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Friday, 29 November 2013

Tehelka Sexual Assault case: It was a Rape not a Sexual Harrassment

tehelka
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। दुष्कर्म पीड़िता ने शुक्रवार को तहलका के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल की हरकत को 'दुष्कर्म' करार दिया है। पीड़िता के अनुसार थिंकफेस्ट के दौरान गोवा के एक होटल में तेजपाल ने उसके साथ जो कुछ किया वह 'दुष्कर्म' की परिभाषा में आता है। साथ ही पीड़िता ने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देने की अपील की।
तेजपाल के पूछताछ के लिए गोवा रवाना होने के तत्काल बाद पीड़िता ने कहा, 'यह मेरी अस्मिता और अधिकार की रक्षा की लड़ाई है कि मेरा शरीर सिर्फ मेरा है, न कि नौकरी देने वाले का खिलौना है।' पीड़िता के बयान से साफ है कि वह इस मामले में तेजपाल के खिलाफ अपने आरोपों पर अडिग है। इसके पहले बुधवार को वह मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा-164 के तहत अपना बयान दर्ज करा चुकी है, जो अदालत में सुबूत के रूप में देखा जाएगा। वह गोवा पुलिस के समक्ष तेजपाल से आमने-सामने पूछताछ के लिए भी तैयार है।
पीड़िता ने साफ कर दिया है कि तेजपाल के खिलाफ उसकी शिकायत के पीछे किसी भी राजनीतिक दल या नेता का हाथ नहीं है।
ऐसे आरोप लगाने के पीछे यह सोच हावी है कि लड़की आज भी अपना फैसला खुद नहीं ले सकती। उसने राजनीतिक दलों को मामले में राजनीति नहीं करने की सलाह दी है। गौरतलब है कि तेजपाल अपने खिलाफ कार्रवाई के पीछे भाजपा की साजिश का आरोप लगाते रहे हैं।


Thursday, 21 November 2013

Tejpal sexual assault case: Read victim's complete E-mail

Tarun Tejpal sexual assault case
नई दिल्ली, जागरण न्यूज नेटवर्क। तहलका की महिला पत्रकार ने प्रधान संपादक तरुण तेजपाल द्वारा यौन उत्पीड़न के बाद प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को भेजी ई-मेल में गोवा के एक होटल में घटी घटना का कुछ ब्योरा दिया है। मेल की पहली ही पंक्ति में पीड़िता ने लिखा है कि यह मेल लिखना उनके लिए बेहद तकलीफदेह है। पीड़ित महिला पत्रकार की शोमा चौधरी को भेजी ई-मेल कुछ इस तरह है।

''मेरे लिए आपको यह ई-मेल लिखना बेहद तकलीफदेह है। जो बात मैं कहने जा रही हूं उसे कैसे सरल ढंग से कहा जाए, यह सोचने में लगी हुई थी, लेकिन अब मुझे यही एक रास्ता समझ आ रहा है। पिछले सप्ताह तहलका के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल ने 'थिंक फेस्ट' के दौरान दो बार मेरा यौन उत्पीड़न किया। जब उन्होंने पहली बार यह हरकत की तो मैं आपको फौरन फोन कर बताना चाहती थी, लेकिन आप बुरी तरह व्यस्त थीं। मुझे पता था कि उस वक्त एक मिनट के लिए भी यह मुमकिन नहीं था कि मैं अकेले में आपको इस हरकत के बारे में बता पाती। इसके अलावा मैं इस बात को लेकर हैरान भी थी कि तरुण ने ऐसी घिनौनी हरकत की, जो मेरे पिता के साथ काम कर चुके हैं और उनके दोस्त हैं। तरुण की बेटी भी मेरी दोस्त है। मैं काम की वजह से तरुण की बहुत इज्जत करती रही हूं। तरुण ने दो बार मेरा यौन शोषण किया। हर बार मैं बुरी तरह हताश और पस्त होकर अपने कमरे में लौटी और कांपते हुए रोती रही। इसके बाद मैं अपने सहकर्मियों के कमरे में गई और एक वरिष्ठ सहकर्मी को फोन कर सारी बात बताई। जब दूसरी बार तरुण ने मेरा यौन उत्पीड़न किया तो मैंने उनकी बेटी को इस बारे में शिकायत की। जब उनकी बेटी ने तरुण से इस बाबत सवाल किया तो वह मुझ पर चीखते हुए गुस्साने लगे। पूरे फेस्टिवल के दौरान मैं तरुण से बचती रही। सिर्फ तभी उनके सामने आई, जब आसपास कई लोग मौजूद रहे। यह सिलसिला तब तक चला, जब तक यह फेस्ट खत्म नहीं हो गया।

शनिवार शाम उन्होंने मुझे एक एसएमएस किया, जिसमें लिखा कि मैंने एक नशेबाज की दिल्लगी का उलटा ही अर्थ निकाल लिया, लेकिन यह सच नहीं है। दिल्लगी के दौरान कोई किसी पर यौन हमला नहीं करता। मैं उनकी हरकत का हर ब्योरा आपको भेज रही हूं ताकि आपको समझ आए कि मेरे लिए यह कितना तकलीफदेह रहा होगा। मैं चाहती हूं कि विशाखा मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के मुताबिक, एक एंटी सेक्सुअल हैरेसमेंट सेल बनाया जाए और वही इस मसले की जांच करे। आखिर में मैं तरुण तेजपाल से लिखित माफी चाहती हूं। यह माफीनामा तहलका में काम करने वाले हर कर्मचारी से साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने जिस तरह एक महिला कर्मचारी के साथ बर्ताव किया उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।''

विशाखा केस में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त, 1997 में कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न रोकने के संबंध में एक निर्णय दिया था। राजस्थान के चर्चित भंवरी देवी केस (1992) की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने विशाखा बनाम राजस्थान सरकार मामले में फैसला दिया था। विशाखा निर्णय नाम से प्रसिद्ध इस केस में यौन उत्पीड़न को परिभाषित करते हुए कई दिशा-निर्देशों और मानकों का निर्धारण किया गया था। 

यौन उत्पीड़न :
-शारीरिक संपर्क
-इस तरह की इच्छा या मांग प्रकट करना
-अश्लील भावभंगिमा दर्शाना
-पोर्नोग्राफी दिखाना
-लैंगिक प्रकृति का शारीरिक, मौखिक या लिखित आचरण
रोकथाम के दिशा-निर्देश
-कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने संबंधी सूचना को अधिसूचित, प्रकाशित और उपयुक्त तरीके से प्रसारित किया जाना चाहिए।
-सरकारी और पब्लिक सेक्टर निकायों में आचरण, अनुशासन संबंधी नियमों व नियंत्रण के प्रावधानों में यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधित नियमों को भी शामिल करना चाहिए। दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
-निजी कंपनियों में इंडस्ट्रियल रोजगार एक्ट, 1946 के तहत यौन उत्पीड़न के रोकथाम संबंधी नियमों को भी शामिल किया जाना चाहिए
-कार्यस्थल पर काम, स्वास्थ्य, स्वच्छता का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए। महिलाओं के खिलाफ प्रतिकूल माहौल नहीं होना चाहिए।
-केंद्र और राज्य सरकारों से यह आग्रह किया गया कि वे ऐसे विधान बनाए ताकि इन दिशा-निर्देशों को निजी सेक्टर पर भी ठीक ढंग से लागू किया जा सके।
*****
ट्विटर पर हैरानी और गुस्सा
''भारत में एक बड़े संपादक ने अपनी ही महिला पत्रकार के साथ यौन दु‌र्व्यवहार किया। वह जेल जाने के बजाय छह माह की छुंट्टी पर चला गया। क्या बेवकूफी है?'' -तारिक फतेह
''तरुण तेजपाल को यह अधिकार कहां से मिला कि वह अपने लिए सजा खुद तय करें? इस सवाल का जवाब सारी महिलाएं चाहती हैं।'' -असमा खान पठान
''यह शर्मनाक है कि अच्छे मूल्यों वाले शख्स ने ऐसा काम किया, लेकिन उन्होंने औरों की तरह अपना गुनाह कबूल करने का साहस दिखाया।'' -जावेद अख्तर
''महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विरोध में फरहान अख्तर ने मर्द अभियान शुरू किया और उनके पिता जावेद अख्तर तरुण तेजपाल को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।'' -एस रोड्रिग्स
''जब कोई दोस्त जुर्म करता है तो पहले तो यकीन नहीं होता, फिर हैरानी होती है और फिर गुस्सा आता है। तरुण ने अपने परिवार और दोस्तों से विश्वासघात किया है।'' -सागरिका घोष
''तरुण ने तहलका को बनाया। उन्हें ही उसे नष्ट करने का अधिकार था और वह उन्होंने कर दिया। धन्यवाद तरुण।'' -आकाश
''तरुण ने महिला पत्रकार के साथ जो कुछ किया उसे जानकर हैरान हूं। यह घटना ताकत के अहंकार को बयान करती है।'' -मधु किश्वर
''नरेंद्र मोदी के बारे में राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि लड़की मामला दर्ज करे या नहीं, हम मामला जरूर दर्ज कराएंगे। तेजपाल के बारे में इसी आयोग का कहना है कि यह उनके और लड़की के बीच का मामला है।'' -नीलेश देसाई
''कांग्रेस ने अपने बहादुर सिपाही को खो दिया है। आइए आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण करें। उनका छह महीने के लिए पत्ता कट गया। अब नरेंद्र मोदी के खिलाफ कौन चुनाव लड़ेगा?'' -पीयूष खंडेलवाल

Wednesday, 20 November 2013

Sexual Assault Case: Tarun Tejpal steps aside as Tehelka Editor for 6 months

sexual assault case

नई दिल्ली। अपनी बेटी की उम्र की पत्रकार के यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरे 'तहलका' पत्रिका के प्रमुख संपादक तरुण तेजपाल प्रायश्चित स्वरूप खुद ही 6 महीने की छुट्टी पर चले गए हैं। संस्थान से खुद को अलग करने की सूचना तेजपाल ने ई-मेल के जरिए तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चटर्जी को दे दी है। शोमा ने तेजपाल के इस तरह संस्थान से हटने के बारे में अधिक बात न करते हुए कहा कि यह हमारा आंतरिक मामला है। वहीं, तेजपाल के इस प्रायश्चित पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

क्या लिखा है पत्र में..पत्र में तेजपाल ने कहा कि पिछले कुछ दिन बहुत परीक्षा वाले रहे और मैं पूरी तरह इसकी जिम्मेदारी लेता हूं। एक गलत तरह से लिए फैसले, परिस्थिति को खराब तरह से लेने के चलते एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई जो उन सभी चीजों के खिलाफ है जिनमें हम विश्वास करते हैं और जिनके लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने संबंधित पत्रकार से अपने दु‌र्व्यवहार के लिए पहले ही बिना शर्त माफी मांग ली है लेकिन मैं महसूस कर रहा हूं कि और प्रायश्चित की जरूरत है। तहलका के संस्थापक सदस्य तेजपाल ने अपने पत्र में लिखा है, क्योंकि इसमें तहलका का नाम जुड़ा है और एक उत्कृष्ट परंपरा की बात है, इसलिए मैं महसूस करता हूं कि केवल शब्दों से प्रायश्चित नहीं होगा। मुझे ऐसा प्रायश्चित करना चाहिए जो मुझे सबक दे। इसलिए मैं तहलका के संपादक पद से और तहलका के दफ्तर से अगले छह महीने के लिए खुद को दूर करने की पेशकश कर रहा हूं।

दो बार हुआ यौन उत्पीड़न!मीडिया में जो खबरें छनकर आ रही हैं, उसके अनुसार पीड़ित लड़की बहुत कम उम्र की है और घटना के बाद से ही सदमे में है। पीड़िता के साथ दो बार यौन उत्पीड़न हुआ और यह तब हुआ जब 'थिंक इवेंट' चल रहा था। 

पीड़िता तरुण की बेटी की उम्र की है। उसने यौन उत्पीड़न की शिकायत ई-मेल के जरिए की है। इस बारे में उसने तरुण की बेटी को भी बताया। पीड़ित लड़की के पिता भी तरुण के दोस्त हैं।

कपड़े फाड़ दिए और उससे भी आगे बढ़ गए..बताया जा रहा है कि यह घटना पिछले सप्ताह गोवा में 'थिंक इवेंट' के दौरान घटी। नशे की हालत में तरुण ने इस लड़की का यौन उत्पीड़न किया। उन्होंने उसके कपड़े फाड़ दिए और उससे भी आगे बढ़ गए..।

लड़की ने अपनी शिकायत में लिखा कि मैं उनकी बहुत इज्जत करती हूं। वे मेरे पिता के समान हैं। उन्होंने 2 बार मेरे साथ हरकत की और मैं रोते हुए अपने कमरे में आई। मैंने अपने साथ हुई हरकत के बारे में पत्रिका के तीन सहयोगियों को बताया।

लड़की ने लिखा कि जब मैंने अपने साथ हुई शर्मनाक घटना के बारे में तरुण की बेटी को बताया तो तरुण काफी नाराज हो गए.. मैं डर गई थी..।

मेल से दी सूचनाशोमा चौधरी ने तहलका के अन्य कर्मियों को एक मेल भेजकर घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'यह आपमें से कई लोगों के लिए अजीब हैरानी की बात हो सकती है। एक अप्रिय घटना घटी और तरुण तेजपाल ने इस मामले में शामिल अपनी सहयोगी से बिना शर्त माफी मांगी है। वह अगले 6 महीने के लिए तहलका के संपादक पद से अलग रहेंगे।' 

सोशल साइट्सों में हुई थू-थूमीडिया जगत में तरुण तेजपाल का नाम काफी पुराना है और तहलका जैसे संस्थान में रहकर उन्होंने कई सनसनीखेज प्रकरण उजागर किए हैं। उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगने के बाद सोशल साइट्सों पर टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई है और मीडिया में भी सवाल खड़ा हो रहा है कि यह मामला पुलिस में क्यों नहीं जा रहा है? क्या इस खुलासे के बाद पुलिस खुद संज्ञान ले सकती है? खुद ही जज बनकर प्रायश्चित करने का यह फैसला कितना उचित है? फेसबुक पर आए कुछ कमेंट इस प्रकार है:

वैशाली वैद्य: डरावने गंदे लोग और उनकी गंदी सोच
रिसू रुंगटा: मारो इनको
राघवेंद्र नारायण: ये लो भईया तहलका के संपादक तरुण तेजपाल ने अपनी बेटी की दोस्त का दो बार .. करके तहलका मचाया और अब खुद जज बनके खुद को सजा दे डाली सजा क्या दी खुद को 6 महीने तक संपादिकी नहीं करेंगे ये महाशय ऐसी सजा तो हर .. चाहेगा।

टाइमलाइन फोटो: तहलका के संचालक तरुण तेजपाल जो बड़ा तहलका मचाते हैं, अपनी खबरों से आज उनकी एक खबर.. तहलका मचा रही है..
गौरव शर्मा: ये है मीडिया का असली चेहरा.. शेम..शेम..शेम