Showing posts with label retirement. Show all posts
Showing posts with label retirement. Show all posts

Saturday, 31 January 2015

ड्वेन ब्रावो ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा

वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर ड्वेन ब्रावो ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। वो टेस्ट टीम से पिछले चार वर्षों से बाहर चल रहे थे। हालांकि वो वनडे और टी-20 क्रिकेट खेलते रहेंगे। हाल ही में ब्रावो को वर्ल्ड कप के लिए वेस्टइंडीज की टीम में जगह नहीं दिया गया था।

31 वर्ष के ब्रावो ने अपने टेस्ट करियर में कुल 40 मैच खेले थे। इनमें उन्होंने 31 की औसत से 2,200 रन बनाए थे। टेस्ट करियर में उनके नाम तीन शतक भी है। टेस्ट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा 113 जो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2005 में बनाया था। गेंदबाज के तौर पर टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 86 विकेट भी हैं। उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए अपना आखिरी टेस्ट श्रीलंका के खिलाफ वर्ष 2010 में खेला था।

Tuesday, 7 January 2014

KP rejects retirement talks, says determined to regain Ashes

नई दिल्ली। इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज केविन पीटरसन ने एशेज सीरीज में इंग्लैंड की 0-5 से मिली शर्मनाक हार के बाद साफ कर दिया है कि वो इतनी जल्दी हार नहीं मानने वाले और एशेज सीरीज दोबारा हासिल करके ही दम लेंगे। इसी के साथ दुनिया भर में हो रही आलोचनाओं के बीच उन्होंने एक बार फिर इशारा कर दिया कि अभी उनका संन्यास का कोई इरादा नहीं है।

पीटरसन ने ट्विटर के जरिए कहा, '5-0 से हारना और ऊपर से मेरे द्वारा खुद भी रन ना बनाना बेहद निराशाजनक रहा। एक टॉप क्लास टीम के खिलाफ बेहद कठिन दौरा था ये। मैं इंग्लैंड के सभी फैंस का शुक्रिया करना चाहता हूं जिन्होंने हमें समर्थन दिया और मैं 2015 में एशेज दोबारा हासिल करने की ओर प्रतिबद्ध हूं।' गौरतलब है कि केपी ने एशेज सीरीज में बेहद निराश करने वाला प्रदर्शन दिया, उनके बल्ले से पांच टेस्ट मैचों में 29.40 की औसत से महज 294 रन ही निकले। इस प्रदर्शन के बाद दुनिया भर में उनकी आलोचना की गई और कोच एंडी फ्लावर तक ने एलान कर दिया कि अब कठोर फैसले लेने का समय है, जो टीम में छंटनी की ओर एक बड़ा इशारा माना जाता है, जिस रडार पर पीटरसन सहित वो सभी इंग्लिश खिलाड़ी रहेंगे जो हार का सबसे बड़ा कारण बने।

Sunday, 5 January 2014

2014, Ten Years of Manmohan Singh Exile


अमृतसर [रमेश शुक्ला 'सफर']। मेरे 'मोहन' ने मेरी सुन ली। कृष्ण भक्त हूं, बचपन से ही मोहन के साथ मन की बातें करता आया हूं। बचपन, जवानी मोहन के साथ बीती है। एक मोहन भगवान कृष्ण तो दूजे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह [मेरा मोनू]। बीते 12 दिसंबर को मंदिर घर में मोहन से प्रार्थना की थी कि 'हे मोहन'! मेरे मनमोहन को सद्बुद्धि दे। दस साल हो चले हैं, मिला ही नहीं हमसे। अच्छा तो यही है कुर्सी छोड़े दे, उम्र भी तो हो चली है। हमारे लिए वो तो 'वनवास' ही चला गया। 

मैं धन्य हूं कि मेरी मोहन ने भी सुनी और मनमोहन ने भी। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दस साल बाद कहा कि 'अब प्रधानमंत्री मैं नहीं'। अब कृष्ण भगवान से यही कहता हूं कि 'हे मोहन', खुश रहे मनमोहन' खुश रखना उसे हमेशा। यह प्रार्थना वाले 'हाथ' दोस्ती के वो हाथ हैं जिन्हें राजनीति से सरोकार नहीं, वो दोस्ती का 'फूल' खिलाते हैं। हम और 'आप' की बातों में नहीं आते। यह हाथ हैं प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के गहरे मित्र व सहपाठी पठानकोट के विक्रम सिंह के। 

विक्रम सिंह प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के वहीं सहपाठी है, जिन्होंने दैनिक जागरण के माध्यम से डॉ. मनमोहन सिंह से कुर्सी छोड़ने की सलाह बीते 13 दिसंबर को दी थी। 'मोनू! छोड़ दो कुर्सी, बाकी मर्जी 'आप' की' दैनिक जागरण में प्रकाशित हुई तो चैनल दौड़े थे।

विक्रम सिंह हंसते हुए कहते हैं कि 'अब कहीं मेरे मोनू को लेकर 'आप' यह मत छाप देना की वो राजनीति के काबिल नहीं हैं। वो हैं काबिल, लेकिन स्वच्छ, निष्पक्ष राजनीति के। दस साल तक मेरा मोहन बोला, लेकिन 'मन' से नहीं। मोहन ने क्या नहीं दिया देश को। मोहन ने तन, मन, धन सब कुछ अर्पण किया है देश के लिए।
मैं जानता हूं कि वो कितने ईमानदार हैं, शायद 'आप' भी नहीं। खुशी है कि मोनू! कालेज के दिनों में कहा करता था कि विक्रम, देखना एक दिन तेरा मोनू तुझे कुछ बनकर दिखाएगा, सच हुआ, मोनू से कब वो डॉ. मनमोहन सिंह हुआ, और कब नोटों पर उसके हस्ताक्षर चलने लगे और कब प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे। जिंदगी जैसे पलों में गुजर गई'। इतने के साथ ही फोन पर ही विक्रम सिंह भावुक हो गए। 

Thursday, 26 December 2013

7 players who left Cricket in 2013


(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। क्रिकेट इतिहास में शायद साल 2013 एक ऐसे साल के रूप में याद किया जाएगा जहां मैदान पर कई बार भावनाओं का तूफान आया, करोड़ों आंखें नम हुईं और ना जाने कितने क्रिकेट से या उसके कुछ प्रारूपों से सदा के लिए अलविदा कहकर चल दिए। यकीन नहीं होता कि एक साल में तकरीबन 25 क्रिकेट सितारों ने अपने फैंस की आंखें नम छोड़ दीं। हम आपको रूबरू कराते हैं उन 7 लम्हों से, यानी उन 7 खिलाड़ियों के संन्यास से, जो शायद क्रिकेट फैंस कभी नहीं भूल पाएंगे, इनमें आपका फेवरेट कौन रहा?... 

1. सचिन तेंदुलकर (भारत):
साल 2013 के अंत में वो हुआ जिसकी कल्पना शायद ही कभी किसी ने की थी। 1989 से 2013 तक तकरीबन 24 साल क्रिकेट की पिच पर राज करने वाला इस खेल के सबसे जगमगाते कोहिनूर सचिन रमेश तेंदुलकर ने मैदान को अलविदा कह दिया। पहले वनडे से, फिर टी20 से और आखिर में वानखेड़े स्टेडियम पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 200वां टेस्ट खेलकर एक भावुक भाषण के जरिए सचिन ने करोड़ों आंखें नम कर दीं और इस खेल को अलविदा कहा। टेस्ट वनडे और टी20 मिलाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तकरीबन 34,357 रन और कुल 100 शतक जड़ने वाले इस खिलाड़ी का संन्यास क्रिकेट इतिहास का सबसे दिलचस्प संन्यास कहा जा सकता है। 

2. रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया):
ऑस्ट्रेलिया के सफलतम कप्तान रिकी पोंटिंग ने 2013 में ही क्रिकेट के सभी प्रारूपों व प्रथम श्रेणी क्रिकेट को भी अलविदा कहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों में 27483 रन बनाए जिसमें 71 शतक शामिल रहे। ऑस्ट्रेलिया को दो विश्व कप हासिल कराने वाले इस कप्तान व दिग्गज खिलाड़ी ने करोड़ों क्रिकेट फैंस की आंखें नम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

3. राहुल द्रविड़ (भारत):
टीम इंडिया की वो दीवार जो शायद कभी किसी के सामने झुकी। एक ऐसा खिलाड़ी जिसकी तकनीक की पूरी दुनिया कायल हुई और ना जाने भारत ने कितने मैच उनकी वजह से ही जीते। द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को तो 2012 में ही ऑस्ट्रेलिया दौरे के साथ अलविदा कह दिया था, लेकिन मैदान से विदाई उन्होंने आइपीएल से ली और अपने करोड़ों फैंस की आंखें नम कर दीं, क्योंकि आइपीएल-6 के फाइनल के बाद फैंस ने उन्हें दोबारा मैदान पर कभी नहीं देखा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तकरीबन 25 हजार रन और 48 जड़ने वाले इस दिग्गज का मैदान से अलविदा कहना भी भावुक लम्हों में से रहा। 

4. माइक हसी (ऑस्ट्रेलिया):
ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी व मिस्टर क्रिकेट के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने इसी साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा। जनवरी में उन्होंने अचानक अपने संन्यास की घोषणा की और सिडनी में श्रीलंका के खिलाफ आखिरी टेस्ट खेलकर फैंस को भावुक छोड़ दिया। सबने कहा कि उनमें काफी क्रिकेट बाकी था लेकिन वो टीम को बीच में छोड़कर चले गए। फिलहाल वो अब भी दुनिया की तमाम टी20 लीग खेल रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका संन्यास सबसे भावुक लम्हों में से रहा। हसी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 14,398 रन बनाए जिसमें 68 शतक शामिल रहे।

5. ग्रीम स्वान (इंग्लैंड):
इंग्लैंड के दिग्गज स्पिनर व उनके इतिहास के छठे सबसे सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज ग्रीम स्वान ने साल खत्म होते-होते अचानक एशेज सीरीज के बीच क्रिकेट को अलविदा कहने का मन बना लिया। सब हैरान थे, लेकिन एक खिलाड़ी मैदान छोड़ने का मन बना चुका था। कारण साफ नहीं था लेकिन विदाई अचानक हो चुकी थी। स्वान ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में सभी प्रारूप मिलाकर 410 विकेट हासिल किए और उन्हें इंग्लैंड के पिछले कुछ सालों में टेस्ट व वनडे में सर्वश्रेष्ठ टीमों में शुमार करने के बेहतरीन योगदान के लिए हमेशा जाना जाएगा।

6. शेन वॉर्न (ऑस्ट्रेलिया):
टेस्ट क्रिकेट में 708 विकेट, वनडे में 293 विकेट साफ करते हैं कि इस क्रिकेटर ने क्रिकेट इतिहास और कंगारू टीम में क्या भूमिका निभाई। वॉर्न ने यूं तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को 2007 में ही अलविदा कह दिया था लेकिन मैदान से उनकी आखिरी विदाई जनवरी 2013 में हुई जब उन्होंने अपने बिग बैश टी20 टूर्नामेंट मैच में आखिरी बार शिरकत की। मैदान पर मौजूद हजारों दर्शकों ने लेग स्पिन के इस बादशाह को आखिरी बार जलवा बिखेरते देखा और उन्हें सदा के लिए भावुक होते हुए मैदान से अलविदा कहा। 

7. जैक्स कैलिस (दक्षिण अफ्रीका):
साल के खत्म होते-होते क्रिकेट फैंस को कई भावुक लम्हों से दो-चार होना पड़ा और साल अंत होते-होते भी एक दिग्गज ने टेस्ट क्रिकेट के जरिए अपने संन्यास की राह बनाने का फैसला ले लिया। दक्षिण अफ्रीका व दुनिया के सबसे महान व सफल ऑलराउंडर जैक्स कैलिस ने भारत के खिलाफ डरबन में अपने करियर का आखिरी टेस्ट खेलने का फैसला किया और अब 2013 के बाद इस महानतम खिलाड़ी को हम कभी सफेद कपड़ों में नहीं देख सकेंगे। टेस्ट में 13,174 रन और 292 विकेट उनकी महानता को बयां करते हैं। 

2013 में संन्यास लेने वाले क्रिकेट खिलाड़ी (किसी भी प्रारूप से):
1. मैथ्यू होगार्ड (इंग्लैंड)
2. डेरेन मैडी (इंग्लैंड)
3. संजय बांगर (भारत)
4. थिलन समरवीरा (श्रीलंका)
5. ग्रीम स्वान (इंग्लैंड)
6. सइराज बहतुले (भारत)
7. माइक हसी (ऑस्ट्रेलिया)
8. पॉल हैरिस (दक्षिण अफ्रीका)
9. बेथ मॉर्गन (महिला क्रिकेटर, इंग्लैंड)
10. शेन वॉर्न (ऑस्ट्रेलिया)
11. लू विंसेंट (न्यूजीलैंड)
12. लीसा स्थालेकर (महिला क्रिकेटर, ऑस्ट्रेलिया)
13. रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया)
14. एंथोनी मैकग्रा (इंग्लैंड)
15. इयन ब्लैकवेल (इंग्लैंड)
16. जेम्स मार्शल (न्यूजीलैंड)
17. क्रिस मार्टिन (न्यूजीलैंड)
18. मैथ्यू सिंक्लेयर (न्यूजीलैंड)
19. रे प्राइज (जिंबॉब्वे)
20. काइल जार्विस (जिंबॉब्वे)
21. राहुल द्रविड़ (भारत)
22. स्टीव हार्मिसन (इंग्लैंड)
23. अजित अगरकर (भारत)
24. सचिन तेंदुलकर (भारत)
25. जैक्स कैलिस (दक्षिण अफ्रीका)

Source : Cricket News