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Thursday, 11 December 2014

'Customary courts' like Khap panchayats unconstitutional: Government

Law Minister DV Sadananda Gowda told Lok Sabha that all 'customary courts', Khap panchayats and kangaroo courts are "against the law and against the Constitution".

"It is a very serious issue. State governments have to take action and check such customary courts," he said during Question Hour. Gowda was replying a supplementary Rabindra Kumar Jena (BJD) who raised the issue of such a court in West Bengal.

The Minister said he would soon write to all states for setting up of 'Naari Aadalat' (women courts) for expeditious disposals of cases related to women.

Source: Hindi News and Newspaper

Monday, 2 December 2013

A unique decision by Lok Adalat on live in

live in relation
खंडवा । मध्य प्रदेश के खंडवा में एक लोक अदालत ने बेहद अनोखा फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता व्यक्ति से पत्नी और लिव इन पार्टनर के साथ बराबर वक्त गुजारने को कहा है। इसके तहत अदालत ने कहा कि व्यक्ति को अपनी पत्नी और लिव इन के साथ 15-15 दिन व्यतीत करना चाहिए।
अपने आदेश में जज गंगा चरण दुबे ने शनिवार को कहा कि पत्नी, लिव इन पार्टनर समेत तीनों एक ही छत के नीचे रहें और व्यक्ति आपसी सहमति से 15-15 दिन इन दोनों के साथ समय व्यतीत करे।
ओंकारेश्वर स्थित प्रदेश बिजली विभाग से हाल ही में रिटायर हुए व्यक्ति के घर में तीन कमरे हैं। समझौते के अनुसार, वह बीच वाले कमरे में रहेगा और अगल-बगल के कमरों में उसकी पत्नी और महिला मित्र रहेंगी। साथ ही बीच वाले कमरे में उन दोनों के कमरे के दरवाजे खुलेंगे और उस व्यक्ति को अपनी पत्नी और लिव इन पार्टनर के साथ 15-15 दिन गुजारने होंगे। इसके अलावा व्यक्ति की चल और अचल दोनों संपत्तियों में दोनों का बराबर का हिस्सा भी होगा।
पत्नी ने लोक अदालत में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें उसने यह आरोप लगाया था कि उसका पति अपना ज्यादातर वक्त लिव इन पार्टनर के साथ गुजारता है और पिछले दो साल से वह उनके घर में ही रह रही है।
Source- Hindi News

Mulayam charge center on sachchar commitee issue

Lucknow
लखनऊ (जाब्यू)। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति सच्चर की रिपोर्ट में मुसलमानों की स्थिति दलितों से बदतर बताये जाने केबावजूद केंद्र सरकार चुप्पी साधे है और कुछ दल राज्य सरकार के न्याय दिलाने के प्रयास को तुष्टीकरण का नाम दे रहे हैं। सपा इससे घबराने वाली नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि गुटबंदी छोड़कर लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटें। पार्टी आगे बढ़ेगी तो वह भी बढ़ेंगे।
सपा सुप्रीमो सोमवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में जुटे कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कार्यकर्ताओं को कई बार पुचकारा और कई बार डपटा। कहा कि कार्यकर्ता राज्य सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाएं। सीमित संसाधनों केबावजूद जनहित का कोई कार्य नहीं रूक रहा है, जनहित के कार्यो में जहा कोई अड़चन लगा रहा हो, उसकी जानकारी सीधे उन्हें उपलब्ध करायी जाए। यह सबसे बेहतर सरकार है, जिसने किसानों, नौजवानों और मुसलमानों के कल्याण की तमाम योजनाएं चलाई है। मुलायम ने कहा कि 10वीं पास मुस्लिम लड़कियों को 30 हजार रुपए दिए जा रहे हैं जिस पर कुछ लोग एतराज जताते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में मुस्लिमों की स्थिति दलितों से बदतर बतायी गयी है।

Sonia Gandhi are richer than Queen Elizabeth!

SoniaGanghi
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। हफिंग्टन पोस्ट के उस दावे पर कांग्रेसी नेता एवं केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास 2 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति है और वह विश्व की 12वीं सबसे अमीर नेता हैं। हफिंग्टन पोस्ट के अनुसार सोनिया इतनी संपत्ति के साथ ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, ओमान के सुल्तान और सीरिया के राष्ट्रपति असद से भी अमीर नेता हैं। हफिंग्टन पोस्ट ने यह नहीं बताया है कि उसने सोनिया या अन्य नेताओं की संपत्ति का आकलन किस आधार पर किया है। इस सूची पर ट्वीट के जरिये प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि अगर हफिंग्टन पोस्ट इस तरह की ऊट-पटांग खबरें देता रहा तो अपने नाम को ही सार्थक करेगा। ऐसी खबरें छापकर वह उपहास का पात्र बनेगा। उन्होंने इस खबर को प्रतिक्रिया जताने लायक भी नहीं करार दिया।

हफिंग्टन पोस्ट की 20 अमीर नेताओं-शासनाध्यक्षों की यह विवादास्पद सूची इंटरनेट पर सक्रिय है। हफिंग्टन पोस्ट ने अमीर नेताओं की संपत्ति का स्रोत बताने के स्थान पर इतना भर कहा है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर। माना जा रहा है कि हफिंग्टन पोस्ट ने यह सूची किसी अन्य वेबसाइट से उठाई है। इस सूची में संबंधित देशों के नेताओं की संपत्ति के साथ वहां की प्रति व्यक्ति आय का भी ब्योरा दिया गया है, ताकि अमीरों और वंचितों के बीच के अंतर को दिखाया जा सके। अमीरों की इस सूची में रूस के राष्ट्रपति पुतिन पहले, थाइलैंड के के सम्राट भूमिबोल अतुल्यतेज दूसरे, ब्रुनेई के सुल्तान तीसरे नंबर पर हैं। इस सूची से ओबामा गायब हैं।

कुछ समय पहले नेशनल वॉच नामक संगठन ने सोनिया की कुल संपत्ति 1.38 करोड़ बताई थी। हफिंग्टन पोस्ट अमेरिका की इंटरनेट आधारित समाचार सेवा है। इसे वर्ष 2012 में प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार भी मिल चुका है।

Source- Hindi News

Wednesday, 20 November 2013

SP Desh Bachao, Desh Banao Rally Today

sp rally
बरेली, [सद्गुरु शरण]। बरेली में बृहस्पतिवार को होने जा रही सपा की 'देश बचाओ-देश बनाओ' रैली मुजफ्फननगर दंगों से सपा और मुसलमानों के रिश्ते के 'जख्म' का इलाज करने की कवायद है, पैरों तले जमीन बचाने की जिद्दोजहद है। इसके अलावा यह 'मेगा सियासी शो' करने की घोषित-अघोषित अन्य वजहें भी हैं, लेकिन रैली के जरिए सपा मुखिया मुलायम सिंह बताना चाहते हैं कि उनके लिए मुस्लिम वर्ग आज भी उसी तरह सर्वोपरि है, जैसा 90' के दशक के शुरू से रहा।
यह वही मुस्लिम वोट बैंक है, जिसकी वफादारी के बूते पार्टी समर्थक उनके प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। पश्चिमी यूपी में पिछले कुछ दिनों से चल रही सांप्रदायिक अशांति इस सपने को बार-बार भंग कर रही है। सपा नेतृत्व की यही चिंता उसे आला हजरत की जमीन पर खड़े होकर रिश्तों की सफाई देने के लिए खींच लाई।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद देवबंदियों के गढ़ में सपा सरकार के लिए अच्छे स्वर नहीं सुने जा रहे। ऐसे में सपा चाहती है कि अगर कहीं नुकसान हो तो उसकी भरपाई रुहेलखंड से हो जाए। हालांकि यादवों के गढ़ बदायूं को छोड़कर यह अंचल कभी सपा के लिए मुफीद नहीं रहा। बरेली में संतोष गंगवार और आंवला व पीलीभीत में मेनका गांधी-वरुण गांधी जैसे राष्ट्रीय कद के नेताओं की मौजूदगी के कारण सपा को पैर रखने की जगह ही नहीं मिली।

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सपा ने मजबूत 'होमवर्क' किया। कुर्मी वर्ग के साफ-सुथरे विधायक भगवत सरन गंगवार को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया। धार्मिक पृष्ठभूमि की दो मुस्लिम हस्तियों को 'लालबत्ती' से नवाजा, लेकिन इसी बीच मुजफ्फरनगर दंगे ने इस रंग को भंग कर दिया।

अब सपा इस रैली के जरिए इस चर्चा पर पूर्णविराम लगा देना चाहती है कि मुसलमान उससे नाराज हैं। जाहिर है कि रैली में बड़े पैमाने पर मुस्लिम भागीदारी दर्शाने की रणनीति है, जिस पर अमल के लिए बदायूं के सांसद धर्मेद्र यादव के नेतृत्व में मंत्रियों-नेताओं की फौज पिछले पंद्रह दिनों से बरेली में डेरा डाले हुए है। सपा इसे मील का पत्थर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती क्योंकि मुलायम के लिए दिल्ली की दूरी शायद इसी पड़ाव से तय होगी।

बरेली में आज दिखेगी मंत्रियों की ताकत
बरेली, जागरण संवाददाता। भीड़ कितनी आएगी, यह बुधवार को पता लगेगा, लेकिन वीवीआइपी और वीआइपी के नजरिये से रुहेलखंड की यह सबसे बड़ी रैली होगी। अभी तक अखिलेश सरकार के 30 से ज्यादा मंत्रियों का कार्यक्रम आ चुका है। तीन मंडलों बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़ से भी सांसद, विधायक-पार्टी पदाधिकारी हिस्सा लेने आ रहे हैं।

बृहस्पतिवार को बरेली में सपा की देश बचाओ, देश बनाओ रैली में अखिलेश सरकार का करीब आधा मंत्रिमंडल मौजूद रहेगा। सभी बड़ी हस्तियों के लए मंच सज चुका है। आगे वाली कुर्सियों पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव, कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां और अगर आए तो राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव विराजमान होंगे। पीछे मंत्रियों के साथ लोकसभा उम्मीदवार और पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों को बैठाने की योजना है। बड़े मंच के दाएं छोर पर एक और मंच बनाया गया है, जिस पर छोटे नेता बैठाए जाएंगे। इस्लामिया मैदान और उसके आसपास का इलाका सपामय हो चुका है। हरे-लाल झंडों से शहर पटा है। नीचे जनता के लिए कुर्सियों और पीछे के हिस्से में खड़े होने का इंतजाम किया गया है। 70 से 1 लाख की भीड़ मैदान के अंदर आने का दावा किया जा रहा है। बाकी भीड़ सड़कों पर रहकर एलसीडी के जरिए सपा नेताओं को सुनेगी। 

आगरा में बेनकाब होगा भाजपा का चेहरा
मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल ने कहा है कि आगरा की रैली में भाजपा का सांप्रदायिक चेहरा बेनकाब होगा। वहां नरेंद्र मोदी दंगा फैलाने वाले मुजफ्फरनगर के विधायकों को सम्मानित करेंगे। सपा नेता ने नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि आखिर इसके पीछे उनकी मंशा क्या है।
बुधवार को एक विवाह में शिरकत करने पहुंचे प्रो. रामगोपाल यादव ने पत्रकारों से वार्ता में केंद्र में अगली सरकार तीसरे मोर्चे की बनने की संभावना जताई। यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले इस पर बात करना बेकार है। उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उसका सांप्रदायिक चेहरा जनता के सामने आ चुका है। भाजपा सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़कर हिंदू मुसलमानों को एक दूसरे का दुश्मन बना रही है। बोले, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का कोई असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। 

रायबरेली में प्रियंका वाड्रा के खेतों में धान काटने के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। कांग्रेस के 21 नवंबर को लखनऊ में सीएम आवास घेरने के सवाल को भी वह टाल गए। यूपी में मुलायम सिंह यादव की रैलियों की चर्चा करते हुए कहा कि आजमगढ़ रैली की भीड़ बताने को काफी है कि जनता का विश्वास सपा पर बढ़ा है। 21 नवंबर की बरेली की रैली भी ऐतिहासिक होगी।

Wednesday, 13 November 2013

Congress MP shares dais with BJP leaders in Amethi

Congress MP Sanjay Singh
नई दिल्ली [आशुतोष झा]। गांधी परिवार के गढ़ में सेंध लगाने के लिए भाजपा ने कांग्रेस का ही मोहरा चुना है। भाजपा की रणनीति सटीक बैठी तो अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ इस बार कांग्रेस के सुल्तानपुर के सांसद संजय सिंह बतौर भाजपा प्रत्याशी खम ठोकेंगे। संजय सिंह कभी गांधी परिवार के वफादार सतीश शर्मा को इसी सीट से हरा चुके हैं और खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ भी एक लाख से ज्यादा वोट तक जुटाने में सफल रहे थे।

मिशन 272 का लक्ष्य लेकर चली भाजपा इस बार हर सीट को लेकर गंभीर दिखना चाहती है। यही कारण है कि कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार दिख रहे कांग्रेस सांसद संजय सिंह को राहुल के खिलाफ उतारने की रणनीति है। सूत्रों की मानें तो सांसद बनने के बाद से ही कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे संजय सिंह ने भी इसकी सहमति दे दी है, हालांकि उनकी ओर से कुछ शर्ते भी रखी गई। मसलन वह चाहते हैं कि यहां से हारने के एवज में उन्हें राज्यसभा में भेजा जाए। लेकिन वह अब तक अपनी मुराद पूरी नहीं करवा पाए हैं। भाजपा नेतृत्व की ओर से उन्हें इस बाबत कोई आश्वासन नहीं दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी के सामने संजय से बड़ा कोई उम्मीदवार नहीं है और न ही संजय के पास कोई दूसरा विकल्प। दरअसल 1998 में संजय कैप्टन सतीश शर्मा को इस सीट पर हरा चुके हैं। जबकि 1999 में सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़कर भी वह तकरीबन एक लाख वोट पाने में सफल रहे थे। संजय की मुसीबत यह है कि वह अब कांग्रेस में रहने को तैयार नहीं है। भाजपा की ओर से उन्हें सिर्फ यह आश्वासन मिला है कि केंद्र में सरकार बनी तो उन्हें कोई जगह दी जाएगी। 

लोकसभा के पिछले चुनाव में संजय सिंह कांग्रेस की टिकट पर अमेठी के बगल की सीट सुल्तानपुर से सांसद तो बन गए लेकिन पार्टी में वह हमेशा अछूत बने रहे। कांग्रेस ने उन्हें कितना तवज्जो दिया उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सुल्तानपुर से टिकट का वादा करने के बाद भी कांग्रेस ने अपनी पहली सूची में उनका नाम काट दिया था। जब टिकट मिला भी तो दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं से जुड़े कांग्रेसियों ने चुनाव जीतने में उन्हें नाको चने चबवा दिए। उन्हें उम्मीद थी कि केंद्र में सरकार बनने पर वह मंत्री बनेंगे, लेकिन पार्टी ने उन्हें किसी पद लायक नहीं समझा। इन स्थितियों में खुद ही से लड़ रहे संजय सुल्तानपुर संसदीय सीट के मतदाताओं से भी कट गए। लिहाजा इस सीट से अपनी हार तय देख संजय सिंह इस बार भाजपा का दामन थामने जा रहे हैं।

Source- News in Hindi

Monday, 4 November 2013

Shweta Menon Withdraws Complaint

Shweta menon

कोल्लम। मलयालम फिल्मों की अभिनेत्री श्वेता मेनन ने कांग्रेस सांसद के खिलाफ छेड़छाड़ का मुकदमा वापस ले लिया है। श्वेता के मुताबिक सांसद ने उनसे निजी तौर पर माफी मांग ली है, लिहाजा उन्होंने अपनी शिकायत वापस ले ली।
जानी-मानी अभिनेत्री श्वेता ने कोल्लम से सांसद एन पीतांबर कुरुप (71) पर छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए एफआइआर दर्ज कराई थी। यह वाकया कोल्लम में सालाना प्रेसीडेंट बोट रेस के दौरान हुआ था। मीडिया में आए वीडियो में सांसद को अभिनेत्री को छूते दिखाया गया था। सांसद का कहना था कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। सांसद सोमवार को भी अपने पक्ष पर अडिग रहे। एफआइआर वापस लेने के लिए श्वेता को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने अभिनेत्री से बदसलूकी नहीं की थी, लेकिन बोट रेस की आयोजन समिति का हिस्सा होने के नाते मैंने उनसे माफी मांगी है।' 

श्वेता ने एफआइआर दर्ज कराने के चंदे घंटे बाद ही रविवार रात अपनी शिकायत वापस ले ली। 39 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा, 'बोट रेस के दौरान हुई घटना के लिए पीतांबर कुरप की ओर से सार्वजनिक और निजी तौर पर माफी मांगने के बाद मैंने शिकायत वापस ले ली है।' 

अभिनेत्री ने कहा कि इस फैसले के पीछे उन पर कोई दबाव नहीं था, बल्कि गुरुजी, पिता और पति की राय पर उन्होंने मुकदमा वापस लेने का निर्णय लिया है।