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Tuesday, 12 April 2016

विशेषज्ञों ने माना जीका का कहर उम्मीद से ज्यादा, मांगी मदद

जीका वायरस के कहर से अमेरिका के पचास में से तीस राज्य जूझ रहे हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि जीका वायरस की महामारी को लेकर जो अंदेशा था उससे कहीं अधिक खतरा अमेरिका के सामने है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुतोरिको में हजारों की संख्या में जीका से प्रभावित मामले सामने आ रहे हैं।

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एलर्जी और इंफेक्शस डीजीज से जुड़े अमेरिकी विशेषज्ञों ने रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस से तत्काल करीब 1.9 बिलियन डॉलर इमरजेंसी फंड को रिलीज करने की मांग की है। अंग्रेजी न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने फरवरी में जीका से लड़ने के लिए इमरजेंसी फंड को रिलीज करने की अपील की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कांग्रेस से अनुमति नहीं मिलेगी तो उस हालात में इबोला से लड़ने के लिए संचित फंड से 589 मिलियन डॉलर को ट्रांसफर किया जाएगा।

ब्राजील से फैले जीका के कहर से लैटिन अमेरिका और कई कैरिबियाई मुल्क सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त में ब्राजील में ओलंपिक खेलों को देखते हुए जीका से निपटने के लिए समन्वित प्रयास की जरूरत है। ब्राजील में पिछले हफ्ते जीका के एक हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं।

गौरतलब है कि जीका वायरस का ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं और मासूम बच्चों पर होता है। जीका के असर से मासूम बच्चों के सिर का आकार सामान्य से छोटा होता है और वो एक तरह से अपंगता के शिकार हो जाते हैं। Read more http://www.jagran.com

Tuesday, 28 January 2014

Eight More Metro Rail Coaches Reach Chennai from Brazil

Eight more rakes of Chennai Metro Rail train reached Chennai shores on Monday and are expected to be transported to the Rs 198 crore, state-of-the art depot on Tuesday night.

The eight sealed rakes were offloaded from the ship on Monday. They arrived from the Brazilian port of Santos.

With their arrival now, the Chennai Metro Rail yard will have five metro trains. Four more trains, imported from Brazil, are to reach the Chennai shore soon. They will also be shipped out in pairs, a Metro Rail spokesman said.

The coaches were transported from the vessel to Namakkal Transport Carriers (NTC) vehicles. NTC has a three-year contract with Chennai Metro Rail to transport the Metro Rail coaches from the port as well as Sri City to the yard.

A Metro Rail spokesman said that although the official inauguration of the Sri City plant is yet to happen, the first Chennai Metro train that is being built in Metro Rail coach making facility at the Sri City Special Economic Zone near Tada in Nellore district will be rolled out by the end of next month. NTC officials said that they have yet to be assigned the dates on when to ship the trains from Sri City.

The rail cars will be produced with an indigenisation level of around 35 per cent. It is believed the site design and construction of the plant is based on technology shared from Alstom’s global manufacturing facilities as well as its major transport hub in Lapa in Brazil from where the first metro train was rolled out.

Hindi News


newindianexpress.com

Thursday, 7 November 2013

Standard and Poor Puts onus of Powering up India Economy on Next Govt

Rating agency
नई दिल्ली [जाब्यू]। आने वाले समय में देश की क्रेडिट रेटिंग क्या होगी यह अब पूरी तरह से केंद्र में आने वाली अगली सरकार के आर्थिक एजेंडा पर निर्भर करेगा। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र में आने वाली नई सरकार के एजेंडा से आर्थिक सुधार हटे तो देश की रेटिंग को घटाया भी जा सकता है।

मौजूदा सरकार राजकोषीय घाटे को काबू में रखने के लिए जूझ रही है और विदेशी निवेश के प्रवाह में भी कमी हो रही है। लेकिन एसएंडपी चुनाव से पहले भारत की क्रेडिट रेटिंग की समीक्षा नहीं करेगी। एजेंसी ने स्पष्ट कर दिया है कि रेटिंग की समीक्षा का काम अब केंद्र में नई सरकार बनने के बाद ही होगा। फिलहाल एसएंडपी ने भारत को निगेटिव आउटलुक के साथ बीबीबी-रेटिंग पर रखा हुआ है। यह किसी भी देश के लिए निवेश की न्यूनतम ग्रेड की रेटिंग है। 

एजेंसी ने एक बयान में कहा कि इस रेटिंग में सकारात्मक सुधार तभी हो सकता है जब नई सरकार विकास की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएगी। आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए भी सरकार को प्रयास करने होंगे। लोकसभा के अगले चुनाव मई 2014 में होने हैं। 

साल 2012-13 में देश की आर्थिक विकास की रफ्तार एक दशक के निचले स्तर पांच फीसद पर आ टिकी थी। चालू वित्ता वर्ष की पहली तिमाही में तो यह घटकर 4.4 फीसद ही रह गई है। एसएंडपी का कहना है कि अगर नीतिगत जड़ता इसी तरह बनी रहती है तो रेटिंग को घटाया भी जा सकता है। 

उधर एसएंडपी की इस चेतावनी को लेकर सरकार ज्यादा गंभीर नहीं है। वित्ता मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रेटिंग एक सामान्य प्रक्रिया है। इसे लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।