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Tuesday, 24 May 2016

सचिन और गांगुली के कारण टीम इंडिया में नहीं आ पाया ये क्रिकेटर!

अमोल मजूमदार ऐसे दुर्भाग्यशाली क्रिकेटर रहे जिन्हें घरेलू क्रिकेट में हजारों रन बनाने के बावजूद टीम इंडिया में कभी मौका नहीं मिल पाया। मजूमदार की तकनीक में कोई खराबी नहीं थी, उनका टाइमिंग खराब रहा जिसके चलते वे राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं बन पाया। वे उसी स्कूल टीम में थे जिसमें सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली शामिल थे। वे जब टीम इंडिया में प्रवेश की कोशिश कर रहे थे तब टीम में सचिन, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण धूम मचा रहे थे।


1988 में हैरिस शील्ड इंटर स्कूल टूर्नामेंट में 13 वर्षीय सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली के बीच तीसरे विकेट के लिए हुई 664 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी भारतीय क्रिकेट का सुनहरा पन्ना है। इस साझेदारी के जरिए ये दोनों खिलाड़ी सुर्खियों में आ गए और पैड पहनकर बैठे एक 13 वर्षीय क्रिकेटर की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। यह बल्लेबाज अमोल मजूमदार था।


जब आगे चलकर सचिन और कांबली टीम इंडिया की तरफ से खेले, तब हैरिस शील्ड मैच की तरह मजूमदार यहां भी अपनी बारी आने का इंतजार करते रहे। अमोल ने वर्षों बाद 1993 में मुंबई की तरफ से प्रथम श्रेणी किया और हरियाणा के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच में 260 रन बनाए। यह प्रथम श्रेणी पदार्पण में अभी भी रिकॉर्ड स्कोर है। मजूमदार ने चमकीले प्रथम श्रेणी करियर में 21 वर्षों में 11167 रन बनाए।

कभी टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाए

टेलेंट और तकनीक को छोड़ दीजिए, मजूमदार हमेशा खराब टाइमिंग के शिकार बने। वे उस स्कूल टीम में शामिल रहे, जिसमें सचिन और कांबली थे। वे 1995 में उस भारत 'ए' में चुने गए जिसमें राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण थे। इंग्लैंड 'ए' के खिलाफ टेस्ट मैचों में द्रविड़ चमके जबकि वन-डे में गांगुली छा गए। रवि शास्त्री और नवजोतसिंह सिद्धू रिटायर हुए थे और टीम इंडिया के मध्यक्रम में जगह खाली थी। 1995-96 की दुलीप ट्रॉफी प्रतिभा दिखाने का सही मंच था और लक्ष्मण और द्रविड़ ने सबसे ज्यादा रन बनाए जबकि गांगुली ने पूर्व क्षेत्र के खिलाफ 171 रन बनाए। ये तीनों भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल रहे जबकि मजूमदार इंतजार करते रह गए।

इसके बाद तो मजूमदार सही मौके का इंतजार करते ही रह गए। मुंबई का 15 वर्षों तक प्रतिनिधित्व करने के बाद वे असम और आंध्रप्रदेश की तरफ से भी खेले। उन्होंने 30 प्रथम श्रेणी शतक लगाए और 8 रणजी ट्रॉफी खिताब हासिल किए।

फेब फोर ने रास्ता रोके रखा

मजूमदार जब टीम इंडिया में जगह पाने की कोशिश कर रहे थे तब फेब फोर (सचिन, द्रविड़, गांगुली और लक्ष्मण) अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छाए हुए थे। उस वक्त इन चारों के बगैर भारतीय टीम की कल्पना भी कोई नहीं कर सकता था। इसकी वजह से घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने के बावजूद मजूमदार राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना पाए। अमोल ने 2014 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया, वह भी टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किए बगैर।  Read more http://www.jagran.com/

Wednesday, 13 April 2016

सचिन तेंदुलकर की फिल्म का यह दूसरा दमदार पोस्टर भी हुआ वायरल!

एक तरफ जहां क्रिकेेट जगत से मोहम्मद अजहरुद्दीन और एम एस धोनी पर बन रही फिल्मों की खूब चर्चा है तो दूसरी तरफ जब से 'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर पर बन रही फिल्म 'सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स', का पहला पोस्टर सामने आया है, तब से उनके फैंस में इस फिल्म के प्रति खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इनमें शाहरुख खान, रणवीर सिंह जैसे सितारों से लेकर सचिन के साथी क्रिकेटर भी शामिल हैं और अब तो उनकी फिल्म का दूसरा पोस्टर भी सामने आ गया है और आते ही सोशल मीडिया पर छा गया है।

'सचिन द फिल्म' नाम से आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ''सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स' का नया पोस्टर जारी किया गया है, जिस पर लिखा है, 'थ्री जेनरेशन, वन हीरो' यानि तीन पीढि़यां एक नायक।

इससे पहले साेमवार को खुद सचिन ने इस फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया था और ट्वीट कर अपने फैंस को यह भी बताया था कि 14 अप्रैल को टीजर रिलीज होने वाला है।

इसके बाद सचिन के कई साथी क्रिकेटरों ने उनकी इस फिल्म का पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर किया। इनमें वीरेंद्र सहवाग, सुरैश रैना और रोहित शर्मा शामिल हैं। मुंबई की प्रोडक्शन कंपनी 200 नॉट आउट लंदन के अवॉर्ड विनिंग राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर जेम्स एर्स्किन के साथ मिलकर इस फिल्म को बना रही है। जेम्स इस फिल्म से बतौर डायरेक्टर जुड़े हुए हैं। Read more http://www.jagran.com

Sunday, 29 December 2013

Is Kallis even greater than Sachin Tendulkar




(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। जब भी क्रिकेट इतिहास के बारे में चर्चा होगी तो 2013 को शायद ही कोई कभी भूल सकेगा। आखिर ये वो साल जो रहा जब क्रिकेट के दो महानतम खिलाड़ियों ने मैदान को अपने-अपने अंदाज में अलविदा कह दिया। एक ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा तो दूसरे ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहकर अपने पूर्ण संन्यास की राह को तय कर दिया। हम बात कर रहे हैं दक्षिण अफ्रीका के महानतम ऑलराउंडर जैक्स कैलिस और क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल बल्लेबाज सचिन रमेश तेंदुलकर की। दोनों ने विदाई के लिए यही साल चुना, ऐसे में ये सवाल अब हमेशा जिंदा रहेगा कि सचिन और कैलिस में कौन था ज्यादा महान क्रिकेटर...?

आमतौर पर जब किसी से ये सवाल पूछा जाता है तो जवाब यही मिलता है कि दोनों की अपनी खूबियां रही, और दोनों ही अपनी-अपनी टीम के लिए क्रिकेट के बादशाह रहे..लेकिन फिर भी सवाल जगजाहिर है कि इन दोनों की टक्कर में आखिर कौन था सर्वश्रेष्ठ? आइए दोनों खिलाड़ियों के कुछ खास पहलुओं पर गौर फरमाते हैं जो काफी हद तक ये स्पष्ट करने जरूर हो जाएगा कि महान जरूर दोनों थे लेकिन कहीं ना कहीं ये क्रिकेट की सबसे बड़ी बहस बन सकती है।

1. सचिन तेंदुलकर (भारत): 

इस महान क्रिकेटर ने अपने करियर में बल्ले से वो सभी चीजें हासिल की जिसकी कामना कोई भी क्रिकेटर रखता होगा। कागजों पर शायद उनसे बेहतर ना तो कोई था और ना ही आगे कोई हो सकेगा। 24 सालों के करियर के रिकॉर्ड 200 टेस्ट मैचों में रिकॉर्ड 15,921 रन और रिकॉर्ड 51 शतक, वनडे में रिकॉर्ड 463 मैचों में रिकॉर्ड 18,426 रन और रिकॉर्ड 49 शतक। ये वो विशालकाय आंकड़े हैं जो एक बेहतरीन क्रिकेटर, एक महानतम क्रिकेटर का स्तर बयां करते हैं। शांत स्वभाव और बल्ले से बोलने वाले इस खिलाड़ी ने जितनी लोकप्रियता मैदान में रहकर कमाई उतना ही विवादों से दूर रहकर, मैदान से बाहर भी। भारतीय क्रिकेट के साथ-साथ दुनिया के करोड़ों क्रिकेट फैंस ने उन्हें इस खेल के भगवान का दर्जा दिया और वो ऐसी विदाई लेकर गए जिसका सपना देखते-देखते खिलाड़ियों के करियर समाप्त हो गए। 

2. जैक्स कैलिस (दक्षिण अफ्रीका): 

सचिन तेंदुलकर ने बेशक बल्ले से कई कीर्तिमान बनाए हों, बेशक कई बार उन्होंने ऐसे इतिहास रचे जिससे भारत और दुनिया के तमाम खेल प्रेमियों ने उन्हें सलाम किया, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी टीम में एक खिलाड़ी ऐसा था जो बिना ज्यादा फोकस, बिना ज्यादा लाइम लाइट के हमेशा फैंस के दिल में जगह बनाता गया और जाते-जाते भी महानता का अहसास करा गया। नाम है जैक्स कैलिस। इस 38 वर्षीय खिलाड़ी ने भारत के खिलाफ डरबन टेस्ट से जब संन्यास का ऐलान किया तब भी वो ढलते नहीं दिखे और तकरीबन 20 साल के करियर के बाद भी जाते-जाते अपना 45वां शतक लगाकर पवेलियन लौटे। कुछ लोग कैलिस को सबसे महान क्रिकेटर के तौर पर इसलिए तरजीह देते हैं क्योंकि उन्होंने मैदान के हर डिपार्टमेंट में अपना योगदान दिया और सर्वश्रेष्ठ स्तर पर दिया। उन्होंने 166 टेस्ट मैचों में 13,289 रन बनाए, डरबन टेस्ट की पहली पारी तक उन्होंने 292 विकेट भी लिए, यही नहीं, फील्डिंग में भी वो अव्वल रहे और 200 कैच लेकर कैच लेने के मामले में दुनिया के दूसरे नंबर के टेस्ट खिलाड़ी बने। इसके अलावा 325 वनडे मैचों में 17 शतक के साथ 11,574 रन तो बनाए ही, साथ ही यहां भी 273 विकेट लिए और 129 कैच लपके, वहीं उनका वनडे का करियर अब भी बाकी है और 2015 विश्व कप खेलना उनका लक्ष्य है। ना जाने तब तक ये खिलाड़ी और क्या-क्या रिकॉर्ड अपने नाम करेगा। जो भी हो लेकिन हर डिपार्टमेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना और लगातार ऐसा करना हर खिलाड़ी के बस की बात नहीं होती।

Thursday, 26 December 2013

7 players who left Cricket in 2013


(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। क्रिकेट इतिहास में शायद साल 2013 एक ऐसे साल के रूप में याद किया जाएगा जहां मैदान पर कई बार भावनाओं का तूफान आया, करोड़ों आंखें नम हुईं और ना जाने कितने क्रिकेट से या उसके कुछ प्रारूपों से सदा के लिए अलविदा कहकर चल दिए। यकीन नहीं होता कि एक साल में तकरीबन 25 क्रिकेट सितारों ने अपने फैंस की आंखें नम छोड़ दीं। हम आपको रूबरू कराते हैं उन 7 लम्हों से, यानी उन 7 खिलाड़ियों के संन्यास से, जो शायद क्रिकेट फैंस कभी नहीं भूल पाएंगे, इनमें आपका फेवरेट कौन रहा?... 

1. सचिन तेंदुलकर (भारत):
साल 2013 के अंत में वो हुआ जिसकी कल्पना शायद ही कभी किसी ने की थी। 1989 से 2013 तक तकरीबन 24 साल क्रिकेट की पिच पर राज करने वाला इस खेल के सबसे जगमगाते कोहिनूर सचिन रमेश तेंदुलकर ने मैदान को अलविदा कह दिया। पहले वनडे से, फिर टी20 से और आखिर में वानखेड़े स्टेडियम पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 200वां टेस्ट खेलकर एक भावुक भाषण के जरिए सचिन ने करोड़ों आंखें नम कर दीं और इस खेल को अलविदा कहा। टेस्ट वनडे और टी20 मिलाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तकरीबन 34,357 रन और कुल 100 शतक जड़ने वाले इस खिलाड़ी का संन्यास क्रिकेट इतिहास का सबसे दिलचस्प संन्यास कहा जा सकता है। 

2. रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया):
ऑस्ट्रेलिया के सफलतम कप्तान रिकी पोंटिंग ने 2013 में ही क्रिकेट के सभी प्रारूपों व प्रथम श्रेणी क्रिकेट को भी अलविदा कहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों में 27483 रन बनाए जिसमें 71 शतक शामिल रहे। ऑस्ट्रेलिया को दो विश्व कप हासिल कराने वाले इस कप्तान व दिग्गज खिलाड़ी ने करोड़ों क्रिकेट फैंस की आंखें नम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

3. राहुल द्रविड़ (भारत):
टीम इंडिया की वो दीवार जो शायद कभी किसी के सामने झुकी। एक ऐसा खिलाड़ी जिसकी तकनीक की पूरी दुनिया कायल हुई और ना जाने भारत ने कितने मैच उनकी वजह से ही जीते। द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को तो 2012 में ही ऑस्ट्रेलिया दौरे के साथ अलविदा कह दिया था, लेकिन मैदान से विदाई उन्होंने आइपीएल से ली और अपने करोड़ों फैंस की आंखें नम कर दीं, क्योंकि आइपीएल-6 के फाइनल के बाद फैंस ने उन्हें दोबारा मैदान पर कभी नहीं देखा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तकरीबन 25 हजार रन और 48 जड़ने वाले इस दिग्गज का मैदान से अलविदा कहना भी भावुक लम्हों में से रहा। 

4. माइक हसी (ऑस्ट्रेलिया):
ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी व मिस्टर क्रिकेट के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने इसी साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा। जनवरी में उन्होंने अचानक अपने संन्यास की घोषणा की और सिडनी में श्रीलंका के खिलाफ आखिरी टेस्ट खेलकर फैंस को भावुक छोड़ दिया। सबने कहा कि उनमें काफी क्रिकेट बाकी था लेकिन वो टीम को बीच में छोड़कर चले गए। फिलहाल वो अब भी दुनिया की तमाम टी20 लीग खेल रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका संन्यास सबसे भावुक लम्हों में से रहा। हसी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 14,398 रन बनाए जिसमें 68 शतक शामिल रहे।

5. ग्रीम स्वान (इंग्लैंड):
इंग्लैंड के दिग्गज स्पिनर व उनके इतिहास के छठे सबसे सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज ग्रीम स्वान ने साल खत्म होते-होते अचानक एशेज सीरीज के बीच क्रिकेट को अलविदा कहने का मन बना लिया। सब हैरान थे, लेकिन एक खिलाड़ी मैदान छोड़ने का मन बना चुका था। कारण साफ नहीं था लेकिन विदाई अचानक हो चुकी थी। स्वान ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में सभी प्रारूप मिलाकर 410 विकेट हासिल किए और उन्हें इंग्लैंड के पिछले कुछ सालों में टेस्ट व वनडे में सर्वश्रेष्ठ टीमों में शुमार करने के बेहतरीन योगदान के लिए हमेशा जाना जाएगा।

6. शेन वॉर्न (ऑस्ट्रेलिया):
टेस्ट क्रिकेट में 708 विकेट, वनडे में 293 विकेट साफ करते हैं कि इस क्रिकेटर ने क्रिकेट इतिहास और कंगारू टीम में क्या भूमिका निभाई। वॉर्न ने यूं तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को 2007 में ही अलविदा कह दिया था लेकिन मैदान से उनकी आखिरी विदाई जनवरी 2013 में हुई जब उन्होंने अपने बिग बैश टी20 टूर्नामेंट मैच में आखिरी बार शिरकत की। मैदान पर मौजूद हजारों दर्शकों ने लेग स्पिन के इस बादशाह को आखिरी बार जलवा बिखेरते देखा और उन्हें सदा के लिए भावुक होते हुए मैदान से अलविदा कहा। 

7. जैक्स कैलिस (दक्षिण अफ्रीका):
साल के खत्म होते-होते क्रिकेट फैंस को कई भावुक लम्हों से दो-चार होना पड़ा और साल अंत होते-होते भी एक दिग्गज ने टेस्ट क्रिकेट के जरिए अपने संन्यास की राह बनाने का फैसला ले लिया। दक्षिण अफ्रीका व दुनिया के सबसे महान व सफल ऑलराउंडर जैक्स कैलिस ने भारत के खिलाफ डरबन में अपने करियर का आखिरी टेस्ट खेलने का फैसला किया और अब 2013 के बाद इस महानतम खिलाड़ी को हम कभी सफेद कपड़ों में नहीं देख सकेंगे। टेस्ट में 13,174 रन और 292 विकेट उनकी महानता को बयां करते हैं। 

2013 में संन्यास लेने वाले क्रिकेट खिलाड़ी (किसी भी प्रारूप से):
1. मैथ्यू होगार्ड (इंग्लैंड)
2. डेरेन मैडी (इंग्लैंड)
3. संजय बांगर (भारत)
4. थिलन समरवीरा (श्रीलंका)
5. ग्रीम स्वान (इंग्लैंड)
6. सइराज बहतुले (भारत)
7. माइक हसी (ऑस्ट्रेलिया)
8. पॉल हैरिस (दक्षिण अफ्रीका)
9. बेथ मॉर्गन (महिला क्रिकेटर, इंग्लैंड)
10. शेन वॉर्न (ऑस्ट्रेलिया)
11. लू विंसेंट (न्यूजीलैंड)
12. लीसा स्थालेकर (महिला क्रिकेटर, ऑस्ट्रेलिया)
13. रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया)
14. एंथोनी मैकग्रा (इंग्लैंड)
15. इयन ब्लैकवेल (इंग्लैंड)
16. जेम्स मार्शल (न्यूजीलैंड)
17. क्रिस मार्टिन (न्यूजीलैंड)
18. मैथ्यू सिंक्लेयर (न्यूजीलैंड)
19. रे प्राइज (जिंबॉब्वे)
20. काइल जार्विस (जिंबॉब्वे)
21. राहुल द्रविड़ (भारत)
22. स्टीव हार्मिसन (इंग्लैंड)
23. अजित अगरकर (भारत)
24. सचिन तेंदुलकर (भारत)
25. जैक्स कैलिस (दक्षिण अफ्रीका)

Source : Cricket News

Monday, 2 December 2013

Vinod Kambli still in ICU

Vinod Kambli
मुंबई। पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली अब भी आइसीयू में हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। उन्हें शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने के बाद लीलावती अस्पताल में भर्ती किया गया था।
अस्पताल के सूत्र ने कहा कि कांबली अब भी आइसीयू में हैं। उनकी हालत स्थिर है और डॉक्टर उनकी हालत पर नजर रखे हैं। 41 वर्षीय कांबली शुक्रवार की सुबह अपनी कार से चेंबूर से बांद्रा जा रहे थे और इस दौरान उन्हें सीने में तकलीफ हुई, जिसके बाद उन्हें एक महिला ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने अस्पताल में भर्ती कराया। पिछले साल जुलाई में कांबली की दो धमनियां ब्लॉक होने के कारण उनकी एंजियोप्लास्टी की गई थी। अगले साल 18 जनवरी को 42 बरस के होने वाले कांबली ने भारत की ओर से 17 टेस्ट और 104 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।

Friday, 29 November 2013

Plea in HC to stop conferment of Bharat Ratna on Tendulkar

High Court
चेन्नई। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख सीएन राव को भारत रत्न प्रदान करने से रोकने के लिए मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस मामले में राष्ट्रपति की अधिसूचना का पालन नहीं किया गया है। राष्ट्रपति आगामी 26 जनवरी को राव और सचिन को भारत रत्न प्रदान करेंगे। खास बात यह है कि याचिका में वरिष्ठ वैज्ञानिक राव को भारत रत्न देने से रोकने की मांग तो की गई है लेकिन याचिकाकर्ता ने खुद स्वीकार किया है कि वह सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पाने के हकदार हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस एम. सत्यनारायन की पीठ ने एक वकील की ओर से दायर इस याचिका पर सुनवाई 2 दिसंबर तक के लिए टाल दी है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पी विल्सन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि भारत रत्न के बारे में केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव किए हैं। इनके तहत अब खिलाड़ी भी देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने के हकदार है। इस पर पीठ ने एएसजी को सोमवार तक राष्ट्रपति की संशोधित अधिसूचना की प्रति पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

Wednesday, 27 November 2013

Collector's items: Coins by Achrekar are priceless for Sachin

sachin tendulkar
मुंबई। अगर किसी व्यक्ति से पूछा जाए कि वह मुहम्मद अली के हस्ताक्षर वाले मुक्केबाजी ग्लव्स, मशहूर ब्रिटिश बैंड डायर स्ट्रेट के मार्क नोकफ्लेर के गिटार और सर डॉन ब्रैडमैन के बल्ले में से किस यादगार चीज को चुनेगा तो निश्चित तौर पर उसके लिए फैसला करना काफी मुश्किल होगा। 

लेकिन अगर यही सवाल सचिन तेंदुलकर से पूछा जाएगा तो उनका जवाब होगा अपने कोच रमाकांत आचरेकर द्वारा दिए गए सिक्के, जो उन्हें शिवाजी पार्क जिमखाना ग्राउंड में घंटों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद अपने गुरु से मिले हैं। यह सिक्के सचिन के लिए बेशकीमती हैं। उन दिनों आचरेकर स्टंप के ऊपर एक रुपये का सिक्का रखा करते थे।

अगर तेंदुलकर आउट नहीं होते थे तो यह सिक्का उनका हो जाया करता था।
तेंदुलकर ने बुधवार को भारत की पहली सेलीब्रिटी कॉमर्स वेबसाइट कलेक्टेबिलिया के लांच के बाद कहा कि मेरे लिए सबसे यादगार चीज वह सिक्के हैं, जो मैंने आचरेकर सर से हासिल किए हैं। वह सबसे अहम और बेशकीमती हैं। कलेक्टेबिलिया सेलीब्रिटी वॉल में विभिन्न क्षेत्र के दिग्गजों के हस्ताक्षर वाली कुछ असली और बहुमूल्य चीजे होंगी। इसमें तेंदुलकर के 200वें टेस्ट के बाद उनके हस्ताक्षर वाला बल्ला और मुहम्मद अली के हस्ताक्षर वाले मुक्केबाजी ग्लव्स भी शामिल हैं। अली के मुक्केबाजी ग्लव्स को देखने के बाद सचिन ने कहा कि यह वैसे ही हैं जैसे उनके बांद्रा के बंगले में हैं। तेंदुलकर ने कहा कि अपने 40वें जन्मदिन पर मुझे अंजना (कलेक्टेबिलिया डॉट कॉम की प्रबंध निदेशक अंजना रेड्डी) ने सरप्राइज दिया। मुहम्मद अली के ग्लव्स जो आप यहां देख रहे हैं वैसे ही मेरे घर पर भी हैं जिन पर उनके हस्ताक्षर हैं। यह विशेष तोहफा है। इसके अलावा इस दिग्गज भारतीय बल्लेबाज के पास सर डॉन ब्रैडमैन की फ्रेम वाली तस्वीर और उनके हस्ताक्षर वाला बल्ला भी है।
महान गायिका लता मंगेशकर तेंदुलकर को अपने बेटे की तरह मानती हैं और इस दिग्गज क्रिकेटर को अपनी लता दीदी से तोहफे का इंतजार है। उन्होंने कहा कि मैं जिस चीज को लेकर उत्सुक हूं वह यह है कि लता दीदी ने मुझे कुछ देने का वादा किया था, इसलिए उम्मीद करता हूं कि मुझे कुछ मिलेगा। यह सरप्राइज है। मैं इसे लेकर उत्सुक हूं। यह मेरे लिए विशेष है।


Source- Cricket News in Hindi

Thursday, 21 November 2013

Virat Kohli becomes fastest to score 5000 runs in ODIs

Kochi ODI
कोच्चि। भारत के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने गुरुवार को वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 5000 रन पूरे करके सबसे कम पारियों में इस मुकाम तक पहुंचने के वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज विवियन रिच‌र्ड्स के रिकॉर्ड की बराबरी की। कोहली की यह 120वें वनडे मैच की 114वीं पारी है। रिच‌र्ड्स ने भी अपनी 114वीं पारी में 5000 रन पूरे किए थे।

कोहली ने भारत की तरफ से सबसे कम पारियों में 5000 रन पूरे करने का सौरव गांगुली का रिकॉर्ड तोड़ा। गांगुली 126 पारियों में इस मुकाम पर पहुंचे थे। कोहली वनडे में 5000 रन पूरे करने वाले दसवें भारतीय बल्लेबाज हैं। उनसे पहले सचिन तेंदुलकर (18426 रन), गांगुली (11,221 रन), राहुल द्रविड़ (10,768 रन), मुहम्मद अजहरुद्दीन (9378 रन), युवराज सिंह (8246), वीरेंद्र सहवाग (7995 रन), महेंद्र सिंह धौनी (7616 रन), अजय जडेजा (5359 रन) और गौतम गंभीर (5238 रन) यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।

सबसे कम पारियों में पांच हजार पूरे करने वालों में रिच‌र्ड्स और कोहली के बाद वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा (118), वेस्टइंडीज के गार्डन ग्रीनिज (121), दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स (124) और भारत के सौरव गांगुली (126) का नंबर आता है।

Wednesday, 20 November 2013

Sachin is Bharat Ratna but what about Dhyan Chand

Dhyan Chand

भुवनेश्वर। हॉकी इंडिया लीग (एचआइएल) ने भी ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग में खुद को शामिल करते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार को हॉकी के जादूगर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करना चाहिए। वहीं, पूर्व हॉकी खिलाड़ियों ने भी कहा है कि यह सम्मान उन्हें नहीं दिया जाना उस महान खिलाड़ी का अपमान है जिसने देश को गुलामी के दौर में खेल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी।

एचआइएल के अध्यक्ष और हॉकी इंडिया के महासचिव नरेद्र बत्रा ने कहा, 'हम सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने का स्वागत करते है। हमें खुशी होगी यदि भारत सरकार ध्यानचंद के नाम की घोषणा भी इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए करे। एचआइएल का अध्यक्ष होने के नाते मैं जल्द ही खेल मंत्रालय के सामने यह मसला रखूंगा।' एचआइएल के उपाध्यक्ष प्रताप सत्पथी ने कहा, 'हम तेंदुलकर को भारत रत्न देने का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन यदि ध्यानचंद को यह सम्मान नहीं मिलता है तो यह अन्याय होगा।'

भारत रत्न पर मचे घमासान के बीच पूर्व ओलंपियनों ने कहा है कि चाहे सचिन को भारत रत्न के साथ 'खेल मंत्री' बना दो, लेकिन पहले यह पुरस्कार ध्यानचंद को दिया जाना चाहिए था जिन्होंने मुल्क के खाते में कई स्वर्ण पदक दिलाए हैं। पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह ने कहा, 'ध्यानचंद का खेल के क्षेत्र में बड़ा योगदान है। इस महान खिलाड़ी ने उस वक्त मुल्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल के क्षेत्र में पहचान दिलायी थी, जब हमारा देश गुलाम था। इसलिए इस सम्मान पर पहला हक उनका बनता है।'

भारतीय टीम के पूर्व कोच राजिंदर सिंह ने कहा, 'मैं अन्य की बात नहीं जानता लेकिन मेजर (ध्यानचंद) को यह पुरस्कार अवश्य मिलना चाहिए था।' सुरेंद्र सोढी ने कहा, 'मेजर ध्यानचंद इस पुरस्कार के असली हकदार हैं और उन्हें भी यह पुरस्कार मिलना चाहिए।

Source- Cricket News in Hindi

Team India gears up for Kochi ODI

India v west indies ODI

कोच्चि। टेस्ट सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप के बाद बुलंद हौसलों वाली भारतीय क्रिकेट टीम जब कोच्चि में वेस्टइंडीज के खिलाफ गुरुवार को वनडे सीरीज के पहले मुकाबले के लिए उतरेगी तो उसका लक्ष्य जीत से आगाज कर मजबूत स्थिति हासिल करना होगा। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के नेतृत्व में भारतीय टीम ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में असाधारण प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में वनडे सीरीज में भी टीम इंडिया अपने इसी विजयी अभियान को जारी रखना चाहेगी।

दूसरी ओर भ्रमणकारी वेस्टइंडीज के लिए टेस्ट सीरीज में मिली शर्मनाक हार का बदला लेने का भी यह अच्छा मौका होगा। कप्तान ड्वेन व्रावो पिछली हार के बाद आलोचनाओं में घिरी टीम को वापस पटरी पर लाने के लिए विशेष रणनीति के साथ मैदान पर उतरेंगे। टीम इंडिया इस वक्त आत्मविश्वास से भरपूर है और बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों ही विभाग में उसके पास सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी मौजूद हैं, जबकि कैरेबियाई टीम की सबसे बड़ी कमजोरी फिलहाल उसका बल्लेबाजी क्रम है, जिसने टेस्ट सीरीज में बेहद खराब प्रदर्शन किया था जिसके कारण टीम को दोनों ही मैचों में पारी की हार झेलनी पड़ी थी। टेस्ट सीरीज के दोनों मैचों में शतक लगाने वाले रोहित शर्मा, युवा बल्लेबाज विराट कोहली, सुरेश रैना, शिखर धवन, महेंद्र सिंह धौनी और ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के रूप में टीम इंडिया के पास दुनिया का बेहतरीन बल्लेबाजी क्रम है। पिछले मैचों में उनके असाधारण प्रदर्शन का लोहा भी दुनिया मान चुकी है। इसके अलावा ऑलराउंडर युवराज सिंह भी वनडे टीम का हिस्सा हैं और उनसे मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।
ऐसे में वेस्टइंडीज के गेंदबाजों टिनो बेस्ट, सचिन के विदाई टेस्ट में उनका विकेट लेने वाले नरसिंह देवनारायन, वीरासामी पैरमोल और रवि रामपॉल के लिए भारतीय बल्लेबाज न सिर्फ बड़ी चुनौती होंगे, बल्कि उन्हें मेजबान टीम के बल्लेबाजों को कम स्कोर पर पवेलियन भेजने के लिए विशेष रणनीति के साथ मैदान पर उतरना भी जरूरी होगा। टीम इंडिया के पास प्रज्ञान ओझा, मुहम्मद शमी, अमित मिश्रा, मोहित शर्मा, जयदेव उनादकट और आर. विनय कुमार के रूप में अच्छा गेंदबाजी क्रम है। इसके अलावा आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन भी टीम के अहम खिलाड़ी हैं।

कप्तान ड्वेन ब्रावो के अलावा ऑलराउंडर डैरेन सैमी, जॉनसन चा‌र्ल्स, क्रिस गेल, लेंडल सिमंस, कीरन पॉवेल, मर्लोन सैमुअल्स के रूप में टीम के पास मजबूत बल्लेबाजी क्रम है। कुछ बदलावों के साथ उतर रही वेस्टइंडीज की टीम में इस बार प्रदर्शन के लिहाज से भी कुछ बदलाव जरूर दिखाई देगा। साथ ही पिछले मैचों में फ्लॉप साबित हुए गेल से भी कुछ तूफानी प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।

टीमें : भारत- महेंद्र सिंह धौनी (कप्तान), शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली, युवराज सिंह, सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा, आर. अश्विन, भुवनेश्वर कुमार, मुहम्मद शमी, अंबाती रायुडू, अमित मिश्रा, जयदेव उनादकट, आर. विनय कुमार और मोहित शर्मा।

वेस्टइंडीज- ड्वेन ब्रावो (कप्तान), टिनो बेस्ट, डेरेन ब्रावो, जॉनसन, चा‌र्ल्स, नरसिंह देवनरायन, क्रिस गेल, जेसन होल्डर, सुनील नरेन, वीरासामी पैरमोल, रवि रामपॉल, कीरन पॉवेल, दिनेश रामदीन, मलोर्न सैमुअल्स और लेंडल सिमंस।

Mussoorie welcome's sachin and Their Family

Sachin tendulkar
जागरण प्रतिनिधि, मसूरी (देहरादून)। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने देवभूमि का रुख किया। सुकून के कुछ पल बिताने के लिए बुधवार को वह अपने पसंदीदा पर्यटक स्थल पहाड़ों की रानी मसूरी पहुंचे। इस दौरान मीडिया का जमावड़ा लगा तो सचिन ने दो टूक कहा, 'प्लीज, मुझे अकेला छोड़ दीजिए। मैं यहां सिर्फ छुट्टियां बिताने आया हूं। आज कोई सवाल जवाब नहीं।'

बताया जा रहा कि पत्नी अंजलि संग पहुंचे सचिन अगले पांच दिन तक मसूरी की वादियों में छुट्टियां बिताएंगे। यहां की हसीन वादियों से सचिन का विशेष लगाव है और क्रिकेट में व्यस्त रहने के बावजूद वह प्रतिवर्ष परिवार संग यहां आते रहे हैं। यह कयास पहले से लगाए जा रहे थे कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सचिन सीधे मसूरी पहुंचेंगे और हुआ भी ठीक ऐसा ही।

सचिन बुधवार सुबह देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। लगभग 10.50 बजे सात वाहनों के काफिले के साथ वह सड़क मार्ग से मसूरी के लिए रवाना हुए और टिहरी बाईपास होते हुए दोपहर 12.40 पर लंढौर कैंट स्थित अपने पारिवारिक मित्र संजय नारंग के होटल रॉकबी मनोर पहुंचे। 

इस बीच मीडियाकर्मियों का जमावड़ा भी लग गया। करीब तीन बजे सचिन पत्नी अंजलि और मित्र संजय नारंग के साथ पैदल ही बोथल बैंक बंगले के लिए निकले। इस दौरान मीडियाकर्मियों ने उनसे सवाल पूछे तो उन्होंने अकेला छोड़ देने का अनुरोध किया। हालांकि इससे पहले सचिन ने होटल की टैरेस से प्रशंसकों का हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया।

Prithviraj Shaw plays world record innings of 546 runs 10875349

Prithvi Shaw
मुंबई। मुंबई के 14 वर्षीय पृथ्वी शॉ ने बुधवार को प्रतिष्ठित हैरिस शील्ड ट्रॉफी में 546 रनों की पारी खेलते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। पृथ्वी की शानदार पारी से उनमें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की झलक दिखाई देती है, जिन्हें हैरिस शील्ड मैच से ही पहली बार लोकप्रियता मिली थी। सचिन ने नाबाद 326 रन बनाते हुए विनोद कांबली (349) के साथ 664 रन की विश्व रिकॉर्ड साझेदारी की थी। यह रिकॉर्ड कुछ समय पहले ही टूटा है। 

मुंबई के इस उभरते हुए बल्लेबाज और मुंबई अंडर-16 टीम के कप्तान पृथ्वी ने आजाद मैदान पर सेंट फ्रांसिस डि एसिसी बोरीवली के खिलाफ खेले गए मैच में रिज्वी स्प्रिंगफील्ड की ओर से खेलते हुए 330 गेंदों की अपनी पारी में 85 चौके और पांच छक्के मारे। इसके साथ ही पृथ्वी आधिकारिक इंटर स्कूल मैच में 500 से अधिक का स्कोर करने वाले पहले स्कूली क्रिकेटर भी बन गए हैं।

पृथ्वी ने अपने स्कूल के सीनियर साथी और पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर के भतीजे अरमान जाफर के 498 रन के स्कोर को पीछे छोड़ा, जो उन्होंने कुछ साल पहले ही बनाया था। सेंट फ्रांसिस को 92 रन पर ढेर करने के बाद पृथ्वी ने मंगलवार को 166 गेंदों में नाबाद 257 रन की पारी खेली थी। बुधवार को उन्होंने अपनी पारी में 289 रन और जोड़े। किसी पंजीकृत क्रिकेट टूर्नामेंट में इससे पहले किसी भारतीय का सर्वश्रेष्ठ स्कोर दादाभाई हावेवाला के नाम दर्ज था जिन्होंने मुंबई में 1933-34 सत्र में सेंट जेवियर कॉलेज के खिलाफ 515 रन बनाए थे। वहीं प्रतिस्पर्धी क्रिकेट की शुरुआत के बाद उपलब्ध सभी पंजीकृत स्कोरकार्ड की बात करें तो पृथ्वी का रिकॉर्ड तीसरा सबसे बड़ा स्कोर है। जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड एईजे कोलिंस के नाम है, उन्होंने 1899 में इंग्लैंड में खेले गए मैच में नाबाद 628 रन बनाए थे, जबकि दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर सीजे एडी के नाम है। उन्होंने 1901 में 566 रन बनाए थे। 

क्रिकेट जगत में पृथ्वी की चर्चा
अपार प्रतिभा के धनी पृथ्वी को लेकर पिछले कुछ समय से मुंबई क्रिकेट हल्कों में काफी चर्चा है। अपनी काबिलियत के दम पर क्रिकेट स्कॉलरशिप हासिल कर इंग्लैंड में ग्लूस्टरशायर अकादमी के साथ ट्रेनिंग और उसकी दूसरे दर्जे की टीम के लिए कुछ अभ्यास मैच खेल चुके पृथ्वी की प्रतिभा के कायल इंग्लैंड के पूर्व काउंटी क्रिकेटर और जेडब्ल्यू क्रिकेट अकादमी के स्थापक जूलियन वुड भी हैं।

कुछ महीने पहले ही वुड ने पृथ्वी के साथ अपनी पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा था कि अगले पांच सालों में वह दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बन सकता है। 

पृथ्वी के कोच राजू पाठक और पिता पंकज शॉ ने उनके लिए हर संभव प्रयास किया। चार साल की उम्र में मां को खोने वाले पृथ्वी को उसके पिता ने कम आमदनी के बावजूद हर सुविधा मुहैया कराई। पृथ्वी अगर ऐसे प्रदर्शन करते रहे तो प्रबल संभावना है कि जूनियर चयन समिति के चेयरमैन कोनोर विलियम्स उन्हें अगले साल अंडर-19 टीम में चुनने पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। 

'मुझे नहीं पता था कि मैं 490 रन पर बल्लेबाजी कर रहा हूं क्योंकि मैंने अपने साथियों से कहा था कि वह मुझे स्कोर नहीं बताएं क्योंकि मैं अपना नैसर्गिक खेल खेलना चाहता था। जब मैं 500 रन पर पहुंचा तो साथियों ने मुझे बताया और सभी मेरे लिए खुश हुए।'
- पृथ्वी शॉ

Monday, 18 November 2013

Sachin gets salute by England parliament Also

Sachin Tendulkar

लंदन। सचिन तेंदुलकर को ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ कॉमंस ने भी उनकी क्रिकेट सेवाओं के लिए बधाई देते हुए सम्मान दिया है। सोमवार को जब हाउस ऑफ कॉमंस का सत्र शुरू हुआ तो सदस्यों ने सचिन तेंदुलकर को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले का सम्मान करते हुए उन्हें बधाई प्रस्ताव पारित किया।
ब्रिटेन की संसद द्वारा किसी दूसरे देश के खिलाड़ी के लिए बधाई प्रस्ताव पारित करना, यह अपने आप में बहुत बड़ा सम्मान है। हाउस ऑफ कॉमंस में यह प्रस्ताव पेश करने वाले भारतीय मूल के सांसद कीथ वाज ने कहा कि तेंदुलकर ने दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के रूप में काम किया। कीथ ने खेल के प्रति उनके निस्वार्थ समर्पण की चर्चा की। उन्होंने कहा, 'यह प्रस्ताव एक उत्कृष्ट बल्लेबाज के सम्मान के लिए है। तेंदुलकर को जितना भारत में पसंद किया जाता है उतना ही ब्रिटेन में। अत: यह बिल्कुल सही है कि संसद उनके योगदान की चर्चा करे।'

Sachin left with 664 record partnership figure with a match figure coincidence

Sachin Tendulkar
नई दिल्ली। मास्टर ब्लास्टर सचिन रमेश तेंदुलकर अब मैदान को अलविदा कह चुके हैं। जो लोग उनकी दीवानगी में 24 सालों तक डूबे रहे वो इस बात से वाकिफ होंगे कि 664 का आंकड़ा सचिन की जिंदगी व उनकी शुरुआत में कितना खास रहा था, और अब जाते-जाते भी यह आंकड़ा एक खास अंदाज में उनके साथ गया। अब इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और लेकिन इस आंकड़े को मास्टर भी कभी नहीं भूलेंगे..क्या है यह इत्तेफाक, आइए जानते हैं।
सचिन तेंदुलकर जब पहली बार मुंबई क्रिकेट में छाए और देखते-देखते मुंबई व क्रिकेट जगत में एक जाना-पहचाना युवा नाम बनने लगे थे, तब उसका सबसे बड़ा कारण बनी 664 रनों की वो नॉटआउट पार्टनरशिप जो उन्होंने स्कूल के दिनों में विनोद कांबली के साथ हैरिस शील्ड ट्रॉफी में बनाई थी। उस ऐतिहासिक पार्टनरशिप के बाद ही रमाकांत आचरेकर के यह दोनों शिष्य सबसे ज्यादा चर्चा में आए थे और धीरे-धीरे रास्ते खुलते चले गए।

अब बात इत्तेफाक की। सचिन तेंदुलकर ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को 16 नवंबर 2013 को अलविदा कहा तब उनके अंतरराष्ट्रीय मैचों की संख्या भी 664 ही रही। उन्होंने अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय करियर में 463 वनडे, 200 टेस्ट और 1 टी20 मैच खेला। जिसका कुल जोड़ होता है 664..आंकड़ों के इस बादशाह ने कागज पर इस खेल के तकरीबन सभी बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए और जाते-जाते वो अपने पहले सबसे बड़े रिकॉर्ड का मेल भी अपने मैचों की संख्या से करते हुए मैदान से विदा हुए।

Slowly Gautam Gambhir and Virender Sehwag Returning to Form

Sachin Tendulkar
मुंबई। एक तरफ जहां मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट के मैदान को सदा के लिए अलविदा कह दिया। वहीं, 22 गज की पिच पर दो अन्य भारतीय दिग्गजों द्वारा अंतरराष्ट्रीय पिच पर लौटने की जद्दोजहद जारी है। यह खिलाड़ी हैं, गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग। रणजी ट्रॉफी ग्रुप 'ए' के मुकाबले में दिल्ली के उनमुक्त चंद के शतक के बाद गौतम गंभीर ने अपना अर्धशतक पूरा किया और मुंबई के खिलाफ मैच ड्रॉ कराने में सफलता हासिल की। जीत के लिए 348 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली ने चौथे और अंतिम दिन चंद के नाबाद 106 और गंभीर के 51 रन की मदद से बिना किसी नुकसान के 198 रन बना लिए।
चंद ने 154 गेंदों का सामना करते हुए 14 चौके और एक छक्का जमाया, जबकि गंभीर ने रिटायर हर्ट होने से पहले 112 गेंदों का सामना करते हुए केवल तीन चौके लगाए। गंभीर ने वीरेंद्र सहवाग को बल्लेबाजी का अभ्यास कराने के लिए यह फैसला किया। स्टंप के समय सहवाग 22 गेंदों पर 35 रन बनाकर चंद के साथ क्रीज पर थे। उन्होंने अपनी पारी में पांच चौके और एक छक्का उड़ाया। सहवाग एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में नजर आ रहे थे। गौरतलब है कि यह दोनों खिलाड़ी लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं और घरेलू क्रिकेट के जरिए वापसी का रास्ता तलाश रहे हैं।

इससे पहले दो विकेट पर 198 रन से आगे खेलना शुरू कर मुंबई की टीम ने 70 ओवर में छह विकेट पर 347 रन बनाकर अपनी दूसरी पारी घोषित कर दी। आदित्य तारे (122) और सिद्धेश लाड अपने कल के स्कोर में क्रमश: सात और 25 रन जोड़ सके। अभिषेक नायर ने 60 रन बनाए, जिसमें नौ चौके और एक छक्का शामिल हैं। दिल्ली के पेसर पवन सुयाल ने 52 रन देकर तीन विकेट लिए।

Even After his last Wicket Sachin didnt Forget to Analyse it

Sachin Tendulkar
पुणे। मास्टर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर यह जानते थे कि वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे और अंतिम टेस्ट में यह उनकी आखिरी पारी थी, लेकिन वह खेल के प्रति इतने जुनूनी हैं कि वो इसके बावजूद अपने उस शॉट का आकलन करना नहीं भूले, जिस पर वह आउट हुए थे। उन्होंने इस विकेट पर अपनी राय अपने भाई के साथ साझा की थी।
सचिन के बड़ेभाई और उनके मेंटर अजित तेंदुलकर ने मराठी न्यूज चैनल में इस महान बल्लेबाज के हवाले से कहा कि मैंने जितनी उम्मीद की थी, गेंद उससे थोड़ा ज्यादा उछाल पर थी और मैं अतिरिक्त उछाल का आकलन नहीं कर पाया था। वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल में समाप्त दूसरे और अंतिम टेस्ट में सचिन के आउट होने के बाद हमेशा की तरह होने वाली बातचीत की पुष्टि करते हुए अजित ने कहा कि मैंने उसे बताया कि वह शानदार खेला और वह अपनी स्टाइल में आराम से खेल रहा था। लेकिन बल्ले पर गेंद छुआकर स्लिप में (वेस्टइंडीज के कप्तान डेरेन सैमी द्वारा लपके गए कैच) कैच से बचा जा सकता था।'
दूसरे दिन के खेल के बाद अपने भाई के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान सचिन ने कहा कि वह उछाल का ठीक तरह से अंदाज नहीं लगा पाने के कारण आउट हुए जिससे उनके लाखों प्रशंसक निराश हो गए, जो उनके चमकदार करियर का अंत 101वें शतक से देखना चाहते थे।

Sachin's temple will be made in Bihartue

Sachin Tendulkar

पटना। बिहार में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर मंदिर में पूजे जाएंगे। मंदिर का निर्माण कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में होगा। यह मंदिर भोजपुरी गायक व इस गांव के निवासी मनोज तिवारी बनवा रहे हैं। इसका शिलान्यास 19 नवंबर को होगा। इसी दिन तेंदुलकर की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा भी होगी। यहां प्रतिष्ठापित होने वाली मूर्ति का पहला लुक जारी कर दिया गया है। मंदिर को चार माह में तैयार कराने का लक्ष्य है। मनोज तिवारी का मानना है कि यह मंदिर सचिन को सम्मान देने के साथ नए खिलाड़ियों को भी उनके जैसा बनने की प्रेरणा देगा। मंदिर में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह की मूर्तियां भी होंगी। यह मंदिर करीब छह हजार वर्ग फीट के परिसर में बनेगा। लेआउट के मुताबिक सचिन की मूर्ति गर्भगृह में होगी। जबकि साथी खिलाड़ी मंदिर के अगले हिस्से में होंगे। 

आदमकद मूर्ति में सचिन इंडियन क्रिकेट टीम की आफिशियल ब्लू जर्सी में होंगे। उनके हाथ में व‌र्ल्ड कप नजर आएगा। मूर्ति बनकर तैयार हो गई है। पांच फुट पांच इंच की सचिन की मूर्ति संगमरमर की है। इसे श्रीनाथ (राजस्थान) जिले के मूर्तिकार खेमराम ने बनाया है। यह मनोज तिवारी के घर में रखी गई है। धोनी और युवराज की मूर्ति मंदिर के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद लायी जाएगी। मंदिर में अन्य पत्थरों के साथ संगमरमर का भी भरपूर उपयोग किया जाएगा। 

तिवारी ने बताया कि मंदिर को वर्ष 2014 में बनाने की योजना थी। सचिन के सन्यास लेने की घोषणा के बाद इसे 2013 में ही बनाने का निर्णय लिया गया। इसे बनाने में लगभग 70 लाख रुपये की लागत आएगी। शिलान्यास के दिन ही सचिन की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। मूर्ति को 15 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित किया जाना है। उसी दिन से पूजा भी शुरू हो जाएगी। 

मूर्ति पर मौसम का प्रभाव न पड़े इसकी व्यवस्था भी की जा रही है। मंदिर के बाद तिवारी अपने गांव में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक स्टेडिटम भी बनवाना चाहते हैं। तिवारी ने कहा कि मेरी कोशिश है कि सचिन मंदिर के शिलान्यास के मौके पर उपस्थित रहें।

Celebs line up in Sachin party in Mumbai

Sachin Tendulkar
जेएनएन, मुंबई। क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की ओर से सोमवार रात दी गई पार्टी में राजनीति, सिनेमा और खेल जगत की कई मशहूर हस्तियां शामिल हुईं। पार्टी में पूरी टीम इंडिया भी मौजूद थी।
शनिवार को तेंदुलकर ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का 200वां और अंतिम टेस्ट मैच खेला था। इसी के साथ उन्होंने आंसुओं के साथ क्रिकेट को अलविदा कह दिया। रविवार के दिन वह इंटरव्यू देते रहे, जबकि सोमवार की शाम सचिन के लिए बेहद खास थी। सचिन ने सभी मित्रों और परिचितों का शुक्रिया अदा करने के लिए डिनर पार्टी रखी, जिसमें शामिल होने के लिए कई हस्तियां आईं। इस पार्टी में अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, आमिर खान, किरण राव, राहुल बोस और मधुर भंडारकर जैसी फिल्मी हस्तियां पहुंचीं। राजनीति के क्षेत्र से शरद पवार, राज ठाकरे सहित अन्य हस्तियों ने शिरकत की। पार्टी में उनके दोस्त ब्रायन लारा भी आए थे। इनके अलावा क्रिकेट जगत से सुनील गावस्कर, श्रीनाथ सहित अन्य हस्तियां मौजूद थीं।

Tradition of giving Bharat Ratna off: Shivanand Tiwari

Sachin Tendulkar
नई दिल्ली। टेस्ट क्रिकेट से धमाकेदार विदाई के बाद देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न पुरस्कार मिलने की घोषणा पर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अभी इस पुरस्कार पर ठीक से प्रतिक्रिया भी नहीं दे पाए थे कि इस पर बवाल मच गया।

जदयू नेता और सांसद शिवानंद तिवारी ने सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद को यह पुरस्कार देने की घोषणा क्यों नहीं की गई जबकि उनकी उपलब्धियां कहीं ज्यादा है।

तिवारी ने कहा कि मैं ''सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा से सहमत नहीं हूं। दरअसल ऐसा करके भारत रत्न को ही मजाक बना दिया गया है। अब इस पुरस्कार का कोई महत्व नहीं रह गया है।''

उन्होंने कहा, ''सचिन तेंदुलकर ने कोई मुफ्त में क्रिकेट नहीं खेला है। उन्होंने इसी खेल से हजारों करोड़ों रुपये कमाएं हैं। ऐसे में उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किये जाने की घोषणा समझ से परे है।'' तिवारी ने कहा कि भारत रत्न के लिए मेजर ध्यानचंद के नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया, यह सवाल बनता है।

Sachin dedicates Bharat Ratna to all mothers in the country

Sachin Tendulkar

मुंबई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके रिकाडरें के बादशाह सचिन तेंदुलकर ने एक बार फिर सबका दिल जीत लिया। मास्टर बल्लेबाज ने रविवार को अपना भारत रत्न देश की सभी मांओं को समर्पित किया। सचिन ने वानखेड़े स्टेडियम में अपना 200वां टेस्ट खेलकर भावुक विदाई लेने के 24 घंटे बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'मैंने शनिवार को कहा था कि भारत रत्न मेरी मां के लिए है क्योंकि उन्होंने मेरे लिए कई बलिदान किए हैं। बचपन में आप जीवन को समझ नहीं पाते, लेकिन बड़े होने पर इसका एहसास होता है। भारत रत्न सिर्फ मेरी मां के लिए नहीं है, बल्कि भारत की लाखों माताओं के लिए हैं जो अपने बच्चों के लिए कई कुर्बानियां देती हैं। इसीलिए मैं यह देश की उन तमाम माओं को समर्पित करना चाहूंगा।'
उन्होंने कहा, 'मैं काफी गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। क्रिकेट में 24 साल तक मेरे योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। मैंने हर बार बेहतर प्रदर्शन की कोशिश की और लोगों की सराहना से मुझे अगली बार और बेहतर करने की प्रेरणा मिली। यह पुरस्कार वास्तव में समूचे देश का है। मैं पूरे खेल जगत की ओर से यह सम्मान ले रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि मेरे बाद बाकी खिलाड़ियों के लिए भी दरवाजे खुलेंगे।' उन्होंने भारत रत्न पाने वाले वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव को भी बधाई दी। 

सचिन ने कहा कि मेरे लिए सबसे अहम 24 साल खेलना रहा। इस दौरान अलग-अलग चुनौतियां आईं लेकिन परिवार, दोस्तों, खिलाड़ियों और कोचों का साथ हमेशा बना रहा। यह एक स्वप्निल सफर था। कल रात बैठकर जब मैं सोच रहा था तो विश्वास नहीं हुआ कि अब कभी क्रिकेट नहीं खेलना है। लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि कहीं न कहीं खेल सकता हूं। अपने करियर को विराम देने का यह सबसे सही समय था। मुझे अपने करियर में कहीं कोई अफसोस नहीं है। मैंने सही वक्तपर क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया। मेरे लिए यह बहुत ही मजेदार रहा। क्रिकेट हमेशा मेरे लिए ऑक्सीजन की तरह रही। उन्होंने यह भी कहा कि वह टीम का हिस्सा हों या न हों, देश उनके लिए हमेशा सबसे पहले रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह देश की जीत के लिए कोशिश और दुआ करते रहेंगे।

मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि मैंने अपने जीवन के 40 साल में से 30 साल केवल क्रिकेट खेली। यानि मेरे जीवन का 75 फीसदी हिस्सा क्रिकेट से ही जुड़ा रहा। मेरा क्रिकेट के साथ जुड़ाव कहीं न कहीं बना रहेगा। आगे मैं क्या करना चाहूंगा इसके लिए मुझे अभी समय लगेगा। रिटायर हुए अभी 24 घंटे ही हुए है। आराम करने के लिए 24 दिन तो मिलने ही चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मैं रोजाना की तरह सुबह सवा छह बजे उठा और अपने काम शुरू किए। लेकिन तभी मुझे लगा कि मुझे मैच तो खेलने जाना ही नहीं है। आराम से अपने लिए चाय बनाई और अंजलि के साथ शानदार नाश्ता किया। यह एक रिलेक्स सुबह थी। मैंने अपने सभी शुभचिंतकों के एसएमएस के जवाब दिए।

उन्होंने कहा कि मेरे लिए 2011 में विश्व कप जीतने और कल का पल सबसे खास रहा। मुझे विश्व कप जीतने के लिए 22 साल तक लंबा इंतजार करना पड़ा। विश्व कप जीतना मेरे लिए खास पल रहे। कल का दिन भी बहुत विशेष था। मैं नहीं जानता कि मैं इसके लिए क्या कहूं। मैं इसके लिए सिर्फ बड़ा थैंक्यू कहना चाहता हूं।'