

Monday, 18 November 2013

Tradition of giving Bharat Ratna off: Shivanand Tiwari

Sachin Tendulkar
नई दिल्ली। टेस्ट क्रिकेट से धमाकेदार विदाई के बाद देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न पुरस्कार मिलने की घोषणा पर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अभी इस पुरस्कार पर ठीक से प्रतिक्रिया भी नहीं दे पाए थे कि इस पर बवाल मच गया।

जदयू नेता और सांसद शिवानंद तिवारी ने सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद को यह पुरस्कार देने की घोषणा क्यों नहीं की गई जबकि उनकी उपलब्धियां कहीं ज्यादा है।

तिवारी ने कहा कि मैं ''सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा से सहमत नहीं हूं। दरअसल ऐसा करके भारत रत्न को ही मजाक बना दिया गया है। अब इस पुरस्कार का कोई महत्व नहीं रह गया है।''

उन्होंने कहा, ''सचिन तेंदुलकर ने कोई मुफ्त में क्रिकेट नहीं खेला है। उन्होंने इसी खेल से हजारों करोड़ों रुपये कमाएं हैं। ऐसे में उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किये जाने की घोषणा समझ से परे है।'' तिवारी ने कहा कि भारत रत्न के लिए मेजर ध्यानचंद के नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया, यह सवाल बनता है।

Sachin dedicates Bharat Ratna to all mothers in the country

Sachin Tendulkar

मुंबई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके रिकाडरें के बादशाह सचिन तेंदुलकर ने एक बार फिर सबका दिल जीत लिया। मास्टर बल्लेबाज ने रविवार को अपना भारत रत्न देश की सभी मांओं को समर्पित किया। सचिन ने वानखेड़े स्टेडियम में अपना 200वां टेस्ट खेलकर भावुक विदाई लेने के 24 घंटे बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'मैंने शनिवार को कहा था कि भारत रत्न मेरी मां के लिए है क्योंकि उन्होंने मेरे लिए कई बलिदान किए हैं। बचपन में आप जीवन को समझ नहीं पाते, लेकिन बड़े होने पर इसका एहसास होता है। भारत रत्न सिर्फ मेरी मां के लिए नहीं है, बल्कि भारत की लाखों माताओं के लिए हैं जो अपने बच्चों के लिए कई कुर्बानियां देती हैं। इसीलिए मैं यह देश की उन तमाम माओं को समर्पित करना चाहूंगा।'
उन्होंने कहा, 'मैं काफी गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। क्रिकेट में 24 साल तक मेरे योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। मैंने हर बार बेहतर प्रदर्शन की कोशिश की और लोगों की सराहना से मुझे अगली बार और बेहतर करने की प्रेरणा मिली। यह पुरस्कार वास्तव में समूचे देश का है। मैं पूरे खेल जगत की ओर से यह सम्मान ले रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि मेरे बाद बाकी खिलाड़ियों के लिए भी दरवाजे खुलेंगे।' उन्होंने भारत रत्न पाने वाले वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव को भी बधाई दी। 

सचिन ने कहा कि मेरे लिए सबसे अहम 24 साल खेलना रहा। इस दौरान अलग-अलग चुनौतियां आईं लेकिन परिवार, दोस्तों, खिलाड़ियों और कोचों का साथ हमेशा बना रहा। यह एक स्वप्निल सफर था। कल रात बैठकर जब मैं सोच रहा था तो विश्वास नहीं हुआ कि अब कभी क्रिकेट नहीं खेलना है। लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि कहीं न कहीं खेल सकता हूं। अपने करियर को विराम देने का यह सबसे सही समय था। मुझे अपने करियर में कहीं कोई अफसोस नहीं है। मैंने सही वक्तपर क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया। मेरे लिए यह बहुत ही मजेदार रहा। क्रिकेट हमेशा मेरे लिए ऑक्सीजन की तरह रही। उन्होंने यह भी कहा कि वह टीम का हिस्सा हों या न हों, देश उनके लिए हमेशा सबसे पहले रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह देश की जीत के लिए कोशिश और दुआ करते रहेंगे।

मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि मैंने अपने जीवन के 40 साल में से 30 साल केवल क्रिकेट खेली। यानि मेरे जीवन का 75 फीसदी हिस्सा क्रिकेट से ही जुड़ा रहा। मेरा क्रिकेट के साथ जुड़ाव कहीं न कहीं बना रहेगा। आगे मैं क्या करना चाहूंगा इसके लिए मुझे अभी समय लगेगा। रिटायर हुए अभी 24 घंटे ही हुए है। आराम करने के लिए 24 दिन तो मिलने ही चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मैं रोजाना की तरह सुबह सवा छह बजे उठा और अपने काम शुरू किए। लेकिन तभी मुझे लगा कि मुझे मैच तो खेलने जाना ही नहीं है। आराम से अपने लिए चाय बनाई और अंजलि के साथ शानदार नाश्ता किया। यह एक रिलेक्स सुबह थी। मैंने अपने सभी शुभचिंतकों के एसएमएस के जवाब दिए।

उन्होंने कहा कि मेरे लिए 2011 में विश्व कप जीतने और कल का पल सबसे खास रहा। मुझे विश्व कप जीतने के लिए 22 साल तक लंबा इंतजार करना पड़ा। विश्व कप जीतना मेरे लिए खास पल रहे। कल का दिन भी बहुत विशेष था। मैं नहीं जानता कि मैं इसके लिए क्या कहूं। मैं इसके लिए सिर्फ बड़ा थैंक्यू कहना चाहता हूं।'

Politics over Bharat Ratan: Why Bharat Ratna to Sachin, Not to Vajpai

Bharat Ratan
नई दिल्ली [जाब्यू]। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव को भारत रत्न देने की घोषणा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजने की मांग तेज हो गई। साथ ही इस पर सियासत ने भी तेजी पकड़ ली है। भाजपा की तरफ से उठाई गई मांग के साथ जहां हाल ही राजग से अलग हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खड़े हो गए हैं, वहीं केंद्र सरकार के दो मंत्रियों ने भी इसका समर्थन कर दिया है। हालांकि, सरकार के सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने गुजरात दंगों के दौरान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राजधर्म की नसीहत देने के बावजूद वाजपेयी द्वारा खुद इसका पालन नहीं करने का आरोप लगाकर इस सर्वोच्च सम्मान के लिए उनकी योग्यता पर सवाल जरूर उठा दिए हैं।

सचिन की लोकप्रियता को भुनाने का सरकार के सियासी दांव में सियासत ने कई पेंच फंसा दिए हैं। करीब पांच साल पहले से वाजपेयी को भारत रत्न देने की मांग कर रही भाजपा ने इस मुद्दे को फिर से उठाया। भाजपा को सबसे पहले उसकी इस मुहिम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का समर्थन मिला। राजग छोड़ते हुए भी नीतीश ने नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए वाजपेयी की सबको साथ लेने की सियासत का हवाला दिया था। अपने राज्य के सियासी समीकरणों को साधते हुए नीतीश ने तत्काल इस मांग का समर्थन कर दिया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी सही मायने में इसके लायक हैं। साथ ही उन्होंने राम मनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर को भी भारत रत्न से नवाजे जाने की मांग की। राजग में शामिल शिवसेना ने भी अटल को भारत रत्न दिए जाने की मांग की है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि अगर राजीव गांधी को भारत रत्न मिल सकता है तो अटल को क्यों नहीं। 

मोदी के मुकाबले वाजपेयी की सियासत को सही बताने वाली कांग्रेस से भी उनके समर्थन में आवाज उठ गई। कांग्रेस खाते से केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री पल्लम राजू के साथ-साथ संप्रग सरकार में मंत्री नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला खुलकर अटल के समर्थन में आ गए। फारूक ने वाजपेयी को भारत रत्न की उपाधि से ऊपर ठहराते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर उन्हें इस सम्मान से नवाजे जाने की सिफारिश करेंगे। 

हालांकि, कांग्रेस का औपचारिक पक्ष रखते हुए केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने थोड़े सधे शब्दों में यह साफ कर दिया कि वाजपेयी का नाम जानबूझकर ही अलग रखा गया। उन्होंने कहा, वाजपेयी ने एक सीएम को राजधर्म की नसीहत दी थी। वक्त का तकाजा था कि वह उस सीएम को खुद ही बर्खास्त करते लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वाजपेयी को इसका मलाल भी था। ऐसे में भारत रत्न दिए जाने पर गंभीरता से सोचना जरूरी है।
हालांकि, केंद्र के एक वरिष्ठ मंत्री का मानना है कि कांग्रेस वाजपेयी को भारत रत्न देकर राजनीतिक पलटवार कर सकती थी, लेकिन वह चूक गई। 

शिवानंद ने कराई जदयू की किरकिरी : जदयू के बड़बोले नेता शिवानंद तिवारी फिर से गलती कर बैठे। उनके नेता नीतीश कुमार ने जहां सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने का स्वागत किया, वहीं तिवारी ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सचिन पैसे लेकर क्रिकेट खेलते थे और उससे अरबों कमाए। फिर भारत रत्न उन्हें देने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने कहा कि हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर विचार किया जाना चाहिए था। वहीं, शिवसेना ने तिवारी के बयान को आड़े हाथ लिया है। संजय राउत ने कहा कि शिवानंद तिवारी को सचिन पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। सचिन भारत की पहचान हैं, शिवानंद तिवारी नहीं।

Sunday, 17 November 2013

Sachin is the 'greatest' of my era: Muralitharan

Muralitharan
नई दिल्ली। श्रीलंका के दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने भारतीय क्रिकेट स्टार सचिन तेंदुलकर को अपनी पीढ़ी का महानतम क्रिकेटर करार देते हुए कहा कि उनका विकेट हमेशा हमारे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने कहा कि वर्षो तक की गई अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण ने तेंदुलकर को लीजेंड बनाया। उन्होंने पूरे उत्साह, जोश और गरिमा के साथ क्रिकेट खेली। 800 टेस्ट विकेट और 500 से अधिक वनडे विकेट लेने वाले इस 41 वर्षीय ऑफ स्पिनर ने कहा कि औसत के मामले में भले ही सर डॉन ब्रेडमैन का जवाब नहीं लेकिन रनों और लंबे समय तक क्रिकेट में बने रहने के मामले में तेंदुलकर को अपने युग का महानतम क्रिकेटर माना जाएगा।

मुरलीधरन ने कहा कि सचिन मेरे युग का महानतम क्रिकेटर है। वह आधुनिक युग का महान क्रिकेटर है। उनका जुनून, समर्पण, प्रत्येक मैच से पहले कड़ी मेहनत और क्रिकेट के प्रति उनके प्यार को मैं सलाम करता हूं और इससे वह महानतम खिलाड़ी बने। उन्होंने कहा कि मैंने अन्य को नहीं देखा। मैंने ब्रेडमैन को बल्लेबाजी करते हुए नहीं देखा लेकिन यदि आप सचिन के आंकड़े, उन्होंने जितने अधिक रन बनाए, उनका लंबे समय तक क्रिकेट में बने रहना जो उन्हें मेरे समय का महानतम क्रिकेटर बनाते हैं। उनकी तरह कोई भी इतने लंबे समय तक नहीं खेल पाया। मुझे यह कहते हुए किसी तरह का संदेह नहीं कि वह वह महानतम हैं।
मुरलीधरन ने कहा कि खेल के प्रति उनका प्यार, उनका रवैया, प्रत्येक मैच से पहले कड़ा अभ्यास करना, मैच की तैयारी में घंटों पसीना बहाना, इससे ही महान खिलाड़ी बनते हें। सचिन अदभुत है और मैं 24 साल पहले जिस इंसान से मिला था वह आज भी वैसे ही हैं। मुरलीधरन का तेंदुलकर से पहली बार 1993 में वनडे सीरीज के दौरान आमना-सामना हुआ। उन्होंने कहा कि वह कई वजहों से तेंदुलकर से प्रेरित हैं। मुझे अपने खेल के प्रति अपने जुनून और समर्पण से प्रेरित किया। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। वह सच्चे भद्रजन की तरह खेले। उन्होंने बेहद सम्मानजनित तरीके से खुद को आगे बढ़ाया। वह हमेशा विनम्र और शांतचित व्यक्ति रहे। वह बेजोड़ थे।

कई का मानना है कि भारतीय बल्लेबाजी की नई सनसनी और उप कप्तान विराट कोहली सचिन के संभावित उत्तराधिकारी हैं लेकिन मुरलीधरन ने कहा कि तुलना का कोई मतलब नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि दो चीजें एक समान नहीं हो सकती हैं। विराट कोहली युवा प्रतिभाओं में शानदार हैं। मेरे लिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने कोहली के रूप में दूसरा सचिन ढूंढ़ लिया है। समय ही बताएगा। सचिन को महान बनने में 24 साल लगे और कोहली ने अभी शुरुआत की है। मुरलीधरन ने कहा कि यदि कोहली अपनी प्रतिभा को सही इस्तेमाल करते रहे। जैसा वह अभी खेल रहे हैं वैसे ही खेलते रहें। यदि वह अनुशासन और समर्पण दिखाते हैं तो फिर महानतम खिलाड़ियों में से एक बन सकते हैं लेकिन अभी सचिन महानतम हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे कोहली का रवैया और रनों की भूख पसंद है। आइपीएल में (आरसीबी की तरफ से) वह मेरा कप्तान थे। मैंने उनकी हमेशा जीत और बड़े स्कोर बनाने की भूख देखी है। वह प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं। सचिन निश्चित तौर पर सर्वकालिक महान खिलाड़ी हैं। सचिन अपने करियर में पहले ही सब कुछ हासिल कर चुका है और कोहली उसे हासिल करने की प्रक्रिया में है। मुरलीधरन ने कहा कि सचिन सभी तरह की परिस्थितियों और गेंदबाजी के सामने सर्वश्रेष्ठ थे और विरोधी टीमों को उनके लिए खास रणनीति बनानी पड़ती थी। उन्हें रोक पाना, आउट करना हमेशा मुश्किल रहा। उनका विकेट हमारे लिए हमेशा बेहद महत्वपूर्ण रहा। हमने उनके विकेट के लिए हमेशा खास रणनीति बनाई। मुरलीधरन ने कहा कि मैं उनकी खुशहाल जिंदगी की कामना करता हूं। उन्हें भविष्य के लिये शुभकामनाएं। मैं उन्हें मेंटर के रूप में युवा खिलाड़ियों की मदद करते हुए देखना चाहता हूं।

Sachin, Prof CNR Rao get Bharat Ratna

Sachin Tendulkar
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने हर बड़ा रिकार्ड अपने नाम दर्ज कराया। उनके बल्लेबाजी के कई रिकार्ड तो शायद भविष्य में टूटें भी, लेकिन मैदान से रिटायर होने के साथ ही जो रिकार्ड उनके नाम हो गया है, वह कभी नहीं टूटेगा। हिंदुस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न पाने वाले सचिन पहले खिलाड़ी बन गए हैं। सबसे कम उम्र में यह सर्वोच्च सम्मान हासिल करने का तमगा भी उनके नाम हो गया। अंतरिक्ष में भारत की ऊंची छलांग का ईंधन मुहैया कराने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी भारत रत्न से नवाजा गया है। 79 वर्षीय राव फिलहाल जवाहर लाल नेहरू सेंटर फार एडवांस एटॉमिक रिसर्च के मानद अध्यक्ष हैं और प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख हैं।

24 सालों से हिंदुस्तान के करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों के दिलों पर राज कर रहे तेंदुलकर की जिस समय क्रिकेट के मैदान से भावभीनी विदाई हो रही थी, उसी समय उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार दोपहर करीब 3:45 बजे तेंदुलकर और राव को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की। राजनीति, कला व सामाजिक हस्तियों को मिलने वाले देश के इस नागरिक सम्मान में खेल-खिलाड़ी क्षेत्र शामिल नहीं था। माकन की अगुआई में पिछले दिनों संप्रग सरकार ने इस नियम को बदला और खिलाड़ियों को भारत रत्न देने का प्रावधान शामिल किया गया। 

अभी संसदीय कार्य राच्यमंत्री राजीव शुक्ला ने दो-तीन दिन पहले ही संकेत दिए थे कि रिटायरमेंट के बाद सचिन को भारत रत्न दिया जा सकता है। हालांकि, देश में तमाम खेल जगत के लोगों का मानना था कि खेल में भारत रत्न के पहले हकदार हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद हैं। मगर फिलहाल जब पूरा देश सचिन के खुमार में डूबा है तो उसी समय संप्रग सरकार ने उनकी लोकप्रियता पर सवार होने का फैसला कर लिया। तेंदुलकर के विश्व क्रिकेट में 100 शतक होने पर पहले भी कांग्रेस सांसद व बीसीसीआइ पदाधिकारी राजीव शुक्ला की अगुआई में संसद में भारत रत्न देने की मांग की गई थी। सचिन को राच्यसभा के लिए नामित कर उस समय भी संप्रग सरकार ने खूब वाह-वाही लूटी थी।

सचिन के अलावा पिछले साल ही पद्मविभूषण से सम्मानित प्रख्यात रसायन वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी भारत रत्न से नवाजा गया है। अंतरिक्ष में भारत की ऊंची छलांग के इसरो कार्यक्रम में तो उनकी सेवाएं रही ही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के वैज्ञानिक सलाहकार रहे राव बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़े और कानपुर आइआइटी में अध्यापन भी किया। 

पीएमओ का नहीं उठा रहे थे फोन
रिटायरमेंट के बाद सचिन तेंदुलकर जब बेहद भावुक माहौल में अपने घर में थे तो वह किसी का फोन नहीं उठा रहे थे। उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय से सचिन को भारत रत्न के लिए चुने जाने की सूचना देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनका इंतजार कर रहे थे। सचिन के घर में किसी ने फोन नहीं उठाया तो पीएमओ ने वहां मौजूद केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला को फोन कर यह सूचना दी और सचिन से बात कराने को कहा। शुक्ला के सूचना देने पर सचिन ने पीएमओ का फोन उठाया और तब प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई दी। 

भारत रत्न
यह पुरस्कार हमारे देश का उच्चतम नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण सेवा के लिए तथा उच्चतम स्तर की लोक सेवा को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है। इस सम्मान के तहत 35 मिमी व्यास वाला स्वर्ण पदक दिया जाता है। पीपल के पत्ते के आकार वाले इस पदक के ऊपरी हिस्से में सूर्य और नीचे हिंदी भाषा में 'भारत रत्न' लिखा होता है। इसके पीछे की ओर शासकीय संकेत और आदर्श-वाक्य लिखे होते हैं। इसे सफेद फीते में डालकर गले में पहनाया जाता है। 13 जुलाई 1977 से 26 जनवरी 1980 के बीच यह पुरस्कार लंबित रहा।

इतिहास:
भारत रत्न पुरस्कार की परंपरा 1954 में शुरू हुई थी। सबसे पहला पुरस्कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन को दिया गया था। तब से अनेक विशिष्ट जनों को अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता पाने के लिए यह पुरस्कार प्रस्तुत किया गया है। इस पुरस्कार को पाने वाले गैर भारतीय भी हैं क्योंकि इसका कोई लिखित प्रावधान नहीं है कि भारत रत्न केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जाए। पूर्व में यह सम्मान भारतीय नागरिक बन चुकी एग्नेस गोंखा बोजाखियू यानी मदर टेरेसा और खान अब्दुल गफ्फार खां एवं नेल्सन मंडेला (1990) को मिल चुका है। यह भी अनिवार्य नहीं है कि भारत रत्न सम्मान हर वर्ष दिया जाए। पिछली बार यह सम्मान वर्ष 2009 में पंडित भीमसेन जोशी को दिया गया था।
प्रकार : नागरिक
श्रेणी : राष्ट्रीय
पहला पुरस्कार : 1954
कुल (अब तक): 43
खास बातें
- 43 में 11 शख्सियतों को मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया
- साल 2001 और 2009 के बीच पहली बार सात सालों के दौरान कोई भारत रत्न पुरस्कार नहीं दिया गया
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत दिया गया भारत रत्न सम्मान उनके परिवार वालों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। देश के इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से जुड़ा यह पहला मामला है, जब इसे अस्वीकार किया गया
- किसी साल विशेष में दिए जा सकने वाले भारत रत्न पुरस्कारों की कुल संख्या-3

Can't believe life between 22 yards has come to end: Sachin Tendulkar

Sachin Tendulkar
जागरण न्यूज नेटवर्क, मुंबई। सक्रिय क्रिकेट जीवन से औपचारिक विदाई से पहले ही वानखेड़े का माहौल भावुक हो चुका था। शनिवार को दर्शकों की आंखों में तैरती-झिलमिलाती नमी स्टेडियम की फिजाओं में महसूस हो रही थी। सचिन सचिन के चाहने वालों को ऐसे माहौल का आभास पहले ही हो गया था। कुछ दिग्गज क्रिकेटर एक दिन पहले ही कह चुके थे कि सचिन विदाई के मौके पर अपने आंसू रोक नहीं पाएंगे। ऐसा ही हुआ और कुछ इस तरह से कि सचिन हमेशा के लिए दिलों में बस गए। वह खुद तो रोए ही, औरों को भी रुला गए। 

अपने मंत्रमुग्ध करने वाले विदाई भाषण से वह अपना कद और ऊंचा कर गए और रही-सही कसर भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न प्रदान करने की घोषणा से पूरी कर दी। वह इतनी कम उम्र (40 वर्ष) में और साथ ही खिलाड़ी के तौर पर यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले पहले शख्स बनेंगे।
सचिन सचमुच भारत रत्न हैं। उन्होंने भले ही सक्रिय क्रिकेटर के तौर पर संन्यास ले लिया हो लेकिन कोई भी उनके मुंह से संन्यास और विदाई जैसे शब्द सुनना नहीं चाहता। उनके बिना क्रिकेट की कल्पना करना भी मुश्किल है। वह क्रिकेट से दूर जा नहीं सकते और प्रशंसक उन्हें ऐसा करने भी नहीं देंगे। उन्होंने क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है और आने वाली क्रिकेट की पीढि़यों को भी उनसे बहुत उम्मीदें हैं। यह उम्मीदें सचिन की औपचारिक विदाई के समय वानखेड़े स्टेडियम में दिखाई भी दीं। वेस्टइंडीज टीम पर फतह हासिल कर सचिन जब टीम के साथ मैदान से बाहर निकले तो न तो अपने आंसू रोक सके और न ही उन्हें छिपा सके। वह हैट काम नहीं आई जो शायद उन्होंने अपनी आंखों के भावों को छिपाने के लिए पहन रखी थी।

पुरस्कार वितरण समारोह के लिए सचिन टीम और परिवार के साथ मैदान पर आए। रवि शास्त्री ने पुरस्कार वितरण की तमाम औपचारिकताएं पूरी कीं। ये जरूरी थीं, लेकिन सभी का ध्यान सचिन, उनके साथ मौजूद पत्नी अंजलि, बच्चों सारा और अर्जुन पर था। सारे अवा‌र्ड्स बंट जाने के बाद सचिन की बारी आई तो रवि शास्त्री ने उनसे कुछ पूछने के बजाय माइक ही उनके हाथ में थमा दिया। बहुत कम बोलने वाले सचिन पहली बार खुल कर बोले और ऐसा बोले कि अपने आंसुओं को थामने की कोशिश कर रहे लोग नाकाम हो गए।

अपने विदाई भाषण के जरिये उन्होंने साबित किया कि धन्यवाद ज्ञापित करने में भी उनका कोई सानी नहीं।
सचिन बोलते समय रोना नहीं चाह रहे थे इसलिए बार-बार पानी पिए जा रहे थे। उन्होंने बारी-बारी से सब को याद किया और कोई छूट न जाए इसलिए एक लिस्ट भी लेकर आए थे। जब उन्होंने अपने परिवार के बारे में बोलना शुरू किया तो बच्चों के साथ खड़ीं अंजलि अब रोईं कि तब रोईं वाली हालत में आ गईं।

जब सचिन ने उनका जिक्र करना शुरू किया तो तमाम जतन के बावजूद वह रो ही पड़ीं। सचिन ने आखिर में कहा कि जब तक मैं जिंदा रहूंगा तब तक सचिन-सचिन मेरे कानों में गूंजता रहेगा। उनका इतना कहना था कि पूरा स्टेडियम सचिन-सचिन से गूंज उठा। जब उन्होंने कहा कि शायद उनका भाषण लंबा हो गया है तो नहीं-नहीं की आवाजें आईं। लोगों के लिए यह कल्पना करना कठिन था कि सचिन अब खेलते हुए नहीं दिखेंगे, लेकिन कहीं न कहीं सबके दिलों में भरोसा था कि जिन सचिन ने खुद कहा हो कि क्रिकेट उनके लिए अॅाक्सीजन की तरह है वह उससे दूर नहीं जा सकते और इसका संकेत उन्होंने टीम इंडिया की ओर मुखातिब होते हुए यह कहकर दिया भी कि हमेशा याद रखें कि वे देश की सेवा कर रहे हैं। 

विदाई भाषण के बाद सचिन पूरी टीम के साथ विक्ट्री लैप के लिए उतरे। सबसे पहले विराट कोहली और महेंद्र सिंह धौनी ने उन्हें कंधे में उठाया। इसके बाद शिखर धवन और मुरली विजय के कंधों पर सवार होते हुए सचिन ने वानखेड़े का आखिरी चक्कर पूरा किया। सचिन ने एक बार फिर तब भावनाओं का ज्वार पैदा किया जब वह मैदान से विदा होने के पहले पिच को प्रणाम करने आए। उनकी आंखों से फिर से गंगा-जमुना बह निकलीं।
यकीन नहीं हो रहा कि पिछले 24 साल से 22 गज के दरम्यान की मेरी जिंदगी खत्म हो गई है। सभी को धन्यवाद, जिन्होंने मुझे सहयोग किया। मैं पहली बार सूची लेकर आया हूं, जिन्हें मुझे धन्यवाद देना है, क्योंकि कई बार मैं भूल जाता हूं। सबसे पहले मेरे पिता (रमेश तेंदुलकर) जिनका 1999 में निधन हो गया। .. खेल चुके सभी सीनियर क्रिकेटरों को धन्यवाद। .. मुझे पूरा यकीन है कि आप इसी तरह देश की सेवा करते रहेंगे।

In angry outburst scientist Rao calls politicians 'idiots'

Bharat Ratna awardee and eminent scientist scientist CNR Rao
बेंगलूर। भारत रत्न सम्मान पाने वाले प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो.सीएनआर राव देश में विज्ञान की उपेक्षा व वैज्ञानिक शोध के लिए बहुत कम धन मिलने से आहत हैं। इस मुद्दे को लेकर कुरेदने पर वह रविवार को गुस्से में इतना कम धन आवंटित करने के लिए नेताओं को 'इडियट्स' तक कह डाला।

उन्होंने सख्त लहजे में यह भी कहा कि जितना पैसा सरकार ने विज्ञान क्षेत्र को दिया है, हम लोगों ने उससे बहुत अधिक किया है।

प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष राव पुरस्कार की घोषणा के दूसरे दिन संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शोध के लिए और संसाधन मुहैया करने की जरूरत पर बल दिया।
एक संवाददाता ने जब देश में हो रहे वैज्ञानिक शोध के स्तर के बारे में सवाल किया पर राव आपा खोते हुए बरस पड़े 'क्यों इन बेशर्म मूर्खो., इन नेताओं ने हम लोगों के लिए इतना कम दिया। इसके बावजूद हम वैज्ञानिकों ने कुछ किया है।' विज्ञान के लिए हमारा निवेश बहुत कम है, देर से मिलता है.. जो पैसा हमने पाया है हमने काम करके दिखाया है। इसके लिए हमें जो पैसा मिल रहा है यह कुल मिलाकर कुछ नहीं है।

चीन की प्रगति के बारे में उन्होंने कहा कि हम भारतीय कड़ी मेहनत नहीं करते हैं, हम चीनियों की तरह नहीं हैं। हम आराम तलबी हैं और उतने राष्ट्रवादी भी नहीं हैं। हमें कुछ अधिक पैसा मिलता है तो हम विदेश जाने को तैयार हो जाते हैं। देश में वैज्ञानिक मिजाज भी नहीं है। सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में उन्होंने कहा कि इसका विज्ञान से कोई लेना देना नहीं है। इससे कुछ लोग पैसा बनाते हैं और काम करने वाला पूरा कुनबा नाखुश है।
भारत के भविष्य के बारे में इस शीर्ष वैज्ञानिक ने कहा कि यह इससे जुड़ा है कि शिक्षा और विज्ञान में भारत कितना खर्च करता है। जिन देशों ने दुनिया में वास्तव में प्रगति की है वे ऐसे देश हैं जो वैज्ञानिक ढंग से आगे हैं। दुर्भाग्य से देश में विज्ञान के लिए उतनी सहायता नहीं मिलती जितनी मिलनी चाहिए। 

 Source- Hindi News

Friday, 15 November 2013

Lata Praises, Sachin Should Get Bharat Ratna

sachin tendulkar
मुंबई। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न से सम्मानित करने की मुहिम तेज हो गई है। सैफ अली खान के बाद अब गायिका लता मंगेशकर ने भी उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने की गुजारिश की है।

लता दीदी ने कहा कि सचिन ने देश के लिए जो भी किया है, बहुत कम लोग ही ऐसा कर पाते हैं। उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया है। उन्हें देश का सबसे सम्मानित और गौरवान्वित पुरस्कार मिलना चाहिए। उनका कहना है कि सचिन के बगैर क्रिकेट की तुलना भी नहीं की जा सकती है। उन्हें लगता है कि सचिन को एक साल और खेलना चाहिए। सचिन के सन्यास से वे काफी दुखी हैं। 

उन्होंने कहा कि सचिन के अंदर जितना टैलेंट है उन्हें एक अकादमी खोलनी चाहिए और युवाओं को क्रिकेट का ज्ञान देना चाहिए। 

गौरतलब है कि साल 2011 में लता मंगेशकर को अपनी गायिकी के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनसे पहले अभिनेता सैफ अली खान ने भी सचिन को भारत रत्न देने की मांग की थी। सचिन ने अपने आखिरी (200 वें) टेस्ट मैच में 74 रन बनाए और इसके साथ ही उनका क्रिकेट करियर समाप्त हो गया। (मिड डे)

Sachin Last Time on Ground, India 7 Wickets Away from Victory

Sachin Tendulkar
मुंबई। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम पर आज मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मुमकिन है कि आखिरी बार मैदान पर उतरेंगे। समाचार लिखे जाने तक कैरेबियाई टीम भारत से अब भी 225 रन दूर है और भारत मुंबई टेस्ट में जीत से महज 4 विकेट दूर है, ऐसे में आसार यही हैं कि यह टेस्ट आज ही समाप्त हो जाएगा और 'क्रिकेट के भगवान' को फैंस आखिरी बार मैदान पर देख सकेंगे। 

दूसरी पारी में जवाब में उतरे कैरेबियाई टीम के बल्लेबाज दूसरे दिन के अंत में शुरू से ही लड़खड़ाते दिखे और आते ही विकेटों की झड़ी लगना शुरू हो गई। पहले 15 रन के कुल स्कोर पर अश्रि्वन ने पॉवेल (9) को आउट किया। इसके बाद नाइटवॉचमैन की भूमिका निभाने पिच पर उतरे टीनो बेस्ट (9) को ओझा ने अपना शिकार बनाया और एलबीडब्ल्यू करते हुए पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। वहीं, दिन खत्म होते-होते कैरेबियाई टीम के इन फॉर्म बल्लेबाज डेरेन ब्रावो (11) भी अश्रि्वन की गेंद पर विजय के हाथों कैच होकर पवेलियन लौट गए और वेस्टइंडीज को तीसरा झटका लगा। इसके बाद आज मैच के तीसरे दिन सुबह-सुबह ओझा ने मार्लन सैमुअल्स (11) को धौनी के हाथों स्टंप करा दिया व इसके बाद ओझा ने ही धौनी के हाथों क्रिस गेल (35) को भी कैच कराते हुए वेस्टइंडीज को पांचवां झटका दे दिया। ओझा का कहर यहीं नहीं थमा, उन्होंने इस पारी में अपना चौथा विकेट झटकते हुए नरसिंह देवनारायण (0) के रूप में वेस्टइंडीज को छठा झटका भी दे दिया।

इससे पहले दूसरे दिन की शुरुआत पूरी तरह से सचिनमय रही थी। 38 के निजी स्कोर पर पहले दिन नाबाद रहने वाले सचिन ने दूसरे दिन की सुबह अपना पचासा पूरा करके फैंस को झूमने का मौका दिया। उन्होंने 91 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया और इस दौरान 9 चौके लगाए। यह सचिन के टेस्ट करियर का 68वां अर्धशतक रहा, हालांकि वह अपनी पारी को 74 रन से आगे नहीं ले जा सके। सचिन ने 118 गेंदें खेलीं और इस दौरान 12 चौके लगाए। 

इससे पहले, पहले दिन दूसरे सत्र में ही वेस्टइंडीज की पारी समेटने के बाद भारतीय टीम ने सधी हुई शुरुआत की थी और पहले विकेट की साझेदारी में शिखर धवन (33) और मुरली विजय (43) ने 77 रन बनाए। धवन को शिलिंगफोर्ड ने चंद्रपॉल के हाथों आउट कराया। धवन ने 28 गेंदों का सामना करते हुए सात चौके लगाए। धवन के बाद विजय भी उसी ओवर में डेरेन सैमी को कैच थमा बैठे। विजय ने 55 गेंदों में आठ चौके लगाए।

दूसरे दिन सचिन की 74 व विराट कोहली के 57 रनों की पारी के बाद चेतेश्वर पुजारा ने अपने करियर का पांचवां टेस्ट शतक लगाया, वो 113 की शानदार पारी के बाद शिलिंगफोर्ड का शिकार बने, जबकि धौनी महज 4 रन बनाकर बेस्ट की गेंद पर स्लिप में कैच हो गए। इसके बाद रविचंद्रन अश्रि्वन (30) ग्रेब्रियाल का शिकार बने, फिर भुवनेश्वर कुमार (4) के रूप में 8वां झटका लगा और ओझा (0) के रूप में नौवां झटका लगा, लेकिन अंत होते-होते रोहित शर्मा ने भी कमाल दिखा दिया। पहले टेस्ट में अपने टेस्ट करियर का आगाज शतक के साथ करने वाले रोहित ने दूसरे टेस्ट में भी जानदार शतक जड़ डाला। उन्होंने नाबाद 111 रनों की पारी खेली। रोहित का यह लगातार दूसरा शतक रहा। अजहरुद्दीन और गांगुली के बाद वो लगातार दो टेस्ट शतक लगाने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। जिसके दम पर मुंबई टेस्ट में भारत 313 रनों की बड़ी बढ़त हासिल करने में सफल रहा।

Thursday, 14 November 2013

Saif ali khan Says, Sachin Must got Bharat Ratna

Sacin tendulkar
मुंबई,(मिड डे)। सचिन का आखिरी टेस्ट मैच अभी खत्म हुआ भी नहीं कि उनको भारत रत्न जैसे सम्मानित पुरस्कार दिए जाने की बात जोर पकड़ रही है। जहां एक ओर स्टार्स सचिन को अपने-अपने अंदाज में सम्मान दे रहे हैं, वहीं सैफ अली खान सचिन को भारत रत्न दिए जाने की बात पर जोर दे रहे हैं।

सैफ अली खान का मानना है कि सचिन ने देश के लिए बहुत कुछ किया है। वे देश के गौरव हैं। इन्हें देश का सबसे गौरवान्वित पुरस्कार मिलना चाहिए। छोटे नवाब ने कहा कि उनके पिता मनसूर अली खान पटौदी ने सचिन के बारे में कहा था कि उन्होंने क्रिकेट को एक नया आयाम दिया है, एक अलग ऊंचाई दी है। 

सैफ अली खान ने कहा कि एक बार इन्होंने सचिन से पूछा था कि कैसे वे इतना अच्छा खेल लेते हैं, तो सचिन ने कहा कि वे बोलर को लंच से पहले ही मार देता हूं, शायद इसलिए लंच के बाद मैं आउट हो जाता हूं, क्योंकि वो मुझे मार देता है। ऐसे ही फिर मैं उसे मार देता हूं, वो मुझे। 

सैफ अली खान ने कहा कि कोई भी चीज इस दुनिया में स्थायी नहीं है, लेकिन सचिन की कमी कोई नहीं पूरी कर सकता है। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता है।

No Qualms About Talking to Modi: Cameron

David Cameron
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। चुनावी मौसम में भारत की सियासी हवा का रुख भांपकर पश्चिमी मुल्कों ने भी मन बदलना शुरू कर दिया है। गुजरात दंगों के बाद कभी नरेंद्र मोदी के नाम से कतराने वाले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भारत यात्रा में साफ किया कि उन्हें किसी भी चुने नेता से बात करने में परहेज नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वह मोदी से मिलने की इच्छा रखते हैं।

बीती रात एक दिनी भारत दौरे पर आए कैमरन ने गुरुवार सुबह भारतीय उद्योगपतियों से मुलाकात में एक सवाल के जवाब में कहा कि ब्रिटेन ने गुजरात सरकार के साथ संपर्क की प्रक्रिया शुरू की है। राज्य के मुख्यमंत्री से हमारे विदेश मंत्री ने मुलाकात की है और मुझे लगता है कि संपर्क का सिलसिला जारी रहना चाहिए। भाजपा के प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री का कहना था कि समय आने पर जरूर मिलेंगे। मुलाकात करना अच्छा है।

अपना नेता चुनने का अधिकार भारत की जनता के पास है, लेकिन हमें किसी भी निर्वाचित नेता से मिलने में परहेज नहीं है। महत्वपूर्ण है कि ब्रिटेन ने 2002 में गुजरात दंगों के बाद से राज्य के साथ रोकी गई संवाद प्रक्रिया को फिर से शुरू किया है। बीते साल अक्टूबर में उसने गुजरात सरकार के प्रति अपने नजरिये को बदलते हुए ब्रिटिश राजदूत को अहमदाबाद भेजा था। बीते दो सालों के दौरान पश्चिमी मुल्कों और विदेशी मीडिया ने नरेंद्र मोदी को लेकर नजरिये में बदलाव दिखाया है।

राष्ट्रकुल शासनाध्यक्ष सम्मेलन के लिए कोलंबो जाने से पहले भारत आए ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उनकी बहुत छोटी यात्रा है। यहां उनकी प्राथमिकता प्रधानमंत्री व दोनों देशों के बीच सरकारों के स्तर पर संवाद की है। कैमरन गुरुवार दोपहर ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने के लिए कोलकाता रवाना हो गए। उनका कहना था कि कोलकाता उन्होंने कभी नहीं देखा, इसलिए वहां जाने की उनकी इच्छा थी।
गुजरात में मोदी की तीसरी चुनावी जीत के बाद फरवरी 2013 में दोपहर भोज पर यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रुख में बदलाव का एलान किया था। इतना ही नहीं गत एक साल के दौरान कई देशों के राजदूतों ने गांधीनगर में मोदी से मुलाकात की है। उल्लेखनीय है कि गुजरात दंगों को लेकर ब्रिटेन, अमेरिका व कई पश्चिमी मुल्कों ने नरेंद्र मोदी व सूबे के साथ अपने आधिकारिक संपर्क काट लिए थे।

Source- News in Hindi

Tuesday, 12 November 2013

Lata ji Should Return Bharat Ratna Award : Congress

Lata mangeshkar
मुंबई। मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष जनार्दन चांदुरकर ने गायिका लता मंगेशकर से भारत रत्न लौटाने को कहा है। उनका कहना है कि भारत रत्न जैसे सम्मान मिलने वाले लोगों से उम्मीद की जाती है कि वह छोटी चीजों में ना पड़े, उनकी सोच बड़ी हो और वे देश के हित में सोचें। कांग्रेस के नेता ने ये बयान इसलिए दिया, क्योंकि हाल में लता मंगेशकर ने बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी।

उन्होंने कहा था कि मैं भाजपा में से किसी को अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती हूं। इसके बाद कांग्रेस के नेता की तरफ से बयान आया कि अगर नरेंद्र मोदी जैसे सांप्रदायिक शख्स का समर्थन करना है तो उन्हें अपना सम्मान वापस करना होगा।

चादुंरकर का कहना है,'अगर लता जी या कोई और सम्मान प्राप्त व्यक्ति आगे भी ऐसा करता हैं तो मैं खुद पीएम को चिट्ठी लिखूंगा कि उनसे अवार्ड वापस ले लिया जाए'।

गौरतलब है कि पिछले दिनों नरेंद्र मोदी को लता मंगेशकर ने प्रधानमंत्री पद पर देखने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी में पीएम के सारे गुण हैं।