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Tuesday, 12 April 2016

एक हादसा और दो देशः 6 साल बाद भी है स्मोलेंस्क के भेद खुलने का इंतजार

 स्मोलेंस्क हवाई हादसे की पोलैंड 6वीं बरसी मना रहा है। लेकिन आज छ साल बाद भी उस हादसे को लेकर कई कहानियां सामने आ रही हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए ऐसी कहानियों को बुना जा रहा है जिससे लोगों के मन में एक तरह की उत्सुकता बनी रहे।

अप्रैल 2010 में वारसा से पश्चिम रसिया की उड़ान पर पोलैंड का विमान TU-154M स्मोलेंस्क की सीमा में हादसे का शिकार हो गया था। विमान में पोलैंड के राष्ट्रपति लेक कांस्की और उनके शीर्ष अधिकारियों समेत 96 लोग सवार थे। हादसे के बाद गठित रसियन-पोलिश टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विमान का पायलट लगातार दबाव में था। और उसके पास अनुभव की कमी थी।

अंग्रेजी न्यूज एजेंसी आरटी के मुताबिक स्मोलेंस्क एटीसी की अनदेखी कर विमान को रनवे पर उतारने की कोशिश की लेकिन धूंध और विजिबिलिटी की कमी से विमान दुर्घटना का शिकार हो गया।

इलेक्ट्रानिक डिवाइस में रिकॉर्ड आवाज से ये साफ होता है कि एटीसी ने पायलट को कहा कि विमान को ऊपर ले जाओ लेकिन विमान जमीन से टकरा गया और विमान कई टुकड़ों में बंट गया। लेकिन पोलैंड में ये खबरें सामने आने लगी कि रसिया ने एक सुनियोजित योजना के तहत विमान हादसा कराया ताकि पोलैंड में तख्तापलट कराया जा सके।

पोलिश सरकार ने भी ये माना था कि रनवे के करीब एक बड़े बर्च पेड़ से विमान टकराया और कई हिस्सों में विमान टूट गया। लेकिन 2013 में कुछ शोधकर्ता एक नए विचार के साथ सामने आए । उन्होंने कहा कि बर्च का पेड़ हादसे से करीब पांच दिन पहले ही टूट कर गिरा हुआ था। किसी शख्स ने पेड़ पर चढ़ने की कोशिश की थी और पेड़ को काटकर गिरा दिया था।

इससे पहले साल 2011 में इस तरह के तथ्य सामने आए कि हादसे के दिन रनवे और स्मोलेंस्क के स्पेस में धूंध नहीं थी बल्कि कृत्रिम तरीके से धूंध का निर्माण किया गया।

स्मोलेंस्क हादसे से जुड़े दावों का सच क्या है इसके लिए अभी भी जांच चल रही है। लेकिन पोलैंड में ये मुद्दा न केवल पोलिश लोगों की भावना से जुड़ा हुआ है बल्कि इस मुद्दे पर जमकर राजनीति भी होती है। Read more http://www.jagran.com

Thursday, 11 December 2014

India, Russia to explore oil and gas; aim for USD 30 billion trade

Russian President Vladimir Putin and Prime Minister Narendra Modi envisage broader collaboration between hydrocarbon companies in oil and gas exploration and production as well as in LNG projects and supplies.

"It is expected that Indian companies will strongly participate in projects related to new oil and gas fields in the territory of the Russian Federation. The sides will study the possibilities of building a hydrocarbon pipeline system, connecting the Russian Federation with India.

"They will also examine avenues for participation in petrochemical projects in each other's country and in third countries," a joint statement said.

The leaders have encouraged Indian and Russian companies to pursue greater participation in each other's power generation projects, as also in supply of equipment, technology for enhanced oil recoveries and extraction of coal, including coking coal.

Source: Hindi News and Newspaper

Russia, India sign seven inter-governmental agreements

Envisaging close consultation between the two External Affairs Ministries on as many as 17 issues, ranging from Asia-Pacific to West Asia to West Europe to Latin America as also at various multilateral forum like UN, G20, BRICS, SCO, RIC, the two nations signed, 'Protocol for consultations between the Ministry of External Affairs and Ministry of Foreign Affairs of Russia for the period 2015-2016'.

Moving on Laying down provisions and procedures for training courses in military educational and training establishments; which will facilitate better understanding between the two defence forces , 'Agreement for Training of Indian Armed Forces Personnel in the Military Educational Establishments of the Defence Ministry of the Russian Federation,' was undertaken by the two nations.

Source: Hindi News and Newspaper

Russia to remain India's top defence partner: Modi to Putin

Modi spoke after a one-day summit that sought to revive a relationship that peaked in the Soviet era, while the two sides signed billions of dollars in deals covering nuclear power, oil and defence cooperation.
             
In the most significant ones, state-owned Rosatom will build 12 nuclear reactors in India, energy major Rosneft  inked a 10-year crude supply deal with Essar Oil and Russia promised to build advanced helicopters in India.
             
"Even if India's options have increased, Russia remains our most important defence partner," Modi told reporters after the first formal summit between the leaders since Modi won election by a landslide in May.
             
Putin's visit comes as the Kremlin grapples with a sliding oil price and weak economy that have deepened the impact of Western sanctions over its annexation of Crimea last spring and support for an uprising in eastern Ukraine.
             
The tension over Ukraine intruded on the choreographed visit when it emerged that the Russian-backed leader of Crimea had travelled as part of Putin's delegation for what were billed as unofficial talks to enhance trade.

Source: Hindi News and Newspaper

Thursday, 2 January 2014

Chinese Helicopter Rescues 52 From Ship Trapped in Antarctic Ice

सिडनी। अंर्टाकटिका में बर्फ और बर्फीले तूफान के बीच पिछले एक हफ्ते से फंसे रूसी अनुसंधान जहाज आइसबाउंड के सभी 52 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया है। उन्हें सुरक्षित निकालने में बर्फ काटने वाले आस्ट्रेलिया आपूर्ति जहाज ने अहम भूमिका निभाई। इस जहाज से ही हेलीकॉप्टर भेजकर कुछ फेरे लगाकर अंर्टाकटिका के मौसम पर शोध करने के गए वैानिकों को सुरक्षित निकाला गया। आस्ट्रेलियाई मैरीटाइम सेफटी अथारिटी ने बताया कि अब एएमएसए ने उन्हें सलाह दी थी जिसका पालन करते हुए वह सभी 52 यात्रियों को सुरक्षित तरीके से आस्ट्रेलियाई जहाज पर ले आए हैं। हालांकि रूसी जहाज अभी भी बर्फ में फंसा हुआ है। एक चीनी बर्फ तोड़ने वाले जहाज के एक हेलीकॉप्टर की मदद से 12 फेरे लगाकर इन लोगों को सुरक्षित लाया गया। 

उल्लेखनीय है कि रूसी जहाज पिछले 24 दिसंबर से फ्रेंच बेस से 100 अक्षांशीय मील की दूरी पर बर्फ बन चुके महासागर में फंस गया था। कई देशों के जहाजों से तब से उस जहाज तक पहुंचने की कोशिश की लेकिन मीलों जमी बर्फ के कारण कोई भी जहाज के करीब तक नहीं पहुंच पाया था। बर्फीले तूफान के कारण कई दफा आस्ट्रेलिया बचाव दल के कई हेलीकाप्टर भी उस स्थान पर उतर नहीं पा रहे थे। क्योंकि वहां मौसम खराब होने से कुछ नहीं दिख रहा था। 

Read more : News in Hindi

Wednesday, 20 November 2013

Russian company to send 32 satellites into Space

Russia

मास्को। रूस और अमेरिका के बीच उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र तेज प्रतिस्पर्धा मची हुई है। इसी कड़ी के रूप में रूसी कंपनी कॉस्मोट्रास ने बुधवार को ऐलान किया कि वह एक लांच में रिकॉर्ड 32 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ेगा। 32 उपग्रहों से लैस डनेपर रॉकेट को आज सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर ओरेनबर्ग क्षेत्र स्थित प्रक्षेपण स्थल से छोड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि बुधवार को अमेरिकी कंपनी ऑरबिटल ने 29 उपग्रहों से लैस एक रॅाकेट को अंतरिक्ष में छोड़ा था। यदि रूस का आज का अभियान सफल होता है तो यह विश्व रिकॉर्ड होगा। भारत ने अब तक एक साथ 10 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े हैं।

रूसी और यूक्रेनी उद्यमों ने डनेपर को एक सामरिक बैलिस्टक मिसाइल से परिवर्तित किया गया है। कॉस्मोट्रास ने 18 रॉकेटों से 65 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे हैं।

Friday, 15 November 2013

Antony Arrives in Russia for INS Vikramaditya Handover

AK Antony
मॉस्को। भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी शुक्रवार को रूस के बंदरगाह शहर सेवरोदविंस्क पहुंचे। शनिवार को यहीं रूस के पनडुब्बी निर्माण केंद्र सेवमाश शिपयार्ड में विमानवाहक युद्धपोत आइएनएस विक्रमादित्य भारत को सौंपा जाएगा।

नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी पहले ही यहां पहुंच गए थे। एंटनी के साथ रक्षा सचिव आरके माथुर व अन्य अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल चार दिवसीय दौरे पर रूस पहुंचा है।
एंटनी सैन्य तकनीकी सहयोग पर भारत और रूस के अंतर सरकारी आयोग की बैठक में भी शामिल होंगे।

 Source- Hindi News

Thursday, 14 November 2013

INS Vikramaditya soon will Join the Indian Navy Fleet

INS Vikramaditya
नई दिल्ली। रूसी विमानवाहक पोत गोर्शकोव आखिरकार शनिवार को भारत को हासिल हो जाएगा। भारत ने इस विमानवाहक पोत का नाम आईएनएस विक्रमादित्य रखा है। इस युद्धक पोत को लाने के लिए रक्षा मंत्री एके एंटनी शुक्रवार को रूस पहुंचेगे। रूस के सेवेरोदविस्क शहर में नौसेना को मिल रहा 

आईएनएस विक्रमादित्य करीब डेढ़ माह बाद भारत पहुंचेगा।

2004 में राजग सरकार के कार्यकाल में दौरान हुए खरीद सौदे में गत नौ सालों के भीतर न केवल कई फेरबदल हुए, बल्कि इसकी कीमत भी खासी वृद्धि हुई । नौसेना प्रवक्ता के अनुसार भारत की सैन्य ताकत में खासा इजाफा करने वाले इस विशाल पोत में लगभग 80 फीसद उपकरण नए हैं। साथ ही भारतीय सामरिक जरूरतों के मुताबिक इसमें आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। लिहाजा यह लगभग नया ही युद्धपोत है।
भारत में सरकार के सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने (सीसीएस) अंत में एडमिरल की खरीद के पक्ष में फैसला किया था। विक्रमादित्य के संचालन के कलाकार अवधारणा में लगे आठ बॉयलर को निकाल कर इसके जगह पर भट्ठी ईंधन तेल और आधुनिक तेल जल विभाजक के साथ ही एक मलजल उपचार संयंत्र अंतराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए शामिल किया गया है। विक्रमादित्य में 1.5 मेगावाट डीजल जनरेटर, एक वैश्रि्वक समुद्री संचार प्रणाली, स्पेरी नेविगेशन रडार, एक नए टेलीफोन एक्सचेंज, नया डेटा लिंक और एक आईएफएफ एमके इलेवन प्रणाली, होटल की सेवाएं, नई जल उत्पादन संयंत्रों के साथ ही न्यूयॉर्क इंटरनेशनल प्रशीतन और एयर कंडीशनिंग के साथ सुधार किया जा रहा है। एक नए गैली सुधार घरेलू सेवाएं और 10 महिला अधिकारियों के लिए आवास के साथ स्थापित किया जा रहा है।
इस विमानवाहक पोत का जीवन काल 20 साल है, विशेषज्ञों का कहना है कि यह वास्तव में 30 साल की एक न्यूनतम हो सकता है। आधुनिकीकरण के पूरा होने पर, जहाज और उसके उपकरणों के 70 प्रतिशत से अधिक नया हो जाएगा। विक्रमादित्य का सफलता पूर्वक समुद्री परीक्षण पूरा कर लिया गया है और 32 समुद्री मील की अधिकतम गति तक पहुँचने में सक्षम है। सफेद सागर में सितंबर 2013 में विमान का परीक्षण कर लिय गया।
नाम : आईएनएस विक्रमादित्य
बिल्डर : काला सागर शिपयार्ड , यूक्रेन
लागत: 2350000000
स्थिति: समुद्री परीक्षण पूरा
जनरल विशेषता
कक्षा एवं प्रकार : संशोधित कीव श्रेणी
प्रकार: विमान:: वाहक पोत
विस्थापन: 45,400 टन का लोड
लंबाई: 283.5 मीटर [930 फीट]
किरण : 59.8 मीटर [196 फीट]
औषध: 10.2 मीटर (33 फुट)
प्रोपल्सन : 4 शाफ्ट गियर भाप टर्बाइन, 140,000 अश्वशक्ति
गति : 29.3 समुद्री मील [(54.3 किमी / घंटा]
सीमा: 4,000 नॉटिकल मील (7400 किमी) [5]
धीरज: 18 समुद्री मील में 13,500 समुद्री मील (25,000 किमी) (33 किमी / घंटा) [6]

Source- Hindi News