Showing posts with label Technology. Show all posts
Showing posts with label Technology. Show all posts

Friday, 13 May 2016

एक महीने के वाईफाई के लिए सेक्‍स और शराब छोड़ने को तैयार लोग

तकनीक ने जिंदगी को आसान बनाया है लेकिन अब यही तकनीक लोगों की जिंदगी को बर्बाद करती जा रही है। स्मार्टफोन और इंटरनेट ने इंसानों को भीड़ में भी अकेला कर दिया है। इसका नशा इस कदर चढ़ा हुआ है लोग एक महीने के वाईफाई के लिए शराब और सेक्स तक छोड़ने को तैयार हो गए हैं।

हाल ही में अमेरिका में हुई एक स्टडी के अनुसार लोगों के सिर पर तकनीक का नशा ऐसा चढ़ा हुआ है कि वो अपनी जिंदगी के कई महत्वपूर्ण पलों को खो चुके हैं वहीं कईयों ने तो पूरे परिवार का वक्त खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इंट्रीपीड ट्रेवल द्वारा हाल ही में अमेरिका के 1500 लोगों पर की गई स्टडी में यह बात सामने आई की औसत युवा लोग अपने फोन के बिना 16 घंटे भी नहीं रह सकते।

24 प्रतिशत ऐसे थे जिन्हें मोबाइल में डूबे होने की वजह से हादसों का शिकार होना पड़ा। इनमें से कई का मानना है कि उनका मोबाइल कभी भी उनसे 3 फीट से ज्यादा दूर नहीं होता। सर्वे में शामिल एक तिहाई लोगों के अनुसार वो जरूरत से ज्यादा वक्त अपने मोबाइल, लेपटॉप या टैबलेट पर गुजारते हैं।

41 प्रतिशत लोगों का मानना है उन्होंने विशेष कार्यक्रम या जगह का चुनाव सिर्फ इसलिए किया क्योंकि सोशल मीडिया के लिए उनकी तस्वीरें बेहतर होंगी। एक महिला ने तो यहां तक कहा कि वो रात को साते वक्त भी अपना आईपैड साथ लेकर सोती हैं और एक सुबह तो उनके पति इसी पर सोए मिले। जब उन्होंने देखा तो उसमें उनके पति के प्रायवेट पार्ट की तस्वीरें आ गईं थीं।  Read more http://www.jagran.com/

Thursday, 11 December 2014

Government to use tech to improve governance, curb corruption: PM Modi

In his interaction with US-based economists, the Prime Minister underlined the need for "injecting technology" into government processes and decision-making.
  
These initiatives, he added, would also provide the best possible solution to the problem of corruption.
  
Corruption, it may be mentioned, was one of the major election planks during the polls earlier this year which saw emergence of BJP as the majority party at the Centre.
  
Talking to the US economists, the Prime Minister said his government would accord "topmost priority" to skill development and job creation.
  
All government policies would be youth-centric as 65 per cent of India's population is below the age of 35, said an official release quoting the Prime Minister.
  
He said the government's focus on infrastructure and 'Digital India' would boost employment opportunities even in rural areas.

Source: Hindi News and Newspaper

Wednesday, 15 January 2014

Do you know how your number spread every where?

  
नई दिल्ली। मोबाइल फोन की जरूरत को आप सभी समझते हैं। इसके बिना अब तो जीवन अधूरा सा लगने लगा है। तेजी से हो रही मोबाइल क्रांति का आनंद सभी उठा रहे हैं, लेकिन इस क्रांति ने एक अशांति भी फैला दी है।

कभी भी, कही भी अचानक फोन की घंटी बजती है। दूसरी ओर एक आवाज आती है, सर या मैडम या आपका नाम..। क्या आपसे दो मिनट बात हो सकती है? अमूमन जवाब होता है मैं बिजी हूं या कभी बात नहीं कर सकता। लेकिन इस फोन से व्यक्ति तंग तो आ ही जाता है।

समझ तो यह नहीं आता कि इन लोगों के पास नंबर आता कहां से है और यह नाम कैसे जान लेते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपका नाम और नंबर इन लोगों के पास कैसे पहुंचता है? विज्ञापनों के इस अतिक्रमण के लिये कुछ हद तक हम भी जिम्मेदार हैं। किसी मॉल या शोरूम में जा कर उनकी 'गेस्ट बुक' भरना, या किसी अच्छे रेस्त्रां में खाने के बाद उनको 'फीड बैक' देना, यह सब करके हम अपने संपर्क सूत्र जैसे मोबाइल नंबर, ई-मेल, जन्म-तिथि इत्यादि सार्वजनिक ही तो कर रहे हैं।

फेसबुक या ऐसी ही कितनी ही अन्य वेबसाइट्स भी ये विवरण मांगते हैं। उदाहरण के तौर पर एक जींस खरीदने पर भी हम अपना नाम, फोन नंबर और ई-मेल आसानी से लिख देते हैं। ऐसा करने से बचकर हम कुछ हद तक इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

क्या आप जानते है कि आपका नंबर कौन बच रहा है? हमारे ये नंबर इनको मिलते कैसे हैं? क्या टेलीकॉम कंपनी का ही कोई कर्मचारी कुछ रुपयों के लिये अपना 'डेटाबेस' बेच देता है? या फिर कई टीमें हैं जो बाकायदा ऐसे मॉल और होटलों में जा कर, पैसे देकर हमारा लेखा-जोखा हासिल कर लेती हैं?

भारत जैसे देश में जहां लाखों नौजवान पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, उनका ऐसे कामों में लग जाना नामुमकिन नहीं। यह एक 'ब्लैक-होल' जैसी स्थिति है। जो छोटी कंपनियां इसमें पूरी तरह या 'पार्ट टाइम' लगी हैं, वो अपने आंकड़े बताने को तैयार नही होती। 

Thursday, 31 October 2013

The fastest growing air traffic in India

air traffic

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। अन्य क्षेत्रों का हाल चाहे जो हो, भारत के एविएशन क्षेत्र को देखकर नहीं लगता कि कहीं कोई आर्थिक सुस्ती है। अगस्त की तरह सितंबर में भी घरेलू क्षेत्र में हवाई यात्रियों की संख्या में जैसी बढ़ोतरी हुई है, उससे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी हैरान हैं। इस साल अगस्त में हवाई यात्रियों की संख्या 18.5 फीसद बढ़ी थी। सितंबर में भी इसमें 16.4 फीसद का इजाफा हुआ है। भारतीय हवाई यातायात में यह वृद्धि दुनिया के किसी भी क्षेत्र के मुकाबले सबसे अधिक है।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की ओर से जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार सितंबर में भारत में हवाई सीटों में भी 5.7 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई। परिणामस्वरूप लोड फैक्टर 6.6 बढ़कर 71.5 फीसद हो गया। यह वृद्धि देश में व्याप्त आर्थिक सुस्ती के उलट है। इस तेज बढ़ोतरी की वजह एडवांस बुकिंग पर किरायों में छूट हो सकती है। यह अनुमान कुछ हैरत भरा है, क्योंकि छूट के बावजूद भारत में किरायों का स्तर पिछले साल के मुकाबले काफी ऊंचा है। वार्षिक आधार पर हवाई ट्रैफिक 2012 के मुकाबले 4 फीसद बढ़ा है।

भारतीय एविएशन क्षेत्र के यातायात में यह बढ़ोतरी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले साल हवाई यातायात में कमी दर्ज की गई थी। इसके अलावा दुनिया के अन्य क्षेत्रों या देशों के मुकाबले भी यह ज्यादा है। भारत के मुकाबले सितंबर में चीन में हवाई यातायात में केवल 10.6 फीसद की ही बढ़ोतरी हुई है। अमेरिका में 1.4 और ब्राजील में केवल एक फीसद की वृद्धि हुई है। जापान में हवाई यातायात 7.8 और रूस में 12.1 फीसद बढ़ा है। आस्ट्रेलिया में सिर्फ 2.6 फीसद का इजाफा हुआ है।

इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा फायदा इंडिगो तथा एयर इंडिया को मिला है। सबसे आकर्षक किराया प्रस्तावों के कारण इंडिगो 30.3 फीसद हिस्सेदारी पाकर नंबर एक पर रही। सबसे उचित किरायों के कारण एयर इंडिया 20.3 फीसद बाजार हिस्सेदारी को पार करने में सफल रही। वैसे, यातायात में बढ़ोतरी के बावजूद कई घरेलू एयरलाइनें अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने में विफल रही हैं। मसलन, सितंबर में इंडिगो की 30 फीसद सीटें खाली रहीं। इसकी भरपाई वह अक्टूबर से मार्च के दौरान करने की कोशिश करेगी। स्पाइसजेट का भी जाड़ों में 22 फीसद ज्यादा उड़ानें भरने का इरादा है।