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Tuesday, 7 June 2016

जानिए, विश्व कप इतिहास का पहला मैच क्यों है भारतीय टीम के लिए बदनुमा दाग !

7 जून 1975 का दिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यादगार दिन है। इस खास दिन पहले विश्वकप क्रिकेट का पहला मैच भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स मैदान पर खेला गया था। यह मैच कई मायनों में आज भी यादगार है। आज टी-20 के दौर में जहां बल्लेबाज का एक भी गेंद खाली निकालना पाप माना जाता है, वहीं महान सुनील गावस्कर ने उस मैच में 174 गेंद खेलकर महज 36 रन बनाए थे। एक नजर उस मैच से जुड़ी अहम बातों पर -

    तब वनडे मैच 60-60 ओवर के होते थे। गावस्कर ने ऑपनिंग करते हुए पूरे 60 ओवर तक बल्लेबाजी की थी।
    उन्होंने 174 गेंद में महज 36 रन बनाए। केवल एक चौका लगाया और इस तरह उनका स्ट्राइक रेट था 20.68।
    गावस्कर की उस पारी को आज भी वनडे इतिहास की सबसे खराब पारियो में गिना जाता है।
    इग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए चार विकेट के नुकसान पर 334 का विशाल स्कोर खड़ा किया था।
    डेनिस एमिस ने 137, किथ फ्लैचर ने 68 और क्रिस ओल्ड ने नाबाद 51 रन बनाए थे।
    गावस्कर के ऐसे खेल से भारतीयों को बहुत निराशा हुई, क्योंकि उन्होंने अपनी पारी के दौरान कभी लक्ष्य हासिल करने की दिशा में बल्लेबाजी नहीं की।
    भारतीय पारी के 60 ओवर खत्म होने पर स्कोर था 3 विकेट खोकर 132 रन। इस तरह भारत को विश्वकप इतिहास के पहले ही मैच में 202 रनों की बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
    गुंडप्पा विश्वनाथ ने जरूर 59 गेंदों पर 37 रन बनाए, लेकिन गावस्कर ने सभी को निराश किया।
    क्रिकेटर मैग्जीन के मुताबिक, जब पारी समाप्त होने वाली थी, तब कुछ दर्शक मैदान में घुस आए थे, ताकि गावस्कर से आपत्ति दर्ज करवा सकें। तब टीम के मैनेजर रहे गुलबराई रामचंद्रन ने कहा था, ऐसी पारी का मतलब उन्हें भी समझ नहीं आया।
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Tuesday, 24 May 2016

सचिन और गांगुली के कारण टीम इंडिया में नहीं आ पाया ये क्रिकेटर!

अमोल मजूमदार ऐसे दुर्भाग्यशाली क्रिकेटर रहे जिन्हें घरेलू क्रिकेट में हजारों रन बनाने के बावजूद टीम इंडिया में कभी मौका नहीं मिल पाया। मजूमदार की तकनीक में कोई खराबी नहीं थी, उनका टाइमिंग खराब रहा जिसके चलते वे राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं बन पाया। वे उसी स्कूल टीम में थे जिसमें सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली शामिल थे। वे जब टीम इंडिया में प्रवेश की कोशिश कर रहे थे तब टीम में सचिन, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण धूम मचा रहे थे।


1988 में हैरिस शील्ड इंटर स्कूल टूर्नामेंट में 13 वर्षीय सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली के बीच तीसरे विकेट के लिए हुई 664 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी भारतीय क्रिकेट का सुनहरा पन्ना है। इस साझेदारी के जरिए ये दोनों खिलाड़ी सुर्खियों में आ गए और पैड पहनकर बैठे एक 13 वर्षीय क्रिकेटर की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। यह बल्लेबाज अमोल मजूमदार था।


जब आगे चलकर सचिन और कांबली टीम इंडिया की तरफ से खेले, तब हैरिस शील्ड मैच की तरह मजूमदार यहां भी अपनी बारी आने का इंतजार करते रहे। अमोल ने वर्षों बाद 1993 में मुंबई की तरफ से प्रथम श्रेणी किया और हरियाणा के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच में 260 रन बनाए। यह प्रथम श्रेणी पदार्पण में अभी भी रिकॉर्ड स्कोर है। मजूमदार ने चमकीले प्रथम श्रेणी करियर में 21 वर्षों में 11167 रन बनाए।

कभी टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाए

टेलेंट और तकनीक को छोड़ दीजिए, मजूमदार हमेशा खराब टाइमिंग के शिकार बने। वे उस स्कूल टीम में शामिल रहे, जिसमें सचिन और कांबली थे। वे 1995 में उस भारत 'ए' में चुने गए जिसमें राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण थे। इंग्लैंड 'ए' के खिलाफ टेस्ट मैचों में द्रविड़ चमके जबकि वन-डे में गांगुली छा गए। रवि शास्त्री और नवजोतसिंह सिद्धू रिटायर हुए थे और टीम इंडिया के मध्यक्रम में जगह खाली थी। 1995-96 की दुलीप ट्रॉफी प्रतिभा दिखाने का सही मंच था और लक्ष्मण और द्रविड़ ने सबसे ज्यादा रन बनाए जबकि गांगुली ने पूर्व क्षेत्र के खिलाफ 171 रन बनाए। ये तीनों भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल रहे जबकि मजूमदार इंतजार करते रह गए।

इसके बाद तो मजूमदार सही मौके का इंतजार करते ही रह गए। मुंबई का 15 वर्षों तक प्रतिनिधित्व करने के बाद वे असम और आंध्रप्रदेश की तरफ से भी खेले। उन्होंने 30 प्रथम श्रेणी शतक लगाए और 8 रणजी ट्रॉफी खिताब हासिल किए।

फेब फोर ने रास्ता रोके रखा

मजूमदार जब टीम इंडिया में जगह पाने की कोशिश कर रहे थे तब फेब फोर (सचिन, द्रविड़, गांगुली और लक्ष्मण) अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छाए हुए थे। उस वक्त इन चारों के बगैर भारतीय टीम की कल्पना भी कोई नहीं कर सकता था। इसकी वजह से घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने के बावजूद मजूमदार राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना पाए। अमोल ने 2014 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया, वह भी टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किए बगैर।  Read more http://www.jagran.com/

Thursday, 26 December 2013

Ashes test: Melbourne will strike the beginning of Boxing day test 10959908



मेलबर्न। क्रिसमस मनाने के बाद एक बार फिर चिर प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड गुरुवार से एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट में आमने-सामने होंगे। मेलबर्न में होने वाले इस चौथे टेस्ट में यूं तो 3-0 से अजेय बढ़त बनाने वाली कंगारू टीम ही प्रबल दावेदार नजर आ रही है, लेकिन इंग्लैंड के पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा, लेकिन हां, वो बाकी बचे दो मुकाबले जीतकर कम से कम अपने फैंस को कुछ राहत जरूर देने की कोशिश करेंगे।

एक साल में दो एशेज सीरीज और स्थिति व नतीजे कुछ ही महीनों के अंदर पूरी तरह से उलट-पुलट हो गए। गर्मियों में जब कंगारू इंग्लैंड पहुंचे तो उनको इंग्लैंड ने बुरी तरह धो डाला और लगातार तीसरी बार एशेज अर्न अपने पास रखी और थकी हारी से दिखने वाली कंगारू टीम ने जब हॉट फेवरेट इंग्लिश टीम को सर्दियों में अपने घर में एशेज के लिए स्वागत किया तो इंग्लिश टीम की कंपकपी छूट गई। ऑस्ट्रेलिया ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अपने पुराने रुतबे व तेवर को फिर दिखाया और क्रिकेट विशेषज्ञों व आलोचनाओं की सारी गणित को गलत साबित करते हुए इंग्लिश टीम को शुरू के तीनों टेस्ट मैचों में रौंद डाला, और रौंदा भी गजब अंदाज में, जहां उनके बल्लेबाज भी चले और गेंदबाज भी, जो लय में नहीं था, वो भी लय में लौटा, और जो लय में था, वो और आक्रामक होता दिखा।

इंग्लैंड की टीम जब मेलबर्न में चौथा टेस्ट खेलने उतरेगी तब उसका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ यही होगा कि वो किसी तरह बाकी बचे दोनों मुकाबले जीत जाए ताकि देश वापसी में फैंस को मुंह दिखाया जा सके, वहीं दूसरी तरफ कंगारुओं की बदले की भावना अभी भी शांत नहीं हुई होगी क्योंकि लगातार तीन एशेज गंवाने के बाद लय में लौटना उनके लिए वरदान जैसा ही है। इंग्लैंड के सामने सबसे बड़ी मुश्किल होगी उसके दो अहम खिलाड़ियों का अचानक गायब हो जाना। एक तरफ जहां जॉनाथन ट्रॉट मानसिक तनाव के कारण स्वदेश लौट गए, तो दूसरी तरफ तीसरे टेस्ट के बाद मुख्य स्पिनर ग्रीम स्वान ने सबको हैरान-परेशान करते हुए अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।
जाहिर तौर पर मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया का टॉप ऑर्डर एक बार फिर इंग्लिश गेंदबाजों के निशाने पर होगा लेकिन जब इंग्लैंड के सबसे सफल गेंदबाज जेम्स एंडरसन ही अब तक फ्लॉप साबित होते दिख रहे हों, ऐसे में किसी और गेंदबाज से कप्तान कैसे ज्यादा उम्मीदें रखे। वहीं, कंगारू टीम में उनके मुख्य गेंदबाज मिचेल जॉनसन ही नहीं, रेयान हैरिस, शेन वॉटसन और पीटर सिडल जैसे गेंदबाज भी कहर ढा रहे हैं। इंग्लैंड को मेलबर्न में ना सिर्फ अपनी गेंदबाजी को व्यवस्थित करना होगा बल्कि अपने टॉप व मिडिल ऑर्डर को भी दुरुस्त करना होगा। कुल मिलाकर अब तक चारों खाने चित होने वाली इंग्लिश टीम को ये साबित करना होगा कि उनकी टीम पूरी तरह ढली नहीं है, जबकि कंगारू क्लीन स्वीप की तरफ एक और कदम बढ़ाने के लिए उतरेंगे।


Source : Cricket News

Monday, 2 December 2013

Karan creates history by taking 10 wickets in an Innings

Karan Thakur
नई दिल्ली। रेलवे के तेज गेंदबाज करण ठाकुर सीके नायुडू ट्रॉफी (बीसीसीआइ अंडर-25 टूर्नामेंट) मैच की एक पारी में सभी दस विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए हैं। करण ने बड़ौदा के खिलाफ शनिवार को यह कारनामा किया। करण एमआरएफ पेस अकादमी में ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा और डेनिस लिली का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर चुके हैं (फोटो)।
रेलवे अंडर-25 की तरफ से खेल रहे दिल्ली के 23 वर्षीय गेंदबाज करण ने 28.5 ओवर में पांच मेडन करके 77 रन दिए और दस विकेट लिए। उनके इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद उनकी टीम बल्लेबाजों के लचर प्रदर्शन केकारण दस रन से यह मैच हार गई।
करण नियमित रूप से एमआरएफ पेस अकादमी में ट्रेनिंग लेते हैं और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के महान गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा के साथ भी कुछ समय बिताया है। अपने इस रिकॉर्ड पर करण ने कहा कि मैं भाग्यशाली हूं कि अकादमी में दो अवसरों पर मुझे मैकग्रा सर से बात करने का मौका मिला। उन्होंने मुझे कुछ उपयोगी गुर सिखाए। मेरा मजबूत पक्ष आउटस्विंगर है। मुझे अपनी उपलब्धि पर गर्व है लेकिन यदि मेरे लिए यादगार रहे दिन में हमारी टीम जीत जाती तो मैं अधिक खुश होता।
करण से पहले भारतीय गेंदबाजों में अनिल कुंबले, प्रेमांग्सू चटर्जी और प्रदीप सुंदरम एक पारी में दस विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं। कुंबले ने 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में दस विकेट लिए थे, जबकि चटर्जी और सुंदरम ने रणजी ट्रॉफी मैचों में यह कारनामा किया था। 1955-56 बंगाल की ओर से खेलते हुए चटर्जी ने असम के खिलाफ दस विकेट लिए थे, जबकि सुंदरम ने 1985-86 में राजस्थान की ओर से विदर्भ के खिलाफ यह रिकॉर्ड बनाया था।

Pak T20 captain Hafeez says he is unaware of team selection

Muhammed Hafeez
कराची। पाकिस्तानी टी20 टीम के कप्तान मुहम्मद हाफिज ने ये खुलासा करके सबको हैरान कर दिया कि अफगानिस्तान व श्रीलंका के खिलाफ यूएई में होने वाले तीन टी20 मैचों के लिए जिस पाक टीम का ऐलान किया गया, उससे वो बेखबर हैं।
पाकिस्तानी टी20 टीम के कप्तान हफीज जब दक्षिण अफ्रीका से पाकिस्तान वापस लौटे तो एयरपोर्ट पर वो मीडिया को ये बताने से जरा भी नहीं हिचकिचाए कि जिस टी20 टीम का ऐलान किया गया है उसके बारे में ना तो उनसे राय ली गई और ना ही उन्हें सूचित किया गया। हफीज ने कहा, 'मुझे कुछ नहीं पता (टीम के चयन पर) क्योंकि मैं फ्लाइट में था और ना ही किसी ने मुझसे संपर्क कर मुझे यह बताने की कोशिश की। मुझे नहीं पता कि टीम में कौन-कौन है, अब जाकर देखूंगा कि टीम में किसको-किसको शामिल किया गया है।'
गौरतलब है कि पाकिस्तानी क्रिकेट चयनकर्ताओं ने जब पाक टीम का ऐलान किया तो उसमें शोएब मलिक और अब्दुल रज्जाक जैसे सीनियर खिलाड़ियों को बाहर रखा गया, जबकि उनकी जगह दो नए खिलाड़ियों, शरजील खान और हैरिस सोहेल को टीम में शामिल किया गया है। जाहिर है कि पाकिस्तानी चयन प्रक्रिया में कप्तान की भूमिका व कप्तान का चयन हमेशा चर्चा का विषय रहा है। पहले भी कई कप्तान इसको लेकर सवाल उठा चुके हैं

Friday, 29 November 2013

Sahara’s Subrata Roy blames troubles on comment about Sonia Gandhi

Sahara India Pariwar
'सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा उठाने का बदला ले रही है कांग्रेस'
कोलकाता [जासं]। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) कांग्रेस के कुछ मंत्रियों के इशारे पर सहारा समूह को फंसाने की कोशिश कर रहा है। सहारा समूह के सर्वेसर्वा सुब्रत राय ने यह आरोप लगाया है। सुब्रत राय ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लिए बिना कहा कि उनके विदेशी मूल का मुद्दा उठाने और उन्हें पीएम बनाने की मुखालफत करने की कीमत सहारा को चुकानी पड़ रही है।
सुब्रत राय ने कहा, 'सेबी हमारे लिए एक रेगुलेटर व बड़े भाई की भूमिका में नहीं है, जैसा दूसरी कंपनियों के मामले में है। इसकी वजह राजनीतिक ही है।' सराहा प्रमुख ने भाजपा शासित राज्यों- मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ का नाम लेकर वहां हो रहे विकास की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि मोदी से तो मिला हूं, लेकिन राहुल के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। सेबी के साथ विवाद से कंपनी की साख पर असर पड़ रहा है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारी कुल देनदारियों से संपत्तियों का मूल्य बहुत अधिक है। इसे लेकर चिंता की बात नहीं। अभी हमारे पास जमाकर्ताओं और बैंकों की कुल देनदारी 40 से 45 हजार करोड़ रुपये के बीच है। इसके मुकाबले हमारी भूमि व अन्य अचल संपत्तियों की कीमत 1.20 लाख करोड़ रुपये है।
सुब्रत राय सेबी की भूमिका से खास नाराज दिखे। उन्होंने कहा, 'आज के दौर में देश में कोई बड़ा उद्यमी नहीं उभर सकता। तीस साल पहले मैंने अपनी यात्रा शुरू की थी और एक उपलब्धि हासिल की। मगर आज के हालात में मैं भी कुछ नहीं कर सकता।' इस दौरान उन्होंने बंगाल में अपनी निवेश की योजनाओं की भी जानकारी दी। इनमें दक्षिण 24 परगना में 400 करोड़ रुपये की लागत से 500 बेड के अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज का निर्माण शामिल है।

Piyush weds Anubhuti

piyush chawla
अनुभूति के हुए पीयूष चावला, शादी में कई नामी क्रिकेटर शामिल
मुरादाबाद। शुक्रवार की रात आयोजित एक भव्य समारोह में क्रिकेटर पीयूष चावला अनुभूति के हो गए। दिल्ली रोड पर होटल ड्राइव इन 24 में आयोजित विवाह समारोह में रात पौने बारह बजे जैसे ही अनुभूति ने पीयूष के गले में जयमाल डाली पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। समारोह में भुवनेश्वर, इरफान पठान समेत कई नामी क्रिकेटर भी शामिल हुए। मंडलायुक्त समेत तमाम अधिकारियों व गणमान्य मान्य लोगों ने भी समारोह में शिरकत की।
दुल्हन बनी अनुभूति सिल्वर गोटे वाले रानी कलर के लहंगे सजी थीं तो दूल्हे राजा पीयूष ने बादामी कलर की शेरवानी पहन रखी थी। लग्न के मुताबिक शादी की रस्में रात सवा नौ बजे शुरू हुई। पीयूष आयोजन स्थल के द्वितीय तल पर तैयार हुए और पैदल नीचे आकर घोड़े पर सवार हुए। उसके बाद बैंडबाजे की धुन व ढोल थाप के साथ पीयूष की बारात आगे बढ़ी। आयोजन स्थल के एक गेट से निकलकर दूसरे गेट में प्रवेश कर गई। इस दौरान दोस्तों, परिजनों व रिश्तेदारों ने जमकर डांस किया। जश्न माहौल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 200 मीटर की दूरी तय करने में बरात को सवा दो घंटे लग गए। आतिशबाजी की चकाचौध से विवाह समारोह दमक उठा। उसके बाद सवा ग्यारह बजे गेट पर बारात का अनुभूति के परिजनों व रिश्तेदारों ने शानदार स्वागत किया। फिर दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ पीयूष जयमाल के स्टेज पर पहुंचे। उसके बाद अनुभूति अपनी सहेली व रिश्तेदारों के साथ जैसे ही स्टेज पर पहुंची, मंगलगीत गाए जाने लगे। फिर अनुभूति ने पीयूष के गले में जयमाल डाली उसके बाद पीयूष ने इसी रस्म को दोहरा दिया। पूरे पंडाल में पुष्प वर्षा होने लगी और कैमरों के फ्लैश चमकने लगे। मेहमानों की आवभगत के बाद फेरों की रस्म रात साढ़े बारह बजे शुरू हो गई। विवाह की रस्में पंडित शिव पूजन शास्त्री व अवधेश नारायण पांडे ने पूरी कराई।
दुल्हन बनीं अनुभूति मेरठ के सीएमओ अमीर सिंह की बेटी हैं, जबकि पीयूष के पिता प्रमोद चावला बिजली विभाग में कार्यरत हैं।
आयोजन में यूपी के टीम सलेक्टर एवं पूर्व क्रिकेटर ज्ञानेंद्र पांडे, एसएसपी आशुतोष कुमार, मुरादाबाद के पूर्व डीएम व एनआरएचएम के डायरेक्टर अमित घोष समेत तमाम अधिकारी, शिक्षाविद्, कारोबारी, चिकित्सक व गणमान्य लोग मौजूद थे। पीयूष के विदेशी मेहमानों ने भी आयोजन में शिरकत की।
शादी में जमकर नाचे रिश्तेदार व दोस्त
पीयूष की शादी में मां पूनम चावला, पिता प्रमोद चावला, भाई प्रतीक चावला समेत रिश्तेदारों व दोस्तों ने जमकर ठुमके लगाए। क्रिकेटर इरफान पठान व भुवनेश्वर पूरे समय बने रहे। वह शाम करीब छह बजे होटल ड्राइव इन 24 अपने निजी वाहनों से पहुंचे। शादी में सुरक्षा की दृष्टि से दिल्ली से बाउंसर आए थे, जो इरफान पठान व भुवनेश्वर के गिर्द-गिर्द घूमते रहे। इरफान पठान ने अपने कमरे से निकलकर बारात में पहुंचने की दो बार कोशिश की लेकिन खुद को भीड़ से घिरा देख वापस कमरे में लौट गए जबकि भुवनेश्वर जयमाल के दौरान पीयूष के पास पहुंचे और फोटो भी खिंचाए। पीयूष की मां पूनम चावला पिंक कलर की डेस में सजी थीं उन्होंने भी बेटे की शादी में ठुमके लगाए तो मरून कलर की शेरवानी पहने पीयूष के भाई प्रतीक चावला भी जमकर झूमे। पिता प्रमोद चावला सुनहरी कलर के सूट में कभी बारात तो कभी मेहमानों की आवभगत में नजर आए।
विदेशी दोस्तों ने भी उठाया शादी का लुफ्त
पीयूष की शादी में उनके विदेशी दोस्त भी पहुचे। बारात से लेकर जयमाल को उन्होंने करीब से देखा और कैमरे में कैद किया। जयमाल के वक्त विदेशी मेहमानों ने पीयूष के साथ फोटो भी खिचाएं। जयमाल के बाद पीयूष व अनुभूति ने दोस्तों के साथ डांस किया।

Wednesday, 27 November 2013

Ishant Sharma needs to stop focusing on his image: Fanie de Villiers

Ishant Sharma
क्लेटन मुर्जेलो (मिड-डे) मुंबई। कुछ लोगों का मानना है कि इशांत शर्मा भाग्यशाली हैं कि उनको दक्षिण अफ्रीका जाने वाली भारत की वनडे और टेस्ट टीम में शामिल किया गया। जबकि कुछ का कहना है कि तेज गेंदबाजों की मददगार विकेट पर भारत को उनके छह साल के अंतरराष्ट्रीय अनुभव की जरूरत थी। वास्तविकता यह है कि इशांत को वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए टीम में नहीं रखा गया था। इससे पहले कैरेबियाई टीम के साथ खेली गई दो टेस्ट की सीरीज में भी उनको बाहर बैठना पड़ा था।

राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने रोशनारा क्लब की मददगार विकेट पर रणजी ट्रॉफी मैच में हरियाणा के खिलाफ उनके नौ विकेट झटकने के प्रदर्शन को गंभीरता से लिया। इस मैच में दिल्ली ने 105 रन से जीत दर्ज की और इशांत का दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए टीम में आने का रास्ता खुल गया। टीम से निकाले जाने से पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन वनडे मैचों में दो विकेट के लिए 24 ओवर में 189 रन लुटाए थे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज में उन्होंने सात विकेट लिए थे।

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज फैनी डीविलियर्स इस बात से हैरान नहीं हैं कि आखिर क्यों इशांत विश्व रैंकिंग (टेस्ट में 31 और वनडे में 66) में ऊंचा स्थान हासिल नहीं कर सके। डीविलियर्स इसके लिए इशांत के व्यक्तित्व को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने 2010-11 में भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे में मिड-डे से कहा था, 'सबसे पहले उसे अपने बाल कटाने चाहिए। वह मुझे खिलाड़ी नहीं लगता है।'

बुधवार को वह और ज्यादा मुखर थे। उन्होंने कहा, 'मैंने ऐसे कई खिलाड़ियों को देखा है, जो अपने बाहरी कारकों की वजह से शीर्ष स्तर पर नहीं पहुंच सके। कांबली (विनोद) इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। अंगूठी, कान की बालियां, चेन वगैहरा। इन चीजों से उनका फोकस खत्म हो गया। छवि उनकी सबसे बड़ी समस्या थी। यह खेल बेहद समर्पण की मांग करता है। इशांत जैसी शख्सियत लोगों को कुछ सिखा नहीं सकतीं। ऐसे खिलाड़ी आमतौर पर अच्छे टीम मैन भी नहीं होते हैं। ऐसे खिलाड़ियों की वजह से टीम की छंवि खराब होती है। वह मेरे बच्चे के लिए भी अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। वह शायद अपना ही सबसे बड़ा दुश्मन है।'

डीविलियर्स चाहते हैं कि इशांत सामान्य रहकर अपनी प्रतिभा के साथ न्याय करें। उनके समर्थक और आलोचक यह कभी नहीं भूल पाएंगे कि उन्होंने 2007-08 के विवादित ऑस्ट्रेलियाई दौरे में रिकी पोंटिंग एंड कंपनी के खिलाफ कितनी शानदार गेंदबाजी की थी। उन्होंने कहा, 'इस समय आपकी छवि खेल से ज्यादा महत्वपूर्ण है। दुनिया के शीर्ष गेंदबाजों को देखिए, वे सामान्य लोग हैं। दुनिया के सर्वकालिक महान टेनिस खिलाड़ियों फेडरर, संप्रास को देखिए। इशांत ने 2010-11 के दक्षिण अफ्रीका दौरे में केपटाउन में तीसरे और अंतिम टेस्ट (2/77) में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। उनके पास अपने आलोचकों को गलत साबित करने के लिए इस बार बेहतर मौका है।


Source- Cricket News in Hindi

Wednesday, 20 November 2013

Team India gears up for Kochi ODI

India v west indies ODI

कोच्चि। टेस्ट सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप के बाद बुलंद हौसलों वाली भारतीय क्रिकेट टीम जब कोच्चि में वेस्टइंडीज के खिलाफ गुरुवार को वनडे सीरीज के पहले मुकाबले के लिए उतरेगी तो उसका लक्ष्य जीत से आगाज कर मजबूत स्थिति हासिल करना होगा। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के नेतृत्व में भारतीय टीम ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में असाधारण प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में वनडे सीरीज में भी टीम इंडिया अपने इसी विजयी अभियान को जारी रखना चाहेगी।

दूसरी ओर भ्रमणकारी वेस्टइंडीज के लिए टेस्ट सीरीज में मिली शर्मनाक हार का बदला लेने का भी यह अच्छा मौका होगा। कप्तान ड्वेन व्रावो पिछली हार के बाद आलोचनाओं में घिरी टीम को वापस पटरी पर लाने के लिए विशेष रणनीति के साथ मैदान पर उतरेंगे। टीम इंडिया इस वक्त आत्मविश्वास से भरपूर है और बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों ही विभाग में उसके पास सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी मौजूद हैं, जबकि कैरेबियाई टीम की सबसे बड़ी कमजोरी फिलहाल उसका बल्लेबाजी क्रम है, जिसने टेस्ट सीरीज में बेहद खराब प्रदर्शन किया था जिसके कारण टीम को दोनों ही मैचों में पारी की हार झेलनी पड़ी थी। टेस्ट सीरीज के दोनों मैचों में शतक लगाने वाले रोहित शर्मा, युवा बल्लेबाज विराट कोहली, सुरेश रैना, शिखर धवन, महेंद्र सिंह धौनी और ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के रूप में टीम इंडिया के पास दुनिया का बेहतरीन बल्लेबाजी क्रम है। पिछले मैचों में उनके असाधारण प्रदर्शन का लोहा भी दुनिया मान चुकी है। इसके अलावा ऑलराउंडर युवराज सिंह भी वनडे टीम का हिस्सा हैं और उनसे मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।
ऐसे में वेस्टइंडीज के गेंदबाजों टिनो बेस्ट, सचिन के विदाई टेस्ट में उनका विकेट लेने वाले नरसिंह देवनारायन, वीरासामी पैरमोल और रवि रामपॉल के लिए भारतीय बल्लेबाज न सिर्फ बड़ी चुनौती होंगे, बल्कि उन्हें मेजबान टीम के बल्लेबाजों को कम स्कोर पर पवेलियन भेजने के लिए विशेष रणनीति के साथ मैदान पर उतरना भी जरूरी होगा। टीम इंडिया के पास प्रज्ञान ओझा, मुहम्मद शमी, अमित मिश्रा, मोहित शर्मा, जयदेव उनादकट और आर. विनय कुमार के रूप में अच्छा गेंदबाजी क्रम है। इसके अलावा आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन भी टीम के अहम खिलाड़ी हैं।

कप्तान ड्वेन ब्रावो के अलावा ऑलराउंडर डैरेन सैमी, जॉनसन चा‌र्ल्स, क्रिस गेल, लेंडल सिमंस, कीरन पॉवेल, मर्लोन सैमुअल्स के रूप में टीम के पास मजबूत बल्लेबाजी क्रम है। कुछ बदलावों के साथ उतर रही वेस्टइंडीज की टीम में इस बार प्रदर्शन के लिहाज से भी कुछ बदलाव जरूर दिखाई देगा। साथ ही पिछले मैचों में फ्लॉप साबित हुए गेल से भी कुछ तूफानी प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।

टीमें : भारत- महेंद्र सिंह धौनी (कप्तान), शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली, युवराज सिंह, सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा, आर. अश्विन, भुवनेश्वर कुमार, मुहम्मद शमी, अंबाती रायुडू, अमित मिश्रा, जयदेव उनादकट, आर. विनय कुमार और मोहित शर्मा।

वेस्टइंडीज- ड्वेन ब्रावो (कप्तान), टिनो बेस्ट, डेरेन ब्रावो, जॉनसन, चा‌र्ल्स, नरसिंह देवनरायन, क्रिस गेल, जेसन होल्डर, सुनील नरेन, वीरासामी पैरमोल, रवि रामपॉल, कीरन पॉवेल, दिनेश रामदीन, मलोर्न सैमुअल्स और लेंडल सिमंस।

Mussoorie welcome's sachin and Their Family

Sachin tendulkar
जागरण प्रतिनिधि, मसूरी (देहरादून)। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने देवभूमि का रुख किया। सुकून के कुछ पल बिताने के लिए बुधवार को वह अपने पसंदीदा पर्यटक स्थल पहाड़ों की रानी मसूरी पहुंचे। इस दौरान मीडिया का जमावड़ा लगा तो सचिन ने दो टूक कहा, 'प्लीज, मुझे अकेला छोड़ दीजिए। मैं यहां सिर्फ छुट्टियां बिताने आया हूं। आज कोई सवाल जवाब नहीं।'

बताया जा रहा कि पत्नी अंजलि संग पहुंचे सचिन अगले पांच दिन तक मसूरी की वादियों में छुट्टियां बिताएंगे। यहां की हसीन वादियों से सचिन का विशेष लगाव है और क्रिकेट में व्यस्त रहने के बावजूद वह प्रतिवर्ष परिवार संग यहां आते रहे हैं। यह कयास पहले से लगाए जा रहे थे कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सचिन सीधे मसूरी पहुंचेंगे और हुआ भी ठीक ऐसा ही।

सचिन बुधवार सुबह देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। लगभग 10.50 बजे सात वाहनों के काफिले के साथ वह सड़क मार्ग से मसूरी के लिए रवाना हुए और टिहरी बाईपास होते हुए दोपहर 12.40 पर लंढौर कैंट स्थित अपने पारिवारिक मित्र संजय नारंग के होटल रॉकबी मनोर पहुंचे। 

इस बीच मीडियाकर्मियों का जमावड़ा भी लग गया। करीब तीन बजे सचिन पत्नी अंजलि और मित्र संजय नारंग के साथ पैदल ही बोथल बैंक बंगले के लिए निकले। इस दौरान मीडियाकर्मियों ने उनसे सवाल पूछे तो उन्होंने अकेला छोड़ देने का अनुरोध किया। हालांकि इससे पहले सचिन ने होटल की टैरेस से प्रशंसकों का हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया।

Prithviraj Shaw plays world record innings of 546 runs 10875349

Prithvi Shaw
मुंबई। मुंबई के 14 वर्षीय पृथ्वी शॉ ने बुधवार को प्रतिष्ठित हैरिस शील्ड ट्रॉफी में 546 रनों की पारी खेलते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। पृथ्वी की शानदार पारी से उनमें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की झलक दिखाई देती है, जिन्हें हैरिस शील्ड मैच से ही पहली बार लोकप्रियता मिली थी। सचिन ने नाबाद 326 रन बनाते हुए विनोद कांबली (349) के साथ 664 रन की विश्व रिकॉर्ड साझेदारी की थी। यह रिकॉर्ड कुछ समय पहले ही टूटा है। 

मुंबई के इस उभरते हुए बल्लेबाज और मुंबई अंडर-16 टीम के कप्तान पृथ्वी ने आजाद मैदान पर सेंट फ्रांसिस डि एसिसी बोरीवली के खिलाफ खेले गए मैच में रिज्वी स्प्रिंगफील्ड की ओर से खेलते हुए 330 गेंदों की अपनी पारी में 85 चौके और पांच छक्के मारे। इसके साथ ही पृथ्वी आधिकारिक इंटर स्कूल मैच में 500 से अधिक का स्कोर करने वाले पहले स्कूली क्रिकेटर भी बन गए हैं।

पृथ्वी ने अपने स्कूल के सीनियर साथी और पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर के भतीजे अरमान जाफर के 498 रन के स्कोर को पीछे छोड़ा, जो उन्होंने कुछ साल पहले ही बनाया था। सेंट फ्रांसिस को 92 रन पर ढेर करने के बाद पृथ्वी ने मंगलवार को 166 गेंदों में नाबाद 257 रन की पारी खेली थी। बुधवार को उन्होंने अपनी पारी में 289 रन और जोड़े। किसी पंजीकृत क्रिकेट टूर्नामेंट में इससे पहले किसी भारतीय का सर्वश्रेष्ठ स्कोर दादाभाई हावेवाला के नाम दर्ज था जिन्होंने मुंबई में 1933-34 सत्र में सेंट जेवियर कॉलेज के खिलाफ 515 रन बनाए थे। वहीं प्रतिस्पर्धी क्रिकेट की शुरुआत के बाद उपलब्ध सभी पंजीकृत स्कोरकार्ड की बात करें तो पृथ्वी का रिकॉर्ड तीसरा सबसे बड़ा स्कोर है। जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड एईजे कोलिंस के नाम है, उन्होंने 1899 में इंग्लैंड में खेले गए मैच में नाबाद 628 रन बनाए थे, जबकि दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर सीजे एडी के नाम है। उन्होंने 1901 में 566 रन बनाए थे। 

क्रिकेट जगत में पृथ्वी की चर्चा
अपार प्रतिभा के धनी पृथ्वी को लेकर पिछले कुछ समय से मुंबई क्रिकेट हल्कों में काफी चर्चा है। अपनी काबिलियत के दम पर क्रिकेट स्कॉलरशिप हासिल कर इंग्लैंड में ग्लूस्टरशायर अकादमी के साथ ट्रेनिंग और उसकी दूसरे दर्जे की टीम के लिए कुछ अभ्यास मैच खेल चुके पृथ्वी की प्रतिभा के कायल इंग्लैंड के पूर्व काउंटी क्रिकेटर और जेडब्ल्यू क्रिकेट अकादमी के स्थापक जूलियन वुड भी हैं।

कुछ महीने पहले ही वुड ने पृथ्वी के साथ अपनी पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा था कि अगले पांच सालों में वह दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बन सकता है। 

पृथ्वी के कोच राजू पाठक और पिता पंकज शॉ ने उनके लिए हर संभव प्रयास किया। चार साल की उम्र में मां को खोने वाले पृथ्वी को उसके पिता ने कम आमदनी के बावजूद हर सुविधा मुहैया कराई। पृथ्वी अगर ऐसे प्रदर्शन करते रहे तो प्रबल संभावना है कि जूनियर चयन समिति के चेयरमैन कोनोर विलियम्स उन्हें अगले साल अंडर-19 टीम में चुनने पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। 

'मुझे नहीं पता था कि मैं 490 रन पर बल्लेबाजी कर रहा हूं क्योंकि मैंने अपने साथियों से कहा था कि वह मुझे स्कोर नहीं बताएं क्योंकि मैं अपना नैसर्गिक खेल खेलना चाहता था। जब मैं 500 रन पर पहुंचा तो साथियों ने मुझे बताया और सभी मेरे लिए खुश हुए।'
- पृथ्वी शॉ

Sunday, 17 November 2013

Sachin is the 'greatest' of my era: Muralitharan

Muralitharan
नई दिल्ली। श्रीलंका के दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने भारतीय क्रिकेट स्टार सचिन तेंदुलकर को अपनी पीढ़ी का महानतम क्रिकेटर करार देते हुए कहा कि उनका विकेट हमेशा हमारे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने कहा कि वर्षो तक की गई अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण ने तेंदुलकर को लीजेंड बनाया। उन्होंने पूरे उत्साह, जोश और गरिमा के साथ क्रिकेट खेली। 800 टेस्ट विकेट और 500 से अधिक वनडे विकेट लेने वाले इस 41 वर्षीय ऑफ स्पिनर ने कहा कि औसत के मामले में भले ही सर डॉन ब्रेडमैन का जवाब नहीं लेकिन रनों और लंबे समय तक क्रिकेट में बने रहने के मामले में तेंदुलकर को अपने युग का महानतम क्रिकेटर माना जाएगा।

मुरलीधरन ने कहा कि सचिन मेरे युग का महानतम क्रिकेटर है। वह आधुनिक युग का महान क्रिकेटर है। उनका जुनून, समर्पण, प्रत्येक मैच से पहले कड़ी मेहनत और क्रिकेट के प्रति उनके प्यार को मैं सलाम करता हूं और इससे वह महानतम खिलाड़ी बने। उन्होंने कहा कि मैंने अन्य को नहीं देखा। मैंने ब्रेडमैन को बल्लेबाजी करते हुए नहीं देखा लेकिन यदि आप सचिन के आंकड़े, उन्होंने जितने अधिक रन बनाए, उनका लंबे समय तक क्रिकेट में बने रहना जो उन्हें मेरे समय का महानतम क्रिकेटर बनाते हैं। उनकी तरह कोई भी इतने लंबे समय तक नहीं खेल पाया। मुझे यह कहते हुए किसी तरह का संदेह नहीं कि वह वह महानतम हैं।
मुरलीधरन ने कहा कि खेल के प्रति उनका प्यार, उनका रवैया, प्रत्येक मैच से पहले कड़ा अभ्यास करना, मैच की तैयारी में घंटों पसीना बहाना, इससे ही महान खिलाड़ी बनते हें। सचिन अदभुत है और मैं 24 साल पहले जिस इंसान से मिला था वह आज भी वैसे ही हैं। मुरलीधरन का तेंदुलकर से पहली बार 1993 में वनडे सीरीज के दौरान आमना-सामना हुआ। उन्होंने कहा कि वह कई वजहों से तेंदुलकर से प्रेरित हैं। मुझे अपने खेल के प्रति अपने जुनून और समर्पण से प्रेरित किया। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। वह सच्चे भद्रजन की तरह खेले। उन्होंने बेहद सम्मानजनित तरीके से खुद को आगे बढ़ाया। वह हमेशा विनम्र और शांतचित व्यक्ति रहे। वह बेजोड़ थे।

कई का मानना है कि भारतीय बल्लेबाजी की नई सनसनी और उप कप्तान विराट कोहली सचिन के संभावित उत्तराधिकारी हैं लेकिन मुरलीधरन ने कहा कि तुलना का कोई मतलब नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि दो चीजें एक समान नहीं हो सकती हैं। विराट कोहली युवा प्रतिभाओं में शानदार हैं। मेरे लिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने कोहली के रूप में दूसरा सचिन ढूंढ़ लिया है। समय ही बताएगा। सचिन को महान बनने में 24 साल लगे और कोहली ने अभी शुरुआत की है। मुरलीधरन ने कहा कि यदि कोहली अपनी प्रतिभा को सही इस्तेमाल करते रहे। जैसा वह अभी खेल रहे हैं वैसे ही खेलते रहें। यदि वह अनुशासन और समर्पण दिखाते हैं तो फिर महानतम खिलाड़ियों में से एक बन सकते हैं लेकिन अभी सचिन महानतम हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे कोहली का रवैया और रनों की भूख पसंद है। आइपीएल में (आरसीबी की तरफ से) वह मेरा कप्तान थे। मैंने उनकी हमेशा जीत और बड़े स्कोर बनाने की भूख देखी है। वह प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं। सचिन निश्चित तौर पर सर्वकालिक महान खिलाड़ी हैं। सचिन अपने करियर में पहले ही सब कुछ हासिल कर चुका है और कोहली उसे हासिल करने की प्रक्रिया में है। मुरलीधरन ने कहा कि सचिन सभी तरह की परिस्थितियों और गेंदबाजी के सामने सर्वश्रेष्ठ थे और विरोधी टीमों को उनके लिए खास रणनीति बनानी पड़ती थी। उन्हें रोक पाना, आउट करना हमेशा मुश्किल रहा। उनका विकेट हमारे लिए हमेशा बेहद महत्वपूर्ण रहा। हमने उनके विकेट के लिए हमेशा खास रणनीति बनाई। मुरलीधरन ने कहा कि मैं उनकी खुशहाल जिंदगी की कामना करता हूं। उन्हें भविष्य के लिये शुभकामनाएं। मैं उन्हें मेंटर के रूप में युवा खिलाड़ियों की मदद करते हुए देखना चाहता हूं।

Sachin, Prof CNR Rao get Bharat Ratna

Sachin Tendulkar
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने हर बड़ा रिकार्ड अपने नाम दर्ज कराया। उनके बल्लेबाजी के कई रिकार्ड तो शायद भविष्य में टूटें भी, लेकिन मैदान से रिटायर होने के साथ ही जो रिकार्ड उनके नाम हो गया है, वह कभी नहीं टूटेगा। हिंदुस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न पाने वाले सचिन पहले खिलाड़ी बन गए हैं। सबसे कम उम्र में यह सर्वोच्च सम्मान हासिल करने का तमगा भी उनके नाम हो गया। अंतरिक्ष में भारत की ऊंची छलांग का ईंधन मुहैया कराने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी भारत रत्न से नवाजा गया है। 79 वर्षीय राव फिलहाल जवाहर लाल नेहरू सेंटर फार एडवांस एटॉमिक रिसर्च के मानद अध्यक्ष हैं और प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख हैं।

24 सालों से हिंदुस्तान के करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों के दिलों पर राज कर रहे तेंदुलकर की जिस समय क्रिकेट के मैदान से भावभीनी विदाई हो रही थी, उसी समय उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार दोपहर करीब 3:45 बजे तेंदुलकर और राव को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की। राजनीति, कला व सामाजिक हस्तियों को मिलने वाले देश के इस नागरिक सम्मान में खेल-खिलाड़ी क्षेत्र शामिल नहीं था। माकन की अगुआई में पिछले दिनों संप्रग सरकार ने इस नियम को बदला और खिलाड़ियों को भारत रत्न देने का प्रावधान शामिल किया गया। 

अभी संसदीय कार्य राच्यमंत्री राजीव शुक्ला ने दो-तीन दिन पहले ही संकेत दिए थे कि रिटायरमेंट के बाद सचिन को भारत रत्न दिया जा सकता है। हालांकि, देश में तमाम खेल जगत के लोगों का मानना था कि खेल में भारत रत्न के पहले हकदार हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद हैं। मगर फिलहाल जब पूरा देश सचिन के खुमार में डूबा है तो उसी समय संप्रग सरकार ने उनकी लोकप्रियता पर सवार होने का फैसला कर लिया। तेंदुलकर के विश्व क्रिकेट में 100 शतक होने पर पहले भी कांग्रेस सांसद व बीसीसीआइ पदाधिकारी राजीव शुक्ला की अगुआई में संसद में भारत रत्न देने की मांग की गई थी। सचिन को राच्यसभा के लिए नामित कर उस समय भी संप्रग सरकार ने खूब वाह-वाही लूटी थी।

सचिन के अलावा पिछले साल ही पद्मविभूषण से सम्मानित प्रख्यात रसायन वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी भारत रत्न से नवाजा गया है। अंतरिक्ष में भारत की ऊंची छलांग के इसरो कार्यक्रम में तो उनकी सेवाएं रही ही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के वैज्ञानिक सलाहकार रहे राव बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़े और कानपुर आइआइटी में अध्यापन भी किया। 

पीएमओ का नहीं उठा रहे थे फोन
रिटायरमेंट के बाद सचिन तेंदुलकर जब बेहद भावुक माहौल में अपने घर में थे तो वह किसी का फोन नहीं उठा रहे थे। उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय से सचिन को भारत रत्न के लिए चुने जाने की सूचना देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनका इंतजार कर रहे थे। सचिन के घर में किसी ने फोन नहीं उठाया तो पीएमओ ने वहां मौजूद केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला को फोन कर यह सूचना दी और सचिन से बात कराने को कहा। शुक्ला के सूचना देने पर सचिन ने पीएमओ का फोन उठाया और तब प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई दी। 

भारत रत्न
यह पुरस्कार हमारे देश का उच्चतम नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण सेवा के लिए तथा उच्चतम स्तर की लोक सेवा को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है। इस सम्मान के तहत 35 मिमी व्यास वाला स्वर्ण पदक दिया जाता है। पीपल के पत्ते के आकार वाले इस पदक के ऊपरी हिस्से में सूर्य और नीचे हिंदी भाषा में 'भारत रत्न' लिखा होता है। इसके पीछे की ओर शासकीय संकेत और आदर्श-वाक्य लिखे होते हैं। इसे सफेद फीते में डालकर गले में पहनाया जाता है। 13 जुलाई 1977 से 26 जनवरी 1980 के बीच यह पुरस्कार लंबित रहा।

इतिहास:
भारत रत्न पुरस्कार की परंपरा 1954 में शुरू हुई थी। सबसे पहला पुरस्कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन को दिया गया था। तब से अनेक विशिष्ट जनों को अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता पाने के लिए यह पुरस्कार प्रस्तुत किया गया है। इस पुरस्कार को पाने वाले गैर भारतीय भी हैं क्योंकि इसका कोई लिखित प्रावधान नहीं है कि भारत रत्न केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जाए। पूर्व में यह सम्मान भारतीय नागरिक बन चुकी एग्नेस गोंखा बोजाखियू यानी मदर टेरेसा और खान अब्दुल गफ्फार खां एवं नेल्सन मंडेला (1990) को मिल चुका है। यह भी अनिवार्य नहीं है कि भारत रत्न सम्मान हर वर्ष दिया जाए। पिछली बार यह सम्मान वर्ष 2009 में पंडित भीमसेन जोशी को दिया गया था।
प्रकार : नागरिक
श्रेणी : राष्ट्रीय
पहला पुरस्कार : 1954
कुल (अब तक): 43
खास बातें
- 43 में 11 शख्सियतों को मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया
- साल 2001 और 2009 के बीच पहली बार सात सालों के दौरान कोई भारत रत्न पुरस्कार नहीं दिया गया
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत दिया गया भारत रत्न सम्मान उनके परिवार वालों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। देश के इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से जुड़ा यह पहला मामला है, जब इसे अस्वीकार किया गया
- किसी साल विशेष में दिए जा सकने वाले भारत रत्न पुरस्कारों की कुल संख्या-3

Can't believe life between 22 yards has come to end: Sachin Tendulkar

Sachin Tendulkar
जागरण न्यूज नेटवर्क, मुंबई। सक्रिय क्रिकेट जीवन से औपचारिक विदाई से पहले ही वानखेड़े का माहौल भावुक हो चुका था। शनिवार को दर्शकों की आंखों में तैरती-झिलमिलाती नमी स्टेडियम की फिजाओं में महसूस हो रही थी। सचिन सचिन के चाहने वालों को ऐसे माहौल का आभास पहले ही हो गया था। कुछ दिग्गज क्रिकेटर एक दिन पहले ही कह चुके थे कि सचिन विदाई के मौके पर अपने आंसू रोक नहीं पाएंगे। ऐसा ही हुआ और कुछ इस तरह से कि सचिन हमेशा के लिए दिलों में बस गए। वह खुद तो रोए ही, औरों को भी रुला गए। 

अपने मंत्रमुग्ध करने वाले विदाई भाषण से वह अपना कद और ऊंचा कर गए और रही-सही कसर भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न प्रदान करने की घोषणा से पूरी कर दी। वह इतनी कम उम्र (40 वर्ष) में और साथ ही खिलाड़ी के तौर पर यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले पहले शख्स बनेंगे।
सचिन सचमुच भारत रत्न हैं। उन्होंने भले ही सक्रिय क्रिकेटर के तौर पर संन्यास ले लिया हो लेकिन कोई भी उनके मुंह से संन्यास और विदाई जैसे शब्द सुनना नहीं चाहता। उनके बिना क्रिकेट की कल्पना करना भी मुश्किल है। वह क्रिकेट से दूर जा नहीं सकते और प्रशंसक उन्हें ऐसा करने भी नहीं देंगे। उन्होंने क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है और आने वाली क्रिकेट की पीढि़यों को भी उनसे बहुत उम्मीदें हैं। यह उम्मीदें सचिन की औपचारिक विदाई के समय वानखेड़े स्टेडियम में दिखाई भी दीं। वेस्टइंडीज टीम पर फतह हासिल कर सचिन जब टीम के साथ मैदान से बाहर निकले तो न तो अपने आंसू रोक सके और न ही उन्हें छिपा सके। वह हैट काम नहीं आई जो शायद उन्होंने अपनी आंखों के भावों को छिपाने के लिए पहन रखी थी।

पुरस्कार वितरण समारोह के लिए सचिन टीम और परिवार के साथ मैदान पर आए। रवि शास्त्री ने पुरस्कार वितरण की तमाम औपचारिकताएं पूरी कीं। ये जरूरी थीं, लेकिन सभी का ध्यान सचिन, उनके साथ मौजूद पत्नी अंजलि, बच्चों सारा और अर्जुन पर था। सारे अवा‌र्ड्स बंट जाने के बाद सचिन की बारी आई तो रवि शास्त्री ने उनसे कुछ पूछने के बजाय माइक ही उनके हाथ में थमा दिया। बहुत कम बोलने वाले सचिन पहली बार खुल कर बोले और ऐसा बोले कि अपने आंसुओं को थामने की कोशिश कर रहे लोग नाकाम हो गए।

अपने विदाई भाषण के जरिये उन्होंने साबित किया कि धन्यवाद ज्ञापित करने में भी उनका कोई सानी नहीं।
सचिन बोलते समय रोना नहीं चाह रहे थे इसलिए बार-बार पानी पिए जा रहे थे। उन्होंने बारी-बारी से सब को याद किया और कोई छूट न जाए इसलिए एक लिस्ट भी लेकर आए थे। जब उन्होंने अपने परिवार के बारे में बोलना शुरू किया तो बच्चों के साथ खड़ीं अंजलि अब रोईं कि तब रोईं वाली हालत में आ गईं।

जब सचिन ने उनका जिक्र करना शुरू किया तो तमाम जतन के बावजूद वह रो ही पड़ीं। सचिन ने आखिर में कहा कि जब तक मैं जिंदा रहूंगा तब तक सचिन-सचिन मेरे कानों में गूंजता रहेगा। उनका इतना कहना था कि पूरा स्टेडियम सचिन-सचिन से गूंज उठा। जब उन्होंने कहा कि शायद उनका भाषण लंबा हो गया है तो नहीं-नहीं की आवाजें आईं। लोगों के लिए यह कल्पना करना कठिन था कि सचिन अब खेलते हुए नहीं दिखेंगे, लेकिन कहीं न कहीं सबके दिलों में भरोसा था कि जिन सचिन ने खुद कहा हो कि क्रिकेट उनके लिए अॅाक्सीजन की तरह है वह उससे दूर नहीं जा सकते और इसका संकेत उन्होंने टीम इंडिया की ओर मुखातिब होते हुए यह कहकर दिया भी कि हमेशा याद रखें कि वे देश की सेवा कर रहे हैं। 

विदाई भाषण के बाद सचिन पूरी टीम के साथ विक्ट्री लैप के लिए उतरे। सबसे पहले विराट कोहली और महेंद्र सिंह धौनी ने उन्हें कंधे में उठाया। इसके बाद शिखर धवन और मुरली विजय के कंधों पर सवार होते हुए सचिन ने वानखेड़े का आखिरी चक्कर पूरा किया। सचिन ने एक बार फिर तब भावनाओं का ज्वार पैदा किया जब वह मैदान से विदा होने के पहले पिच को प्रणाम करने आए। उनकी आंखों से फिर से गंगा-जमुना बह निकलीं।
यकीन नहीं हो रहा कि पिछले 24 साल से 22 गज के दरम्यान की मेरी जिंदगी खत्म हो गई है। सभी को धन्यवाद, जिन्होंने मुझे सहयोग किया। मैं पहली बार सूची लेकर आया हूं, जिन्हें मुझे धन्यवाद देना है, क्योंकि कई बार मैं भूल जाता हूं। सबसे पहले मेरे पिता (रमेश तेंदुलकर) जिनका 1999 में निधन हो गया। .. खेल चुके सभी सीनियर क्रिकेटरों को धन्यवाद। .. मुझे पूरा यकीन है कि आप इसी तरह देश की सेवा करते रहेंगे।

Sachin Retires Out of Ground for last Time with Tears

Sachin Tendulkar
मुंबई। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर यूं तो काफी मजबूत इंसान माने जाते रहे हैं, एक ऐसा खिलाड़ी जो बड़े से बड़े हालातों में नहीं टूटा.. चोट, हार, निजी समस्याएं, खराब दौर.कुछ इस इंसान को नहीं तोड़ पाया लेकिन जब वानखेड़े में टीम इंडिया की जीत के बाद सचिन आज पवेलियन की ओर लौटे तो पूरा मैदान बस सचिन-सचिन चिल्ला रहा था और 'क्रिकेट के भगवान' के आंसूं छलक पड़े।

अपने 200वें टेस्ट के साथ सचिन तेंदुलकर ने जब मैदान से विदाई ली तब वह बेशक बल्लेबाजी नहीं कर रहे थे लेकिन उनके हाथों में धौनी ने जीत का विकेट थमाया, पिच पर जाकर उन्होंने पूरे स्टेडियम के सामने 24 साल के समर्थन के लिए सिर झुकाकर धन्यवाद दिया और फिर सभी खिलाड़ियों ने बाउंड्री तक उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह सब कुछ चल रहा था, सचिन पवेलियन की ओर लौट रहे थे और उनकी हैट के नीचे उनका लाल चेहरा था, आंसुओं को वो छुपा रहे थे लेकिन फिर भी उनकी भावनाएं सामने आ गईं। सभी खिलाड़ी भी भावुक थे, उनकी पत्नी, बेटा, बेटी सब भावुक थे और तमाम आंसुओं के बीच मास्टर आखिरी बार पवेलियन लौट गए।

Friday, 15 November 2013

Sachin Tendulkar 24th Career Anniversary

Sachin Tendulkar
(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। 'यह सच है कि एक लकड़ी के टुकड़े के दम पर कोई भगवान नहीं बनता, लेकिन यह भी कोई आम इंसान नहीं है..' यह लाइनें आजकल एक टीवी एड का हिस्सा हैं, इन्हें सुनकर कुछ नहीं तो यह अहसास जरूर हो जाता है कि एक पीढ़ी ने एक खिलाड़ी के साथ कैसे अपनी जिंदगी के कुछ रोचक पल जी लिए, फिर चाहे वो स्टेडियम में बैठकर हों, या फिर टीवी के सामने। वो आज का ही दिन था (15 नवंबर, 1989) जब सचिन ने कराची में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट के जरिए अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का आगाज किया था, शायद ही किसी ने सोचा हो कि इसी दिन के करीब उनकी आखिरी विदाई भी होगी। जो भी हो, मैदान की 22 गज की सूखी पंट्टी पर 24 साल का यह विशाल करियर, खेल जगत के हर खिलाड़ी, हर एथलीट के लिए एक मिसाल बना।

15 नवंबर 1989 को वो बुधवार का दिन था जब एक 16 साल का लड़का मैदान पर दिग्गज पाकिस्तान टीम के खिलाफ अपने करियर का आगाज करने उतरा था। उस मैच में पाकिस्तान की तरफ से भी दो खिलाड़ियों का आगाज हुआ, वकार यूनिस और इंजमाम-उल-हक, यह दोनों भी दिग्गज क्रिकेटर बने, बस फर्क इतना रहा कि यह दोनों पाक खिलाड़ी, आए, खेले, गए, कुछ के बाल सफेद हुए तो कुछ कोच से लेकर कमेंटेटर तक बन गए, लेकिन 'क्रिकेट का भगवान' 22 गज की पिच पर अटल रहा..24 साल तक।
सचिन तेंदुलकर ने अपने पूरे करियर में तकरीबन 600 खिलाड़ियों के साथ व उनके विरुद्ध खेला। कपिल की पीढ़ी से लेकर अजहरुद्दीन तक और गांगुली के दौर से लेकर धौनी के स्वर्णिम दौर तक इस खिलाड़ी ने हर उस युग को देखा जिसकी आस कोई भी खिलाड़ी रखता है। उतार-चढ़ाव भरे अपने करियर में तेंदुलकर कई बार लड़खड़ाए, चोटिल हुए, आउट ऑफ फॉर्म हुए लेकिन फिर भी खेल के प्रति उनका समर्पण व 24 साल का अविवादित करियर उनकी एक अलग छाप छोड़ता चला गया। जिंबॉब्वे के पूर्व मशहूर खिलाड़ी व इंग्लैंड टीम के मौजूदा कोच एंडी फ्लावर ने अपने एक बयान में सचिन की हस्ती को बखूबी बयान किया था, एंडी फ्लावर ने कहा था कि, 'दुनिया में दो तरह के क्रिकेटर हैं, एक सचिन..और दूसरा बाकी सब।' एक नजर डालते हैं सचिन के अद्भुत करियर के कुछ खास आंकड़ों पर।
(15 नवंबर 1989-15 नवंबर 2013):
वनडे क्रिकेट:
मैच- 463
रन- 18426
औसत- 44.83
शतक- 49
अर्धशतक- 96
बेस्ट- नाबाद 200
------------
टेस्ट क्रिकेट:
मैच- 200
रन- 15921
औसत- 53.71
शतक- 51
अर्धशतक- 67
बेस्ट- नाबाद 248
--------------
अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट:
मैच- 1
रन- 10
-------------
प्रथम श्रेणी क्रिकेट:
मैच- 309
रन- 25322
औसत- 57.81
शतक- 81
अर्धशतक- 115
बेस्ट- नाबाद 248
--------------
ट्वंटी-ट्वंटी क्रिकेट:
मैच- 96
रन- 2797
औसत- 32.90
शतक- 1
अर्धशतक- 16
बेस्ट- नाबाद 100
--------------

Sachin Tendulkar misses a ton, Pujara and Rohit slams Tons

Sachin Tendulkar
मुंबई। वानखेड़े स्टेडियम पर अपना आखिरी व 200वां टेस्ट खेल रहे सचिन तेंदुलकर की पारी 74 रनों से आगे नहीं जा सकी। जब पूरा देश एक आखिरी शतक की आस लगाए बैठा था तब नरसिंह देवनारायण ने एक बेहतरीन गेंद पर सचिन को स्लिप पर कप्तान डेरेन सैमी के हाथों कैच आउट करा दिया लेकिन उनके योगदान के बाद चेतेश्वर पुजारा (113) व रोहित शर्मा (नाबाद 111) ने शतक जड़ते हुए वेस्टइंडीज को पूरी तरह से बैकफुट पर ढकेल दिया। भारत ने 313 रनों की बढ़त हासिल की और दिन के अंत तक दूसरी पारी में 43 के स्कोर पर तीन कैरेबियाई बल्लेबाजों को भी पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। अब भारत सचिन की विदाई सीरीज में जीत से 7 विकेट दूर है, जबकि वेस्टइंडीज अभी भी भारत से 270 रन पीछे है।

दूसरे दिन की शुरुआत पूरी तरह से सचिनमय रही। 38 के निजी स्कोर पर पहले दिन नाबाद रहने वाले सचिन ने दूसरे दिन की सुबह अपना पचासा पूरा करके फैंस को झूमने का मौका दिया। उन्होंने 91 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया और इस दौरान 9 चौके लगाए। यह सचिन के टेस्ट करियर का 68वां अर्धशतक रहा, हालांकि वह अपनी पारी को 74 रन से आगे नहीं ले जा सके। सचिन ने 118 गेंदें खेलीं और इस दौरान 12 चौके लगाए।

इससे पहले, पहले दिन दूसरे सत्र में ही वेस्टइंडीज की पारी समेटने के बाद भारतीय टीम ने सधी हुई शुरुआत की थी और पहले विकेट की साझेदारी में शिखर धवन (33) और मुरली विजय (43) ने 77 रन बनाए। धवन को शिलिंगफोर्ड ने चंद्रपॉल के हाथों आउट कराया। धवन ने 28 गेंदों का सामना करते हुए सात चौके लगाए। धवन के बाद विजय भी उसी ओवर में डेरेन सैमी को कैच थमा बैठे। विजय ने 55 गेंदों में आठ चौके लगाए।
दूसरे दिन सचिन की 74 व विराट कोहली के 57 रनों की पारी के बाद चेतेश्वर पुजारा ने अपने करियर का पांचवां टेस्ट शतक लगाया, वो 113 की शानदार पारी के बाद शिलिंगफोर्ड का शिकार बने, जबकि धौनी महज 4 रन बनाकर बेस्ट की गेंद पर स्लिप में कैच हो गए। इसके बाद रविचंद्रन अश्विन (30) ग्रेब्रियाल का शिकार बने, फिर भुवनेश्वर कुमार (4) के रूप में 8वां झटका लगा और ओझा (0) के रूप में नौवां झटका लगा, लेकिन अंत होते-होते रोहित शर्मा ने भी कमाल दिखा दिया। पहले टेस्ट में अपने टेस्ट करियर का आगाज शतक के साथ करने वाले रोहित ने दूसरे टेस्ट में भी जानदार शतक जड़ डाला। उन्होंने नाबाद 111 रनों की पारी खेली। रोहित का यह लगातार दूसरा शतक रहा। अजहरुद्दीन और गांगुली के बाद वो लगातार दो टेस्ट शतक लगाने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। जिसके दम पर मुंबई टेस्ट में भारत 313 रनों की बड़ी बढ़त हासिल करने में सफल रहा। 

दूसरी पारी में जवाब में उतरे कैरेबियाई टीम के बल्लेबाज शुरू से ही लड़खड़ाते दिखे और आते ही विकेटों की झड़ी लगना शुरू हो गई। पहले 15 रन के कुल स्कोर पर अश्विन ने पॉवेल (9) को आउट किया। इसके बाद नाइटवॉचमैन की भूमिका निभाने पिच पर उतरे टीनो बेस्ट (9) को ओझा ने अपना शिकार बनाया और एलबीडब्ल्यू करते हुए पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। वहीं, दिन खत्म होते-होते कैरेबियाई टीम के इन फॉर्म बल्लेबाज डेरेन ब्रावो (11) भी अश्विन की गेंद पर विजय के हाथों कैच होकर पवेलियन लौट गए और वेस्टइंडीज को तीसरा झटका लगा। अब भारत को जीत के लिए महज 7 विकेटों की दरकार है।

इससे पहले, पहले दिन, टॉस जीतकर क्षेत्ररक्षण चुनने के अपने निर्णय को कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने सही साबित करते हुए प्रज्ञान ओझा और रविचंद्रन अश्रि्वन ने वेस्टइंडीज की पहली पारी सस्ते में समेट दी। वेस्टइंडीज के लिए कीरेन पॉवेल (48) ने सर्वाधिक रन बनाए, जबकि अपना 150वां टेस्ट मैच खेल रहे शिवनारायण चंद्रपॉल 25 रन पर आउट हुए। वेस्टइंडीज के लिए शुरुआत में सब ठीक लग रहा था क्योंकि पॉवेल और क्रिस गेल लय में दिख रहे थे। लेकिन समी ने कोलकाता के अपने शानदार सफर को जारी रखते हुए 25 के कुल योग पर गेल को अपने जाल में फंसा लिया। गेल 11 रन के निजी योग पर स्लिप में रोहित शर्मा के हाथों लपके गए। वेस्टइंडीज के लिए यह बड़ा झटका था, लेकिन डेरेन ब्रावो (29) और पॉवेल ने दूसरे विकेट के लिए 61 रनों की साझेदारी करते हुए इसकी भरपाई करने की कोशिश की। दोनों काफी अच्छा खेल रहे थे, लेकिन अश्रि्वन की फिरकी पर ब्रावो बल्ला लगा बैठे और धौनी ने उन्हें लपकने में कोई कोताही नहीं बरती। ब्रावो ने 63 गेंदों पर पांच चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट 86 के कुल योग पर गिरा।

लंच तक दो विकेट गंवाने वाले वेस्टइंडीज ने पहले दिन के दूसरे सत्र में आठ विकेट गंवा दिए। पॉवेल ने 80 गेंदों में चार चौके और एक छक्का लगाया। चंद्रपॉल और सैमुअल्स के बीच दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी हुई। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 43 रन जोड़े। सैमुअल्स के जाने के बाद तो जैसे वेस्टइंडीज की पारी ताश के पत्तों का महल साबित हुई और आखिरी छह बल्लेबाज मिलकर 42 रन और जोड़ सके। वेस्टइंडीज के आखिरी चार बल्लेबाजों में तो तीन बिना खाता खोले लौट गए। भुवनेश्वर कुमार और मुहम्मद शमी को एक-एक विकेट हासिल हुए। दो मैचों की सीरीज में भारत 1-0 से आगे है।

Sachin stands in the line of Brad Man and Brian Lara

Sachin Tendulkar
अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली जिंदगी ऐसी बना दिलशाद तू रहे न रहे, दुनिया को याद आए तू यह लाइनें क्रिकेट के गुरु सचिन तेंदुलकर पर खूब फबती हैं। वह जब गुरुवार को आखिरी बार दर्शकों के सामने अपनी कला का नायाब प्रदर्शन करने उतरे तो उनके ऊपर सर डॉन ब्रेडमैन, गैरी सोबर्स, ब्रायन लारा, राहुल द्रविड़, सनत जयसूर्या और रिकी पोंटिंग जैसे दिग्गजों को पछाड़ने व 120 करोड़ भारतीयों की आशाओं को पूरा करने का आखिरी मौका था। 

क्रिकेट के भगवान ने शुक्रवार को अर्धशतक ठोंककर दर्शकों को तो मंत्रमुग्ध किया लेकिन वह आखिरी मैच में शतक नहीं लगा पाने वाले दिग्गजों की कतार को नहीं तोड़ पाए। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में 74 रन बनाकर आउट होने वाले सचिन की यह अंतिम पारी साबित हो सकती है क्योंकि उम्मीद है कि दूसरी पारी में उनकी बल्लेबाजी नहीं आएगी। सचिन के आउट होने के बाद कमेंट्री कर रहे आमिर खान ने नवजोत सिंह सिद्धू से कहा कि भारत को यहीं पारी घोषित कर देनी चाहिए और दूसरी पारी में फिर से बल्लेबाजी करनी चाहिए जिससे तेंदुलकर को शतक बनाने का एक और मौका मिल सके। 

सचिन अपने आखिरी मैच में शतक भले ही न लगा सके हों लेकिन उन्होंने जिस तरह बल्लेबाजी की वह बताता है कि उनमें अब भी बहुत क्रिकेट बाकी है। अगर दिग्गजों की बात करें तो एडम गिलक्रिस्ट, ब्रायन लारा, ब्रेडमैन, सोबर्स, लारा, द्रविड़, जयसूर्या और पोंटिंग अपने आखिरी मैच में शतक नहीं लगा पाए हैं। सचिन ने तो आखिरी मैच में अर्धशतक लगाया लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि कुछ अपवादों को छोड़कर दुनिया के अधिकतर स्टार क्रिकेटर अपने आखिरी मैच में चमकदार प्रदर्शन करने में नाकाम रहे।
कई सालों तक सचिन के बराबर खड़े किए गए लारा ने कराची में 2006 में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था जिसमें उन्होंने शून्य और 49 रन बनाए। उन्होंने 21 अप्रैल 2007 को इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप मैच खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा। इस मैच में लारा 18 रन बनाकर रन आउट हो गए थे। अपने करियर में रनों का अंबार लगाने वाले ब्रेडमैन आखिरी टेस्ट पारी में शून्य पर आउट हुए। यदि वह इस मैच में चार रन बना लेते तो उनका औसत 100 पर पहुंच जाता लेकिन एरिक होलीज ने उनकी गिल्लियां उड़ा दीं। 

ब्रेडमैन के बाद क्रिकेट इतिहास में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले सोबर्स भी अपने आखिरी टेस्ट मैच की पहली पारी में खाता नहीं खोल पाए जबकि दूसरी पारी में उन्होंने 20 रन बनाए। दुनिया के एक अन्य दिग्गज ऑलराउंडर इयान बॉथम अपने आखिरी टेस्ट मैच में दो और छह रन ही बना पाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 199 शतक ठोकने वाले जैक हॉब्स अपने आखिरी टेस्ट मैच में अर्धशतक भी नहीं जमा पाए थे जबकि ज्योफ्री बायकॉट ने 18 और छह रन की दो पारियां खेली थी। कोलिन काउड्रे, जहीर अब्बास, जावेद मियादाद, डेविड गावर, एलन बॉर्डर, मार्क टेलर, गॉर्डन ग्रीनिज, मार्क वॉ, ग्राहम गूच, इंजमाम उल हक, रिकी पोंटिंग, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, मैथ्यू हेडेन और एंड्रयू स्ट्रॉस भी अपने आखिरी टेस्ट मैच में सस्ते में आउट हो गए थे। इयान चैपल, क्लाइव लॉयड, विव रिचर्डस, जयसूर्या और स्टीफन फ्लेमिंग अपने विदाई मैच में अर्धशतक लगाने में सफल रहे लेकिन शतक उनसे भी नहीं बना। 

भारत के महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी अपने विदाई मैच में पाकिस्तान के खिलाफ 96 रन की बेहतरीन पारी खेली थी। कुछ दिग्गजों का कैरियर शतक के साथ खत्म हुआ। 1984 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना आखिरी मैच खेलने उतरे ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल 182 रन बनाकर मैन ऑफ द मैच बने। श्रीलंका के अरविंद डिसिल्वा ने बांग्लादेश के खिलाफ 2002 में कोलंबो में 206 रन बनाकर क्रिकेट को अलविदा कहा। डिसिल्वा के अलावा जिन अन्य खिलाड़ियों ने अपने विदाई टेस्ट मैच में दोहरा शतक जड़ा उनमें ऑस्ट्रेलिया के बिल पोंसफोर्ड और वेस्टइंडीज के सेमोर नुर्स शामिल हैं। पोंसफोर्ड ने 266 और नुर्स ने 258 रन की बड़ी पारियां खेलकर क्रिकेट से संन्यास लिया था। इंग्लैंड के नासिर हुसैन ने 2004 में न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉर्डस में चौथी पारी में नाबाद 103 रन बनाकर अपनी टीम को जीत दिलाई और क्रिकेट को अलविदा कहा।

Sachin Last Time on Ground, India 7 Wickets Away from Victory

Sachin Tendulkar
मुंबई। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम पर आज मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मुमकिन है कि आखिरी बार मैदान पर उतरेंगे। समाचार लिखे जाने तक कैरेबियाई टीम भारत से अब भी 225 रन दूर है और भारत मुंबई टेस्ट में जीत से महज 4 विकेट दूर है, ऐसे में आसार यही हैं कि यह टेस्ट आज ही समाप्त हो जाएगा और 'क्रिकेट के भगवान' को फैंस आखिरी बार मैदान पर देख सकेंगे। 

दूसरी पारी में जवाब में उतरे कैरेबियाई टीम के बल्लेबाज दूसरे दिन के अंत में शुरू से ही लड़खड़ाते दिखे और आते ही विकेटों की झड़ी लगना शुरू हो गई। पहले 15 रन के कुल स्कोर पर अश्रि्वन ने पॉवेल (9) को आउट किया। इसके बाद नाइटवॉचमैन की भूमिका निभाने पिच पर उतरे टीनो बेस्ट (9) को ओझा ने अपना शिकार बनाया और एलबीडब्ल्यू करते हुए पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। वहीं, दिन खत्म होते-होते कैरेबियाई टीम के इन फॉर्म बल्लेबाज डेरेन ब्रावो (11) भी अश्रि्वन की गेंद पर विजय के हाथों कैच होकर पवेलियन लौट गए और वेस्टइंडीज को तीसरा झटका लगा। इसके बाद आज मैच के तीसरे दिन सुबह-सुबह ओझा ने मार्लन सैमुअल्स (11) को धौनी के हाथों स्टंप करा दिया व इसके बाद ओझा ने ही धौनी के हाथों क्रिस गेल (35) को भी कैच कराते हुए वेस्टइंडीज को पांचवां झटका दे दिया। ओझा का कहर यहीं नहीं थमा, उन्होंने इस पारी में अपना चौथा विकेट झटकते हुए नरसिंह देवनारायण (0) के रूप में वेस्टइंडीज को छठा झटका भी दे दिया।

इससे पहले दूसरे दिन की शुरुआत पूरी तरह से सचिनमय रही थी। 38 के निजी स्कोर पर पहले दिन नाबाद रहने वाले सचिन ने दूसरे दिन की सुबह अपना पचासा पूरा करके फैंस को झूमने का मौका दिया। उन्होंने 91 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया और इस दौरान 9 चौके लगाए। यह सचिन के टेस्ट करियर का 68वां अर्धशतक रहा, हालांकि वह अपनी पारी को 74 रन से आगे नहीं ले जा सके। सचिन ने 118 गेंदें खेलीं और इस दौरान 12 चौके लगाए। 

इससे पहले, पहले दिन दूसरे सत्र में ही वेस्टइंडीज की पारी समेटने के बाद भारतीय टीम ने सधी हुई शुरुआत की थी और पहले विकेट की साझेदारी में शिखर धवन (33) और मुरली विजय (43) ने 77 रन बनाए। धवन को शिलिंगफोर्ड ने चंद्रपॉल के हाथों आउट कराया। धवन ने 28 गेंदों का सामना करते हुए सात चौके लगाए। धवन के बाद विजय भी उसी ओवर में डेरेन सैमी को कैच थमा बैठे। विजय ने 55 गेंदों में आठ चौके लगाए।

दूसरे दिन सचिन की 74 व विराट कोहली के 57 रनों की पारी के बाद चेतेश्वर पुजारा ने अपने करियर का पांचवां टेस्ट शतक लगाया, वो 113 की शानदार पारी के बाद शिलिंगफोर्ड का शिकार बने, जबकि धौनी महज 4 रन बनाकर बेस्ट की गेंद पर स्लिप में कैच हो गए। इसके बाद रविचंद्रन अश्रि्वन (30) ग्रेब्रियाल का शिकार बने, फिर भुवनेश्वर कुमार (4) के रूप में 8वां झटका लगा और ओझा (0) के रूप में नौवां झटका लगा, लेकिन अंत होते-होते रोहित शर्मा ने भी कमाल दिखा दिया। पहले टेस्ट में अपने टेस्ट करियर का आगाज शतक के साथ करने वाले रोहित ने दूसरे टेस्ट में भी जानदार शतक जड़ डाला। उन्होंने नाबाद 111 रनों की पारी खेली। रोहित का यह लगातार दूसरा शतक रहा। अजहरुद्दीन और गांगुली के बाद वो लगातार दो टेस्ट शतक लगाने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। जिसके दम पर मुंबई टेस्ट में भारत 313 रनों की बड़ी बढ़त हासिल करने में सफल रहा।

Thursday, 14 November 2013

20 years back suhas saw sachin play his first at wankhede, now can only Hear

Sachin Tendulkar
मुंबई। 20 साल पहले ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व स्कोर कीपर थाणे के सुहास मराठे ने जब वानखेड़े स्टेडियम में कदम रखा था, तब सचिन इस मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच खेलने उतरे थे (19-23 फरवरी,1993)। इंग्लैंड के खिलाफ हुए उस मैच को सुहास ने देखा था और वो आज तक उसे नहीं भूल पाएंगे, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि आज जब सचिन वानखेड़े पर अपने जीवन का आखिरी टेस्ट खेलने उतरे हैं तब सुहास उसे देख नहीं सकते, बस सुन सकते हैं, क्योंकि अब उनकी नजर नहीं रही।

सुहास मराठे एक क्रिकेट स्टैटिस्टिशियन हैं। उनकी दाईं आंख गंभीर रूप के ग्लूकोमा का शिकार हुई जबकि उन्हें नहीं पता चला कि कब देखते-देखते उनकी बाईं आंख ने भी रोशनी गंवा दी। उन्हें आज गर्व है कि उन्होंने सचिन के उनके घरेलू मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट की स्कोरिंग की थी हालांकि उतना ही दुख भी कि आज वह उसी मैदान पर उनके आखिरी टेस्ट को देख नहीं पा रहे, बस कमेंट्री सुन सकते हैं। सुहास कहते हैं, 'हां, मुझे अफसोस है। मैंने उन्हें (सचिन) कितनी बेहतरीन पारियों को खेलते हुए देखा। मैं 1988 में उस समारोह का हिस्सा भी बना था जब सचिन और कांबली को उनके स्कूल करियर में विनोद कांबली के साथ एतिहासिक 664 रन की पार्टनरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। मैंने 1993 के वानखेड़े के उस टेस्ट मैच में स्कोरिंग करते हुए उनकी इंग्लैंड के खिलाफ उस 78 रनों की पारी को देखा था।'

62 वर्षीय मराठे 1999 तक आराम से टीवी देखते थे लेकिन फिर उनकी आंख में दिक्कतें शुरू हो गईं, कई ऑपरेशन असफल रहे और उसके बाद हौसला रखते हुए सुहास ने यह तय किया कि वह ऐसे ही जिंदगी को जिंदादिली से जीएंगे और क्रिकेट का प्रेम व अपने शौक जारी रखेंगे। सुहास सचिन के नाम से जारी किए गए डाक टिकट को लेकर भी काफी उत्साहित हैं क्योंकि वह खुद भी टिकट इकट्ठा करने का शौक रखते हैं और इस टिकट को भी अपने पास रखना चाहेंगे। सुहास के मुताबिक सचिन ने जो कीर्तिमान हासिल किए हैं उसे अब कोई पार नहीं कर सकेगा।
(मिड-डे)