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Monday, 2 December 2013

Tejpal taken for sexual potency test

tarun tejpal tehelka
पणजी। सहकर्मी पत्रकार के यौन उत्पीड़न मामले में गिरफ्तार तहलका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल ने हवालात में दूसरी रात मेढकों और कछुओं के शिकारियों के साथ गुजारी। सोमवार को गोवा मेडिकल कॉलेज ने तेजपाल का पुरुषत्व (पोटेंसी) परीक्षण किया, जिसमें वह पास हो गए। गोवा मेडिकल कॉलेज के डीन वीएन जिंदल ने बताया कि जांच एजेंसी की जरूरतों के मुताबिक दो चरणों में आरोपी के स्वास्थ्य परीक्षण किए गए। यौन उत्पीड़न के मामलों में आरोपी का पुरुषत्व परीक्षण अनिवार्य होता है।

तेजपाल ने रविवार की रात मेढकों और कछुओं के चार स्थानीय शिकारियों के साथ काटी।

तहलका के पूर्व मुख्य संपादक जिस लॉकअप में बंद हैं, वह पुरानी पुर्तगाली इमारत में है। तेजपाल को अपनी कोठरी तक पहुंचने के लिए एक छोटी और तंग सुरंग से गुजरना होता है। इस सुरंग के आखिरी छोर पर तीन कोठरियां है, जिनमें दो पुरुषों के लिए और एक महिलाओं के लिए है। तेजपाल की कोठरी आठ गुणा चार फीट की है। सूत्रों के मुताबिक, नींद पूरी नहीं हो पाने के कारण तेजपाल थके हुए और तनाव में नजर आ रहे थे। उनके चेहरे पर हल्की सूजन थी और आंखें लाल थीं।

सोमवार सुबह अपराध शाखा अधिकारियों के साथ हवालात पहुंचे तेजपाल के परिजनों ने उन्हें गोवा की पाव भाजी खिलाई। इससे पहले उन्होंने पुलिस द्वारा दी गई चाय पी। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। सोमवार सुबह पहले चरण में पांच घंटे तक चले परीक्षण में मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग ने 50 वर्षीय तेजपाल के रक्त की जांच सहित कई परीक्षण किए। दूसरे चरण में दोपहर तीन बजे के बाद उन्हें फिर मेडिकल कॉलेज लाया गया।

रविवार की रात तेजपाल ने अपने साथ लॉकअप में बंद अन्य आरोपियों से बातचीत की कोशिश की थी, लेकिन अवैध शिकार के चारों आरोपी उनकी किसी बात का जवाब नहीं दे पाए, क्योंकि उन्हें हिंदी समझ नहीं आती। तेजपाल ने उन पर लगे आरोपों के बारे में पूछा, लेकिन वे जवाब देने के बजाय उन्हें घूरते रहे। तेजपाल रात में दो बार पानी पीने के लिए उठे। रविवार की रात परिजन तेजपाल के लिए गद्दा लेकर हवालात पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने कोर्ट की अनुमति नहीं होने का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया। तेजपाल ने लॉकअप में पंखा लगवाने के लिए स्थानीय कोर्ट में अर्जी दी है।

तहलका के पूर्व मुख्य संपादक पर थिंक फेस्ट-2013 के दौरान 7 व 8 नवंबर को स्थानीय होटल की लिफ्ट में सहकर्मी पत्रकार के साथ दो बार यौन उत्पीड़न का आरोप है। गोवा पुलिस ने उनके खिलाफ आइपीसी की धारा-376 (2)(के) और 354ए के तहत मामला दर्ज किया है। घटना के सार्वजनिक होने के 10 दिन बाद उन्हें नाटकीय घटनाक्रम के बीच शनिवार को गिरफ्तार किया गया।

Tejpal aken for Sexual Potency Test

tarun tejpal tehelka
पणजी। सहकर्मी पत्रकार के यौन उत्पीड़न मामले में गिरफ्तार तहलका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल ने हवालात में दूसरी रात मेढकों और कछुओं के शिकारियों के साथ गुजारी। सोमवार को गोवा मेडिकल कॉलेज ने तेजपाल का पुरुषत्व (पोटेंसी) परीक्षण किया, जिसमें वह पास हो गए। गोवा मेडिकल कॉलेज के डीन वीएन जिंदल ने बताया कि जांच एजेंसी की जरूरतों के मुताबिक दो चरणों में आरोपी के स्वास्थ्य परीक्षण किए गए। यौन उत्पीड़न के मामलों में आरोपी का पुरुषत्व परीक्षण अनिवार्य होता है।
तेजपाल ने रविवार की रात मेढकों और कछुओं के चार स्थानीय शिकारियों के साथ काटी।

तहलका के पूर्व मुख्य संपादक जिस लॉकअप में बंद हैं, वह पुरानी पुर्तगाली इमारत में है। तेजपाल को अपनी कोठरी तक पहुंचने के लिए एक छोटी और तंग सुरंग से गुजरना होता है। इस सुरंग के आखिरी छोर पर तीन कोठरियां है, जिनमें दो पुरुषों के लिए और एक महिलाओं के लिए है। तेजपाल की कोठरी आठ गुणा चार फीट की है। सूत्रों के मुताबिक, नींद पूरी नहीं हो पाने के कारण तेजपाल थके हुए और तनाव में नजर आ रहे थे। उनके चेहरे पर हल्की सूजन थी और आंखें लाल थीं।

सोमवार सुबह अपराध शाखा अधिकारियों के साथ हवालात पहुंचे तेजपाल के परिजनों ने उन्हें गोवा की पाव भाजी खिलाई। इससे पहले उन्होंने पुलिस द्वारा दी गई चाय पी। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। सोमवार सुबह पहले चरण में पांच घंटे तक चले परीक्षण में मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग ने 50 वर्षीय तेजपाल के रक्त की जांच सहित कई परीक्षण किए। दूसरे चरण में दोपहर तीन बजे के बाद उन्हें फिर मेडिकल कॉलेज लाया गया।

रविवार की रात तेजपाल ने अपने साथ लॉकअप में बंद अन्य आरोपियों से बातचीत की कोशिश की थी, लेकिन अवैध शिकार के चारों आरोपी उनकी किसी बात का जवाब नहीं दे पाए, क्योंकि उन्हें हिंदी समझ नहीं आती। तेजपाल ने उन पर लगे आरोपों के बारे में पूछा, लेकिन वे जवाब देने के बजाय उन्हें घूरते रहे। तेजपाल रात में दो बार पानी पीने के लिए उठे। रविवार की रात परिजन तेजपाल के लिए गद्दा लेकर हवालात पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने कोर्ट की अनुमति नहीं होने का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया। तेजपाल ने लॉकअप में पंखा लगवाने के लिए स्थानीय कोर्ट में अर्जी दी है।

तहलका के पूर्व मुख्य संपादक पर थिंक फेस्ट-2013 के दौरान 7 व 8 नवंबर को स्थानीय होटल की लिफ्ट में सहकर्मी पत्रकार के साथ दो बार यौन उत्पीड़न का आरोप है। गोवा पुलिस ने उनके खिलाफ आइपीसी की धारा-376 (2)(के) और 354ए के तहत मामला दर्ज किया है। घटना के सार्वजनिक होने के 10 दिन बाद उन्हें नाटकीय घटनाक्रम के बीच शनिवार को गिरफ्तार किया गया।

Friday, 29 November 2013

Sexual assault case: Tarun Tejpal gets relief against arrest till morning

Tarun Tejpal
नई दिल्ली। सहकर्मी से दुष्कर्म के आरोपी तरुण तेजपाल को गोवा की सत्र अदालत से शुक्रवार को फौरी राहत मिल गई और उनकी गिरफ्तारी शनिवार तक के लिए टल गई। शुक्रवार को सत्र अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई खत्म होने तक तहलका के मुख्य संपादक की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। परंतु, शनिवार सुबह 10 बजे से याचिका पर फिर से सुनवाई होगी और लोक अभियोजक अपना पक्ष रखेंगे। तेजपाल गिरफ्तारी से भले ही बच गए हों, लेकिन मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकीलों ने पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठाए और उसका नाम भी लिया।
शुक्रवार देर शाम को गोवा पुलिस ने करीब डेढ़ घंटे तक उनसे पूछताछ की। यहां तक कि केंद्र सरकार भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे है। गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने बताया कि गोवा सरकार से केस संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
बृहस्पतिवार देर शाम अदालत से गैरजमानती वारंट हासिल करने के बाद गोवा पुलिस की टीम ने शुक्रवार को सुबह छह बजे तेजपाल के दिल्ली स्थित घर पर दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिले। तेजपाल की पत्नी गीतन बत्रा ने पुलिस को कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया। इसके बाद सुबह 10 बजे तेजपाल के वकीलों ने गोवा की सत्र अदालत से अग्रिम जमानत की गुहार लगाई और दोपहर ढाई बजे तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई। इधर, गिरफ्तारी की आशंका से मुक्त तेजपाल गोवा और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को चकमा देते हुए दोपहर बाद पत्नी व अन्य परिजनों के साथ विमान से गोवा के लिए चले और पांच बजे गोवा पहुंच गए। दावोलिम हवाई अड्डे पर पहुंचे तेजपाल को भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए। गिरफ्तारी की रोक की अवधि खत्म होने के कारण गोवा पुलिस ने उन्हें तत्काल हिरासत में ले लिया। हालांकि, कुछ मिनट बाद ही अदालत में जमानत अर्जी पर सुनवाई शनिवार को भी जारी रहने और तब तक गिरफ्तारी पर रोक जारी रहने की सूचना से तेजपाल ने राहत की सांस ली। इसके बाद देर शाम तेजपाल खुद गोवा पुलिस की अपराध शाखा पहुंचे, जहां जांच अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की है।
दिल्ली हाई कोर्ट में पूरे मामले के पीछे भाजपा की साजिश बताने वाले तेजपाल के वकीलों ने गोवा की अदालत में पीड़िता के चरित्र पर भी सवाल उठाने की कोशिश की। यहां तक कि बचाव पक्ष के वकील ने भरी अदालत में दो बार पीड़िता का नाम भी लिया। इस पर जज ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पीड़िता का नाम लेना सही नहीं है और इस मामले में कानून भी काफी सख्त है। जज की आपत्ति के बाद वकील को नाम लेने के लिए माफी मांगनी पड़ी। वकील गीता लूथरा ने कहा कि तेजपाल बहुत ही शरीफ और प्रसिद्ध व्यक्ति हैं। उन्होंने दलील दी कि होटल के सीसीटीवी फुटेज तेजपाल को निर्दोष ठहराते हैं, उन्होंने अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले को राजनीति से प्रेरित बताया।

Source- Hindi News

Thursday, 21 November 2013

Tejpal sexual assault case: Read victim's complete E-mail

Tarun Tejpal sexual assault case
नई दिल्ली, जागरण न्यूज नेटवर्क। तहलका की महिला पत्रकार ने प्रधान संपादक तरुण तेजपाल द्वारा यौन उत्पीड़न के बाद प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को भेजी ई-मेल में गोवा के एक होटल में घटी घटना का कुछ ब्योरा दिया है। मेल की पहली ही पंक्ति में पीड़िता ने लिखा है कि यह मेल लिखना उनके लिए बेहद तकलीफदेह है। पीड़ित महिला पत्रकार की शोमा चौधरी को भेजी ई-मेल कुछ इस तरह है।

''मेरे लिए आपको यह ई-मेल लिखना बेहद तकलीफदेह है। जो बात मैं कहने जा रही हूं उसे कैसे सरल ढंग से कहा जाए, यह सोचने में लगी हुई थी, लेकिन अब मुझे यही एक रास्ता समझ आ रहा है। पिछले सप्ताह तहलका के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल ने 'थिंक फेस्ट' के दौरान दो बार मेरा यौन उत्पीड़न किया। जब उन्होंने पहली बार यह हरकत की तो मैं आपको फौरन फोन कर बताना चाहती थी, लेकिन आप बुरी तरह व्यस्त थीं। मुझे पता था कि उस वक्त एक मिनट के लिए भी यह मुमकिन नहीं था कि मैं अकेले में आपको इस हरकत के बारे में बता पाती। इसके अलावा मैं इस बात को लेकर हैरान भी थी कि तरुण ने ऐसी घिनौनी हरकत की, जो मेरे पिता के साथ काम कर चुके हैं और उनके दोस्त हैं। तरुण की बेटी भी मेरी दोस्त है। मैं काम की वजह से तरुण की बहुत इज्जत करती रही हूं। तरुण ने दो बार मेरा यौन शोषण किया। हर बार मैं बुरी तरह हताश और पस्त होकर अपने कमरे में लौटी और कांपते हुए रोती रही। इसके बाद मैं अपने सहकर्मियों के कमरे में गई और एक वरिष्ठ सहकर्मी को फोन कर सारी बात बताई। जब दूसरी बार तरुण ने मेरा यौन उत्पीड़न किया तो मैंने उनकी बेटी को इस बारे में शिकायत की। जब उनकी बेटी ने तरुण से इस बाबत सवाल किया तो वह मुझ पर चीखते हुए गुस्साने लगे। पूरे फेस्टिवल के दौरान मैं तरुण से बचती रही। सिर्फ तभी उनके सामने आई, जब आसपास कई लोग मौजूद रहे। यह सिलसिला तब तक चला, जब तक यह फेस्ट खत्म नहीं हो गया।

शनिवार शाम उन्होंने मुझे एक एसएमएस किया, जिसमें लिखा कि मैंने एक नशेबाज की दिल्लगी का उलटा ही अर्थ निकाल लिया, लेकिन यह सच नहीं है। दिल्लगी के दौरान कोई किसी पर यौन हमला नहीं करता। मैं उनकी हरकत का हर ब्योरा आपको भेज रही हूं ताकि आपको समझ आए कि मेरे लिए यह कितना तकलीफदेह रहा होगा। मैं चाहती हूं कि विशाखा मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के मुताबिक, एक एंटी सेक्सुअल हैरेसमेंट सेल बनाया जाए और वही इस मसले की जांच करे। आखिर में मैं तरुण तेजपाल से लिखित माफी चाहती हूं। यह माफीनामा तहलका में काम करने वाले हर कर्मचारी से साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने जिस तरह एक महिला कर्मचारी के साथ बर्ताव किया उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।''

विशाखा केस में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त, 1997 में कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न रोकने के संबंध में एक निर्णय दिया था। राजस्थान के चर्चित भंवरी देवी केस (1992) की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने विशाखा बनाम राजस्थान सरकार मामले में फैसला दिया था। विशाखा निर्णय नाम से प्रसिद्ध इस केस में यौन उत्पीड़न को परिभाषित करते हुए कई दिशा-निर्देशों और मानकों का निर्धारण किया गया था। 

यौन उत्पीड़न :
-शारीरिक संपर्क
-इस तरह की इच्छा या मांग प्रकट करना
-अश्लील भावभंगिमा दर्शाना
-पोर्नोग्राफी दिखाना
-लैंगिक प्रकृति का शारीरिक, मौखिक या लिखित आचरण
रोकथाम के दिशा-निर्देश
-कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने संबंधी सूचना को अधिसूचित, प्रकाशित और उपयुक्त तरीके से प्रसारित किया जाना चाहिए।
-सरकारी और पब्लिक सेक्टर निकायों में आचरण, अनुशासन संबंधी नियमों व नियंत्रण के प्रावधानों में यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधित नियमों को भी शामिल करना चाहिए। दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
-निजी कंपनियों में इंडस्ट्रियल रोजगार एक्ट, 1946 के तहत यौन उत्पीड़न के रोकथाम संबंधी नियमों को भी शामिल किया जाना चाहिए
-कार्यस्थल पर काम, स्वास्थ्य, स्वच्छता का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए। महिलाओं के खिलाफ प्रतिकूल माहौल नहीं होना चाहिए।
-केंद्र और राज्य सरकारों से यह आग्रह किया गया कि वे ऐसे विधान बनाए ताकि इन दिशा-निर्देशों को निजी सेक्टर पर भी ठीक ढंग से लागू किया जा सके।
*****
ट्विटर पर हैरानी और गुस्सा
''भारत में एक बड़े संपादक ने अपनी ही महिला पत्रकार के साथ यौन दु‌र्व्यवहार किया। वह जेल जाने के बजाय छह माह की छुंट्टी पर चला गया। क्या बेवकूफी है?'' -तारिक फतेह
''तरुण तेजपाल को यह अधिकार कहां से मिला कि वह अपने लिए सजा खुद तय करें? इस सवाल का जवाब सारी महिलाएं चाहती हैं।'' -असमा खान पठान
''यह शर्मनाक है कि अच्छे मूल्यों वाले शख्स ने ऐसा काम किया, लेकिन उन्होंने औरों की तरह अपना गुनाह कबूल करने का साहस दिखाया।'' -जावेद अख्तर
''महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विरोध में फरहान अख्तर ने मर्द अभियान शुरू किया और उनके पिता जावेद अख्तर तरुण तेजपाल को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।'' -एस रोड्रिग्स
''जब कोई दोस्त जुर्म करता है तो पहले तो यकीन नहीं होता, फिर हैरानी होती है और फिर गुस्सा आता है। तरुण ने अपने परिवार और दोस्तों से विश्वासघात किया है।'' -सागरिका घोष
''तरुण ने तहलका को बनाया। उन्हें ही उसे नष्ट करने का अधिकार था और वह उन्होंने कर दिया। धन्यवाद तरुण।'' -आकाश
''तरुण ने महिला पत्रकार के साथ जो कुछ किया उसे जानकर हैरान हूं। यह घटना ताकत के अहंकार को बयान करती है।'' -मधु किश्वर
''नरेंद्र मोदी के बारे में राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि लड़की मामला दर्ज करे या नहीं, हम मामला जरूर दर्ज कराएंगे। तेजपाल के बारे में इसी आयोग का कहना है कि यह उनके और लड़की के बीच का मामला है।'' -नीलेश देसाई
''कांग्रेस ने अपने बहादुर सिपाही को खो दिया है। आइए आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण करें। उनका छह महीने के लिए पत्ता कट गया। अब नरेंद्र मोदी के खिलाफ कौन चुनाव लड़ेगा?'' -पीयूष खंडेलवाल