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Monday, 27 June 2016

सीमा पर जवान मारे जा रहे हैं RSS इफ्तार पार्टी मना रहा हैः कपिल सिब्बल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल मे भाजपा अौर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(अारएसएस) पर जमकर हमला किया। सिब्बल ने कहा कि सीमा पर हमारे जवान मारे जा रहे हैं अौर अारएसएस पाकिस्तान उच्चायुक्त को बुलाकर इफ्तार पार्टी कर रही है। सरकार की ये कैसी पॉलसी है समझ में नहीं अा रहा है।

पंपोर हमले के बाद कपिल सिब्बल ने कहा हमने (यूपीए सरकार) ने भी पाकिस्तान के साथ बातचीत की लेकिन हम कभी बर्थ डे पार्टी या शादी में शामिल होने पाक नहीं गए। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान लगातार हमारे यहां आतंकी भेज रहा है तो दूसरी तरफ अारएसएस इफ्तार पार्टी दे रहा है, जिसमें पाक के हाई कमिश्नर को बुला रहे हैं। ये कैसी बातचीत और विदेश नीति है।

Tuesday, 7 January 2014

Now people make law in country

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। जनता की राय लेकर हर काम करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) का असर संप्रग की केंद्र सरकार पर भी होने लगा है। सरकार कानून बनाने में जनता की भागीदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके तहत संबंधित मंत्रालय को प्रस्तावित कानून के मसौदे पर जनता की राय लेना अनिवार्य किया जा सकता है। कुछ मंत्रालय अभी भी प्रस्तावित कानून के मसौदे को रायशुमारी के लिए वेबसाइट पर डालते हैं, लेकिन ये ऐच्छिक है। सरकार का मानना है कि जब कानून जनता की भलाई के लिए बनते हैं तो उसे बनाने में उनकी भी राय और भागीदारी होनी चाहिए।

कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार जनसहभागिता बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस मसले पर विभिन्न मंत्रालयों के बीच बैठक बुलाकर विचार किया जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक संबंधित मंत्रालय कानून का मसौदा तैयार कर उसे रायशुमारी के लिए अपनी वेबसाइट पर डालेगा। जनता की राय आने के बाद प्रस्तावित मसौदे में जरूरत के मुताबिक बदलाव कर बिल मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। इस प्रक्रिया को अनिवार्य करने के लिए संसद में बिल पेश करने की संसदीय नियम प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने होंगे। हालांकि, मंत्रालयों को तत्काल जरूरत होने पर विधेयक मंजूरी के लिए सीधे कैबिनेट के समक्ष पेश करने की छूट भी होगी। हर विधेयक पर रायशुमारी लेने से कानून बनने में देरी की संभावना पर अधिकारी का कहना था कि संसदीय समिति भी तो जनता की राय लेती है, लेकिन ऐसा बिल के संसद में पेश होने के बाद होता है। अच्छा हो कि जनता की राय पहले ही ले ली जाए।

हाल ही में महिला व बाल विकास मंत्रालय ने अपना विधेयक वेबसाइट पर डाला था। खेल मंत्रालय ने स्पोर्ट्स बिल और वित्त मंत्रालय ने भी प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) विधेयक को जनता की राय के लिए वेबसाइट पर डाला था।