Showing posts with label Run batted in. Show all posts
Showing posts with label Run batted in. Show all posts

Thursday, 14 November 2013

October WPI Inflation Rises to 7 Percent

WPI inflation
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो] आसमान छूते प्याज और सब्जियों की कीमतों ने देश में महंगाई को ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। अक्टूबर में थोक मूल्यों पर आधारित महंगाई की दर आठ महीने के ऊंचे स्तर सात फीसद पर पहुंच गई। इस साल सितंबर में यह 6.46 फीसद थी। बीते साल अक्टूबर में मुद्रास्फीति की यह दर 7.32 फीसद पर थी। बीते सोमवार को आए आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में खुदरा महंगाई की दर सात माह की ऊंचे स्तर 10.1 फीसद पर रही।

सरकार की ओर से गुरुवार को थोक मूल्यों पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी किए गए। इन आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में खाने-पीने की चीजों से जुड़ी महंगाई दर 18.19 फीसद पर जा पहुंची है। सामान्य महंगाई की दर में वृद्धि को लेकर रिजर्व बैंक (आरबीआइ) पहले ही अनुमान लगा चुका है। सरकार की ओर से खाद्य उत्पादों की महंगाई रोकने के उपाय नहीं होने को उद्योग चिंता की बड़ी वजह मान रहा है। इसके विपरीत योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया मानते हैं कि महंगाई की दर जल्द ही नीचे आएगी। खाद्य उत्पादों की आपूर्ति में जल्द सुधार होगा।

अक्टूबर में इस महंगाई दर को बढ़ाने में सब्जियों और प्याज के थोक मूल्य प्रमुख रहे। सब्जियों की कीमतें पिछले साल के अक्टूबर के मुकाबले 78.38 फीसद बढ़ीं तो अकेले प्याज के दाम 278.21 फीसद ऊपर चढ़ गए। आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन ने बुधवार को ही अपने एक बयान में खाद्य उत्पादों की महंगाई की बड़ी चिंता बताया था। इसी महंगाई के चलते ही केंद्रीय बैंक को ब्याज की दरों में वृद्धि करनी पड़ी है।

खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ मैन्यूफैक्चरिंग उत्पादों में भी महंगाई का रुख ऊपर की ओर बना हुआ है। इन उत्पादों की महंगाई दर सितंबर के 2.03 से बढ़कर अक्टूबर में 2.5 फीसद हो गई। वैसे, मोटे अनाज और चावल की कीमत में अक्टूबर में मामूली कमी आई है, लेकिन गेहूं के दाम 7.88 फीसद बढ़ गए।

Wednesday, 13 November 2013

RBI pegs CAD at USD 56 bn; Re recovers after Rajan's pep Talk

RBI
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ऐसे समय जब डॉलर के मुकाबले रुपया फिर कमजोर होना लगा है। आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन ने अर्थव्यवस्था की उम्मीदों भरी तस्वीर पेश करने की कोशिश की है। निर्यात और औद्योगिक क्षेत्र के सकारात्मक आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष चालू खाते में घाटा (सीएडी) 56 अरब डॉलर से ज्यादा का नहीं रहेगा। हालात पूरी तरह से काबू में हैं। इसलिए रुपये में और गिरावट की कोई वजह नहीं है। तरलता बनाए रखने के लिए आरबीआइ अगले हफ्ते बैंकिंग प्रणाली में 8,000 करोड़ रुपये की नकदी छोड़ेगा।

रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के गवर्नर के बयान का असर बाजार पर भी पड़ा है। पिछले पांच कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 41 पैसे मजबूत होकर 63.31 पर बंद हुआ है। राजन ने सीएडी (देश से विदेशी मुद्रा के बाहर जाने और बाहर से यहां आने के बीच का अंतर) को लेकर जो आस बंधाई है वह वित्त मंत्रालय के आंकड़ों से भी बेहतर है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने हाल तक इसके 70 अरब डॉलर होने की बात कह रहे थे। 

पिछले दो महीनों के निर्यात को देखकर इसके 60 अरब डॉलर होने की बात कही जा रही थी। राजन का कहना है, 'इस वर्ष सीएडी 56 अरब डॉलर होगा, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का तीन फीसद है और पिछले वर्ष के मुकाबले 32 अरब डॉलर कम होगा।'

जानकारों का कहना है कि चालू खाते का घाटा बढ़ने की वजह से ही रुपये पर दबाव बढ़ा था। सीएडी को कम करने के लिए सरकार ने सोने के आयात पर काफी अंकुश लगा दिया है। राजन ने इस बारे में कहा कि सोने पर अंकुश लगा रहेगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इससे सोने की तस्करी बढ़ी है। आंकड़ों के जरिये रघुराम ने साबित किया है कि अगर देश में कोई विदेशी निवेश नहीं आए तब भी सरकार के लिए बाहर जा रहे डॉलर के भुगतान में कोई परेशानी नहीं आने वाली।

राजन के मुताबिक, आने वाले दिनों में ब्याज दरों का रुख पूरी तरह से महंगाई दर और रुपये की कीमत पर निर्भर करेगी। जहां तक महंगाई का सवाल है, कम मांग, बेहतर खाद्य आपूर्ति और आरबीआइ की तरह से उठाए गए कदमों का असर जल्द दिखाई देगा। इससे महंगाई में कमी आएगी। निकट भविष्य में खाद्य उत्पादों व ईंधन की कीमत में वृद्धि के असर पर भी रिजर्व बैंक की नजर रहेगी। 

राजन ने उम्मीद जताई है कि निर्यात बढ़ने, बेहतर मानसून होने, औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार बढ़ने और बिजली की स्थिति में सुधार की वजह से दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च, 2013-14) में आर्थिक विकास दर भी बेहतर रहेगी।

Source- Business Hindi News

Sunday, 10 November 2013

Clean Currency Policy: RBI Rule from 1st JANUARY 2014?

clean currency policy

आगरा, जागरण संवाददाता। रुपये पर गिनती, किसी का नाम या अन्य आंकड़ा लिखने की आदत हो तो तत्काल छोड़ दीजिए। भारतीय रिजर्व बैंक के नए मानकों के अनुसार अगले वर्ष एक जनवरी से नोट पर कुछ भी लिखा तो इसे रद्दी माना जाएगा। ये नोट न तो बाजार में चलेगा और न ही इसे बैंक स्वीकार करेगा।
2014 की शुरुआत से आरबीआइ क्लीन नोट पॉलिसी को अनिवार्य करने जा रहा है। भारतीय स्टेट बैंक के मंडलीय कार्यालय के अधिकारी ने बताया कि फंड सेटलमेंट लिंक ऑफिस से उन्हें निर्देश मिले हैं कि सभी शाखाओं को आरबीआइ की इस पॉलिसी के बारे में बता दिया जाए। उनके पास आने वाले कैश में से ऐसे नोटों को अलग कर लिया जाए, जिन पर कुछ लिखा हो या पिन लगी हो। ऐसे नोट दोबारा जारी नहीं किए जाएंगे। ग्राहकों को नए और साफ-सुथरे नोट ही मिलेंगे। इससे पहले आरबीआइ ने भारतीय करेंसी को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए सात नवंबर 2001 को क्लीन नोट पॉलिसी लागू की थी। लेकिन इसका कड़ाई से पालन होने पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि बाजार में लिखे हुए नोटों की संख्या बहुत ज्यादा है।

Wednesday, 6 November 2013

People Receiving Fake Emails by Dr. Raghuram Rajan

RBI

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। इंटरनेट के जरिये आम जनता की आंख में धूल झोंक कर पैसा लूटने वाले गिरोहों की पौ-बारह हैं। अब तो इनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के नए गवर्नर रघुराम राजन को भी हथियार बना लिया है। पिछले दो-तीन दिनों के भीतर हजारों भारतीयों को आरबीआइ गवर्नर की तरफ से फर्जी मेल भेजे गए हैं। इनमें करोड़ों रुपये की लॉटरी जीतने की सूचना दी गई है। इंटरनेट के जरिये धोखाधड़ी करने वाले इन गिरोहों की बढ़ी सक्रियता से सरकारी एजेसियां भी सकते में हैं।
आरबीआइ के नए गवर्नर का नाम लेकर ईमेल के जरिये फ्रॉड करने वाले गिरोहों की इस हरकत से साफ है कि इन पर लगाम लगाने की सारी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। दो माह पूर्व अगस्त में ही रिजर्व बैंक ने इस समस्या के समाधान के लिए देश के तमाम बैंकों, सुरक्षा एजेंसियों और अन्य संबंधित विभागों की उच्चस्तरीय बैठक में बेहतर तालमेल बनाने का एजेंडा तैयार किया था। लेकिन आम जनता को लूटने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
आरबीआइ के क्षेत्रीय निदेशक दीपक सिंघल ने दैनिक जागरण को बताया कि पहले नाइजीरिया के गिरोह ज्यादा सक्रिय थे, लेकिन अब भारतीय भी इस गोरखधंधे में जुट गए हैं। इससे सिर्फ आम जनता में जागरूकता फैला कर ही बचा जा सकता है। इन धोखाधड़ियों पर नजर रखने के लिए वित्त मंत्रालय के भीतर गठित विशेष प्रकोष्ठ के अधिकारी मानते हैं कि ये गिरोह सरकारी एजेंसियों से भी ज्यादा तेज हैं। प्रकोष्ठ ने वर्ष 2010 में ऐसे गिरोहों की गतिविधियों की निगरानी कर एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें बैंकों को ज्यादा सतर्कता बरतने को कहा गया था, लेकिन स्थिति में खास बदलाव नहीं आया है।
रिजर्व बैंक की हाल ही में इस संकट पर हुई बैठक में यह पता चला कि हालात से निपटने के लिए बैंकों के पास कोई नीति ही नहीं है। बैंकों और पुलिस एजेंसियों के बीच तालमेल बिल्कुल ही अभाव है। अब समस्या से निपटने के लिए जांच एजेंसियों और बैंकों को नए निर्देश दिए गए हैं।

Source- News in Hindi