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Friday, 15 November 2013

Tendulkar Hits a Majestic 74 As India Eye An Emphatic Win

Sachin Tendulkar
जागरण न्यूज नेटवर्क, मुंबई। करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के बीच अपने आखिरी मैच में शतक की आस जगा गए सचिन शुक्रवार को जब मैदान में उतरे तो उसी रंग में थे, जिसमें एक दिन पहले नजर आ रहे थे। स्टेडियम भी दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन के मुकाबले खचाखच भरा था। सचिन ने आते ही जल्दी-जल्दी दो चौके लगाकर उम्मीदों को पंख लगा दिए। कुछ ही समय बाद उन्होंने चौका लगाकर हॉफ सेंचुरी पूरी की और यह काम होते ही हजारों दर्शकों के साथ पत्नी अंजलि और मां रजनी ने भी राहत की सांस ली। अंजलि ने हाथ से कुछ इशारा किया मानो वह कह रही हों कि टिके रहो। बच्चों सारा और अर्जुन के चेहरे भी खिल उठे। आमिर खान खड़े होकर देर तक तालियां बजाते रहे। स्टेडियम का नजारा ऐसा था मानो मैदान पर सिर्फ सचिन ही सचिन हों। अपना 200वां और आखिरी टेस्ट मैच खेल रहे तेंदुलकर ने दिखाया कि वह आखिर क्यों जीनियस हैं?

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 24 साल पूरे करने वाले सचिन का खेल देखने आने वालों में शुक्रवार को कुछ और विशिष्ट नाम जुड़ चुके थे। इनमें खास थे राहुल गांधी और रितिक रोशन। सचिन शतक की ओर बढ़ते नजर आ रहे थे। 47वें ओवर में जब नरसिंह देवनारायण की पांचवीं गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर विरोधी टीम के कप्तान डेरेन सैमी के हाथों में समाई तो किसी को कुछ समझ नहीं आया। यहां तक कि खुद सैमी भी कुछ-कुछ हैरत में नजर आए। 

आउट की आवाज के साथ अंपायर की अंगुली उठते ही स्टेडियम में सन्नाटा छा गया। सभी के चेहरों पर एक ही भाव था और जिसका एक ही मतलब था कि ऐसे कैसे हो सकता है, लेकिन सचिन तो आउट हो चुके थे। स्टेडियम कुछ क्षणों के लिए सन्नाटे में डूब सा गया। अंजलि खड़ी हो गईं। मां रजनी और भाई अजित भावुक दिखने लगे और कोच रमाकांत अचरेकर की आंखों में आंसू झिलमिलाने लगे। अवाक से रह गए दर्शक सचिन को सलामी देने के लिए खड़े हो गए। पवेलियन की ओर लौटते सचिन ने भी उनका अभिवादन स्वीकार किया।
सचिन ने 118 गेंदों पर 12 चौकों की मदद से 74 रन बनाए। किसी को नहीं पता कि उनकी आंखों में आंसू थे या नहीं, लेकिन जब वह पवेलियन लौट रहे थे तो करोड़ों भारतीयों की आंखें जरूर नम थीं। दर्शकों के दिल में यह एहसास था कि शायद अब सचिन इस तरह बैटिंग करते कभी नहीं दिखेंगे। 

भारत के पास खेल समाप्त होने तक 270 रन की बढ़त है और उसे जीत दर्ज करने के लिए केवल सात विकेट की दरकार है। ऐसे में भारत की और फिर सचिन की दोबारा बल्लेबाजी आना असंभव है। वह जब मैदान के बाहर कदम रख रहे थे तो बॅाल ब्वाय की भूमिका में सामने खड़ा उनका बेटा अर्जुन मुग्ध होकर तालियां बजा रहा था।
''मैंने भगवान को विदा होते हुए देखा है।''
-एक तख्ती पर लिखी इबारत
दूसरा टेस्ट : दूसरा दिन
वेस्टइंडीज (पहली पारी) : 182
भारत (पहली पारी) : 495
पुजारा 113
रोहित 111*
सचिन 74
वेस्टइंडीज (दूसरी पारी) : 43/3
270 रन से पिछड़ी, सात विकेट हाथ में 
 

Thursday, 14 November 2013

Sachin Tendulkar on crease, India on top in Mumbai Test

Sachin Tendulkar
लाइव: 'भगवान' शतक से चूके, 74 पर आउट, देवनारायण ने रचा इतिहास
मुंबई। वानखेड़े स्टेडियम पर सचिन तेंदुलकर की पारी 74 रनों से आगे नहीं जा सकी। सचिन पहले दिन के अंत तक और दूसरे दिन की पूरी बल्लेबाजी में लय में दिखाई दिए लेकिन जब पूरा देश एक आखिरी शतक की आस लगाए बैठा था तब नरसिंह देवनारायण ने एक बेहतरीन गेंद पर सचिन को स्लिप पर कप्तान डेरेन सैमी के हाथों कैच आउट करा दिया। शायद देवनारायण के जीवन का यह सबसे खास विकेट बन चुका है। समाचार लिखे जाने तक भारत ने 3 विकेट पर 234 बना लिए हैं। पिच पर चेतेश्वर पुजारा अर्धशतक जमाकर विराट कोहली के साथ टिके हुए हैं।

वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट के पहले दिन स्पिनर्स ने जहां कैरेबियाई टीम को 182 रनों पर ढेर कर दिया वहीं, पहला दिन का अंत और दूसरे दिन की शुरुआत पूरी तरह से सचिनमय रही। 38 के निजी स्कोर पर पहले दिन नाबाद रहने वाले सचिन ने दूसरे दिन की सुबह अपना पचासा पूरा करके फैंस को झूमने का मौका दिया। उन्होंने 91 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया और इस दौरान 9 चौके लगाए। यह सचिन के टेस्ट करियर का 68वां अर्धशतक रहा।

पहले दिन टीम इंडिया के ओपनर्स ने भारत को सधी हुई शुरुआत देने के बाद अपने विकेट तो गंवा दिए लेकिन नतीजतन 'क्रिकेट के भगवान' व अपना आखिरी टेस्ट खेल रहे सचिन तेंदुलकर पिच पर उतरे। स्टेडियम पर भारतीय ओपनर्स के आउट होने पर शायद इतनी खुशी फैंस के चेहरे पर कभी नहीं देखी गई थी। इससे पहले, पहले दिन दूसरे सत्र में ही वेस्टइंडीज की पारी समेटने के बाद भारतीय टीम ने सधी हुई शुरुआत की और पहले विकेट की साझेदारी में शिखर धवन (33) और मुरली विजय (43) ने 77 रन बनाए। धवन को शिलिंगफोर्ड ने चंद्रपॉल के हाथों आउट कराया। धवन ने 28 गेंदों का सामना करते हुए सात चौके लगाए। धवन के बाद विजय भी उसी ओवर में डेरेन सैमी को कैच थमा बैठे। विजय ने 55 गेंदों में आठ चौके लगाए।

टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण चुनने के अपने निर्णय को कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने सही साबित करते हुए प्रज्ञान ओझा और रविचंद्रन अश्रि्वन ने वेस्टइंडीज की पहली पारी सस्ते में समेट दी। वेस्टइंडीज के लिए कीरेन पॉवेल (48) ने सर्वाधिक रन बनाए, जबकि अपना 150वां टेस्ट मैच खेल रहे शिवनारायण चंद्रपॉल 25 रन पर आउट हुए। वेस्टइंडीज के लिए शुरुआत में सब ठीक लग रहा था क्योंकि पॉवेल और क्रिस गेल लय में दिख रहे थे। लेकिन समी ने कोलकाता के अपने शानदार सफर को जारी रखते हुए 25 के कुल योग पर गेल को अपने जाल में फंसा लिया। गेल 11 रन के निजी योग पर स्लिप में रोहित शर्मा के हाथों लपके गए। वेस्टइंडीज के लिए यह बड़ा झटका था, लेकिन डेरेन ब्रावो (29) और पॉवेल ने दूसरे विकेट के लिए 61 रनों की साझेदारी करते हुए इसकी भरपाई करने की कोशिश की। दोनों काफी अच्छा खेल रहे थे, लेकिन अश्रि्वन की फिरकी पर ब्रावो बल्ला लगा बैठे और धौनी ने उन्हें लपकने में कोई कोताही नहीं बरती। ब्रावो ने 63 गेंदों पर पांच चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट 86 के कुल योग पर गिरा।

लंच तक दो विकेट गंवाने वाले वेस्टइंडीज ने पहले दिन के दूसरे सत्र में आठ विकेट गंवा दिए। पॉवेल ने 80 गेंदों में चार चौके और एक छक्का लगाया। चंद्रपॉल और सैमुअल्स के बीच दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी हुई। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 43 रन जोड़े। सैमुअल्स के जाने के बाद तो जैसे वेस्टइंडीज की पारी ताश के पत्तों का महल साबित हुई और आखिरी छह बल्लेबाज मिलकर 42 रन और जोड़ सके। वेस्टइंडीज के आखिरी चार बल्लेबाजों में तो तीन बिना खाता खोले लौट गए। भुवनेश्वर कुमार और मुहम्मद शमी को एक-एक विकेट हासिल हुए। दो मैचों की सीरीज में भारत 1-0 से आगे है।

20 years back suhas saw sachin play his first at wankhede, now can only Hear

Sachin Tendulkar
मुंबई। 20 साल पहले ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व स्कोर कीपर थाणे के सुहास मराठे ने जब वानखेड़े स्टेडियम में कदम रखा था, तब सचिन इस मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच खेलने उतरे थे (19-23 फरवरी,1993)। इंग्लैंड के खिलाफ हुए उस मैच को सुहास ने देखा था और वो आज तक उसे नहीं भूल पाएंगे, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि आज जब सचिन वानखेड़े पर अपने जीवन का आखिरी टेस्ट खेलने उतरे हैं तब सुहास उसे देख नहीं सकते, बस सुन सकते हैं, क्योंकि अब उनकी नजर नहीं रही।

सुहास मराठे एक क्रिकेट स्टैटिस्टिशियन हैं। उनकी दाईं आंख गंभीर रूप के ग्लूकोमा का शिकार हुई जबकि उन्हें नहीं पता चला कि कब देखते-देखते उनकी बाईं आंख ने भी रोशनी गंवा दी। उन्हें आज गर्व है कि उन्होंने सचिन के उनके घरेलू मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट की स्कोरिंग की थी हालांकि उतना ही दुख भी कि आज वह उसी मैदान पर उनके आखिरी टेस्ट को देख नहीं पा रहे, बस कमेंट्री सुन सकते हैं। सुहास कहते हैं, 'हां, मुझे अफसोस है। मैंने उन्हें (सचिन) कितनी बेहतरीन पारियों को खेलते हुए देखा। मैं 1988 में उस समारोह का हिस्सा भी बना था जब सचिन और कांबली को उनके स्कूल करियर में विनोद कांबली के साथ एतिहासिक 664 रन की पार्टनरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। मैंने 1993 के वानखेड़े के उस टेस्ट मैच में स्कोरिंग करते हुए उनकी इंग्लैंड के खिलाफ उस 78 रनों की पारी को देखा था।'

62 वर्षीय मराठे 1999 तक आराम से टीवी देखते थे लेकिन फिर उनकी आंख में दिक्कतें शुरू हो गईं, कई ऑपरेशन असफल रहे और उसके बाद हौसला रखते हुए सुहास ने यह तय किया कि वह ऐसे ही जिंदगी को जिंदादिली से जीएंगे और क्रिकेट का प्रेम व अपने शौक जारी रखेंगे। सुहास सचिन के नाम से जारी किए गए डाक टिकट को लेकर भी काफी उत्साहित हैं क्योंकि वह खुद भी टिकट इकट्ठा करने का शौक रखते हैं और इस टिकट को भी अपने पास रखना चाहेंगे। सुहास के मुताबिक सचिन ने जो कीर्तिमान हासिल किए हैं उसे अब कोई पार नहीं कर सकेगा।
(मिड-डे)


Sachin Tendulkar on crease, India on top in Mumbai Test

Sachin Tendulkar
मुंबई। वानखेड़े स्टेडियम पर वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट के पहले दिन स्पिनर्स ने जहां कैरेबियाई टीम को 182 रनों पर ढेर कर दिया वहीं, टीम इंडिया के ओपनर्स ने भारत को सधी हुई शुरुआत देने के बाद अपने विकेट तो गंवा दिए लेकिन नतीजतन 'क्रिकेट के भगवान' व अपना आखिरी टेस्ट खेल रहे सचिन तेंदुलकर पिच पर उतर गए। स्टेडियम पर भारतीय ओपनर्स के आउट होने पर शायद इतनी खुशी फैंस के चेहरे पर कभी नहीं देखी गई थी। सचिन तेंदुलकर 38 पर नाबाद दूसरे दिन पिच पर उतरे हैं, जबकि उनके साथ चेतेश्वर पुजारा (नाबाद 34) उनका साथ दे रहे हैं। भारत ने अब तक 2 विकेट के नुकसान पर 157 रन बना लिए हैं।

पहले दिन के अंत तक मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने 6 चौके लगाए और वह शानदार फॉर्म में दिखाई दिए। उन्होंने अपने हर पुराने शॉट की झलक बखूबी पेश की वह 73 गेंदों तक बेहतरीन संघर्ष किया और चेतेश्वर पुजारा उनका लगातार बढि़या साथ दे रहे हैं। इससे पहले, पहले दिन दूसरे सत्र में ही वेस्टइंडीज की पारी समेटने के बाद भारतीय टीम ने सधी हुई शुरुआत की और पहले विकेट की साझेदारी में शिखर धवन (33) और मुरली विजय (43) ने 77 रन बनाए। धवन को शिलिंगफोर्ड ने चंद्रपॉल के हाथों आउट कराया। धवन ने 28 गेंदों का सामना करते हुए सात चौके लगाए। धवन के बाद विजय भी उसी ओवर में डेरेन सैमी को कैच थमा बैठे। विजय ने 55 गेंदों में आठ चौके लगाए।

टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण चुनने के अपने निर्णय को कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने सही साबित करते हुए प्रज्ञान ओझा और रविचंद्रन अश्रि्वन ने वेस्टइंडीज की पहली पारी सस्ते में समेट दी। वेस्टइंडीज के लिए कीरेन पॉवेल (48) ने सर्वाधिक रन बनाए, जबकि अपना 150वां टेस्ट मैच खेल रहे शिवनारायण चंद्रपॉल 25 रन पर आउट हुए। वेस्टइंडीज के लिए शुरुआत में सब ठीक लग रहा था क्योंकि पॉवेल और क्रिस गेल लय में दिख रहे थे। लेकिन समी ने कोलकाता के अपने शानदार सफर को जारी रखते हुए 25 के कुल योग पर गेल को अपने जाल में फंसा लिया। गेल 11 रन के निजी योग पर स्लिप में रोहित शर्मा के हाथों लपके गए। वेस्टइंडीज के लिए यह बड़ा झटका था, लेकिन डेरेन ब्रावो (29) और पॉवेल ने दूसरे विकेट के लिए 61 रनों की साझेदारी करते हुए इसकी भरपाई करने की कोशिश की। दोनों काफी अच्छा खेल रहे थे, लेकिन अश्रि्वन की फिरकी पर ब्रावो बल्ला लगा बैठे और धौनी ने उन्हें लपकने में कोई कोताही नहीं बरती। ब्रावो ने 63 गेंदों पर पांच चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट 86 के कुल योग पर गिरा।

लंच तक दो विकेट गंवाने वाले वेस्टइंडीज ने दिन के दूसरे सत्र में आठ विकेट गंवा दिए। पॉवेल ने 80 गेंदों में चार चौके और एक छक्का लगाया। चंद्रपॉल और सैमुअल्स के बीच दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी हुई। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 43 रन जोड़े। सैमुअल्स के जाने के बाद तो जैसे वेस्टइंडीज की पारी ताश के पत्तों का महल साबित हुई और आखिरी छह बल्लेबाज मिलकर 42 रन और जोड़ सके। वेस्टइंडीज के आखिरी चार बल्लेबाजों में तो तीन बिना खाता खोले लौट गए। भुवनेश्वर कुमार और मुहम्मद शमी को एक-एक विकेट हासिल हुए। दो मैचों की सीरीज में भारत 1-0 से आगे है।