16 फरवरी 2015 से गूगल का पॉपुलर प्लेटफार्म जी टॉक मैसेंजर इतिहास बन जाएगा। जी हां, गूगल ने ‘जी टॉक’ बंद करने का निर्णय ले लिया है। वैसे यूजर्स, जिन्हें इस प्लेटफार्म की आदत है उन्हें इसे 'गुडबाय' कहना पड़ेगा जैसा कि ऑरकुट के साथ हुआ। आप चाहे या न चाहे आपको अब हैंगआउट का ही उपयोग करना होगा।
सर्चइंजन गूगल अब अपने हैंगआउट एप में ही अपना भविष्य देख रहा है। जीटॉक से अलविदा कहने से यह भी इशारा मिल रहा है कि गूगल ने (सिक्योरिटी और वर्जन) डेस्कटॉप एप्लीकेशन से सपोर्ट खत्म करने का सोच लिया है।
गूगल ने यह भी बताया है कि हैंगआउट्स एप से आइएम सर्विस को रिप्लेस किया जाएगा, जो इसके क्रोम ब्राउजर के द्वारा उपयोग किया जाएगा।
जीटॉक की तुलना में हैंगआउट को यूजर्स ज्यादा पसंद नहीं कर रहे हैं, लेकिन टैबलेट-फोन-पीसी के साथ इसकी जरूरत बनती जा रही है। व्हाट्सएप का पीसी तक पहुंचना, जीटॉक के महत्व को कम कर रहा है (कम लोग ही इस बात से सहमत होंगे)।
सर्चइंजन गूगल अब अपने हैंगआउट एप में ही अपना भविष्य देख रहा है। जीटॉक से अलविदा कहने से यह भी इशारा मिल रहा है कि गूगल ने (सिक्योरिटी और वर्जन) डेस्कटॉप एप्लीकेशन से सपोर्ट खत्म करने का सोच लिया है।
गूगल ने यह भी बताया है कि हैंगआउट्स एप से आइएम सर्विस को रिप्लेस किया जाएगा, जो इसके क्रोम ब्राउजर के द्वारा उपयोग किया जाएगा।
जीटॉक की तुलना में हैंगआउट को यूजर्स ज्यादा पसंद नहीं कर रहे हैं, लेकिन टैबलेट-फोन-पीसी के साथ इसकी जरूरत बनती जा रही है। व्हाट्सएप का पीसी तक पहुंचना, जीटॉक के महत्व को कम कर रहा है (कम लोग ही इस बात से सहमत होंगे)।
Read: News in Hindi and Newspaper