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Thursday, 30 June 2016

अब मुश्किल में चीन, NSG पर भारत के खिलाफ दांव पड़ सकता है उल्टा

कहते हैं कि राजनीति और कूटनीति में समय का बहुत ज्यादा महत्व होता है। जो फैसला आप के पक्ष में न हो इसका मतलब ये नहीं है कि आप उम्मीद छोड़ दें। 24 जून को सियोल बैठक में एनएसजी में भारत की दावेदारी पर चीन की चाल कामयाब हुई। लेकिन चीन अब मुश्किलों में है। उसकी मुश्किल के पीछे कई वजह हैं। जिसे क्रमवार जानने को कोशिश करते हैं।

सियोल में चीन के मुख्य वार्ताकार वैन कून ने चीनी शासन को भरोसा दिलाया था कि 48 सदस्यों वाले एनएसजी के एक तिहाई सदस्य चीन का समर्थन करेंगे। लेकिन वैन कून की रणनीति और कूटनीति औंधे मुंह गिर गई। चीन समेत महज चार देशों ने भारत की दावेदारी का विरोध किया। जानकारों का कहना है कि सियोल के परिणाम से भारत को जितनी निराशा हुई हो, उससे कम धक्का चीन को भी नहीं लगा। चीन को यकीन था कि कम से कम 15 देश उसका समर्थन करेंगे।

चीन को ये सब इतना नागवार लगा कि उसने मुख्य वार्ताकार वैन कून की सार्वजनिक तौर फटकार लगा डाली। चीन प्रशासन वैन कून की रणनीति पर सवाल उठाता रहा।

साउथ चीन सागर पर चीन की मुश्किल

साउथ चीन सागर के मुद्दे पर चीनी रणनीतिकार मुश्किल में हैं। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर हेग आरबिट्रेशन से कुछ दिनों में फैसला आ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये फैसला चीन के खिलाफ जा सकता है। आरबिट्रेशन कोर्ट फिलीपींस के समर्थन में फैसला सुना सकता है। कोर्ट के फैसले का मतलब ये होगा कि फिलीपींस की हड़पी गयी जमीन को चीन को वापस करना होगा। इस फैसले का इससे भी बड़ा असर ये होगा कि चीन युनाइटेड कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ सी से बाहर हो सकता है जिसका वो सदस्य है।

भारत के पास है मौका

चीन को इस बात का डर है कि आरबिट्रेशन कोर्ट के फैसले के बाद भारत वही दांव खेल सकता है। जिसे चीन ने सियोल मीटिंग के दौरान किया था। जानकारों का कहना है कि हेग फैसले का हवाला देकर भारत, चीन को अकंलास से बाहर करने का दबाव बना सकता है। भारत को इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने में मुश्किल भी नहीं आएगी। चीन का कहना है कि उसे 60 देशों का समर्थन हासिल है जो ये मानते हैं कि हेग आरबिट्रेशन अवैध है।

पश्चिमी देशों का भी मानना है कि साउश चीन सी के मुद्दे पर चीन को अलग-थलग होने का डर सता रहा है। चीन हेग आरबिट्रेशन के फैसले का इंतजार कर रहा है। हालांकि चीनी रणनीतिकार उनके हित में आड़े आने वाले कानूनों की वैधता पर ही सवाल उठा देते हैं। इसके उलट अगर अवैध कानून उसके हित को साधने में मदद देते हैं, तो चीन उन कानूनों को वैध बताने में गुरेज भी नहीं करता है।

Tuesday, 28 June 2016

MTCR में भारत की कामयाबी पर भड़का चीन, भारतीयों को बताया पाखंडी

चीन अपने आप को भारत का दोस्त कहता है, लेकिन हकीकत में उसकी सोच कुछ और होती है। एनएसजी में भारत की दावेदारी पर उसने गोलमोल जवाब दिया कि उसे किसी तरह की दिक्कत नहीं है। लेकिन नियम-कानून से इतर भारत का समर्थन वो कैसे कर सकता है। एनएसजी में दावेदारी न मिलने से निराश भारतीयों में उत्साह का संचार हुआ जब मिसाइल तकनीक नियंत्रण समूह का भारत पूर्ण सदस्य़ बन गया । लेकिन चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी को ये सब अच्छा नहीं लगा। ग्लोबल टाइम्स ने एडिटोरियल में भारतीयों को स्वार्थी, पाखंडी और अनैतिक करार दिया।

ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में ये भी कहा गया है कि भारतीयों में राष्ट्रवाद की कमी है। वे पश्चिमी देशों के बीच भागकर खुद का नुकसान कर रहे हैं। एनएसजी पर मिली नाकामी पर भारतीय मीडिया और राजनेता चीन को कोस रहे हैं। लेकिन वे अपनी कमी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।


पेपर में कहा गया है कि ये बात समझ के बाहर है कि अमेरिका के पीछे भारत क्यों भाग रहा है। अमेरिकी ही पूरा विश्व नहीं है। अगर अमेरिका अब भारत की तरफदारी कर रहा है तो इसका अर्थ ये नही है कि पूरा विश्व भारत का समर्थन करेगा। हकीकत ये है कि भारत के प्रति अमेरिकी विदेश नीति सिर्फ और सिर्फ चीन को नियंत्रित करने की है। भारतीयों को राष्ट्रवाद को समझने और सीखने की जरुरत है।

भारतीयों को खुद से व्यवहार को सीखने की जरुरत है। एक तरफ आप सुपर पावर बनने का सपना देखते हैं। तो ये समझना होगा कि सुपर पावर अपनी शर्तों पर नीतियों को प्रभावित करते हैं। चीन नियमों को तरजीह देता है। नियम ये है कि एनएसजी में दावेदारी के लिए एनपीटी पर हस्ताक्षर होने चाहिए। चीन ने सिर्फ नियमों का हवाला दिया था। इस मुद्दे पर भारत की तरफ से बेवजह की टिप्पणी की जा रही है। 

Saturday, 20 December 2014

Indigenous precision guided bomb successfully tested

100 किलोमीटर दूर से लक्ष्य ढूंढेगा ग्लाइड बम


ओडिशा के बालासोर जिला स्थित चांदीपुर परीक्षण रेंज से शुक्रवार को एक हजार किलोग्राम वजनी ग्लाइड बम का परीक्षण किया गया। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित यह बम लक्ष्य से करीब सौ किलोमीटर दूर छोड़ा गया, जिसे रडार व इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सिस्टम से नियंत्रित किया। बम सौ किमी दूर से भी लक्ष्य को ढूंढने की क्षमता रखता है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि बम को भारतीय वायुसेना के एयरक्राफ्ट से बंगाल की खाड़ी के ओडिशा तटीय क्षेत्र में गिराया गया। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आइटीआर) स्थित रडार व इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सिस्टम द्वारा नियंत्रित ग्लाइड बम पूरी परिशुद्धता के साथ लक्ष्य तक पहुंचा। डीआरडीओ के महानिदेशक अविनाश चंदर ने वायुसेना दल के साथ अभियान में शामिल सभी वैज्ञानिकों को इस सफलता के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि आज देश भारी बम बनाने, विकसित करने और लांच करने में सक्षम हो गया है।
Source: Hindi News and Newspaper

Friday, 8 August 2014

India will help shape a new world order in 21st century: Hagel

सिंगापुर में रहने वाले एक भारतीय दंपति के डिजाइन किए गए रोटी बनाने वाले रोबोट ने अमेरिकी बाजार में धूम मचा दी है। इस रोबोट को बिक्री से पहले ही पचास लाख अमेरिकी डालर के आर्डर मिल चुके हैं।

ऋषि ईरानी और उनकी पत्नी प्रनोती को रोबोमेटिक नाम के इस रोबोट को बनाने में छह साल लगे। रोबोमेटिक हर मिनट में एक सिंकी हुई रोटी तैयार कर सकता है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब किचन में काम आने वाले किसी यंत्र में रोबोट का इस्तेमाल किया गया हो। फिलहाल इसके निर्माताओं को अमेरिकी बाजार में इसे बेचने के लिए अमेरिका के एक सर्टिफिकेट का इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि अगले साल से यह अमेरिकी बाजार में उपलब्ध होगा।

599 डालर की कीमत वाले रोबोमेटिक का वजन 13 किलोग्राम है, इसमें 10 मोटर और 5 सेंसर लगे हैं। आटे और तेल की मात्रा के हिसाब से इससे बनाई जाने वाली रोटी को मोटा और पतला बनाया जा सकता है। अलग हो जाने वाले हिस्सों से बने होने के चलते रोबोमेटिक को आसानी से धोया जा सकता है।

ऋषि ईरानी एक उद्यमी हैं, उन्होंने सिंगापुर की एक मोबाइल सिक्योरिटी कंपनी टेनक्यूब की स्थापना की थी, जिसका बाद में मैकेफे ने अधिग्रहण कर लिया था। उनकी पत्नी प्रनोती मैकेनिकल इंजीनिय¨रग और प्रोजेक्ट डिजाइन की विशेषज्ञ हैं।

Source: Newspaper

Islamic State fighters extend gains in north Iraq

इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने गुरुवार को उत्तरी इराक के तीन और शहरों पर अपना कब्जा जमाकर कुर्दिश क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। कुर्दिश बलों को पिछले हफ्ते के अंत में सुन्नी आतंकियों से अपमानजनक हार का मुंह देखना पड़ा था।

 इस्लामिक स्टेट ने अपने आधिपत्य वाले इराक और सीरिया के कुछ इलाकों में खिलाफत साम्राज्य घोषित कर रखा है। 

उसकी कुर्दिश बलों के साथ बुधवार को कुर्दिश की राजधानी अरबिल के निकट मखमूर कस्बे में झड़प हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ताजा घटनाक्रम में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने मखमूर समेत तिलकैफ और अल्क्वेर के कई क्रिश्चियन कस्बों पर कब्जा जमा लिया है।

Source: Newspaper

Obama orders 'targeted' strikes, humanitarian mission in Iraq

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक में मानवीय संकट के बीच चुनिंदा जगहों पर हवाई हमले और हवाई मार्ग से सहायता पहुंचाने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने यह आदेश आइएसआइएस के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने और अमेरिकी सैनिकों के बचाव में दिया है।

कल देर रात एक टेलीविजन चैनल पर अपने संबोधन में ओबामा ने कहा कि अमेरिका आंख मूंद कर नहीं रह सकता, जबकि वह इराकी अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है। ओबामा ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी सैन्यबल को आवश्यकता पड़ने पर आतंकियों के खिलाफ हवाई हमले के स्वीकृति दे दी है। इन आतंकियों ने इराक के कुर्दिश इलाके में बढ़त बना ली है और देश के सबसे बड़े बांध को अपने कब्जे में ले लिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा भी की कि अमेरिका ने बृहस्पतिवार को उत्तरी इराक के पहाड़ी क्षेत्र में हवाई मार्ग के जरिए भोजन और पानी पहुंचाया है, जहां आतंकियों ने अल्पसंख्यक समुदाय को बंधक बना लिया है। 

Source: Newspaper

BSF jawan swept into Pakistan return today 2.30 pm

चेनाब नदी में नौका दुर्घटना के बाद बह कर पाकिस्तान पहुंचे बीएसएफ के जवान को पाक अधिकारी शुक्रवार को भारत के सुपुर्द कर देंगे। कंपनी कमांडरों की फ्लैग मीटिंग में दोनों देशों के बीच इस पर सहमति हो गई है।

सत्यशील यादव (30) शुक्रवार को 2:30 बजे अपने वतन वापस आ जाएगा। अखनूर सेक्टर में गश्त के दौरान मोटरबोट में खराबी आने से यह जवान चेनाब नदी में बहकर पाकिस्तान जा पहुंचा था। वहां उसे पाक रेंजरों ने हिरासत में ले लिया था। बचाव नौका ने बीएसएफ के अन्य तीन अफसरों को तो बचा लिया मगर यादव का पता नहीं चला था। पानी के तेज बहाव में वह 400 मीटर दूर पाकिस्तान के सियालकोट सेक्टर में पहुंच गया था।

उसे ग्रामीणों ने पकड़ कर पाक रेंजरों के सुपुर्द कर दिया था।

परिवार ने ली राहत की सांस

बीएसएफ जवान के परिवार ने इस खबर के बाद राहत की सांस ली है। जवान के भाई सुखबीर ने सेना के प्रयासों के लिए शुक्रिया अदा किया है।

उल्लेखनीय है कि सत्यशील यादव उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद जिले मत्सेना इलाके के रानीपुर का निवासी है। सुखबीर ने बताया कि हमें बीएसएफ से फोन पर सूचना मिली कि भाई चौबीस घंटे में वापस आ रहा है। हम सेना और मीडिया के शुक्रगुजार हैं।

Source: Newspaper

Delhi: bjp popularity decrease in RSS survey

दिल्ली में भाजपा का जनाधार जानने के लिए किए गए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर्वे में उन्हें निराशा हाथ लगी है। सर्वे के मुताबिक लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से अब तक भाजपा का जनाधार राजधानी में कम हुआ है। हालांकि इसमें सिर्फ एक खबर उनके लिए अच्छी यह है कि यदि अभी दिल्ली में विधानसभा चुनाव होते हैं तो सर्वे के मुताबिक भाजपा को 38 सीटें मिल सकती हैं।

लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के समय भाजपा को दिल्ली में 60 सीटें जीतने की बात कही गई थी। जानकारी के मुताबिक यह सर्वे जून-जुलाई में कराया गया था। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर कराए गए इस सर्वे में दिल्ली सरकार को लेकर करीब चालीस हजार से अधिक लोगों की राय जानी गई। सर्वे में सामने आया है कि करीब 22 सीटों पर भाजपा का जनाधार तेजी से खिसका है।

इसकी सबसे बड़ी वजह लोडशेडिंग, पानी और महंगाई को बताया गया है। लोगों में सबसे अधिक गुस्सा पावर कट को लेकर पाया गया। सर्वे में ऐसी करीब 8 सीटें सामने आई हैं जहां लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के जनाधार में अभूतपूर्व वृद्धि दिखाई दी थी, लेकिन अब वहां पर भाजपा का जनाधार खिसक गया है। 


Source: Newspaper

After Kamala Beniwal, not Qureshi to be removed from Governors post

मिजोरम के राज्यपाल कमला बेनीवाल के बाद अब उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी को हटाया जा सकता है। केंद्र सरकार ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है और माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में राष्ट्रपति भी इस पर मुहर लगा सकते हैं।

बिहार के राज्यपाल डीवाई पाटिल को भी इस्तीफा देने के लिए कह दिया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त करने की फाइल को हरी झंडी मिल गई है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार अजीज कुरैशी को राज्यपाल के पद से हटाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इसके लिए उनके उस बयान को आधार बनाया गया है, जिसमें उन्होंने किसी भी सूरत में दुष्कर्म नहीं रुकने की बात कही थी।

कुरैशी को बीएल जोशी के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन राज्य में बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं पर अखिलेश सरकार का बचाव करते हुए कहा था कि सारे पुलिस बल को तैनात करने बाद भी बलात्कार की घटनाएं नहीं रोकी जा सकतीं। मोदी सरकार कुरैशी से आजम खां के मोहम्मद गौहर अली विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने की फाइल को मंजूरी देने से भी नाराज है।

पिछले सात साल से इससे संबंधित विधेयक राजभवन में लंबित था, लेकिन किसी राज्यपाल ने इसे मंजूरी नहीं दी। लेकिन उत्तर प्रदेश का अतिरिक्त प्रभार मिलते ही कुरैशी ने सबसे पहला काम इस विधेयक को हरी झंडी देने का किया था। संप्रग सरकार ने कुरैशी को अप्रैल 2012 में उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया था।

बेनीवाल और कुरैशी के बाद डीवाई पाटिल का नंबर आ सकता है। वैसे पाटिल को पहले फोन कर इस्तीफा देने का अनुरोध किया गया है। उन्हें बता दिया गया है कि इस्तीफा नहीं देने की स्थिति में सरकार को अगला कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार 14 अगस्त को संसद सत्र समाप्त होने के बाद सरकार नए सिरे से संप्रग के दौरान नियुक्त होने वाले राज्यपालों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

पुराने राज्यपालों को हटाने के साथ-साथ नए राज्यपालों की नियुक्ति का काम भी चल रहा है। इसी क्रम में कल्याण सिंह को राजस्थान का राज्यपाल बनाया जा रहा है। सोमवार को मार्गरेट अल्वा का कार्यकाल पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक को यहां का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सरकार कल्याण सिंह की नियुक्ति की फाइल को हरी झंडी दे चुकी है और इस पर केवल राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है।

Source: Newspaper

kharkhauda conversion cases: swelling in private parts of victim

खरखौदा कांड की पीड़ित युवती की हालत अस्पताल में पहले से बेहतर है। उसका ब्लड प्रेशर स्थिर है। गुरुवार को उसकी एमआरआइ की रिपोर्ट आ गई। इसमें उसके प्राइवेट पा‌र्ट्स पर सूजन के निशान आए हैं। इससे चिकित्सक मान रहे हैं कि उसके साथ कुछ गंभीर घटना हुई है। चिकित्सकों के अनुसार युवती को एक से दो दिन में आइसीयू से प्राइवेट रूम में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

यशोदा अस्पताल के प्रबंध निदेशक डा. पीएन अरोड़ा ने बताया पीड़ित युवती की हालत पहले से बेहतर है। उसका ब्लड प्रेशर स्थिर है। गुरुवार को उसकी एमआरआइ की रिपोर्ट आ गई। इसमें उसके प्राइवेट पा‌र्ट्स पर सूजन के निशान आए हैं। एक से दो दिन में आइसीयू से प्राइवेट रूम में शिफ्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि युवती के इलाज का पूरा खर्चा अस्पताल उठा रहा है। बुधवार को युवती का एक रिश्तेदार अस्पताल में आने वाले सभी वीआईपी लोगों के सामने इलाज के खर्चे का मुद्दा उठा रहा था।

उधर, पीड़ित युवती से मिलने सरधना के भाजपा विधायक संगीत सोम के आने की सूचना थी, लेकिन वह नहीं आए। इस बीच पुलिस ने यहां पर किसी भी राजनैतिक हस्ती के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक बिना किसी पूर्व सूचना के कोई भी नेता के गांव में जाकर पीड़ित परिवार से मिलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

यहां लोगों की गतिविधियों व स्थिति की पल-पल की जानकारी एलआइयू शासन को भेज रहा है। पीड़ित युवतियों से मिलने वालों पर भी निगाह रखी जा रही है। उधर, खरखौदा कांड को लेकर रसम संस्था ने गुरुवार शाम कैंडल मार्च निकाला। कौटिल्य सेना से जुड़े लोगों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

हीलाहवाली ने बढ़ाई तनातनी

धर्म परिवर्तन और सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण को लेकर आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य महिला आयोग की टीम भी गुरुवार को पीड़िता के गांव पहुंची। प्रकरण में धीरे-धीरे सांप्रदायिक घेरेबंदी भी तेज हो रही है। पुलिस ने दबिश देकर तीन लोगों को हिरासत में लिया है। गुरुवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष जरीना उस्मानी, सह-महासचिव अनीता और सदस्य राज देवी पीड़िता के खरखौदा स्थित गांव पहुंची और पीड़िता की मां से बात की।

हालांकि मीडिया से बातचीत में महिला आयोग का प्रतिनिधिमंडल पीड़िता की इंसाफ की कम और पुलिस कार्रवाई का ज्यादा बचाव करता नजर आया। यहां तक कह डाला गया कि युवती का कोई आपरेशन नहीं हुआ है। प्रतिनिधिमंडल ने पीड़िता से गाजियाबाद के अस्पताल में मुलाकात भी की।

प्रकरण को दबाने की कोशिश

प्रकरण के राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने के बाद पुलिस ने शुरुआती गिरफ्तारियां तो कीं, लेकिन मुख्य आरोपी सनाउल्ला अभी भी फरार है। मुजफ्फरनगर और हापुड़ के जिन मदरसों की इसमें संलिप्तता रही है, पुलिस उनकी खोज तक नहीं कर पाई है। मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने अब तक सिर्फ इतना माना है कि युवती को मुजफ्फरनगर में रखा गया है। धर्म परिवर्तन के संगठित रैकेट और मानव तस्करी जैसे युवती के आरोपों पर भी पुलिस मुंह सिले हुए है।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि युवती के कॉल डिटेल का सहारा लेकर पुलिस सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के बजाय प्रेम प्रसंग की ओर मोड़ने की तैयारी कर रही है। इतना गंभीर प्रकरण होने के बाद भी पुलिस ने जांच खरखौदा एसओ से हटाकर महिला थाने की एसओ को सौंप दी है। पुलिस को नहीं लगता कि राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी का सबब बन रहे इस मामले में किसी बड़े अधिकारी से जांच की जरुरत है।

दोतरफा पेशबंदी

हिंदू संगठन लगातार लव जेहाद और मदरसों की कार्यप्रणाली की जांच को लेकर सड़कों पर हैं। गुरुवार को भी थापरनगर में हिंदू संगठनों के तेवर उग्र रहे। उधर, इत्तेहाद मिल्लत कमेटी ने मदरसों को बदनाम करने का आरोप लगा अब इस बयानबाजी को दोतरफा कर दिया है। ऐसे तंग माहौल में देर शाम खरखौदा में दो समुदाय पथराव के बाद आमने-सामने आ गए। खरखौदा में सांप्रदायिक भिड़ंत की ऐसी छिटपुट वारदातें लगातार जारी हैं। ऐसे में अगर मामले में पुलिस प्रशासन जल्द ही इस प्रकरण में सब कुछ सामने नहीं लाता है तो हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं। गुरुवार को मेरठ पुलिस-प्रशासन ने भी शहर में फ्लैग मार्च किया।

Source: Newspaper

Jaswant Singh suffers head injury, admitted to hospital

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जसवंत सिंह के सिर में गहरी चोट लगी है। उन्हें धौलाकुंआ स्थित आर्मी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है। ताजा जानकारी के अनुसार उनकी हालत अभी गंभीर बनी हुई है।

सूत्रों ने बताया कि 76 वर्षीय पूर्व रक्षा मंत्री जसवंत सिंह कल देर रात तकरीबन 11 बजे अपने आवास पर कमरे में फिसल गए जिसकी वजह से उनके सिर में चोट लग गई। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

गौरतलब है कि पूर्व रक्षामंत्री जसवंत सिंह को राजस्थान के बाड़मेर से अधिकृत पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने के खिलाफ पार्टी से निकाल दिया गया जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव भी लड़ा लेकिन वह हार गए। 

Source: Newspaper

Now bureaucrats will be followed new guidelines

नौकरशाह राजनीतिक रूप से निष्पक्ष रहें, किसी के साथ भेदभाव न करें और सिर्फ जनहित में रखकर फैसले लें, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा कदम उठाया है। आइएएस, आइपीएस और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों पर लागू वर्ष 1968 में बनी अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली संशोधित हो गई है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वे कर्तव्य पालन के दौरान उच्च आचारनीति और राजनीतिक निष्पक्षता बनाए रखें।

अधिकारियों की जवाबदेही जरूरी

नई नियमावली में कहा गया है कि अधिकारियों को जनता के प्रति खासकर कमजोर वर्ग के प्रति जवाबदेह होने की जरूरत है। अधिकारी जनता के साथ नम्र और अच्छा व्यवहार सुनिश्चित करें व केवल जनता के हित और इस्तेमाल को देखते हुए फैसले लें। नियमावली में कहा गया है कि इस सेवा के प्रत्येक सदस्य अपने कर्तव्य पालन के दौरान उच्च आचारनीति, ईमानदारी, राजनीतिक निष्पक्षता, सचाई, जवाबदेही और पारदर्शिता का पालन करेंगे और उत्कृष्टता को बढ़ावा देंगे।

व्यक्ति या संस्थान से न लें कोई आर्थिक सहयोग

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने जिस अखिल भारतीय सेवा (आचरण) संशोधन नियमावली, 2014 की अधिसूचना जारी की है उसमें अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य बना दिया गया है कि उनके कर्तव्य निर्वहन से उनका कोई निजी हित जुड़ा हो तो उसे घोषित करें और जनहित की रक्षा के मार्ग में आने वाले विवादों के समाधान के लिए कदम उठाएं। यह भी कहा गया है कि अधिकारियों को ऐसे किसी व्यक्ति या संस्थान से कोई आर्थिक या अन्य एहसान नहीं लेना चाहिए जो उन्हें उनके काम को प्रभावित कर सकते हैं। यह भी कहा गया है कि लोक सेवक के रूप में कोई सदस्य अपने पद का दुरुपयोग नहीं करेगा और अपने, अपने परिवार या दोस्त को पैसे या सामान आदि से लाभ पहुंचे ऐसे फैसले नहीं लेगा।

बनाकर रखें गोपनीयता

इस नियमावली में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) और भारतीय वन सेवा (आइएफओएस) के अधिकारियों की यह अनिवार्य जिम्मेदारी हो गई है कि वे अपने कर्तव्य पालन के दौरान गोपनीयता को बनाए रखें। देश की एकता एवं अखंडता, सुरक्षा और रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों और दूसरे देशों से दोस्ताना रिश्तों को प्रभावित कर सकने वाली सूचनाओं को अपने तक बनाए रखें।

फैसले लेने की आजादी

ऐसी सूचनाएं जो किसी अपराध, गैरकानूनी या अवांछित लाभ के लिए प्रलोभन दें उनकी रक्षा की भी अधिकारियों जिम्मेदारी होगी। इससे पहले सिविल सेवा नियमावली में इन अधिकारियों के कर्तव्यों के बारे में विस्तार से चर्चा नहीं की गई थी। संशोधन के जरिये अधिकारियों को फैसले लेने और सुझाव देने की आजादी दी गई है।

नियमावली के कुछ खास बिंदु

- अच्च नैतिक मानकों का पालन।

- सत्यनिष्ठा एवं ईमानदारी से काम।

- जनता के साथ बेहतर तालमेल और बेहतर व्यवहार जरूरी।

- मौजूद संसाधनों का करें बेहतर इस्तेमाल।

- काम को लेकर जवाबदेही और पारदर्शिता लाएं नौकरशाह

- अधिकारियों के कर्तव्य निर्वहन से उनका कोई निजी हित जुड़ा हो तो उसे घोषित करें।

- जनहित के लिए कार्यो में आ रही बाधाओं को दूर करें।

- किसी व्यक्ति विशेष या फिर संस्थान से आर्थिक मदद न लें।

- लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग न करें।

- गोपनीयता बनाकर रखें।

Source: Newspaper

Crossed all limits of humanity in Gorakhpur, cooked lever after murder

एक युवक ने अपने साथी दंपति के साथ मिलकर एक मजदूर की हत्या की और उसका कलेजा पका कर खा गए। बचा हुआ टुकड़ा नहीं खा पाए तो झाड़ी में फेंक दिया। बुधवार को हुई ईट भट्ठा मजदूर पप्पू की हत्या का राजफाश गुरुवार को हुआ है। पुलिस ने शव के तीन टुकड़े कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।

सोनबरसा, चिलुआताल निवासी पप्पू खजनी में बोगा गांव के पास एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था। बुधवार को सुबह ईंट भट्ठे के पास उसकी लाश मिली। लोगों ने बताया कि भट्ठे पर ही गुमला, झारखंड निवासी जनक, पवन और सोनू के साथ पप्पू रात में अपने कमरे में जुआ खेलते देखा गया था। पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि जनक और उसकी पत्‍‌नी राधा फरार हैं। पवन ने पुलिस को बताया कि जुए में हारजीत को लेकर जनक और पप्पू के बीच मारपीट हुई थी। 

जनक की पत्‍‌नी राधा भी वहां पहुंच गई। चोट के कारण पप्पू बेहोश हो गया। बाद में जनक और उसकी पत्‍‌नी ने हंसिए से पेट फाड़कर उसकी हत्या कर दी और शव खेत में फेंक दिया। पुलिस की पूछताछ में पवन ने सच्चाई स्वीकार कर ली। बताया कि जनक और उसकी पत्‍‌नी के साथ वह भी पप्पू की हत्या में शामिल था। वे शव खेत में ले गए और पेट फाड़कर कलेजा निकाला और पकाने के बाद तीनों ने मिलकर खाया। तीन टुकड़ा नहीं खा पाए तो झाड़ी में फेंक दिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने तीनों टुकड़ा बरामद कर लिया है। वहीं से पेट फाड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया धारदार हथियार भी बरामद हो गया।

Source: Newspaper

A major Set back for Aamir's P.K

लगता है आमिर खान की फिल्म पीके की राहें आसान नहीं हैं। फिल्म को कई तरह की मुश्किलों का सामना कर पड़ रहा है। पहले आमिर का न्यूड पोस्टर विवादों से घिर गया और अब फिल्म के स्‍पेशल इफेक्‍ट्स सीन्‍स पर नए सिरे से काम शुरू होगा।

दरअसल, हाल ही में मुंबई के लोटस बिजनेस पार्क में लगी आग में फिल्म के सीन्‍स से जुड़ा सारा बैकअप जल गया। सूत्रों के मुताबिक फिल्म के कुछ स्पेशल इफेक्ट्स सीन्‍स इस आग में नष्‍ट हो गए और उनका कोई बैक-अप भी नहीं था। ऐसे में दोबारा से फिल्म के स्‍पेशल इफेक्‍ट्स सीन्‍स पर दोबारा काम करना पड़ेगा।

बताया जाता है कि पिक्सन के स्टूडियो में इन स्पेशल इफेक्ट्स पर काम हो रहा था, लेकिन बिजनेस पार्क में लगी आग से ये सब नष्ट हो गया। ये स्टूडियो पिछले तीन महीनों से इन इफेक्ट्स पर काम कर रहा था। स्टूडियो टीम को दोबारा इन सब पर काम करना होगा। हालांकि राजकुमार हिरानी और पिक्सन इस बारे में कुछ भी कहने के लिए मौजूद नहीं हैं।

Source: Newspaper

Dhoni made India look down with his this decision

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने यूं तो मैनचेस्टर टेस्ट में 71 रनों की पारी खेलकर किसी तरह टीम इंडिया को 150 पार के स्कोर तक पहुंचाने में मदद की लेकिन एक अन्य मामले का जिक्र करें तो धौनी ने भारत की किरकिरी कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। क्या था ये मामला आइए जानते हैं।

दरअसल, धौनी की जिद और आईसीसी रूल्स के बारे में उनकी कम जानकारी के कारण ही जडेजा-एंडरसन मामले में भारत को विश्व क्रिकेट में शर्मसार होना पड़ा। बुधवार को एंडरसन पर फैसले के खिलाफ अपील करने की मांग को ठुकराकर आईसीसी ने बीसीसीआइ को बड़ा झटका दिया, जबकि अगर भारत ने मैदान के बाहर समझौता कर लिया होता तो एंडरसन को माफी मांगनी पड़ती और यह इस मामले में भारत की सबसे बड़ी जीत होती।

आईसीसी के न्यायिक आयुक्त गॉर्डन लिविस ने सबूतों के अभाव में जडेजा और एंडरसन दोनों को दोषमुक्त करार दिया था। इससे पहले टीम इंडिया को समझौते की पेशकश की गई थी, जिसमें एंडरसन का माफी मांगना शामिल था, हालांकि धौनी ने टीम के मैनेजर सुनील देव को इसीबी के मैनेजिंग डायरेक्टर पॉल डाउनटन से इस मामले में बातचीत करने से रोक दिया था। वहीं इसीबी अध्यक्ष जाइल्स क्लार्क ने भी आइसीसी के चैयरमैन एन श्रीनिवासन से इस मामले पर बातचीत की थी, फिर श्रीनिवासन ने धौनी से बात की, लेकिन धौनी एंडरसन पर आरोप लगाए जाने पर अड़े रहे। अहम बात ये है कि इस पूरे मामले में धौनी के पास न्यायिक आयुक्त के सामने अपनी बात साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत ही नहीं थे, इसके बावजूद उन्होंने मैच रेफरी से शिकायत करने के विकल्प को छोड़कर सीधे आइसीसी जाने का फैसला किया, जिसके चलते भारत को मुंह की खानी पड़ी।

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Tuesday, 5 August 2014

Amar Singh Shares same munch with Mulayam Singh Yadav

समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राज्यसभा सदस्य अमर सिंह चार साल बाद फिर करीब होते नजर आ रहे हैं। उधर सूबे के कद्दावर मंत्री आजम खां ही सरकार से रूठ गये हैं।

कभी समाजवादी पार्टी को पानी पी-पीकर कोसने वाले अमर सिंह आज छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र की याद में लखनऊ में होने वाले समारोह में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह के साथ एक मंच पर होंगे। इस कार्यक्रम के लिए खुद मुलायम सिंह यादव ने पुराने साथी रहे अमर को बुलाया है। इस मुलाकात को समाजवादी पार्टी की राजनीति में नई करवट के रूप में देखा जा रहा है।

एक समय समाजवादी पार्टी में 'की-मैन' रहे अमर सिंह को 2010 में पार्टी से बाहर कर दिया गया था, लेकिन अमर सिंह कभी भी मुलायम के खिलाफ तल्ख नहीं हुए। अलबत्ता, लोकसभा चुनाव के समय मुलायम के आजमगढ़ से चुनाव लड़ने का ऐलान करते ही अमर सिंह ने समर्थन देने का ऐलान कर सपा के साथ रिश्ते ठीक करने की राह खोली थी। अब सपा मुखिया ने जनेश्वर की जयंती पर लखनऊ में आयोजित समारोह में उन्हें आमंत्रित कर एक कदम और आगे बढ़ा दिया है।

अमर सिंह ने फोन पर 'दैनिक जागरण' से कहा 'वह मुलायमवादी रहे हैं। जनेश्वरजी के साथ काम किया है। उनके विचारों को जिया है। सिद्धांत अपनाने का प्रयास किया। अब मुलायम सिंह यादव ने जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन के मौके पर मुझे आमंत्रित किया है। मैं इस कार्यक्रम में आऊंगा। उन्होंने फिर से सपा में शामिल होने की संभावना पर इन्कार किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में यह एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम है। मैं, मुलायम के निमंत्रण पर इसमें शामिल हो रहा हूं। इसका कोई सियासी अर्थ नहीं है।' इससे इतर सूत्रों का कहना है कि बदलती सियासी परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी को अमर सिंह के 'प्रबंधन' की जरूरत महसूस हो रही है।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह ने रालोद के टिकट पर इस बार आगरा के फतेहपुर सीकरी से लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन जिसमें उनकी हार हुई थी। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल इसी साल खत्म होने वाला है। माना जा रहा है कि अमर सिंह की फिर से राज्यसभा में जाने की उमंग हिलोर मार रही है। इसी कारण कुछ दिन से उन्होंने 'मुलायम चालीसा' का जाप शुरू कर दिया है। अमर सिंह ने कहा कि व्यक्ति मुलायम सिंह से मैं हमेशा से ही प्रभावित रहा हूं। व्यक्ति मुलायम सिंह से मैं कभी भी बात कर सकता हू, लेकिन हो सकता है कि राजनेता मुलायम सिंह से बात करने में मुझे दिक्कत हो।

उधर सूबे के कद्दावर मंत्री आजम खां के सरकार के प्रति मिजाज ठीक नहीं हैं। शिया धर्म गुरू मौलाना कल्बे जवाद के खिलाफ उन्होंने जंग का ऐलान कर रखा है। ऐसे में रविवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की मौलाना कल्बे जवाद से मुलाकात से वो खफा हैं। कल लखनऊ में उर्दू अकादमी के एक कार्यक्रम में उन्होंने लखनऊ में रहने के बाद भी आना पसंद नहीं किया। कार्यक्रम के आयोजक भी आजम खां ही थे और यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास, कालीदास मार्ग में आयोजित किया गया था।

रूठते रहे हैं आजम

अखिलेश यादव सरकार के गठन के कुछ अरसे बाद ही आजम खां न सिर्फ विवादों में रहे बल्कि उनका रूठना सार्वजनिक होने लगा था। पहले मेरठ के प्रभारी मंत्री पद से हटाए जाने पर नाराजगी सार्वजनिक की, फिर सपा आगरा कार्यकारिणी में हिस्सा न लेकर पार्टी को असहज किया। आखिर मुख्यमंत्री ने उनके घर जाकर मान-मनौव्वल की। मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। शाही इमाम के दामाद को एमएलसी बनाये जाने पर भी वह खफा-खफा नजर आए। जाहिर नहीं हो सके कुछ मुद्दों को लेकर लंबे समय तक उन्होंने कैबिनेट की बैठकों में हिस्सा भी नहीं लिया।

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NRHM Scam: CBI engaged in knowing the truth

ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले के आरोपी महेन्द्र नाथ पाण्डेय से सीबीआइ सीएमओ के तबादलों का सच जानने में जुट गई है। सीबीआइ ने दो पहले से ही मंत्रियों की कारगुजारियों के बारे में भी पूछताछ शुरू कर दी है। इन दोनों पूर्व मंत्रियों का नाम घोटाले से जुड़ा है। महेन्द्र नाथ के इन दोनों पूर्व मंत्रियों से करीबी रिश्ते रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ जानना चाह रही है कि किन जूनियर डाक्टरों को सीएमओ बनाया गया और उनसे कितनी रकम उगाही गई। इसके अलावा दवा आपूर्ति में किस तरह गोरखधंधा किया गया। इस धंधे में संबंधित पूर्व मंत्रियों को कितनी रकम दी गई। ऐसे कई सवालों का जवाब सीबीआइ महेन्द्र नाथ पाण्डेय से जानने में जुटी है। लखनऊ के सीबीआइ कार्यालय में पाण्डेय से पूछताछ चल रही है।

आरोप यह भी है कि बसपा सरकार में एनआरएचएम की धनराशि की बंदरबांट के लिए मनचाहे सीएमओ की तैनाती कराई गई। इसमें जूनियर डाक्टरों को भी सीएमओ बनाया गया और उनसे मनमानी रकम वसूली गई। सूत्रों के मुताबिक इस कार्य में पाण्डेय की अहम भूमिका रही। एक ऐसा भी दौर रहा जब सूबे के सभी सीएमओ पाण्डेय के इशारों पर काम करने लगे थे। पाण्डेय ने न केवल खुद दवा सप्लाई का काम दूसरी फमरें के नाम पर किया बल्कि अपने चहेतों को भी खूब काम दिलाया। शासन सत्ता में ऊंची पहुंच का लाभ लेकर सीएमओ के तबादलों और ठेका दिलवाने का काम करने वाले इस शख्स को घोटाले के और भी कई राज मालूम हैं।

सूत्रों की माने तो महेन्द्र ने लगातार सफाई ही दी है और कहा कि दवाओं के बिल गायब होने की वजह से उसे दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पाण्डेय ने सीएमओ की तैनाती की बात स्वीकार की, लेकिन अपनी भूमिका से इन्कार किया है। सीबीआइ की दूसरी टीम भी पाण्डेय से पूछताछ करेगी।

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New massage service introduced in Indian Railway

भारतीय रेलवे तेजी के साथ यात्रियों से सीधे जुड़ रहा है। अब वह यात्रियों को यह बताएगी कि कौन सी ट्रेन कितनी लेट है और कितने बजे से जाएगी। यही नहीं यात्रियों के मोबाइल पर खानपान संबंधी जानकारी भी मिलती रहेगी। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने तो इस नई पहल पर कार्य करना भी शुरू कर दिया है।

नई पहल के जरिए रेल प्रशासन फिलहाल ओरिजिनेट यानी बनकर चलने वाली गाडियों की ही जानकारी देगा। यानी, अगर गोरखपुर से कोचीन एक्सप्रेस चलती है और किन्ही कारणों से वह लेट हो जाती है तो यात्रियों को इसकी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा यात्रियों को खानपान संबंधी जानकारी भी दी जाएगी। यानी, ट्रेन में पेंट्रीकार की व्यवस्था है या साइडिंग वेंडिंग है।

खाने में मीनू का रेट और उनकी उपलब्धता के बारे में भी बताया जाएगा। इसके अलावा यात्रियों को यह भी बताया जाएगा कि अगर आपको खानपान और सफाई व्यवस्था को लेकर कोई परेशानी है तो फला नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। शिकायत के लिए नंबर भी मैसेज किया जाएगा। टिकट लेते समय यात्री मांग पत्र में पूरा विवरण के साथ अपना मोबाइल नंबर भी अनिवार्य रूप से भरते हैं।

इसके चलते रेलवे के पास आरक्षित टिकट पर चलने वाले सभी यात्रियों के मोबाइल नंबर मौजूद रहते हैं। यात्रियों के मोबाइल पर आसानी से जानकारी दी जा सकती है।

पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने पहले दिन ही शानदार शुरुआत की। गोरखपुर से एलटीटी जाने वाली 11016 कुशीनगर एक्सप्रेस के 474 यात्रियों को मैसेज किया। इस ट्रेन में सोमवार को पेंट्रीकार नहीं लगी थी। ऐसे में यात्रियों को इसकी जानकारी देने के लिए रेल प्रशासन ने ट्रेन छूटने से पहले ही मैसेज करना शुरू कर दिया। यात्रियों को बताया कि ट्रेन में पेंट्रीकार नहीं लगेगी, वे खानपान की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। 

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Monday, 4 August 2014

UPSC CSAT row: Ruckus in Rajya Sabha

सीसैट पर सरकार के फैसले से नाखुश विपक्ष ने मंगलवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा किया। इस बीच, यूपीएससी परीक्षा के छात्रों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें मेरा नजरिया पता है।

जदयू के शरद यादव ने सीसैट विवाद पर चर्चा करते हुए कहा कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम अंग्रेजी के खिलाफ नहीं है, परंतु अनुवाद वाले हिस्से पर हमारा विरोध है।

वहीं, विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सीसैट के लिए कांग्रेस सरकार दोषी है।

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Express Investigation part-I: Over 600 ‘communal incidents’ in UP since LS results, 60% near bypoll seats

लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में करीब छह सौ घटनाएं सामने आई हैं जिसमें सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की गई। इसमें से करीब साठ फीसद मामले ऐसी विधानसभा क्षेत्रों के सामने आए हैं जहां पर अगले कुछ माह में उपचुनाव होने हैं।

गौरतलब है कि आने वाले समय में बारह विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होना है। इसकी वजह यह है कि लोकसभा चुनाव में इन सीटों के प्रतिनिधि जीतकर संसद पहुंच चुके हैं। लिहाजा छह माह के अंदर इन सीटों पर चुनाव कराए जाने हैं। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से करीब दो तिहाई मामले ऐसे हैं जहां पर बवाल की वजह धर्म को बनाया गया। फिर चाहे वह मौजूदा सहारनपुर दंगा रहा हो या फिर अन्य कोई और। इन जगहों पर धर्म के नाम पर मुद्दा बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की गई।

जिन जगहों पर इस तरह के बवाल हुए हैं वहां पर एक ओर जहां भाजपा काफी उग्र रूप में दिखाई दी वहीं सपा का रवैया बेहद नकारात्मक दिखाई दिया। बसपा ने ऐसी जगहों पर अपनी वापसी को लेकर कोशिश करती हुई दिखाई दी।

आंकड़े बताते हैं कि इस तरह के मामलों में कहीं मस्जिद बनाने, दीवार ढहाने, कब्रिस्तान, मदरसा और लाउड स्पीकर जैसे विवादों के बाद उठे और बाद में उग्र हो गए। लोकसभा चुनाव के बाद अकेले पश्चिमी यूपी में इस तरह के 259 मामले सामने आए। वहीं बुंदेलखंड में छह, पूर्वी यूपी 16, अवध में 53 और तराई क्षेत्र में 29 मामले सामने आए हैं।

इस तरह के बवाल भड़काने में जिन विवादों ने काम किया उसमें छेड़छाड़ से लेकर आपसी मारपीट तक के मामले शामिल हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के करीब 70, गाय वध करने के करीब 61, ऐसे छेड़छाड़ के मामले जिसमें दूसरे समुदाय के लोग शामिल थे के मामले 50, दुर्घटना के मामले 30 हैं, जिनपर विवाद बढ़ा और आपसी तनाव में इजाफा हुआ।

हाल ही में हुए सहारनपुर दंगे में भी उठा कब्रिस्तान-गुरुद्वारा विवाद इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। इसके अलावा एक जुलाई को मस्जिद में लाउड स्पीकर को बंद करवाने की घटना को तूल दिया गया जिसके बाद दंगा हुआ। तीन अगस्त को ही मेरठ में युवती को अगवा कर धर्म परिवर्तन कराने के नाम पर एक बार फिर से आपसी सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की गई थी। 

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